नई दिल्ली, वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आपात निधि (कॉन्टिंजेंसी फंड) में 15 फीसदी की भारी गिरावट आई है। हालांकि उसकी आय में 146 फीसदी की बढ़त हुई है। रिजर्व बैंक की कुल बैलेंस शीट 13.42 फीसदी बढ़कर 41 लाख करोड़ रुपए हो गई। इस बढ़ोतरी में निजी और विदेशी निवेशों का प्रमुख योगदान है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। गौरतलब है कि आरबीआई का वित्त वर्ष जुलाई से जून तक होता है। रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक की आपात निधि में 1.96 लाख करोड़ की गिरावट आई है। आरबीआई का बैलेंस शीट 30 जून 2018 को 36.17 लाख करोड़ रुपए थी, जो 30 जून 2019 को बढ़कर 41.09 लाख करोड़ रुपए हो गई। इस प्रकार इसमें 13.42 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
आरबीआई की संपत्ति में बढ़ोतरी का मुख्य कारण घरेलू और विदेशी निवेश में क्रमश: 57.19 फीसदी और 5.70 फीसदी की बढ़ोतरी है। वहीं सोने में कुल 16.30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। 2018-19 में रिजर्व बैंक की आय 146.59 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष में सिर्फ 78,000 करोड़ रुपए थी। आरबीआई ने भारत सरकार के परामर्श से मौजूदा ईसीएफ (इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क) की समीक्षा के लिए बिमल जालान की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इस समिति ने 52,637 करोड़ की आय को कॉन्टिंजेंसी फंड से वापस निकालने की सिफारिश की थी। सालाना रिपोर्ट में कहा गया चूंकि रिजव बैंक का वित्तीय लचीलापन वांछित सीमा के भीतर था, इसलिए 52,637 करोड़ रुपए के अतिरिक्त जोखिम प्रावधान को आकस्मिक निधि (सीएफ) से वापस लिया गया। आरबीआई के पास इसके बाद कुल 1,23,414 करोड़ रुपए का सरप्लस फंड था, जिसे मिलाकर कुल 1,75,987 करोड़ रुपए वह केंद्र सरकार को हस्तांतरित करेगी, जिसमें से 28,000 करोड़ रुपए वह पहले ही दे चुका है।
RBI की पिछले साल आय 146 % बढ़ी पर आपात निधि में 1.96 लाख करोड़ की गिरावट आई