शहर से गांव तक पीने के पानी को तरस रहे लोग

बैतूल,(नवल वर्मा) धरातल में तेजी से पानी नीचे जाने के बाद पूरे जिले भर में पेयजल संकट गहरा गया है। कलेक्टर ने भले ही 30 जून तक खनन पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि शासकीय विभागों के ही दर्जनों बड़े प्रोजेक्टों का काम इन दिनों जोरशोर से चल रहा है। इसमें हजारों लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे समय जब शहर से लेकर गांव तक पानी के लिए हाहाकार मचना शुरू हो गया है और सरकारी कामों के लिए हजारों लीटर पानी उपयोग किया जा रहा है। निर्माण कार्य इसी तरह चलते रहे तो आगामी मई और जून के माह में कई अंचलों में बूंद-बूंद पानी को लोग तरस जाएंगे। विभाग के अधिकारियों को इस बात का कतई मलाल नहीं है।
शहर में पिछले दिनों पेयजल संकट के बाद नगरपालिका ने मोटर से पानी लेने पर प्रतिबंध लगाया है। इसका अभी असर शुरू नहीं हुआ है। अलबत्ता शहर के अलावा जिले के कई अंचलों में बड़े प्रोजेक्टों का कार्य जोरशोर से चल रहा है। इसमें हर दिन हजारों लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है। ठेकेदार अनुबंध और अपने स्तर पर पानी के लिए व्यवस्था करने में लगे हुए है। संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस बात से कोई मलाल नहीं है कि जिले में पेयजल संकट गहराया हुआ है और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है। दूसरी ओर निर्माण कार्यो के लिए कंपनी के ठेकेदारों ने मनमर्जी से सैकड़ों फीट बोर खनन करवा लिए है। शेष व्यवस्था निजी कूपों से करवाई जा रही है। बड़े प्रोजेक्टों पर हजारों लीटर पानी लगने के बाद स्थिति गड़बड़ा सकती है।
अधिकारियों का ध्यान ही नहीं
ताज्जुब की बात यह है कि जिले में पानी का संकट मार्च माह से ही गहरा गया है। बीते वर्ष हालांकि सामान्य बारिश का आंकड़ा जिले में पूरा हो गया था, लेकिन कुछ ब्लॉकों में बारिश होने के बाद भी हालत बेकाबू हो गई है। मुलताई, प्रभातपट्टन, आठनेर ब्लॉक में स्थिति काफी दयनीय है। इसके बावजूद बड़े निर्माण कार्य हर विभागों में चल रहे है। मसलन वन विभाग, पीडब्ल्यूडी, पीआईयू, आरईएस जैसी बड़ी निर्माण एजेंसियों में टेंडर आवंटित करने के पहले कतई नहीं सोचा था कि गर्मी में पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचेगी और निर्माण कार्यो को इस सीजन में भी चालू रखने से लोगों को दिक्कते होगी। अब अधिकारी निर्माण कार्य में लगने वाले पानी को लेकर अपना बचाव करते नजर आ रहे है। सभी विभाग के अधिकारी इस बात का पल्ला ठेकेदार पर झाड़कर इतिश्री कर रहे है।
अभी नहीं चेते तो हालत बेकाबू
सूत्रों की माने तो जिस लिहाज से जिले में आधा दर्जन बड़े प्रोजेक्टों का काम इन दिनों जोरशोर से चल रहा है। यहां औसतन हर दिन करीब दस हजार लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है। यह पानी ट्यूबवेल, कुएं, निजी लोगों से ठेकेदार क्रय कर रहे है। गर्मी तेज होने के साथ पानी की डिमांड निर्माण कार्यो में बढ़ते जा रही है। ऐसी स्थिति में आने वाले समय में निर्माण कार्य चलने वाले क्षेत्र के आसपास गंभीर पेयजल संकट गहराने के आसार दिखाई दे रहे है। यदि इसी तरह निर्माण कार्यो पर पानी का उपयोग किया गया तो हालत बेकाबू हो सकते है। लोगों की राय है तो तेज गर्मी के कारण निर्माण कार्यो को बंद कर देना चाहिए, इससे हजारों लीटर पानी यहां जाने की वजह आने वाले समय में क्षेत्र के लोगों के उपयोग में आ जाएगा।
इनका कहना
निर्माण कार्यो में पानी के उपयोग को लेकर जानकारी हासिल की जाएगी। वास्तव में यह ज्वलंत प्रश्र है। इस पर शीघ्र ही निर्णय लिया जाएगा।
सौरभ कुमार सुमन, प्रभारी कलेक्टर, बैतूल

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