कोरोना संक्रमण के सर्वाधिक मामले अब दिल्ली और केरल से आ रहे

नई दिल्ली, कोरोना संक्रमण के सर्वाधिक मामले अब महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु अथवा उत्तरप्रदेश जैसे राज्यों से नहीं बल्कि अपेक्षाकृत छोटे राज्य केरल और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली से आ रहे हैं। यह बदलता ट्रेंड कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की पुष्टि करता प्रतीत हो रहा है। लेकिन तापमान गिरने के साथ ही उत्तर भारत में कोरोना की वापसी की भविष्यवाणी भी की जा रही है।
उत्तरप्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां भारत में सबसे अधिक लगभग डेढ़ लाख कोरोना टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं। इस राज्य में मरीजों के मिलने की दर अब 3% के करीब है जो कि राष्ट्रीय औसत से भी काफी कम है। किंतु केरल और दिल्ली में मरीजों की मिलने की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इस कारण यहां तेज रफ्तार से कोरोनावायरस फैल रहा है। कोरोना की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए दिल्ली सरकार ने प्रतिदिन 15,000 नए संक्रमित मरीजों के हिसाब से तैयारी शुरू कर दी है। बड़ा सवाल यह है कि पहले से ही पस्त हो चुकी स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्य सेवा में जुटे कर्मचारियों पर कोरोना की यह तीसरी लहर क्या प्रभाव डालेगी? दूसरा बड़ा प्रश्न यह भी है कि कोरोनावायरस के चलते पहले से ही अनेक गंभीर बीमारियों के मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पाया, क्या अब भी उनकी उपेक्षा होती रहेगी। जहां तक कोरोना वैक्सीन का सवाल है, यह भारत में जून 2021 से पहले आम जनता को उपलब्ध होना संभव नहीं है। दुनिया के जिन देशों में कोरोना वैक्सीन का उपयोग शुरू हो गया है, वहां भी संक्रमण तेजी से फैल रहा है। जिसका सबसे सटीक उदाहरण रूस है।
इस बीच भारत में कुछ राज्यों में बड़ी संख्या में कोरोना के नए मरीजों का मिलना जारी है। शुक्रवार को केरल में 6638 में संक्रमित मिले और पीड़ितों की संख्या बढ़कर 4,25,123 हो गई। दिल्ली में भी 5891 नए संक्रमित मिलने के साथ पीड़ितों की संख्या बढ़कर 3,81,644 हो गई है। केरल और दिल्ली के आंकड़ों की खासियत यह है कि केरल में चार लाख से ऊपर संक्रमित मरीज होने के बावजूद कुल 1458 लोगों की मौत हुई है। इसके विपरीत दिल्ली में जहां चार लाख से कम कोरोना मरीज हैं, मौतों की संख्या केरल से लगभग 4 गुनी 6470 है। इसलिए केरल में संक्रमण का फैलना उतना चिंताजनक नहीं है जितना कि दिल्ली में। वैसे राष्ट्रीय स्तर पर पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात में कोरोना से औसत मृत्यु दर अन्य राज्यों की अपेक्षा ज्यादा है। हालांकि इन तीनों राज्यों में नए मरीज मिलने की रफ्तार में कमी देखी गई है। अन्य राज्यों में पश्चिम बंगाल के अलावा छत्तीसगढ़ की स्थिति भी चिंताजनक है। पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को 3979 कोरोना संक्रमित मिले और पीड़ितों की संख्या बढ़कर 3,69,671 हो गई। इनमें से 6784 की मौत हो चुकी है, जो कि दिल्ली से अधिक है। संक्रमण के मामले में बंगाल दिल्ली से पीछे है। बंगाल में संक्रमण का काबू में ना होना चिंताजनक है, क्योंकि आने वाली ठंड यहां नुकसानदायक हो सकती है। छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय से प्रतिदिन दो हजार से ऊपर नए संक्रमित मरीज मिल रहे हैं और यहां पर 1989 लोगों की मौत भी हो चुकी है। संक्रमण के मामले में छत्तीसगढ़ गुजरात और मध्यप्रदेश से ऊपर है। ओडिशा में भी संक्रमण अधिक है। लेकिन यहां पर कुल 1361 मौतें हुई हैं जो कि राष्ट्रीय औसत से कम है। असम में अब संक्रमण नियंत्रण में आता दिख रहा है। शुक्रवार को यहां 380 मरीज मिले। जबकि 1094 ठीक हो गए। यहां पर कुल 926 लोगों की मौत हुई है।

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