भोपाल, प्रदेश की राजधानी भोपाल शहर रहने लायक शहरों की रैंकिंग में काफी पिछड़ गया है। पिछली रैंकिंग से नौ पायदान लुढ़का और 19वें स्थान पर आ गया। यूं तो ताल-तलैयों से लबरेज और पेड-पौधों की हरियाली को समेटे यह खूबसूरत शहर किसी से पीछे नहीं है। हवाई, रेल व बस की बेहतर कनेक्टिविटी तो है ही, रोजगार के लिहाज से मंडीदीप-गोविंदपुरा जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र भी हैं। ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स (बेहतर जीवन स्तर), आर्थिक क्षमता, स्थिरता एवं आम लोगों की राय ली गई थी। इसमें से जीवन स्तर व आर्थिक क्षमता में इंदौर के बाद भोपाल दूसरे नंबर पर रहा, जबकि स्थिरता में ग्वालियर, जबलपुर व इंदौर से पिछड़कर चौथे स्थान पर पहुंच गया। सिर्फ लोगों की राय के पैमाने पर ही हम खरे उतरे और प्रदेश के तीन बड़े शहरों से आगे रहे। रैंकिंग में पिछड़ने पर शिक्षा, आर्थिक, कारोबार, खेल आदि क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों की अपनी-अपनी राय है। उनका कहना है कि इंदौर जैसा जुनून ही भोपाल को आगे करेगा। वहां सभी पैमाने बेहतर हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण हो या अन्य कोई सर्वे इंदौर के लोग हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं पर भोपाल में ऐसी दीवानगी नहीं दिखती। ऐसे में अब शहरवासियों को भी आगामी सर्वेक्षण के लिए तैयार रहना होगा ताकि रैंकिंग में सुधार हो सके। म्युनिसिपल परफॉरमेंस इंडेक्स में भोपाल देश में तीसरे नंबर पर है। इसके सभी पांच पैमानों में भोपाल इंदौर से पीछे है। बता दें कि केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दोनों इंडेक्स की रैंकिंग जारी की थी। इस बारे में एसपीजी चेयरमैन अस्र्णेश्वर सिंहदेव का कहना है कि भोपाल हरा-भरा खूबसूरत शहर है, लेकिन कुछ कमियां भी हैं। जिन्हें सुधारना काफी जरूरी है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा के मामले में जितना इंदौर आगे हैं, उतना भोपाल नहीं। वहां आइआइटी, आइआइएम जैसे शैक्षणिक संस्थान हैं। इन मामलों में हमें आगे रहना है ताकि आगे हो सके। इस बारे में निगमायुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी का कहना है कि म्युनिसिपल परफॉरमेंस इंडेक्स में देश में तीसरे नंबर पर आना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इससे अच्छी रैंकिंग हासिल की जा सकती थी। ईज ऑफ लिविंग में रैंकिंग कमजोर हुई है। अगले वर्ष बेहतर रैंकिंग के लिए कड़े प्रयास किए जाएंगे।