किसान आंदोलन पर राज्यसभा में तकरार के बाद विपक्ष ने किया वॉकआउट

नई दिल्ली, लोकसभा और राज्यसभा में बजट सत्र जारी है। राज्यसभा की कार्यवाही सुबह नौ बजे शुरू हो चुकी है। कई सांसदों ने विभिन्न मामलों में जीरो ऑवर नोटिस भी दिया है। राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सदन में कहा कि किसानों के विरोध पर चर्चा आज नहीं कल होगी। विपक्ष के सांसद सदन से बाहर चले गए। इसके बाद कार्यवाही को 10:30 बजे तक के लिए टाल दिया गया। मैंने दोहराया है कि कृषि कानूनों पर सदन में चर्चा होनी थी। यह गलत धारणा बन रही है कि कोई चर्चा नहीं हुई। मतदान के संबंध में, लोगों के अपने तर्क हो सकते हैं लेकिन हर पार्टी ने अपने हिस्से को पूरा किया और सुझाव दिए। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में किसानों के आंदोलन का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”मैं आज से चर्चा शुरू करना चाहता था लेकिन मुझे बताया गया कि चर्चा सबसे पहले लोकसभा में शुरू होती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हम कल राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं।”
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव ने आंध्र प्रदेश में हिंदू मंदिर पर हमलों के लिए जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर राज्यसभा में शून्यकाल नोटिस दिया है। इससे इतर ने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को लेकर राज्यसभा में कई सांसदों ने कार्यस्थगन का नोटिस दिया है। उनमें राजद सांसद मनोज झा, टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रे, डीएमके सांसद तिरुचि शिवा और बसपा सांसद अशोक सिद्धार्थ शामिल हैं।
इन सब के बीच राज्यसभा की कार्यवाही 11:30 बजे तक स्थगित कर दी गई। वहीं, भाजपा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव ने राज्यसभा में शून्यकाल का नोटिस दिया और आंध्र प्रदेश में हिंदू मंदिर पर हुए हमले के आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। ज्ञात हो कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बजट पेश करते हुए इसे निराला बताया। कहा कि ऐसा बजट पहले कभी नहीं पेश हुआ। इसके बाद मंगलवार को आज से उम्मीद लगाई जा रही है कि संसद के दोनों सदनों में माहौल गर्म रहेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष कृषि कानूनों और किसानों द्वारा जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
संसद का बजट सत्र 29 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ, हालांकि, विपक्ष ने उन किसानों को समर्थन देने के लिए संबोधन का बहिष्कार किया, जो नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले दो महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को 5.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की एक व्यय योजना का अनावरण किया और कहा कि अगर वह अब खर्च नहीं करती तो देश की वृद्धि में देरी होगी। निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट 2021 अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।
बता दें कि सीतारमण ने संसद में बजट पेश करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार अपना हिसाब-किताब स्वच्छ करने के अवसर से नहीं चूकी है। उन्होंने कहा, ‘मैंने इसे जुलाई 2019 में शुरू किया, फरवरी 2020 में भी जारी रखा और हमने इस बार हिसाब-किताब और पारदर्शी बनाया है। कुछ भी छिपाया नहीं गया है। हम साफ-साफ दिखा रहे हैं कि पैसे कहां खर्च हो रहे हैं। एफसीआई को दिए गए पैसे का भी वर्णन किया गया है। अत: सरकार के राजस्व और व्यय के ब्यौरों का लेखा-जोखा अब अधिक खुला व पारदर्शी हो गया है।

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