अटेर में भाजपा विरुद्ध महल

ग्वालियर,( विवेक श्रीवास्तव )  ईवीएम में गड़बड़ी से चर्चाओं में आया मध्यप्रदेश का अटेर विधानसभा उपचुनाव भाजपा के लिए नाक का बाल बन गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के निधन से खाली हुई विधानसभा सीट पर नौ अप्रेल को मतदान होना है लेकिन इस उपचुनाव को जीतने के लिए भाजपा और शिवराज सरकार ने जिस तरह पूरी ताकत झौंक दी है उससे यही लग रहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का बयान भाजपा के लिए गले की हड्डी न बन जाए। पार्टी के पदाधिकारी और सरकार के नेता इन दिनों अटेर में डेरा डाले हुए हैं। उपचुनावों का इतिहास देखें तो जीत सत्तापक्ष की होती है, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सिंधिया राजपरिवार पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद चुनाव प्रचार की रणनीति में भाजपा फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। ईवीएम के प्रदर्शन के दौरान कमल चुनाव चिन्ह की पर्चियां निकलने से असहज हुई भाजपा को बड़ा झटका तब लगा जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अटेर में एक चुनावी सभा में सिंधिया परिवार को निशाना बना बैठे। सिंधिया राजवंश के वारिस और कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तो मुख्यमंत्री के सिंधिया परिवार विरोधी बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ और शिवराज सरकार में मंत्री यशोधरा राजे ने सिंधिया परिवार के बचाव में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसमे कोई संदेह नहीं भाजपा आज जिस मुकाम पर है, वह राजमाता विजयाराजे सिंधिया की बदौलत ही है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया उस दौर में पार्टी के खैवनहार बनीं जब पार्टी के पास जनसमर्थन नहीं था और चुनाव लडऩे के लिए पैसा भी नहीं था। सिंधिया परिवार के इस अहसान के तले पूरी भाजपा आज भी दबी हुई। खुद शिवराज सिंह भी अम्मा महाराज (राजमाता सिंधिया) के प्रति कई बार सार्वजनिक तौर पर सम्मान प्रगट कर चुके हैं। शिवराज सिंह ने यह उम्मीद नहीं थी कि वह इस तरह की टिप्पणी कर देंगे। ये तो वही बता सकते हैं कि उन्होंने किस वजह से और किन परिस्थितियों में चुनावी मंच से ये बात कह दी। सिंधिया परिवार का पूरे ग्वालियर चंबल संभाग में आदर और सम्मान का भाव है। ऐसे में शिवराज सिंह की टिप्पणी से खुद भाजपा भी सकते में है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के बेटे हेमंत कटारे को कांग्रेस ने अटेर से पार्टी का प्रत्याशी बनाया है। कटारे के लिए समर्थन जुटाने के लिए कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अटेर में डेरा डाल दिया है। ऐसे में अटेर का उपचुनाव और दिलचस्प हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सिंधिया परिवार पर तीखे हमले से ग्वालियर-चम्बल अंचल की सियासत में आई गर्मी ने अटेर के उपचुनाव की न सिर्फ फिजां बदल दी बल्कि ये चुनाव भाजपा विरुद्ध महल (सिंधिया निवास) हो चला है। ईवीएम में सामने आई गड़बड़ी और इस मामले में निवार्चन आयोग की तुरत-फुरत कार्रवाई ने चुनावी जंग में कांग्रेस की ताकत में इजाफा भी किया है। अटेर में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह नौ अप्रेल को मतदान के बाद तय होगा, फिलवक्त प्रदेश का यह उपचुनाव भाजपा के लिए मुश्किल भरा है।

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