जेनेरिक दवाइयां नहीं लिखने पर डॉक्टरों का होगा लाइसेंस रद्द

नई दिल्ली जेनेरिक दवाइय़ों को लेकर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सर्कुलर जारी किया है। एमसीआई ने मेडिकल कॉलेज और राज्य सरकारों को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि डॉक्टर दवा के पर्चे पर जेनेरिक दवाइय़ों के नाम लिखें। ऐसा न करने पर डॉक्टर पर एमसीआई की धारा 5 के तहत डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी और लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
आईएमए द्वारा जेनरिक दवाओं का विरोध बाजार में खराब मलिटी की जेनरिक दवाओं को लेकर हो रहा है। इन खराब जेनरिक दवाओं का निर्माण करने वाली कंपनियों पर कोई रोक नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि इन जेनरिक दवाओं में बीमारियों को ठीक करने के लिए जितनी मात्रा में सॉल्ट मौजूद होना चाहिए वह नहीं होती है, जिससे यह मरीज पर कारगर नहीं रहती। हालांकि आईएमए ने प्रेस वार्ता में यह भी माना कि भारत में बनने वाली सभी जेनरिक दवाएं विदेशों में सप्लाई होती हैं लेकिन आज तक किसी भी देश ने इन दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा नहीं किया है। जेनरिक दवा- वह दवा जो बिना किसी पेटेंट के बनाई और वितरित की जाती हैं, जिन पर किसी कंपनी का नाम नहीं लिखा होता, बल्कि दवा में इस्तेमाल होने वाली ऑरिजनल सॉल्ट का नाम होता है, उसे जेनरिक दवा कहते हैं। ब्रांडेड दवाओं की तुलना में यह बहुत ही सस्ती होती हैं।जब कोई दवा किसी खास कंपनी के नाम से बिकती है तो उसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। इनके प्रचार प्रसार से लेकर खरीद तक में कंपनियां लाखों रुपए खर्च करती हैं, जिससे यह दवाएं महंगी हो जाती हैं। बाजार में एक तरह की दवा कई कंपनियों द्वारा बेची जाती है जिससे प्रतिस्पर्धा भी अधिक होती है और मरीज का खास कंपनियों पर विश्वास अधिक होता है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *