बाजीराव पेशवा की समाधि स्थल पर हुआ भावपूर्ण आयोजन

भोपाल/खरगोन ,जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान आज केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और सीएम शिवराज सिंह चौहान रावेरखेड़ी पहुंचे। चौहान और सिंधिया ने पेशवा बाजीराव प्रथम की जयंती पर यहाँ पहुँचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि यह देश हमारे लिए ज़मीन का टुकड़ा नहीं है अपितु यह माँ का जीवित स्वरूप है। चौहान ने कहा कि भारत माता का अखंड स्वरूप हमारे लिए वन्दनीय हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उद्धृत विभाजन विभीषिका दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें खंडित आज़ादी मिली थी। लव कुश का लाहौर, अधूरा पंजाब, हिंगलाज मैया और ढाकेश्वरी देवी का मंदिर सभी आज हमारी सीमाओं से परे हैं। भारत माँ की रक्षा, एकता और अखण्डता के लिए वीर बाजीराव पेशवा सहित अनेकों वीरों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग किया था।
चौहान ने बाजीराव पेशवा के पराक्रम, वीरता और साहस के अनेकों प्रसंगों को दोहराया। उन्होंने कहा कि वीर बाजीराव की वीरता और पराक्रम, युद्ध कौशल और रणनीति का पाठ विदेशों के सैन्य संस्थानों में भी पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि महाराजा छत्रसाल का राज्य उन्होंने युद्ध जीतकर वापस लौटाया। जब उन्होंने दिल्ली कूच किया तो औरंगज़ेब के पोते की घिग्गी बंध गई। बाजीराव पेशवा की वीरता और पराक्रम से निज़ाम की घेराबंदी का रणनीतिक कौशल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है।
वीर भूमि के जीर्णोद्धार और विस्तारीकरण की रूपरेखा तैयार
चौहान ने कहा कि संस्कृति मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर के साथ मिलकर उन्होंने इस वीर भूमि के जीर्णोद्धार और विस्तारीकरण की पूरी रूपरेखा बनायी है। उन्होंने कहा कि यहाँ होने वाले सभी निर्माण कार्यों में मराठा शिल्प का ही उपयोग किया जाएगा। यहाँ आने वाले पर्यटकों और माँ नर्मदा की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिये आश्रय स्थल बनाया जाएगा।
रावेरखेड़ी मेरे लिए भावनात्मक
केन्द्रीय नागरिक उड्उयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि रावेरखेड़ी उनके लिए बेहद भावनात्मक स्थल है। उनके पूर्वजों ने यहाँ बाजीराव पेशवा की समाधि बनायी थी। सिंधिया ने कहा कि मध्यकाल में जब चारों तरफ़ से भारत माँ को घेरने की कोशिश विदेशी आक्रांताओं द्वारा की जा रही थी, तब डेढ़ सौ सालों तक वीर मराठाओं ने भारत भूमि की अस्मिता बचाने का पराक्रम किया। वीर शिवाजी ने मुगलों के सामने कभी घुटने नहीं टेके। अटक से लेकर कटक तक हिन्दवी साम्राज्य का भगवा ध्वज मराठाओं ने फहराया था। श्री सिंधिया ने कहा कि पेशवा का शब्द अंग्रेजों द्वारा बिगाड़ा गया, पेशवा का सही उच्चारण पेशवे होता है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि रावेरखेड़ी में होने वाले सम्पूर्ण निर्माण में मराठा शिल्प का उपयोग किया जाए। मराठाओं की परंपरा के अनुरूप हर निर्माण का आधार काले पत्थरों से हो।

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