लखनऊ, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार कर दिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए आडवाणी ने कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से बेवजह इस प्रकरण में घसीटा गया। लखनऊ में स्पेशल सीबीआई जज एसके यादव के सामने खुद को बाबरी विध्वंस प्रकरण में पूरी तरह से बेगुनाह बताते हुए आडवाणी ने कहा राजनीतिक दबाव में उनके खिलाफ जांच की गई। उन्होंने कहा कि मनगढ़ंत सबूतों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की गई है। इस दौरान आडवाणी से 100 से अधिक सवाल किए गए।
दिल्ली स्थित आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए आडवाणी के सामने कुछ वीडियो क्लिप, अखबारों की कटिंग सहित अन्य सबूत रखे गए। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने सभी को झूठा, मनगढ़ंत और राजनीतिक साजिश करार दिया। कोर्ट 4 जुलाई से ही सभी आरोपियों के बयान रेकॉर्ड कर रही है। इस मामले में भाजपा के कई नेता आरोपी हैं। आडवाणी से पहले यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और भाजपा नेता उमा भारती के बयान दर्ज हो चुके हैं। सभी 32 आरोपियों का बयान दर्ज होने के बाद उन्हें अपनी सफाई और साक्ष्य पेश करने का मौका दिया जाएगा। सीबीआई की विशेष अदालत को इस मामले को 31 अगस्त तक निस्तारित करना है। बीते 8 मई को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत को यह आदेश दिया था। गौरतलब है कि अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने विवादित ढांचे को गिरा दिया था। उनकी आस्था थी कि किसी प्राचीन मंदिर को ढहाकर वह मस्जिद बनाई गई थी। लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी समेत तमाम भाजपा नेता उस वक्त राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता थे।
आडवाणी ने बाबरी विध्वंस मामले में खुद को बेकसूर बता कर आरोपों को साजिश करार दिया