नई दिल्ली,भारतीय भारोत्तोलक संजीता चानू डोपिंग के आरोपों से बरी हो गयी हैं। अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएफ) ने चानू के नमूनों में एकरूपता नहीं पाए जाने के कारण उनके खिलाफ लगाए गए डोपिंग के आरोपों को खारिज कर दिया है। आईडब्ल्यूएफ ने विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला किया है। वहीं आरोपों से बरी होने के बाद आईडब्ल्यूएफ को आड़े हाथों लेते हुए चानू ने विश्व संस्था से माफी मांगने और मुआवजा दिये जाने की मांग की। साथ ही कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दी जानी चाहिये।
चानू ने शुरु से ही इस मामले में अपने पर लगाये गये डोपिंग के आरोपों को आधारहीन बताया था। उन्हें आईडब्ल्यूएफ के कानूनी सलाहकार लिला सागी के हस्ताक्षर वाले ईमेल के जरिए अंतिम फैसले की जानकारी मिली है। इस ईमेल में कहा गया है, ‘वाडा ने सिफारिश की है कि नमूने के आधार पर खिलाड़ी के खिलाफ मामला समाप्त किया जाना चाहिए।’
इसमें कहा गया है कि आईडब्ल्यूएफ ने वाडा को 28 मई को बताया था कि चानू के नमूनों के विश्लेषण के समय उनमें एकरूपता नहीं पायी गई है। आईडब्ल्यूएफ के अनुसार, ‘इसके बाद आईडब्ल्यूएफ ने खिलाड़ी के खिलाफ आरोप खारिज करने और यह मामला यहीं खत्म करने का फैसला किया है।’
चानू ने इस खुशी जताते हुए कहा कि आंखिरकार मुझे आधिकारिक तौर पर डोपिंग के आरोपों से मुक्त कर दिया गया है पर इस बीच मैंने जो अवसर खोये हैं और मैं जिस मानसिक पीड़ा से गुजरी हूं उसकी लिए जिम्मेदार संगठन से जुड़े लोगों को सजा मिलनी चाहिये। इसके साथ ही
आईडब्ल्यूएफ से माफी मांगने और मुआवजा देने को कहा
उन्होंने कहा, ‘हर स्तर पर की गईं गलतियों की जिम्मेदारी कौन लेगा। आप एक खिलाड़ी को अंतिम फैसला आए बिना ही वर्षों तक निलंबित कर देते हो और एक दिन आप मेल भेजकर कहते हो कि आपको आरोपों से मुक्त किया जाता है।’ चानू ने कहा कि आईडब्ल्यूएफ के कड़े रवैये से वह टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पायी इस कारण उन्हें मुआवजा मिलना चाहिये।
उन्होंने कहा, ‘क्या यह किसी तरह का मजाक है। क्या आईडब्ल्यूएफ खिलाड़ी के करियर की परवाह नहीं करता. क्या मेरे ओलंपिक के अवसरों को खत्म करना आईडब्ल्यूएफ का इरादा था। हर खिलाड़ी का सपना ओलंपिक खेलों में पदक जीतना होता है। वह कम से कम उनमें भाग तो लेना ही चाहता है। वहीं आईडब्ल्यूएफ ने मुझसे यह अवसर छीन लिया।’
अर्जुन पुरस्कार मिलने की उम्मीदें
चानू को उम्मीद है कि वह इस साल अर्जुन पुरस्कार हासिल कर पायेगी। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएफ) ने विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) की सिफारिशों के आधार पर चानू को डोपिंग के आरोप से बरी कर दिया जिससे अब यह 26 वर्षीय खिलाड़ी अर्जुन पुरस्कार के लिए दावेदार बन गयी है। चानू ने कहा, ‘मैंने पहली बार 2016 में अर्जुन पुरस्कार के लिए आवेदन किया था पर तब मुझे यह पुरस्कार नहीं मिला। मुझे योग्य होने के बावजूद 2017 में भी यह अवार्ड नहीं मिला’ उन्होंने कहा, ‘ इसके बाद डोप मामले के कारण मैं इसके लिए अयोग्य हो गयी। मैं अब इसे हासिल करने के प्रयास करूंगी।’ चानू ने 2014 और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में 48 किग्रा और 53 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक भी जीते थे।
इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने पिछले महीने ही अवार्ड के लिए आवेदन किया था क्योंकि उनका अस्थायी निलंबन हटा दिया गया था और आईडब्ल्यूएफ ने उन्हें टूर्नामेंटों में भाग लेने की अनुमति दे दी थी। उनका मामला खत्म नहीं हुआ था और इसलिए भारतीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएलएफ) ने उन्हें जानकारी दी थी कि वह खेल पुरस्कार पाने के अयोग्य है क्योंकि डोपिंग के आरोपों वाले खिलाड़ी को यह अवार्ड नहीं दिए जाते हैं। चानू ने कहा, ‘मैंने हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया तथा ग्लास्गो और गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में डोपिंग के बिना दो पदक जीते। मैं 11-12 साल से इस खेल में हूं। मैं नहीं जानती कि अभी तक मुझे इस पुरस्कार से क्यों नजरअंदाज किया गया।’
IWF ने भारोत्तोलक संजीता चानू को डोपिंग के आरोपों से बरी किया