नई दिल्ली,अगर आपको गेमिंग की लत लग चुकी है तो आज ही छोड दीजिए। आगे चलकर यह लत आपके नींद खोने की वजह बन सकती है। इतना ही नहीं, शारीरिक गतिविधियों में कमी की समस्या भी उत्पन्न होने लगती है। विशेषज्ञों का कहाना है कि ऐसे लक्षणों पर आमतौर पर कम से कम 12 महीने तक निगाह रखनी चाहिए। धीरे-धीरे ऐसा व्यक्ति परिवार के सदस्यों से बातचीत कम कर देता है, क्योंकि उनमें से हरेक किसी न किसी स्क्रीन पर आंखें गड़ाये बैठे रहते हैं या किसी और उलझन में होते हैं।कई माता-पिता को बच्चे की इस बीमारी का तब पता चलता है जब उसकी पढ़ाई में भारी गिरावट आती है, पेशेवर जीवन में विफलता होने लगती है या सामाजिक अलगाव दिखाई देने लगता है। इस बारे में मनोचिकित्सकों का कहना कि इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए 6 से 8 सप्ताह की थेरेपी चाहिए होती है। इसके तहत, उन्हें सिखाया जाता है कि गेम खेलने, असुविधा का सामना करने और अन्य स्वस्थ मनोरंजन के साधनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कैसे खुद को संभालना है। अकेले बच्चे को ही ठीक नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों की माने तो आज माता-पिता के पास पुराने समय के विपरीत, अपने बच्चों के साथ बैठने या बात करने का समय ही नहीं है। बच्चों को इस तरह के व्यसनों से रोकने के लिए पयार्प्त समय और ध्यान देना महत्वपूर्ण है। समय की कमी को उपहारों से पूरा नहीं किया जा सकता, और न ही ऐसा करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में रोगों के नए अंतरार्ष्ट्रीय वगीर्करण (आईसीडी) में मानसिक स्वास्थ्य विकार के रूप में डिजिटल और वीडियो गेमिंग को एक व्यसन के रूप में वगीर्कृत किया है।
गेमिंग की लत से उड सकती है नींद, शारीरिक गतिविधियां भी हो सकती है कम