निकाहनामा में बदलाव के लिए तैयार हुआ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

नई दिल्ली, तीन तलाक के मुद्दे पर 11 मई से हो रही सुनवाई गुरुवार को खत्म हो गई। 5 जजों की पीठ ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। देश का सर्वोच्च कोर्ट पिछले छह दिनों से सुनवाई कर रहा था। भारत की दूसरी सबसे बड़ी आबादी मुसलमानों की है और यह समस्या मुस्लिम महिलाओं से जुड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबंध में सरकार का रुख कई बार साफ किया और सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने बातें स्पष्ट कर दी है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की सलाह को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड स्वीकार किया है और कहा कि वह जल्द ही सभी काजी को यह सलाह जारी करेगा कि वे निकाहनामा में यह शामिल किया जाएगा कि दूल्हा और दुल्हन एक बार में तीन तलाक नहीं ले सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम बोर्ड ने एक सप्ताह में शपथपत्र देने को कहा है।
जज और वकील के बीच सवाल-जवाब
जस्टिस कूरियन- पवित्र कुरान में पहले से ही तलाक की प्रक्रिया बताई गई है तो फिर तीन तलाक की क्या जरूरत? जब कुरान में तीन तलाक का कोई जिक्र नहीं तो ये कहां से आया?
कपिल सिब्बल- कुरान में तीन तलाक का जिक्र नहीं है, लेकिन कहा गया है कि अल्लाह के संदेशवाहक की बात मानो। अल्लाह के संदेशवाह और उनके साथियों से तीन तलाक की प्रथा शुरू हुई।
जस्टिस कूरियन – कम से कम हम ये तो पता लगा ही सकते हैं कि तीन तलाक आस्था का हिस्सा है या नहीं?
जज- इस मुद्दे पर समुदाय कुछ क्यों नहीं कर रहा।
कपिल सिब्बल- हम ये नहीं कह रहे कि तीन तलाक सही है। ये तलाक का सबसे अवांछनीय तरीका है। हम सभी को समझा रहे हैं कि इसका इस्तेमाल ना करें। हम ये भी कह रहे हैं कि तीन तलाक स्थायी नहीं है, लेकिन हम ये नहीं चाहते कि कोई दूसरा हमें बताए कि तीन तलाक खराब है। समुदाय के लोग ही इससे बाहर निकलेंगे।
कोर्ट में कुरान की अंग्रेजी प्रति रखी गई है
जज हर तर्क के दौरान कुरान देखते हैं
धर्म से जुड़ा मामला होने के कारण सुनवाई के दौरान संविधान पीठ के सभी जज मुस्लिमों के पवित्र ग्रंथ कुरान का अंग्रेजी अनुवाद लेकर बैठते हैं और जिरह के दौरान अंग्रेजी की कुरान से लॉ बोर्ड और सरकार के तर्कों की व्यख्या दी जाती है।
तीन तलाक ना इस्लाम का हिस्सा, न आस्था का : शायरा बानो
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता शायरा बानो ने दलील देते हुए कहा कि कोई कहता है कि संसद जाओ और कानून बनाने की मांग करो, लेकिन कानून बनेगा भी तो वो आगे के लिए होगा। उससे मेरे बच्चे वापस नहीं आएंगे, मुझे इंसाफ कैसे मिलेगा? सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को तीन तलाक मामले की सुनवाई के छठे दिन याचिकाकर्ता शायरा बानो की ओर से दलील दी गई कि तीन तलाक ना तो इस्लाम का हिस्सा है और ना ही आस्था का। उन्होंने कहा कि मेरी आस्था ये है कि तीन तलाक मेरे और ईश्वर के बीच में पाप है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी कहता है कि ये बुरा है, पाप है और अवांछनीय है। ये इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है।
हरिद्वार में तीन तलाक का विरोध
पति ने एक तलाक बोला ही था कि पत्नी ने डंडों से पीट दिया
हरिद्वार। हरिद्वार में तीन तलाक दे रहे पति को पत्नी ने इतना पीट दिया कि पति का हाथ फ्रैख्र हो गया। पुलिस ने दोनों को फटकार लगाकर मामला शांत कराया और दोनों को चेतावनी देने के बाद छोड़ दिया।
डाक से भेजे गया तलाक अवैध : कोर्ट
केरल के मल्लपुरम की एक अदालत ने रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए पत्नी को दिए गए तलाक को वैधता प्रदान करने की एक व्यक्ति की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि इस्लामी कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। बुधवार इस जिले के अली फैजी की याचिका को खारिज करते हुए पारिवारिक अदालत के न्यायाधीश रमेश भाई ने कहा कि याचिकाकर्ता इस बात का साक्ष्य पेश करने में विफल रहा है कि इस तलाक में धार्मिक नियम के अनुरूप तय प्रक्रिया का पालन किया गया। केरल और कर्नाटक उच्च न्यायालयों के पूर्व के आदेशों का हवाला देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि पवित्र कुरान के अनुसार, तलाक किसी तर्कसंगत कारण के चलते दिया जाना चाहिए और इस्लामी कानून के अनुसार इससे पहले मैत्री के प्रयास किए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता ने डाक से तलाक देने को वैध करने की मांग की ताकि वह कानून तौर पर अपनी पत्नी को तलाक दे सके। हालांकि पत्नी ने दलील दी कि तलाक को कानूनी तौर पर मान्य नहीं माना जा सकता क्योंकि याचिकाकर्ता ने मुस्लिम कानून में वर्णित प्रयाओं का पालन नहीं किया। फैजी ने वर्ष 2012 में अपनी पत्नी को रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए तलाकपत्र भेजा था। उसकी पत्नी ने यह कहकर इसे स्वीकार करने से मना कर दिया था कि उसने तलाक की किसी वजह का उल्लेख नहीं किया।

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