धीरे-धीरे मौत के आगोश में समा रही आकाशगंगा को वैज्ञा‎निकों ने पहली बार देखा

लंदन, वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आकाशगंगा का पता लगाया है जो धीरे-धीरे मौत के आगोश में समा रही है। यह पहला अवसर है जब किसी आकाशगंगा की मौत को वैज्ञानिकों ने देखा है। इससे पहले केवल मृत आकाशगंगाओं का अवलोकन और अध्ययन ही किया गया था। अटाकामा लार्ज मिलिमीटर/सबमिलिमीटर एरे (एएलएमए) टेलिस्कोप के जरिए खगोलविदों ने पृथ्वी से नौ बिलियन प्रकाश वर्ष दूर धीरे-धीरे मर रही एक आकाशगंगा का पता लगाया है। यह आकाशगंगा नए तारे बनाने वाली लगभग आधे से अधिक गैसों को खो रही है, वहीं इसका ईंधन भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
इस आकाशगंगा की पहचान आईडी2299 के नाम से की गई है। जब किसी आकाशगंगा में नए तारों का निर्माण रूक जाता है या वे तारों को बनाने वाली समाग्री जैसे गैस और ईंधन को खोने लगती है तो इससे उनकी मौत हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, आईडी2299 आकाशगंगा वर्तमान में हर साल लगभग 10,000 सूर्य बनाने की सामग्री को ठंडे गैस के रूप में बाहर निकाल रही है। ऐसा अनुमान है कि वर्तमान में इस आकाशगंगा ने अपनी कुल ठंडी गैस का 46 प्रतिशत भाग खो दिया है। इस आकाशगंगा में अभी भी नए तारों का निर्माण हो रहा है, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। आशंका जताई जा रही है कि नए तारे बनने के कारण इस आकाशगंगा का ईंधन जल्द ही खत्म हो जाएगा। ऐसे में आकाशगंगा शेष बची ठंडी गैसों का तेजी से प्रयोग करेगा। जिसके बाद इस आकाशगंगा की कुछ लाख साल बाद मौत हो जाएगी।
बता दें कि आकाशगंगाओं की उम्र खरबों साल होती है। ब्रिटेन के डरहम विश्वविद्यालय और फ्रांस के सेश्ले न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर के प्रमुख शोधकर्ता एनाग्राजिया पुगलीसी ने कहा कि यह पहली बार है जब हमने दूर के ब्रह्मांड में एक विशिष्ट विशाल तारा बनाने वाली आकाशगंगा को मरते हुए देखा है। हम इस आकाशगंगा के बारे में अधिक अध्ययन कर रहे हैं। वैज्ञा‎निकों को मानना है ‎कि अंतरिक्ष में मौजूद आकाशगंगा एक निश्चित समय के बाद मर जाते हैं। हालांकि, उनके मौत को कभी भी देखा नहीं गया है।

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