मप्र में 55 फीसदी किराया बढ़ाकर बसें चलाने का प्रस्ताव बस ऑपरेटरों ने दिया

भोपाल, तीन माह का टैक्स माफ करने पर अड़े बस संचालकों ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि अगर बस किराया 55 फीसदी बढ़ाया जाएगा तो बसों का संचालन किया जा सकता है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार से अनुमति मिलने के बाद भी बस संचालन नहीं किया जा रहा है। इसका कारण डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और कोरोनाकाल में हुए नुकसान के चलते पुराने किराया शुल्क पर बसों का संचालन घाटे का सौदा बताया जा रहा है। इसके चलते मालिकों ने बसों के किराए में 55 फीसदी की बढ़ोतरी करने की मांग रखी है। बस मालिकों का कहना है कि जब तक किराए में बढ़ोतरी की अनुमति नहीं दी जाती तब तक बसों का संचालन नहीं किया जाएगा।
प्राइम रूट बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा का कहना है कि हमने प्रदेश सरकार से लॉकडाउन की अवधि के दौरान लगने वाले टैक्स को माफ करने को कहा है लेकिन शासन हमारी बात नहीं मान रहा है, जबकि अन्य राज्यों की सरकार ने टैक्स माफ कर दिया है। मार्च 2020 के मुकाबले डीजल की कीमत 26 प्रतिशत से बढ़ गई है।
तीन माह में 17 रूपए बढ़ा डीजल का दाम
कोरोना के चलते जब लॉकडाउन लगाया गया था तब मार्च में एक लीटर डीजल के भाव 63 रुपए के आसपास थे जो कि वर्तमान में 80 रुपए पर पहुंच गए है। इस प्रकार मार्च से लेकर अब तक डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 17 रुपए की बढ़ोतरी हो गई है। इसके चलते पुराने किराए में बसों का संचालन नहीं किया जा सकता। इसके अलावा कोरोना के चलते बसों में भी शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा, जिसके चलते बसों में यात्री क्षमता से कम बैठ सकेंगे इससे बस मालिकों को नुकसान होगा। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि छोटे बस संचालक जिन्हें बसों की किस्तें, आरटीओ टैक्स, ड्राइवर-क्लीनर का वेतन समेत अन्य खर्च वहन करना होता है वह व्यापार कर ही नहीं पाएंगे, ऐसे में नुकसान में बस चलाने से बेहतर है कि बसों का संचालन बंद ही रखा जाए।
40 फीसदी बढ़ोतरी कर सकती है सरकार
कोरोना के चलते ट्रेनों का संचालन बंद है। बसें भी नहीं चल रही है ऐसे में व्यक्ति को एक जिले से दूसरे जिले में जाने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। अगले माह राखी के साथ ही अन्य त्योहार भी आने वाले हैं। यदि बस नहीं चली तो लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वर्तमान में बसों का संचालन पूरी तरह से बंद है। इसे देखते हुए सरकार बसों के किराए में 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी किए जाने को लेकर सहमत हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो भी परेशानी आम जनता को ही होगी क्योंकि कोरोना के चलते लोगों की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब है उस पर बसों का किराया बढऩे से उनकी जेब पर असर होगा।

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