भोपाल,राजधानी में चल रही लो फ्लोर और मिडी बसों के रूटों पर अवैध मैजिक, आपे चल रहे हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो बसें बंद हो जाएंगी और शहरवासी व्यवस्थित लोक परिवहन सेवा का लाभ नहीं ले पाएंगे। यह चिंता भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) के डायरेक्टर केवल मिश्रा ने परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह के सामने जताई। मिश्रा ने सिटी बसों के संचालन में आ रही समस्याओं की विस्तार से जानकारी दी और ज्ञापन सौंपा।मालूम हो कि केद्र व राज्य सरकार के सहयोग से शहर में लो फ्लोर और मिडी बसों का संचालन हो रहा है। परिवहन मंत्री सिंह ने पूछा आरटीओ से किस तरह की मदद चाहिए। मिश्रा ने कहा कि 30 अगस्त को 311 रूट की 10 मिडी बसों के परमिट भोपाल आरटीओ ने निरस्त कर दिया था। जबकि शहर में अवैध वाहनों पर कभी कार्रवाई नहीं की जाती। खासकर शहर में चल रहे आपे बिना परमिट ही चल रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस का तर्क होता है कि उनके पास सिर्फ चालानी कार्रवाई का अधिकार होता है परमिट संबंधी कार्रवाई के लिए आरटीओ का होना जरूरी है। लो फ्लोर बसों के रूट पर अवैध वाहन चलने से बसों को नुकसान होता है, यही नहीं मैजिक से जुड़े संचालक लो फ्लोर ड्राइवरों कंडक्टरों के साथ मारपीट तक कर चुके हैं।
परिवहन मंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए सोमवार को बंगले पर इससे जुड़ी एजेंसियों की बैठक बुलाने का आश्वासन दिया। बीसीएलएल वर्ष 2010 से अवैध वाहनों को हटाने को लेकर लगातार शिकायतें कर रहा है। 9 जनवरी 2016 में संयुक्त कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ और बीसीएलएल की संयुक्त टीम बनाई गई थी। लेकिन सिर्फ दोबार कार्रवाई के बाद मामला ठंडा पड़ गया। वर्ष 2010 से लो फ्लोर बसों का संचालन शुरू हुआ। उस दौरान लो फ्लोर बसों के समानांतर रूट से हटकर मिनी बसों, मैजिक के लिए रूट प्रस्तावित किए गए थे। लो फ्लोर के लिए स्टैंडर्ड और ट्रंक रूट थे और मिनी बसों व मैजिक के लिए कंप्लीमेंट्री रूट बनाए गए थे। तय रूटों पर ही परमिट जारी किया जाना था। शुरुआत में 25 फीसदी वाहनों को तय रूटों पर परमिट जारी किया गया।शहर में 400 मैजिक, 500 आपे, 200 मिनी बसें, 13 हजार ऑटो हैं। ऑटो को छोड़कर मिनी बस, मैजिक और आपे के परमिट नहीं हैं या फिर परमिट किसी और मार्ग का है।
बसों के रूटों पर चल रहे हैं अवैध मैजिक, आपे,मुसीबत में सिटी बसें