नगर निगम को खबर नहीं, शासन ने गुपचुप छीनी डुमना नेचर पार्क की जमीन

जबलपुर, इसे कहते हैं आंख का काजल निकला गया और खबर तक नहीं हुई। यह कहावत चरितार्थ हुई है नगर निगम के साथ। राज्य शासन ने नगर निगम के स्वामित्व वाले डुमना नेचर पार्क की ३ हजार एकड़ जमीन गुपचुप तरीक से अपने नाम कर ली है। गौरतलब है कि डुमना नेचर पार्क की ३ हजार एकड़ भूमि का मालिक नगर निगम रहा है। बीते सालों में यह पता नहीं कब मप्र शासन के नाम हो गई और किसी को पता ही नहीं चला। हैरत की बात है कि इस मामले में न तो जनप्रतिनिधियों ने विरोध जताया और न ही नगर निगम से ही कोई बात उठी। इसका कारण वर्तमान में नगर निगम में जनप्रतिनिधि काल न होना भी हो सकता है। दरअसल इसके पीछे टाइगर सफारी प्रोजेक्ट को कारण बताया जा रहा है जिसका निर्माण ननि नहीं चाह रहा था मगर एमआईसी के कुछ सदस्य इसके पक्ष में थे। वहीं सांसद राकेश सिंह इस प्रोजेक्ट को किसी भी कीमत पर पूरा करने के इच्छुक रहे हैं। अंंतत: खसरे से यह भूमि खिसक कर अब मप्र शासन की हो गई है।
१९१२ से है ननि का स्वामित्व
डुमना नेचर पार्क की ३ हजार एकड़ भूमि १९१२ से नगर निगम तत्कालीन नगर पालिका में दर्ज रही है।१८८३ में सेठ गोकुलदास ने यहां नगर पालिका को दिए कर्ज के ६ लाख रुपए से जब खंदारी जलाशय का निर्माण करवाया था उसी समय अंग्रेजों ने यह जमीन म्यूनिसपिल यानि नगर पालिका के नाम कर दी थी यहां १०० साल से नगर निगम का कब्जा रहा है और अभी भी है।
न नोटिफिकेशन जारी हुआ न नोटिस
किसी भी जमीन को एक्वायर करने के पूर्व प्रक्रि या अपनाई जाती है, नोटिफिकेशन होता है संबंधित विभाग से पत्राचार होता है मगर इस मामले में नगर निगम को न तो कोई पत्र दिया गया और न ही पक्ष लिया गया। मप्र शासन के राजस्व विभाग ने बिना नोटिफिकेशन और नगर निगम को पत्राचार किए बिना मप्र शासन के नाम से दर्ज कर दिया।
करोड़ों के प्रोजेक्ट
५ वर्ष पूर्व यहां पर नगर निगम ने करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट चालू किए और इसमें भी बड़ी राशि से यहां काम करवाए हैं। इन सब पर पानी फिर गया है क्योंकि अब यह भूमि उसके हाथ में ही नहीं रही है। ३ हजार एकड़ में विस्तारित डुमना नेचर पार्क की भूमि की वजह से नगर निगम देश के सबसे बड़े वन भूमि के अधिकार का गौरव रखता था।
आनन-फानन में प्रोजेक्ट वन विभाग को दिया
प्रशासनिक अधिकारियों को जब पता चला कि डुमना नेचर पार्क की भूमि नगर निगम की नहीं बल्कि राजस्व विभाग की है तो आनन-फानन में नगर निगम के हवाले किया गया टाइगर सफारी प्रोजेक्ट वन विभाग को भेज दिया गया है।

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