भोपाल,मप्र के बहुचर्चित पीएमटी घोटाले के आरोपी डॉ. सुधीर कुमार सिंह की जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी है। पीएमटी घोटाला-2008-09 के मामले में सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश भगवत प्रसाद पाण्डे ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि आरोपित ने अयोग्य छात्रों से पैसा लेकर कर उन्हें पीएमटी में पास कराया है। यदि जमानत का लाभ दिया गया तो वह मामले की जांच में विपरीत प्रभाव डालेगा। इससे पूर्व सीबीआई के वकील सतीश दिनकर ने तर्क दिया था कि आरोपित सुधीर प्रभावशाली परिवार से है। वह उत्तरप्रदेश के भाजपा विधायक रामकृपाल सिंह का पुत्र है। उसकी पत्नी भी मेडिकल ऑफिसर है। यदि सुधीर को जमानत दी गई तो वह मामले की जांच को प्रभावित कर सकता है। व्यापमं की विशेष अदालत में पीएमटी घोटाला-2008-2009 ऐसा पहला मामला है, जिसमें किसी आरोपित चिकित्सक की जमानत खारिज की गई हो। इस मामले में इससे पूर्व तीन आरोपित परीक्षार्थीयों की जमानत पर छोड़ दिया गया है। सीबीआई ने आरोपित डॉ. सुधीर कुमार सिंह को 19 नवंबर 2018 को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। वहां से उसे तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया था। व्यापमं मामलों की विशेष अदालत ने राज्य ओपन स्कूल के पूर्व सहायक संचालक को दो साल कैद और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।
यह फैसला विशेष न्यायाधीश एसबी साहू ने सुनाया। घटना 30 अक्टूबर 2008 से 10 अक्टूबर 2008 के बीच भोपाल स्थित मध्यप्रदेश राज्य ओपन स्कूल कार्यालय में हुई थी। यहां पदस्थ पूर्व सहायक संचालक महेन्द्र शर्मा ने हायर सेकंडरी की अंकसूची में काट-छांट कर परीक्षार्थी रामचंद्र को पास किया था। यह खुलासा होने पर आरोपित के खिलाफ एसटीएफ ने धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जीवाड़ा और षडयंत्र के तहत अदालत में 12 जनवरी 2015 को चालान पेश किया गया था। इससे पूर्व एसटीएफ ने मामले से जुड़े मूल परीक्षार्थी रामचंद्र, अयोध्या प्रसाद और बालाराम के खिलाफ 6 जून 2014 को चालान पेश किया था। इनसे पूछताछ में पता चला था कि पूर्व सहायक संचालक महेन्द्र शर्मा से साठ-गांठ कर उन्होंने अपनी अंकसूची में काट-छांट कराई थी। इस आधार पर शासकीय नौकरी हासिल कर ली थी। अदालत 13 जून 2015 को उक्त आरोपितों को दो साल कैद की सजा सुना चुकी है।
पीएमटी घोटाले में डॉ. सिंह की जमानत अर्जी खारिज