प्रेम, करुणा और मैत्री की शिक्षा दो

भोपाल, बौद्व घर्म गुरू दलाई लामा ने आज कहा कि दुनिया को प्रेम,करुणा एवं मैत्री की शिक्षा दी जाना चाहिए। ना कि भौतिक ज्ञान की उन्होंने कहा कि इसके बजाय भावनात्मक ज्ञान ज्यादा जरूरी होता है।
उन्होंने कहा इस तरह की शिक्षा दुनिया को केवल भारत ही दे सकता है। बौद्व धर्मगुरू नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ देवास जिले के नमावर के समीप ग्राम तुरनाल में शिरकत कर रहे थे।
दलाई लामा ने कहा कि विश्व में सुख, समृद्धि एवं शांति के लिए जाति, धर्म के भेद, रंगभेद अदि को दूर करना होगा । इसके लिए आवश्यक है कि हम सब अपनी पारस्परिक एकता को समझें। विश्व के समूचे सात अरब लोग एक हैं । मैं भी उन सात करोड़ लोगों में से एक हूँ।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण,नदी संरक्षण के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा नर्मदा सेवा यात्रा के रूप में किए जा रहे प्रयास को सराहनीय बताया और कहा कि मैं उनके विचारों से सहमत हूँ। हमें मानव मात्र की तरक्की एवं उन्नति के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।
पूर्वजों की धरोहर को बचाना होगा
दलाई लामा ने कहा कि वृक्ष, पानी, हवा आदि के रूप में हमारे पूर्वजों ने जो धरोहर हमें दी है उसे हमें बचाना होगा। मैं स्वयं जल संरक्षण एवं पर्यावरण की स्वच्छता के लिए निरंतर प्रयास करता हूँ। पानी बचाने के लिए मैं कभी बाथ टब का इस्तेमाल नहीं करता अपितु शॉवर से ही नहाता हूँ।
अहिंसा पर विशेष जोर दिया
दलाई लामा ने अपना वक्तव्य अंग्रेजी भाषा में दिया परंतु अहिंसा शब्द उन्होंने हिंदी में बोला तथा उसका विशेष महत्व बताया। उन्होंने बताया कि इसी से विश्व में सदभावना, प्रेम एवं शांति स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि भारत ही विश्व में एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जहाँ विभिन्न धर्मों के अनुयायी एक साथ, आपसी प्रेम सद्भावना एवं भाईचारे के साथ रहते हैं। यह इस देश की विशिष्टता है। भारत ही ऐसा देश है जो भौतिक प्रगति के साथ अंतर्ज्ञान को जोड़ सकता है।
स्पर्श से शांति एवं नई ऊर्जा मिली
इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज शिवराज सिंह चौहान ने अपने वक्तव्य में कहा कि धर्मगुरु दलाई लामा विश्व के महान धर्म गुरु एवं आध्यात्मिक व्यक्ति हैं। उनके स्पर्श से आज मैंने आत्मिक शांति एवं नई ऊर्जा महसूस की है।
2 जुलाई को एक साथ लगेंगे करोडो पेड़
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में आगामी 2 जुलाई को एक दिन में करोडो पेड़ नर्मदा के तट पर लगाए जाएंगे। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे नर्मदा सेवक के रूप में इस अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाए।
बोधि वृक्ष रोपा
कार्यक्रम के प्रारम्भ में दलाई लामा ने बोधि अर्थात पीपल का पौधा तथा मुख्यमंत्री ने बरगद का पौधा रोपा। शुरूआत कन्या-पूजन एवं नर्मदा जल कलश पूजन से हुई। इसके पहले दलाई लामा की ग्राम तुरनाल में सुबह हेलीपेड पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अगवानी की।

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