नई दिल्ली,दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर मुखर हो गए है। केजरीवाल ने भाजपा और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में प्रस्तावित संशोधनों के संबंध में पत्र लिखा है। हाल ही में आम आदमी पार्टी के मुखिया एलान कर चुके हैं कि वो इस मामले में गैर-बीजेपी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात करेंगे। भाजपा और एनडीए शासित राज्यों के मुख्य मंत्रियों को भेजे पत्र में केजरीवाल ने अपील करते हुए लिखा है, आप प्रधानमंत्री जी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उन्हें इन खतरों से अवगत कराएं। मैं जानता हूं कि आप भाजपा/एनडीए से हैं और आपके लिए इसके खिलाफ बोलना मुश्किल होगा। केन्द्र सरकार इन संशोधनों को संसद के शीतकालीन सत्र में पास करवाना चाहती है, जो बेहद खतरनाक हैं। केजरीवाल ने आगे लिखा है, ‘अगर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में प्रस्तावित संशोधन पास हो जाते हैं तो बिजली क्षेत्र की सारी शक्तियां केन्द्र सरकार में निहित हो जाएंगी। राज्य सरकारें कोई भी निर्णय नहीं ले पाएंगी। देश भर में बिजली के दामों में भारी वृद्धि होगी। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार और किसान बुरी तरह पिस जाएंगे। केन्द्र सरकार क्रॉस-सब्सिडी खत्म करना चाहती है। लगभग हर राज्य सरकार औद्योगिक और व्यावसायिक इस्तेमाल पर ज्यादा बिजली के रेट लेती है और उस पैसे से किसानों को या तो फ्री बिजली देती है या फिर बहुत ही कम पैसे लेती है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चिंता जताई है कि अगर केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन पास हो गए तो औद्योगिक, व्यावसायिक, घरेलू और खेती-सभी के बिजली के एक ही रेट हो जाएंगे। केन्द्र सरकार का बिजली में सट्टाबाजारी शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इससे तो बिजली बहुत ही महंगी हो जाएगी। साथ ही किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं की तो कमर ही टूट जाएगी। केजरीवाल ने भाजपा/एनडीए शासित मुख्यमंत्रियों से सवाल किया है कि क्या आपको लगता है कि ये सही कदम है? केजरीवाल ने अपने खत में सभी मुख्यमंत्रियों को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में प्रस्तावित संशोधनों के उस पत्र को भी संलग्न किया है, जो 7 सितंबर 2018 को भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा था।
…तो औद्योगिक,व्यावसायिक,घरेलू और खेती-सभी की बिजली के रेट एक ही हो जाएंगे