मुंबई,सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का 20 फीसदी बैड लोन टॉप 20 डिफॉल्टरों पर है। इनके ऊपर कुल 2.36 लाख करोड़ का लोन है। 31 मार्च 2018 तक भारतीय बैंकिंग प्रणाली में कुल बैड लोन 10.2 लाख करोड़ रुपए था। सूचना अधिकार अधिनियम (2005) के माध्यम से आरबीआई डेटा से पता चला है कि सरकारी नियंत्रण वाले बैंक लोन का जोखिम अधिक केंद्रित है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए खुलासे के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के टॉप 20 डिफॉल्टर्स के पास 2.36 लाख करोड़ गैर-निष्पादित संपत्तियां (एनपीए) हैं, जो वित्तीय वर्ष 2018 के अंत तक शीर्ष 20 उधारकर्ता को 4.69 लाख करोड़ रुपये के एक्सपोजर का करीब 50 प्रतिशत है। हालांकि, निजी बैंकों के मामले में टॉप 20 डिफॉल्टर्स द्वारा डिफॉल्ट लोन, एक्सपोजर का 34 प्रतिशत है। आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन साल में भारी बैड लोन के कारण, पीएसयू बैंक टॉप 20 उधारकर्ता के लोन जोखिम के संबंध में सतर्क हो गए हैं। वित्तीय वर्ष 2016 में सार्वजनिक बैंकों ने टॉप 20 उधारकर्ताओं का लोन 18 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था, लेकिन वित्तीय वर्ष 2017 में इस 10 प्रतिशत घटा दिया गया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2018 में 3प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। लेकिन निजी बैंकों ने वित्त वर्ष 2016 में लोन एक्सपोजर में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वित्तीय वर्ष 2016 में 13प्रतिशत और वित्तीय वर्ष 2018 में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
चीन और ब्राजील जैसे विकासशील देशों की तुलना में, भारत का शुद्ध एनपीए और पूंजीगत प्रावधान का अनुपात बहुत खराब है। इंडियन इंस्टीट्यूड ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स (आईसीएआई) के पूर्व अध्यक्ष अमरजीत चोपड़ा ने बताया कि बैड लोन खराब प्रबंधन का परिणाम है। यह बड़ी परियोजनाओं, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे वाले लोगों के संबंध में मूल्यांकन प्रणाली पर खराब प्रदर्शन करता है।
बैंकों का 20 % बैड लोन टॉप 20 डिफॉल्टरों पर : RBI