नईदिल्ली, बच्चों के नींद का पैटर्न और स्कूल में उनकी परफॉर्मेंस ये दोनों चीजें आपस में जुड़ी हुई हैं और पैरंट्स इस बात को जितनी जल्दी समझ जाएं उतना अच्छा होगा। डिपार्टमेंट ऑफ साइकॉलजी ऐंड ह्यूमन डिवेलपमेंट ने एक स्टडी की जिसमें उन्होंने बच्चे कितने घंटे सोते हैं इस बात की तुलना उनके मार्क्स और ग्रेड्स से की और नतीजे हैरान करने वाले थे। स्टडी के नतीजे बताते हैं कि वैसे बच्चे जो रात को सही ढंग से नहीं सो पाते या फिर जिनकी नींद पूरी नहीं होती वे क्लास में उन बच्चों की तुलना में खराब परफॉर्म करते हैं जो रात में ढंग से सोते हैं और जिनकी नींद पूरी होती है। बच्चों की नींद का पैटर्न अगर रेग्युलर हो यानी अगर बच्चों की स्लीप रूटीन फिक्स्ड हो तो ऐसे बच्चे न सिर्फ क्लास में बेहतर परफॉर्म करते हैं, उनकी अकैडमिक परफॉर्मेंस अच्छी होती है बल्कि उनका व्यवहार भी सही रहता है। जिन बच्चों में नींद की समस्या होती है उनमें बिहेवियरल इशूज भी होते हैं और उनका व्यवहार भी चैलेंजिंग हो जाता है। पढ़ाई में पूरी मेहनत करने के बाद भी अगर आपका बच्चा क्लास में अच्छे मार्क्स नहीं ला पा रहा है तो हो सकता है इसके पीछे उसकी नींद जिम्मेदार हो।
बच्चों के सोने का रूटीन फिक्स है तो उनके परीक्षा में आएंगे अच्छे मार्क्स