भोपाल, प्रदेश के प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों व नेताओं को सरकारी आवासों से बेदखल करने और बकाया वसूली को लेकर गृह विभाग की मुसीबतें कम नहीं हो रही है। मामले में जहां हाई कोर्ट ने एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है तो वहीं विधानसभा की लोक लेखा समिति ने अल्टीमेटम दिया है कि तीन माह के भीतर अफसरों से बकाया राशि वसूली करके बताओ। समिति ने सिफारिश भी की है कि गृह विभाग ऐसी स्थाई नीति बनाये जिससे सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों से समय पर किराया वसूली की जा सके। पिछले दिनों लोकलेखा समिति की बैठक हुई। समिति ने सरकारी आवासों को लेकर समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी सरकारी आवासों में कब्जा जमाये बैठे हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद भी कई अधिकारी आवास नहीं छोड़ रहे हैं।
पूर्व विधायक, सांसद और सामाजिक सेवा से जुड़े लोग भी वर्षों से सरकारी आवासों में रह रहे हैं। लोकलेखा समिति ने गृह विभाग का पक्ष सुनने के बाद कहा है कि शासन या विभाग ऐसे मामले को गंभीरता से ले। सरकारी तथा गैर सरकारी लोगों से वसूली करने के लिये एक अभियान चलायें। विभाग एक ऐसी स्थाई नीति बनाकर उनका पालन करें ताकि शासकीय अधिकारियों व कर्मचारियों से बकाया भुगतान समय पर वसूल किया जा सके। समिति ने इस मामले में तीन के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। गृह विभाग ने कार्रवाई को लेकर कहा है कि भोपाल स्थित शासकीय आवास आवंटन नियम में सरलीकरण करते हुए प्रावधान किया गया है कि संबंधित आहरण संवितरण अधिकारी द्वारा ही वेतन से किराया राशि की कटौती की जायेगी। संपदा संचालनालय के नो ड्यूज प्रमाण पत्र देने के बाद ही संबंधित अधिकारी को वसूली से मुक्त किया जाएगा।
प्रशासनिक अफसरों-नेताओं से बकाया वसूली,हाईकोर्ट ने गृह विभाग से मांगी एक्शन रिपोर्ट