नर्मदा घाटी के 40 हजार परिवारों की फिक्र नहीं – मेधा पाटकर

भोपाल, 9 मई को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की बैठक होने जा रही है, जिसमे बांध के 17 मीटर ऊंचे गेट को बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है। इससे पहले गुरुवार को राजधानी में नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े हजारों लोगों ने शाहजहांनी पार्क से रैली निकाली और नर्मदा घाटी के डूब क्षेत्र में आए लोगों को विस्थापन और मुआवजा देने का मांग की। नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने इस मौके पर कहा कि अगर बैठक में 17 मीटर ऊंचे गेट को बंद करने का निर्णय लिया गया, तो यह मौत के बराबर होगा। जानकारी के मुताबिक नर्मदा बचाओ आंदोलन को 31 साल हो चुके हैं। सरदार सरोवर बांध को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ चुका है। बीते तीन दशक की कानूनी लड़ाई के बाद आए फैसले के बाद भी अब तक नर्मदा घाटी के लोगों को न्याय नहीं मिल पाया है। इसी न्याय की आस में एक बार फिर नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले हजारों ग्रामीण राजधानी के शाहजहांनी पार्क पहुंचे। नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नीलम पार्क तक रैली निकाली और सरकार से न्याय की गुहार लगाई। मेधा पाटकर ने आरोप लगाए हैं कि सरकार एक तरफ नर्मदा सेवा यात्रा निकाल कर नर्मदा को बचाने का दावा कर रही है, लेकिन वहीं दूसरी ओर आज भी नर्मदा घाटी के करीब 40 हजार परिवार ऐसे है जो न्याय की आस में भटक रहे है। मेधा पाटकर का कहना है कि आगामी 9 मई को नर्मदा नियंत्रण की प्राधिकरण की बैठक होने जा रही है। बैठक में 17 मीटर ऊंचे डेम के गेट को बंद करने का निर्णय लिया जाना है। मेधा पाटकर की मानें तो अगर ऐसा हुआ तो यह निर्णय मौत के बराबर होगा। प्रदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय गोल्डमैन पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरणविद प्रफुल सामंत्रा भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सरकार को मानवता की रक्षा करना चाहिए। वहीं उन्होंने चेतावनी दी की अगर अब भी सरकार नहीं चेती तो फिर देश भर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा ।

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