जबलपुर,मुंगेर में ए.के. 47 राईफल तस्करी कांड में पुलिस ने सी.ओ.डी. के एक अधिकारी व सेवानिवृत्त कर्मचारी को अभिरक्षा में लिया है। पुलिस अधीक्षक अमित सिंह ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि सुरेश ठाकुर सी.ओ.डी. में स्टोर इंचार्ज पद पर कार्यरत था जो अपने साथ ए.के. 47 के कलपुर्जे कार में रखकर ले जाता था। सुरेश यह काम गत 6 वर्षों से कर रहा था। एसपी ने ए.के. 47तस्करी के मामले में अन्य कर्मचारियों के शामिल होने की आशंका भी जताई थी। अब पुलिस ए.के.-47 तस्करी में लिप्त आर्मोरर पुरुषोत्तम व अधिकारी सुरेश ठाकुर के गिरोह को तोड़ने पर विचार कर रही है। बताया गया है कि ए.के.-47 तस्करी के खुलासे के बाद इंटेलीजेंस भी सक्रिय हो गया है। ए.के.-47 एक विनाशक हथियार होने के कारण इसके दुरूपयोग की आशंका भी खुफिया एजेंसियां को सता रही है। इस लिहाज से तस्करी के बिहार के रास्ते नेपाल पहुंचने व नक्सली कनेक्शन को भी जांचा जा रहा है।
डिस्मेंटल होते हैं हथियार ……..
ए.के.-47 को सी.ओ.डी. में डिस्मेंटल करने लाया जाता है। सुरेश ठाकुर यहां ए.के. 47 को डिस्मेंटल की सूची में शामिल करता था पर उसे डिस्मेंटल न कर कलपुर्जे निकाल कर बेच देता था। मुंगेर में बिहार पुलिस के हत्थे चढ़े इमरान ने ए.के.-47 को पुरुषोत्तम से खरीदने की बात भी स्वीकार कर ली है। इमरान इसे ४ लाख रुपये में खरीद कर 5-10 लाख रुपये में बेच देता था।
तस्करी में महिला का नाम …….
आरोपी इमरान को मुंगेर में एके 47 और उसके पुर्जे देने के लिए जबलपुर में दो लोग गए थे। जिस दिन इमरान को हथियार मिले उस दिन वह बिहार में ही था। मुंगेर गए दो लोगों में आर्मोरर पुरुषोत्तम के साथ एक महिला भी थी। वह महिला कौन थी यह रहस्य बरकरार है। जो व्यक्ति जबलपुर से बिहार गया था। उसके सीसीटीव्ही फुटेज अभी तक बिहार पुलिस को नहीं मिले हैं। बिहार पुलिस इन फुटेज को लेने जबलपुर पहुंच गई है।
एन.आई.ए. को सौंपा जाएगा मामला ………….
ए.के.47 राईफल तस्करी के मामले के संवेदनशील होने की वजह से अब ऐसी अटकलें भी लग रही हैं कि यह पूरा मामला एनआईए को सौंपा जा सकता है। फिलहाल आई.बी., मिल्ट्री एटेंलीजेंस ए.टी.एस. मामले पर नजर रख रही है।
मुंगेर में एके-47 राईफल तस्करी के मामले में,नक्सली कनेक्शन की जांच में जुटी एजेंसियां