बजरंग के गांव में जश्न का माहौल

सोनीपत, एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने की खबर आने के बाद से ही पहलवान बजरंग पूनिया के गांव में जश्न का माहौल है। बजरंग की मां ने कहा कि इस बार बेटे ने सपना पूरा कर दिया। 24 वर्षीय पहलवान बजरंग ने भारत को प्रतियोगिता का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इससे पहले बजरंग ने वर्ष 2014 में इंचियोन में खेले गए एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। बेटे की स्वर्णिम उपलब्धि पर परिवार फूले नहीं समा रहा। बजरंग ने जैसे ही फाइनल बाउट में जापानी पहलवान को हराया, सोनीपत में उनके घर पर ढोल नगाड़ों की थाप के साथ जश्न मनाने का दौर शुरू हो गया। पटाखों के बीच सभी ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाते हुए बधाई दी। देर रात तक बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। बेटे की उपलब्धि पर माता-पिता फूले नहीं समा रहे हैं।
बेटे की सफलता पर पिता बोले ने कहा, ‘बजरंग की उपलब्धि पर पूरा परिवार खुश है। बधाइयों के दौर के बीच पिता बलवान सिंह ने कहा कि बजरंग ने इसके लिए कड़ी मेहनत की है। एशियाई खेलों में पहले उसने रजत पदक जीता था, आज उसका रंग भी बदल दिया है। मैंने अपने बेटे से कहा था कि सभी प्रतिस्पर्धाओं में पदक हासिल कर चुका है, अब मुझे ओलिंपिक में स्वर्ण चाहिए। उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों में बजरंग के प्रदर्शन को देखते हुए पूरी उन्हें उम्मीद है कि बजरंग अब टोक्यो ओलिंपिक में देश के लिए स्वर्ण जीतेगा। यह उनका एशियाई खेलों में दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने साल 2014 में दक्षिण कोरिया के इंचियोन में आयोजित खेलों में रजत पदक जीता था। बजरंग के भाई हरेंद्र और भाभी मोनिका ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि वह इस बार देश के लिए स्वर्ण पदक लेकर ही लौटेंगे।

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