मप्र में 10 हजार से ज्यादा मेडिकल और नर्सिंग छात्रों को 2 लाख का मिलेगा कैशलेश बीमा

भोपाल, प्रदेश सरकार मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों के 10 हजार से ज्यादा छात्रों का मेडिक्लेम करवाएगी। संभवत: यह देश का पहला राज्य है, जहां मेडिकल छात्रों का बीमा करवाया जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। प्रदेश के शासकीय, स्वशासी, डेंटल, नर्सिंग कॉलेज व संबद्ध अस्पतालों में पढऩे वाले जूनियर डॉक्टरों का अब मेडिक्लेम करवाया जा रहा है। 18 से 35 साल के सुपर स्पेशिएलिटी, पीजी डॉक्टर, डेंटल व फिजियोथैरेपी कोर्स कर रहे छात्रों को हर साल 2 लाख का कैशलेश मेडिक्लेम दिया जाएगा। इसके अलावा दुर्घटना या असामयिक मृत्यु होने पर आश्रित परिजन को 10 लाख का पर्सनल एक्सीडेंटल, डिसेबिलिटी कवर दिया जाएगा। इसके लिए भारतीय जीवन बीमा निगम, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस लिमिटेड, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी से अनुबंध किया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि प्रदेश के मेडिकल, डेन्टल, नर्सिंग और पैरा मेडिकल के 18 से 35 वर्ष के चिकित्सा छात्रों को उनकी पढ़ाई के दौरान स्वास्थ्य बीमा एवं व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का लाभ दिया जाएगा। योजना में छात्रों को 2 लाख का मेडिक्लेम मिलेगा। व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के अतर्गत स्थाई डिसेबिलिटी और मृत्यु होने पर 10 लाख रूपये का मेडिक्लेम दिया जायेगा। योजना में 5 लाख रूपये का अस्थायी डिसेबिलिटी कवर शामिल है। इस योजना में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन शासकीय/स्वशासी शासकीय महाविद्यालयों में पढ़ रहे 15 हजार से अधिक छात्रों को लाभ मिल सकेगा। योजना में चिकित्सा शिक्षा छात्रों को चयनित बीमा कंपनी द्वारा मेडिक्लेम के लिये केशलेस कार्ड की सुरक्षा दी जायेगी। केशलेस कार्ड से चिकित्सा शिक्षा छात्र देश के किसी भी शासकीय/निजी अस्पताल में अपना इलाज और जाँच करा सकेंगे। मेडिक्लेम में क्रिटिकल बीमारियों का इलाज भी शामिल रहेगा। साथ ही योजना में छात्रों की पूर्व से मौजूद बीमारियों को भी मेडिक्लेम में शामिल किया जायेगा। ओपीडी सेवा, जाँच और अस्पताल में भर्ती होने पर सभी उपचार इस बीमा योजना के लाभ में शामिल रहेंगे।
योजना के लागू होने से प्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पढ़ रहें छात्रों और उनके परिवार पर बीमारी की स्थिति में कोई भी आर्थिक भार नहीं आएगा। साथ ही छात्र वित्तीय समावेशन में शामिल हो सकेंगे।
कोविड जैसी महामारी के दौर के गुजरने के बाद इस बीमा योजना का महत्व और बढ़ जाता है। कई चिकित्सा छात्र कोविड के संक्रमण से भी प्रभावित हुए और चिकित्सा छात्रों के कार्य के स्वरूप में उनके कई संक्रामक बीमारियों से ग्रस्त होने की संभावना भी ज्यादा रहती है।

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