नर्मदा सेवा मिशन की कार्य-योजना सभी राज्यों को भेजेंगे – प्रधानमंत्री 

भोपाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि जब अधिकार भाव प्रबल हो जाता है और कर्त्तव्य भाव क्षीण हो जाता है तब अनेक पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने कहा कि नदियों के संरक्षण के प्रति भी कर्त्तव्य भाव कम होने से नदियाँ लुप्त हो रही हैं। ऐसे समय नर्मदा सेवा का काम लोगों में कर्त्तव्य भाव जाग्रत करने का महायज्ञ सिद्ध होगा।
प्रधानमंत्री आज अमरमंटक में नर्मदा सेवा यात्रा की पूर्णता और नर्मदा सेवा मिशन के शुभारंभ अवसर पर भव्य समारोह में नर्मदा सेवकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवकों को प्रणाम करने से भी नर्मदा सेवा का पुण्य प्राप्त होता है। यह पुण्य माँ भारती की सेवा और गरीबों के जीवन में खुशहाली लाने के काम आएगा। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा से अहंकार मिट्टी में मिल जाता है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री और नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते नदियों के संरक्षण के प्रति जागृत हो गए हैं। केरल की एक नदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज कई नदियों में पानी नहीं है। उन्होंने कहा कि चूँकि नर्मदा नदी ग्लेशियर से नहीं निकलती। यह पौधों के प्रसाद से प्रगट होती है इसलिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाकर इसकी रक्षा करने का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि हम ऐसा कर्म करें कि आने वाली पीढ़ियाँ हमें याद रखें जैसे कि आज हम अपने पुरखों का याद करते हैं। जैसे नदियों ने पुरखों को जीवन दिया उसी तरह हम भी नदियों को जीवन दें।
स्वच्छता में म.प्र. सबसे आगे
स्वच्छता अभियान की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जन-भागीदारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। जनभागीदारी की उपेक्षा कर कोई भी सरकार सफल नहीं हो सकती । इसके लिये जन-समर्थन जरूरी है। इस दिशा में मध्यप्रदेश ने उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पीछे था लेकिन दृढ़ संकल्प और जन-भागीदारी से आज देश में सबसे आगे है। देश के 100 स्वच्छ शहरों में मध्यप्रदेश के 22 शहर शमिल हैं। पूरे देश में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे स्थान पर है। इसका साफ मतलब है कि जन-भागीदारी और प्रशासन दोनों ने साथ काम किया है। यह उदाहरण अन्य राज्यों को प्रेरणा देने वाला है।
परफेक्ट डाक्यूमेंट
प्रधानमंत्री ने नर्मदा सेवा यात्रा की सफलता को भी जनता की ताकत और समर्थन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि नए पेड़ों की चिंता करेंगे तो पर्यावरण भी स्वस्थ होगा। नर्मदा सेवा मिशन की कार्य-योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह परफेक्ट डाक्यूमेंट है । इसे सभी राज्यों को भेजें क्योंकि यह प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने का एक मॉडल प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि यदि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 20 प्रतिशत से अधिक है तो इसमें नर्मदा नदी का ही योगदान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में भी मध्यप्रदेश ने योजना तैयार कर ली है। उन्होंने बताया कि 2022 में आजादी के पचहत्तर वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से आव्हान किया कि वे हर पल आजादी के 75 वर्ष को याद करें और देश के लिए सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि अपनी संस्था, अपने गाँव, परिवार और प्रदेश-देश के लिए योगदान देने के लिए संकल्पित हो जाएं। उन्होंने कहा कि हम नया भारत बनाने का सपना लेकर चले हैं। इस काम में प्रत्येक नागरिक को जोड़ना है। प्रत्येक नागरिक यह कोशिश करें कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान कैसे दे सकता है। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक एक कदम आग चलेंगे तो देश सवा सौ करोड़ कदम आगे निकल जाएगा।
विश्वविद्यालय में खुलेंगे नदी संरक्षण-पर्यावरण शुद्धता अध्ययन संकाय
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री को नर्मदा सेवा मिशन की कार्य-योजना सौंपी। उन्होंने नदियों के संरक्षण और पर्यावरणीय शुद्धता के अध्ययन के लिए विश्वविद्यालय में विभाग खोलने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरकंटक के पर्यावरणीय और आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए इसे मिनी स्मार्ट सिटी बनाया जायेगा। यह प्रदेश की पहली मिनी स्मार्ट सिटी होगी।
चौहान ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा हर वर्ग का सहयोग मिला और 25 लाख लोग नर्मदा सेवा से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक आंदोलन बन गया है। नर्मदा के तटों के पाँच किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानें बंद कर दी गई हैं। अब सभी गाँव नदी संरक्षण के प्रति जागृत हो गए हैं। करीब 80 हजार नर्मदा सेवक स्थाई रूप से इससे जुड़ गए हैं। आगामी दो जुलाई को नर्मदा के तटों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा। इनकी रक्षा की जिम्मेदारी के लिए वृक्ष सेवक उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 12 करोड़ पौधे लगाये जायेंगे । इनमें से दो जुलाई को छह करोड़ पौधे लगाए जाएंगे । अगले वर्ष 15 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। स्थानीय प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। नर्मदा के प्रवाह की निरंतरता के लिए प्रयास किये जायेंगे। नर्मदा में मल-जल की एक-एक बूँद रोकी जाएगी। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लाट लगाए जा रहे हैं। जैविक खेती और सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
नर्मदा प्रवाह पुस्तक का विमोचन
शुरूआत में नर्मदा सेवा यात्रा का ध्वज और कलश प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री ने सौंपा। प्रधानमंत्री ने ‘नर्मदा प्रवाह’ पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों को नर्मदा की सेवा करने का संकल्प दिलाया।

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