उमा भरती ने फिर से राजनीति में लौटने का किया ऐलान

भोपाल,2019 में लोकसभा चुनाव लडऩे से इंकार करने वाली भाजपा की फायरब्रांड नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अब राजनीति में फिर से कदम रखने का ऐलान किया है। सांची में हुई जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने 2024 का लोकसभा का चुनाव लडऩे का फैसला किया है। दरअसल, उमा भारती मप्र में राजनीति करना चाहती हैं। वे अपने लिए मप्र में फिर से राजनीतिक मैदान तैयार कर रही हैं।
गौरतलब है कि 2003 में भाजपा को सत्ता में लाने वाली उमा भारती को इस बात का मलाल है कि पार्टी संगठन ने उन्हें मप्र में राजनीति करने का अवसर न देकर यूपी में उन्हें सक्रिय कर दिया। शायद यही वजह है कि उन्होंने 2019 में लोकसभा चुनाव लडऩे से मना कर दिया। लेकिन वे एक बार फिर से राजनीति करना चाहती हैं। इसका संकेत उन्होंने दे दिया है। भाजपा नेता उमा भारती ने कहा कि मुझे प्रचंड राजनीति करना है इसलिए 2024 में चुनाव लड़ूंगी। मप्र के बाद यूपी में भी मेरे नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी, लेकिन मैंने मुख्यमंत्री बनने से मना कर दिया था। 2019 में मैंने फैसला लिया था कि अब 2-3 साल चुनाव नहीं लड़ूंगी।
2019 में लोकसभा चुनाव लडऩे से किया था इंकार
आपको बता दें कि पूर्व उमा भारती ने 2019 के लोकसभा चुनाव में दावेदारी ना करने का ऐलान किया था। इस दौरान उमा ने इसके लिए अपने स्वास्थ्य कारणों को जिम्मेदार बताते हुए दावेदारी ना करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वह बीजेपी के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती रहेंगी। उमा ने कहा था कि ‘मैंने अगले तीन सालों तक चुनाव ना लडऩे का फैसला किया है।
पिछड़ा वर्ग का बड़ा चेहरा हैं उमा भारती
मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव को लेकर उमा भारती की राजीनित में फिर से सक्रियता बढ़ गई है। जो राज्य में विधानसभा के उपचुनाव में पिछड़ा वर्ग मतदाता नतीजों में बड़ी भूमिका निभा सकती है, लिहाजा उमा भारती पिछड़ा वर्ग का बड़ा चेहरा हैं, पार्टी इसका लाभ लेना चाहती है और यही वजह है कि उन्हें राज्य में सक्रिय किया जा रहा है।
मप्र चुनाव में उमा की भूमिका रही अहम
गौरतलब है कि उमा भारती भाजपा की एक भारतीय राजनेत्री हैं। भारती को उनकी कट्टर धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है और यह साध्वी राजनेत्री के रूप में लोकप्रिय हैं। इन्होंने अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन में एक अहम भूमिका निभाई है। उमा भारती की अगुवाई में भाजपा ने मध्य प्रदेश में साल 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी और वह मुख्यमंत्री भी बनी थीं, लेकिन हुबली विवाद के चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उसके बाद उमा भारती ने अलग पार्टी बनाई और उनकी प्रदेश की सियासत से दूरी बढ़ती गई। उमा भारती की भाजपा में वापसी हुई लेकिन राज्य की सियासत से उनका दखल लगातार कम होता गया और उन्हें भाजपा ने उत्तर प्रदेश से विधानसभा और लोकसभा का चुनाव लड़ाया और उनमें उन्होंने जीत भी दर्ज की।

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