हनी ट्रैप मामले में वीडियो से की जाएगी अफसरों की पहचान, मंत्रियों के ओएसडी भी किये जायेंगे तलब

भोपाल, इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह पर तीन करोड़ रुपए की अड़ी डालने के आरोप में गिरफ्तार महिलाओं और उनके हाथों ब्लैकमेल होने वाले आईएएस अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। आरती दयाल के बयान के आधार पर दस लाख रूपए देने वाले आईएएस अफसर व मंत्री के ओएसडी को बुलाने की तैयारी एसआईटी ने कर ली है। आरती ने मंत्री के ओएसडी के साथ एक बिजनेस मैन का वीडियो बनाने की बात स्वीकार की है। ज्यादातर अफसरों को छुïट्टी के दिन चुपचाप आने को कहा गया है। एसआईटी ने अफसरों से पूछताछ के लिए जबरदस्त तरीके से तैयारी की है। महिलाओं की ओर से बनाए गए वीडियो को सामने रखकर एसआईटी मामले से जुड़े अफसरों से पूछेगी, बताइए! आप हैं या नहीं? उसके बाद उनके गुनाहों के दस्तावेज (एनजीओ को दिए गए काम की कापी) दिखाकर सवाल किए जाएंगे। इंदौर पुलिस ने नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा अमित सोनी, आरती दयाल और मोनिका यादव को गिरफ्तार किया था। उन्होंने इंजीनियर पर तीन करोड़ रुपए की अड़ी डाली थी। उनके पास से कई पूर्व मंत्रियों, कुछ कारोबारियों और मध्यप्रदेश के एक दर्जन आईएएस अफसरों के आडियो- वीडियो और पोर्न फिल्में मिली थीं। उसके बाद मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। एसआईटी ने जांच की रफ्तार अब तेज करने के मूड में है।
अफसरों ने काम देना कबूला
सूत्र बताते हैं कि उन सभी अफसरों को बुलाने की तैयारी में है, जिनके अश्लील वीडियो गिरफ्तार महिलाओं के पास मिले हैं। इसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर महिलाओं ने अपने एनजीओ के लिए काम हासिल किए थे। अफसर भी मजबूरी में ब्लैकमेल होते रहे और महिलाओं के मांग के आधार पर उन्हें काम देते रहे। जिन-जिन एनजीओ को अफसरों ने काम दिए हैं, उनके आदेश की कापी भी गिरफ्तार महिलाओं के लैपटाप और मोबाइल में मिली है। बताते हैं कि जांच से जुड़े अफसरों ने इसका सत्यापन भी करा लिया है। अब अफसरों से पूछताछ की जाएगी।
वीडियो और दस्तावेज के आधार पर पूछताछ
पूछताछ का फोकस वीडियो और दस्तावेज होंगे। अफसरों के सामने लेपटाप या कंप्यूटर में वीडियो खोले जाएंगे। उन्हें दिखाए जाएंगे और फिर पूछा जाएगा कि आप हैं या नहीं। आप संबंधित महिलाओं को पहचानते हैं या नहीं। उसके बाद एनजीओ को दिए गए काम की प्रति दिखाई जाएगी। यह भी पूछा जाएगा कि और भी बहुत सारे एनजीओ ने काम के लिए आवेदन किया था, लेकिन मिला सिर्फ गिरोह से जुड़ी महिलाओं को है। इस बारे में अफसरों को जवाब देना होगा। शुरुआती पूछताछ आईएएस अफसरों से होगी। ऐसा इसलिए उनकी संख्या ज्यादा है। नेताओं की संया अफसरों की तुलना में कम है। सबसे बाद में आईपीएस अफसरों से पूछताछ की बारी आएगी।

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