सियासतनामा

कारोबारी और व्यापारी किसी के नहीं
यह तो सभी जानते हैं कि योगगुरु बाबा रामदेव ने शुरु से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ़ैसलों को सराहा है और उनके हर कदम को देश के लिए लाभकारी बताया, लेकिन अब जबकि आम चुनाव करीब आ गए हैं तो उन्हें देश में बढ़ती महंगाई नजर आने लग गई है। हद यह है कि बाबा रामदेव कह रहे हैं कि यदि महंगाई पर काबू नहीं पाया गया तो आम चुनाव में मोदी सरकार को खुद चुनाव महंगा साबित होगा। यही नहीं बल्कि उन्होंने इस बार भाजपा का चुनाव प्रचार नहीं करने की भी बात कह दी है। इस पर भाजपा के कुछ नेताओं ने भी दबी जुबान में कहना शुरु कर दिया कि बाबा रामदेव तो व्यापारी हैं उन्हें अपना फायदा दिखाई देता है। अब यदि चुनाव भाजपा हार जाती है तो फिर उन्हें जीतने वाली पार्टी से हाथ मिलाना होगा, यही वजह है कि वो अभी से इसकी रुपरेखा तैयार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। वैसे आमजन की समझ में यह बात नहीं आ रही है कि जब कारोबारी और व्यापारी किसी एक पार्टी से बंधकर नहीं रह सकते हैं तो फिर भाजपा और मोदी सरकार ने इन कारोबारियों और व्यापारियों के लाभ के लिए अनेक निर्णय क्यों लिए, क्या अब उसका भुगतान इन्हें नहीं भरना पड़ेगा?
अच्छा ही हुआ राहुल
पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तीन दिवसीय परिचर्चा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आमंत्रित किया गया है, लेकिन अब जबकि कार्यक्रम शुरु हो चुका है तो कहा जा रहा है कि उन्हें आमंत्रित किया ही नहीं गया है। इससे पहले राहुल के जाने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए गए थे और दो पक्ष सामने आए थे, जिसमें से पहला पक्ष कहता रहा कि राहुल को आरएसएस के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेना चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष कह रहा था कि उन्हें जरुर जाना चाहिए और अपनी बात रखनी चाहिए। बहरहाल अब जबकि संघ का ‘भविष्य का भारत: आरएसएस का दृष्टिकोण’ विषय पर आधारित कार्यक्रम प्रारंभ हो चुका है तो बताया गया है कि करीब 40 संगठनों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को आमंत्रित किया ही नहीं गया। इस पर जानकार कह रहे हैं कि यह अच्छा ही हुआ, वर्ना लंबे समय तक राहुल को जवाब देना पड़ता कि आखिर वो संघ के कार्यक्रम में क्यों गए और क्या बोलकर आए और क्या उनके नाम और तस्वीरों का फायदा संघ आगे तक नहीं लेता रहेगा।

कहाँ है बुनियादी ढांचा ?
यह तो सभी जान चुके हैं कि यूपीए ने 126 राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांस से सौदा तय किया था, लेकिन एनडीए सरकार ने सिर्फ 36 राफेल ही खरीदे, वो भी बहुत ज्यादा कीमत पर आखिर क्यों? इस सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि 36 से ज्यादा विमान रखने के लिए एयरफोर्स के पास बुनियादी ढांचा नहीं था। इस पर भी सवाल किए जा रहे हैं कि आखिर सरकार बुनियादी ढांचा तैयार करने की बजाय ऐसे महंगे सौदे विदेशों से क्यों कर कर रही है, जबकि उसकी उपयोगिता पर ही सवाल उठ रहे हैं और वह भी कोई और नहीं बल्कि खुद रक्षा मंत्री उठा रही हैं। इसके लिए तो जरुरी यह होता कि मोदी सरकार यह पैसा अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और उसके प्रसार पर लगाती तो बेहतर होता, कम से कम इस राजनीतिक उठा-पटक से तो बच रहते और काम भी पुख्ता हो जाता। ये ऐसे सवाल हैं जो कि सरकार की नीयत और सौदे पर विपक्ष को बोलने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
यह कैसा निलंबन
नोएडा के गौतमबुद्ध नगर की आम्रपाली पुलिस चौकी में ऐसा कुछ घटित हुआ कि सुबह होते-होते वह सुर्खियां बन गई। दरअसल इस पुलिस चौकी पर जब डीजीपी पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिसकर्मीयों ने उन्हें पहचाना ही नहीं और इसके चलते साहब को किसी ने सैल्यूट भी नहीं ठोका। इससे गुस्साए डीजीपी ने उन्हें खबर होने से पहले ही एक्शन लिया और देखते ही देखते चौकी प्रभारी और कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई को नाम दिया गया अनुशासनहीनता, लेकिन हकीकत यही है कि डीजीपी को किसी ने नहीं पहचाना। बहरहाल मामला जो भी हो, लेकिन आम लोग तो सवाल यही कर रहे हैं कि यदि उन्होंने नहीं पहचाना था तो खुद डीजीपी अपनी पहचान बता देते और सलामी ले लेते आखिर इतना बड़ा कदम उठाने की जरुरत आखिर क्यों आन पड़ी। जिन्हें सिपाही और हवलदार कभी कभार ही देख पाते हों उन्हें पहचानना आसान थोड़े ही होता है, क्या यह बात खुद आला अधिकारी नहीं जानते हैं?
सस्ते डाटा की नहीं सस्ते आटा की जरुरत
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में होने वाले छात्रसंघ चुनाव से पहले अध्यक्ष पद के सभी उम्मीदवारों ने प्रेजिडेंशियल डिबेट में हिस्सा लेते हुए जो कहा अब वह बहस का कारण भी बन रहा है। दरअसल एक विश्वविद्यालय की छात्र संघ चुनाव में भी अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है और बताने की कोशिश की है कि इस सरकार की नीतियां क्यों गलत हैं। ऐसे ही एक उम्मीदवार जयंत जिज्ञासु ने अपने भाषण में सीधे मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि देश की सरकार को समझना होगा कि हमें सस्ते डाटा की उतनी ज़रूरत नहीं है जितनी सस्ते आटा की है। इस बात को सरकार विरोधी आगे बढ़ा रहे हैं और कह रहे हैं कि मोदी सरकार तो अमीरों के साथ है इसलिए वह डाटा सस्ता करने में लगी हुई है जबकि गरीबों को दो वक्त की रोटी तक नसीब नहीं हो रही है, उन पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। इसलिए इस समय सस्ते डाटा की नहीं बल्कि सस्ते आटा की बात होनी चाहिए।

राफेल का भारत तक का सफर
एक तरफ राफेल सौदे को लेकर देश में राजनीति गरमाई हुई है तो वहीं दूसरी तरफ खबर है कि फ्रांस के तीन राफेल लड़ाकू विमान मध्य प्रदेश के ग्वालियर एयरबेस पहुंच गए हैं। इन पर अगले तीन दिनों तक भारतीय वायुसेना के पायलट ट्रेनिंग करेंगे। इस तरह राफेल सौदे के और गर्माने का अंदेशा आम हो चला है। कांग्रेस किसी भी तरह यह मानने को तैयार ही नहीं है कि इस सौदे में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ और इस पर पारदर्शिता बरती गई है। हकीकत यही है कि जिस सौदे को कांग्रेस की यूपीए सरकार नहीं कर पाई, उसे महंगे दामों में एक निजी कंपनी के जरिए कैसे अंजाम तक पहुंचा दिया गया? अब कहा जा रहा है कि सरकार भले कुछ भी क्यों न कहे, लेकिन हकीकत यही है कि यह सौदा काफी लंबे समय तक इस सरकार का पीछा करता रहेगा, क्योंकि विरोधियों ने इसे अदालत तक ले जाने का मन जो बनाया हुआ है। कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी की मानें तो मोदी सरकार ने राफेल सौदे में देशहित को पूरी तरह से दांव पर लगा दिया है।

कुत्तों ने लालू की नींद हराम की
आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में जहां जेल की सजा से परेशान हैं तो वहीं अब उन्हें डेंगू के डंक और कुत्तों की भों-भों ने परेशान कर दिया है। लालू के करीबी बता रहे हैं कि जब कभी लालू सोने की कोशिश करते हैं कुत्ते भोंकना शुरु कर देते हैं, जिससे उनकी नींद हराम हो रखी है। अब यदि लालू नींद नहीं ले पाएंगे तो उनकी बीमारी ठीक होने की बजाय और बढ़ने लगेगी। इसलिए अब उन्होंने पेइंग वार्ड की मांग कर दी है, लेकिन इसे लेकर अटकलें लगाई जाने लगीं कि इसके जरिए कहीं वो राजनीति न शुरु कर दें, इसलिए ऐसा हो पाना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि आरोप यह भी है कि लालू के खिलाफ जो भी कार्रवाई की गई है वह राजनीतिक विद्वेष के चलते की गई है और केंद्र में सत्ता परिवर्तन के साथ ही उन्हें राहत मिल सकेगी। फिलहाल उन्हें अपनी तरह से दुश्मनों का सामना करना है।

दोस्त और कारोबारी में फर्क
रुस से भारत के रिश्ते जग जाहिर हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार ने अमेरिका का रुख करके संदेश दिया कि वो अब अमेरिका से नजदीकी बनाना चाहता है। इसे विचारकों ने घातक कदम बताया था, लेकिन सरकार और उसके सलाहकार नहीं मानें और अब खबर आ रही है कि रूसी हथियारों की खरीद पर अमेरिका ने भारत को तनाव देने का काम कर दिया है। दरअसल पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी ने भारत को आगाह किया है कि रूस से हथियारों की खरीद करने पर उसे अमेरिका से विशेष छूट मिलने की कोई गारंटी नहीं होगी। अब यह कौन नहीं जानता कि रूस के खिलाफ अमेरिका के मौजूदा नियमों के तहत यदि कोई देश रूस से रक्षा या खुफिया विभाग के क्षेत्रों में कोई लेन-देन या सौदेबाजी करता है तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना भी करना पड सकता है। कहा जा रहा है कि संभवत: भारत सरकार को अब दोस्त और कारोबारी में अंतर समझ आ गया होगा।

सम्भलो-बोलो,अय्यर की वापसी
पार्टी की अनुशासन समिति की अनुशंसा पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से मणिशंकर अय्यर का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मंजूरी दे दी। गौरतलब है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए ‘नीच किस्म का आदमी’ वाली विवादित टिप्पणी कर दी थी, जिससे राहुल सख्त नाराज हुए और अनुशासन समिति ने उन्हें निलंबित कर दिया था। अब जबकि अय्यर का निलंबन रद्द कर दिया गया है तो फिर से चर्चा आम हो चली है कि क्या अय्यर अब संभल-संभल कर बोलेंगे, ताकि विरोधियों को ही नहीं बल्कि अपनी पार्टी के भी लोगों को बुरा न लगे। अब यह तो सभी समझते हैं कि राजनीति में रहते हुए भाषण देते वक्त जुबान फिसल ही जाती है, फिर उसके लिए इतनी बड़ी सजा के क्या मायने हैं। गलती हुई तो माफी मांगें और आगे बढ़ जाएं, संभवत: आगामी चुनावों के दौरान यही होने वाला है, इसलिए अय्यर को वापस ले लिया गया है।
लेडी डॉन बनाया किसने
एक गिरोह के लोग जिसे ‘मम्मी’ के नाम से पुकारते हैं वह लेडी डॉन बसीरन आखिरकार दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ ही गई। बताया जाता है कि इस लेडी डॉन के खिलाफ पु‍लिस में करीब 113 मामले दर्ज हैं। यह 62 वर्षीय लेडी डॉन एक मात्र खूंखार महिला अपराधी नहीं है बल्कि दिल्ली में ऐसी पांच महिलाओं को चिंहित किया गया है, जिनकी अपराध जगत में तूती बोलती है। इस पर सामाजिक कार्यकर्ताओं का सवाल है कि आखिर ये महिलाएं जो अपराधी बन रही हैं, उसके पीछे किसका हाथ है? एक सामान्य महिला यूं भी कमजोर समझी जाती है, फिर उसे प्रताड़ित किया जाता है और बाद में पुलिस के चक्कर लगाते हुए वह रातों-रात लेडी डॉन बन जाती है। आखिर इसमें कहीं न कहीं पुलिसिया कार्रवाई भी जिम्मेदार है, क्योंकि यदि पुलिस अपना काम ईमानदारी से करती है तो अपराध का ग्राफ वैसे भी गिर जाता। विचारकों की मानें तो महिलाओं का यूं अपराध जगत में कदम रखना सभ्यसमाज के लिए अच्छा संदेश नहीं है।

योगी के लिए चुनौती है देवरिया कांड
देवरिया के मां विन्ध्यवासिनी संरक्षण गृह मामले में जहां डीपीओ को बर्खास्त किया गया वहीं, चार लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। ऐसे में देवरिया के नवनियुक्त डीएम कौशल किशोर का कहना है कि पूर्व डीपीओ ने भारी गड़बड़ियां की थीं। यहां तक कि संरक्षण गृह का लाइसेंस पिछले साल ही रद्द हो चुका था, लेकिन उसके बाद भी यहां बच्चियों को भेजा गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद कई और की गिरफ्तारी संभव है। इस पर कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतना बड़ा सैक्स रैकेट और बच्चियों का यूं यौन शोषण बिना शासन-प्रशासन के लोगों की मिलीभगत से चल ही नहीं सकता है। अत: अब मांग की जा रही है कि उन तमाम लोगों के चेहरों को बेनकाब किया जाना चाहिए, जिनके सहयोग से यह घनौना काम किया गया। वहीं आशंका व्यक्त की जा रही है कि नौकरशाहों और सफेदपोश लोगों के नाम इस मामले में जुड़ने से जांच और कानूनी कार्रवाई भी प्रभावित हो सकती है। यह मामला योगी सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है।

मराठा समाज आखिर किसके साथ
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ मराठा समाज उठ खड़ा हुआ है। मराठा समाज की नाराजगी सरकारी नौकरियों में आरक्षण और खुद सीएम का पंढरपुर पूजा के लिए नहीं पहुंचना है। इस मामले में समाज के लोग खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। इसके चलते अब मराठा समाज के अनेक संगठनों ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग रख दी है। इस प्रकार राजनीतिक तौर पर मराठा समाज ने बतला दिया है कि अब फडणवीस के साथ वो नहीं हैं, लेकिन वहीं दूसरी तरफ अब सवाल यह उठ रहा है कि जब मराठा समाज मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ नहीं हैं तो फिर आखिर वो कौन नेता है जिसके साथ यह समाज जाने को तैयार है, क्योंकि चुनाव करीब आ रहे हैं ऐसे में वोटबैंक की खातिर कोई भी नेता कुछ भी करने को तैयार दिख रहा है।

यह कैसा विकास पर्व
मध्य प्रदेश में विकास पर्व मनाने आए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उस समय विरोध का सामना करना पड़ गया, जबकि कार्यक्रम स्थल पर ही आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगें रखते हुए नारेबाजी शुरु कर दी। यही नहीं बल्कि कांग्रेसी विधायक ने कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य को कार्यक्रम में नहीं बुलाए जाने का भी विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद उक्त जनप्रतिनिधि से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धक्कामुक्की की और विकास पर्व विरोध पर्व में तब्दील होता दिखा। खबरें यदि सही हैं तो सरकारी कार्यक्रम में सभी सम्मानित जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की परंपरा है, लेकिन जब बात पार्टी की आती है तो उसमें यह विवाद उत्पन्न होता है कि किसे बुलाया जाए और किसे नहीं। कयास लगाने वाले तंज कस रहे हैं कि यदि मंच पर ज्योतिरादित्य को बुला लिया जाता तो और किसी को जनता क्योंकर देखती, इसलिए विकास पर्व अकेले मनाना बेहतर समझा गया।

जेल में पिटाई और मौजमस्ती
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिला जेल में ऐसा कुछ हुआ जिससे अंग्रेजों के जमाने की याद ताजा हो गई वहीं दूसरा एक अन्य वीडियो देखा गया तो मालूम हुआ कि भारतीय जेल वाकई सुधारग्रह ही हैं, जहां मौज मस्ती भी हो सकती है। दरअसल सोशल मीडिया में वायरल हुए जिला जेल के दो वीडियो अब राज्य में हड़कंप मचा रहे हैं। पहले वीडियो में जहां नर्तकियों का ग्रुप डांस है तो दूसरे में बंदियों की जेल अधीक्षक कक्ष में बेरहमी से पिटाई। वैसे जिला जेल अधीक्षक एचबी सिंह की मानें तो यह सारी साजिश उन्हें हटाने के लिए की जा रही है। मतलब जेल में नाच-गाने और पिटाई के साथ ही साथ राजनीति भी चल रही है। लोग तो यही कह रहे हैं कि इसे कहते हैं आधुनिक भारतीय जेल जहां सब कुछ मुमकिन है।

प्रणब दा पुन: राजनीति में?
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संघ के कार्यक्रम में हिस्सा क्या लिया राजनीतिक दावों और कयासों के दौर शुरु हो गए। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने तो यहां तक कह दिया कि ‘हमें लगता है कि संघ खुद को उस स्थिति के लिए तैयार कर रहा है कि यदि भाजपा 2019 आम चुनाव में बहुमत प्राप्त करने में विफल हो तो वह प्रणब मुखर्जी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए पेश कर सके।’ बकौल राउत इस बार हर हाल में भाजपा कम से कम 110 सीटें हारेगी। वहीं प्रणब दा की बेटी और कांग्रेस नेत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने राउत को दो-टूक जवाब देते हुए कहा है कि ‘भारत के राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत होने के बाद मेरे पिता दोबारा सक्रिय राजनीति में नहीं आने वाले हैं।’ बहरहाल कोई कुछ भी क्यों न कहे लेकिन यह तो सच है कि जब से प्रणब दा संघ कार्यक्रम के बाद से सुर्खियों में तो आ ही गए हैं।

केजरीवाल कैबिनेट धरने पर…!
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उपराज्यपाल की पटरी कभी बैठी ही नहीं, इसलिए हमेशा से ही तू डाल-डाल मैं पात-पात की स्थिति बनी रही है। अब खबर है कि मांगों को लेकर उप राज्‍यपाल अनिल बैजल के दफ्तर में मुख्यमंत्री केजरीवाल अपने कैबिनेट साथियों के साध धरने पर बैठ गए। संभवत: दिल्ली के इतिहास में यह पहला अवसर है जबकि सरकार को अपनी मांगे मनवाने के लिए एलजी के सामने धरना-प्रदर्शन करना पड़ा है। व्यंग्य करने वाले तो यही कह रहे हैं कि काश ऐसा ही नजारा अन्य राज्यों और यहां तक कि केंद्र में भी देखने को मिलता तो क्या बात थी, क्योंकि दिल्ली में तो उप राज्यपाल सरकार की मांगों तक को ठुकरा कर उन्हें सड़क पर ला देते हैं, लेकिन अन्य राज्यों की और केंद्र की बहुमत वाली सरकार तो किसी को कुछ बताना तक उचित नहीं समझती है। अब तो केजरीवाल कैबिनेट के धरने पर जनता ही संज्ञान ले तो कुछ बात बने, क्योंकि मांगें तो जनहित वाली ही होंगी, जिन्हें लेकर दिल्ली सरकार धरना भी देती है।

यह क्या रावण राज
खबर है कि गुजरात बोर्ड की 12वीं कक्षा की संस्कृत की किताब के जरिए बच्चों को पढ़ाया जा रहा है कि सीता का अपहरण रावण ने नहीं, बल्कि राम ने किया था। किताब के पेज नंबर तक का हवाला देते हुए बताया जा रहा है कि किताब में साफ लिखा है कि “जब राम ने सीता का अपहरण कर लिया तो लक्ष्मण ने राम से कुछ बेहद मार्मिक बातें कहीं।” वैसे तो गुजरात के बोर्ड ऑफ़ स्कूल टेक्सबुक्स के अध्यक्ष डॉ. नितिन पेठानी इसे अनुवाद की गलती बता रहे हैं, लेकिन राजनीति करने वाले तो यही कह रहे हैं कि अब लोगों को समझ में आ ही गया होगा कि हम राम राज में नहीं बल्कि रावण राज में जी रहे हैं, जिसमें राम को अपराधी घोषित करने की साजिश की जा रही है। व्यंग्य करने वाले कह रहे हैं कि हम भारतियों को आखिर रावण राज होने के और कितने सबूत चाहिए?

मीडिया और सरकार
फर्जी खबरों को रोकने के स्मृति ईरानी के फैसले को भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदल दिया हो, लेकिन उनके बयान से कम से कम यह तो स्पष्ट हो ही गया है कि समचारों को लेकर केंद्र सरकार की सोच क्या है। सरकार के मंसूबों को भांपते हुए अनेक पत्रकार संगठनों ने भी विचार-विमर्श करना शुरु कर दिया और इससे पहले कि बात बिगड़ती और मामला सड़कों तक लाया जाता, प्रधानमंत्री मोदी ने उसे बदल कर रख दिया। वैसे असंगठित मीडिया को अब अपने हक की बात जोर-शोर से करनी चाहिए, क्योंकि अधिकार के नाम पर मीडियाकर्मियों के पास कुछ भी नहीं होता है, जबकि सबसे जिम्मेदारी का काम वही करता है। इस पर तोहमत भी उसे ही लगती है कि वह मनगढ़त खबरें देकर पूरी दुनिया को उलझाए रखता है। अगर यह सच भी है तो इसके पीछे मीडियाकर्मी कम और राजनीतिक दल और नेता समेत विभिन्न संगठन इसके अधिक जिम्मेदार होते हैं। कुल मिलाकर अपने लाभ की खातिर मीडिया को यूज करना और अपने हिसाब से चलाने की कोशिश काफी लंबे समय से चली आ रही है। मौजूदा मोदी सरकार पर भी मीडिया को मैनेज करने के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में फेक न्यूज की बात यदि की जाती है तो उस पर भी अंगुली उठना लाजमी हो जाता है।

भारत बंद और केंद्र सरकार
भारत बंद को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में बयान दिया और कहा कि उनकी सरकार एससी/एसटी के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्पर है। सवाल यह है कि यदि अधिकारों की रक्षा हो रही थी तो फिर भारत बंद का आव्हान क्योंकर हुआ और सरकार उसे रोकने में नाकाम क्योंकर हुई? राजनाथ की मानें तो सरकार लोगों की चिंताओं को समझ रही है और हमारी सरकार ने एससी/एससी ऐक्ट को कमजोर नहीं किया है। यहां तक कि आरक्षण को लेकर अफवाहें निराधार हैं। इस प्रकार सरकार दावे करते है कि दलितों के मामले में वह संवेदनशील है, लेकिन वो अपनी बात को समझाने में नाकाम साबित हुई है। इसलिए अनेक राज्यों में बंद के दौरान हिंसा हुई और करीब एक दर्जन लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया। इसलिए विरोधी जहां केंद्र व राज्य सरकारों को बिगड़ी कानून व्यवस्था के लिए दोषी करार दे रहे हैं तो वहीं दलितों के साथ हो रहे अत्याचारों का मामला भी बढ़-चढ़कर उठाने को अपना धर्म बता रहे हैं। कुल मिलाकर इस मामले में केंद्र सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर आ गई है, जिसका खामियाजा अब आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा।

वाकई दाऊद लौट रहा ?
खबर है कि सीबीआई ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगी और करीबी माने जाने वाले फारूक टकला को दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। फारुख टकला कोई और नहीं बल्कि मुंबई 1993 सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में कथित संलिप्तता का आरोपी है, जिस पर साजिश रचने का आरोप है। यहां सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर टकला के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस लंबित होने के बावजूद वह दिल्ली कैसे पहुंचा? आधिकारिक सूत्रों की मानें तो टकला को संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित किया गया और विमान से दिल्ली रवाना किया गया। बहरहाल मामला जो भी हो, लेकिन तंज कसने वाले तो यही कह रहे हैं कि दाऊद के करीबियों का जेलों में जाना बताता है कि डॉन देश वापस आ रहा है।

ईमानदार पकौड़ा ही बेचेंगे
भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने नरेंद्र मोदी सरकार पर नोटबंदी और पीएनबी घोटाले को लेकर प्रहार किया। उन्होंने कटाक्ष किया कि जिस दर से बड़े कारोबार बंद और बड़े कारोबारी घोटाला कर देश से फरार हो रहे हैं उससे तो यही लगता है कि देश में ईमानदार पकौड़ा बेचने वाले ही रह जाएंगे। आपको बतला दें कि मोदी सरकार और उनके नुमाइंदे लगातार पकौड़ा बेचने को लेकर बयान दे रहे हैं, मतलब जो गलती हो गई उसे सही साबित करने में लगे हैं, ऐसे में अब उनकी पार्टी के लोग ही उनके खिलाफ बयान देते नजर आ रहे हैं। वैसे यह पहला अवसर नहीं है जबकि पटना साहिब से भाजपा सांसद शत्रुघ्न ने मोदी सरकार पर हमला बोला है, बल्कि इससे पहले भी अनेक बार उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा और खूब भला-बुरा कहा है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होना बताता है कि कहीं न कहीं कोई घाला तो जरुर है, जिस कारण शत्रुघ्न बयान पर बयान दिए चले जाते हैं और सरकार सुनकर भी अनुसुना करती चली जाती है।

नेपाल में अब्बासी की मौजूदगी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी के नेपाल दौरे को लेकर भारत का चिंतित होना लाजमी है। दरअसल नेपाल में वाम गठबंधन की सरकार बनने के बाद अब्बासी का यह दौरा काफी अहम है। चूंकि नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का झुकाव चीन की तरफ है अत: वहां अब्बासी की मौजूदगी अनेक सवाल खड़े करती है। यह अलग बात है कि ओली के आमंत्रण पर अब्बासी नेपाल पहुंचे, लेकिन इसके पीछे चीन की मर्जी और उनके कहने पर दोनों ही देशों के करीब आने की कहानी सामने आ सकती है। इस दौरे में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन को दोबारा प्रभाव में लाने पर सहमति बनी है। वैसे यह भी हकीकत है कि पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के बीच अब्बासी का नेपाल दौरा अहम है, क्योंकि नवाज शरीफ को तो अदालत ने कहीं का नहीं छोड़ा है।

जैकब से जुड़े भारतीय
यह तो सभी जान चुके हैं कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही हम भारतियों के लिए अहम खबर यह है कि जुमा के राजनीतिक करियर पर ग्रहण लगाने में भारतीय मूल के तीन भाइयों का प्रमुख हाथ बताया जा रहा है। दरअसल भारत से दक्षिण अफ्रीका गए गुप्ता ब्रदर्स की जैकब जुमा के कार्यकाल के दौरान तमाम कथित घोटालों में केंद्रीय भूमिका बताई गई है। इसलिए जुमा के इस्तीफे से पहले ही गुप्ता ब्रदर्स के ठिकानों पर पुलिस और भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों ने छापामार कार्रवाई की। यहां जिन गुप्ता ब्रदर्स की बात हो रही है उनके नाम अजय, अतुल और राजेश बताए जाते हैं और ये सभी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से ताल्लुक रखने वाले हैं। इस घटना के बाद बाहर बसे भारतियों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी होने की भी खबर है। इस प्रकार भारतीय कारोबारियों के लिए इसे अच्छी खबर नहीं माना जा रहा है। इसलिए इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

DNA टेस्ट का फार्मूला
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय मुस्लिमों को हिंदू बताने के बाद अब भारतीय उपमहाद्वीप के समस्त लोगों के डीएनए पर बयान देकर सुर्खियां ली हैं। दरअसल भागवत कह रहे हैं कि अफगानिस्तान से बर्मा और तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक के लोगों का डीएनए एक है। संघ प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक में हिंदुत्व को लेकर भाजपा और कांग्रेस में जंग छिड़ी हुई है। इस प्रकार समीक्षक जहां इसे चुनाव से जोड़कर देख सकते हैं तो वहीं मेडिकल साइंस इसे मानने से इंकार भी कर सकता है, क्योंकि डीएनए से तो अंतरंग पारिवारिक संबंधों का पता लगाया जाता है। ऐसे में यदि सभी का डीएनए समान हो गया तो मेडिकल साइंस का दावा फेल हो जाएगा। इसलिए कहने वाले कह रहे हैं कि भागवत का बयान सिर्फ राजनीतिक है, जिसका साइंस और इतिहास से कोई लेना देना नहीं है।

बेहोशी के बाद तोगड़िया का रोना
करीब 11 घंटे तक ‘लापता’ रहने वाले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया मीडिया के समक्ष आते ही रो पड़े और उन्होंने जो कहा वह किसी बड़ी साजिश की ओर ही इशारा करता है। यह अलग बात है कि तोगड़िया स्‍वीकार करते हैं कि उन्‍होंने राजस्‍थान पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए गायब हुए थे, लेकिन सवाल यह है कि फिर अहमदाबाद के शाही बाग इलाके में वो लोगों को बेहोश कैसे मिले, क्योंकि जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के लिए वह जगह सुरक्षित तो नहीं कही जा सकती। इसमें लोगों को एक बड़ी साजिश नजर आती है, जिसका जिक्र आगे खुद ही तोगड़िया आरोप के तहत करते दिखते हैं और कहते हैं कि उनका एनकाउंटर करने की साजिश रची जा रही है। उन्‍होंने कहा कि वह डरे नहीं है, बल्कि उन्‍हें डराने की कोशिश की जा रही है। लोग पूछ रहे हैं कि डर नहीं था तो फिर तोगड़िया रो क्यों रहे थे, ऐसा तो नहीं उनके किसी अपने करीबी ने ही उनके साथ चोट कर दी हो। बहरहाल बात इशारों में हुई है, इसलिए तमाम दुश्मनों के कान तो खड़े हो ही गए होंगे।

ममता पर क्यों उठे सवाल ?
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर भाजपा सवाल उठाते हुए इसे तुष्टीकरण का नाम दे रही है, जबकि सम्मेलनकर्ताओं का दावा है कि भाजपा ने हिंदू धर्म के नाम पर जो भ्रम फैलाए हैं, उनको यहां दूर करने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी सागर द्वीप में मकर संक्रांति की तैयारियों का जायज़ा लेने पहुंचीं थी। इस पर भी भाजपा को एतराज है इसलिए वह आरोप लगा रही है कि मुस्लिम तुष्टीकरण के बाद ममता बनर्जी अब हिंदुओं को लुभाने में लगी हैं। विश्लेषक सवाल कर रहे हैं कि आखिर क्या भाजपा और कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति नहीं अपनाई है, क्योंकि इसी के दम पर वोटरों का ध्रुवीकरण किया जाता रहा है ऐसे में ममता पर सवाल खड़े करने से पहले इन्हें अपने गिरेवान में भी झांक लेना चाहिए।

हेगड़े की माफी कितनी स्वीकार्य
संविधान बदलने वाले बयान पर हो रहे तीखे विरोध के बाद गुरुवार को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े को माफी मांगनी पड़ी। हेगड़े को सफाई देनी पड़ी कि संविधान में उनकी पूरी आस्था है। उन्होंने कहा, मेरे बयान पर सदन में जो गतिरोध चल रहा है, उसके संदर्भ में मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मेरे लिए संविधान सर्वोपरि है, संसद सर्वोपरि है, मैं कभी किसी भी हालत में संसद के खिलाफ नहीं बोल सकता। लोकसभा में हेगड़े ने गुरुवार को यह कहकर सदस्यों से माफी मांगी कि अगर उनके बयान से किसी की भावना को ठेस पहुंची है तो इसके लिए वह माफी मांगते हैं। कांग्रेस के 133वें स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने भी इस बयान की तीखी आलोचना की और संविधान को खतरे में बताया। उन्होंने कहा, आज के समय में बाबा साहेब अंबेडकर का दिया हुआ संविधान खतरे में है, उस पर हमला हो रहा है, जो दुखद है। हमारा कर्तव्य है कि हम संविधान की रक्षा करें। बता दें कि हेगड़े ने बीते रविवार को धर्मनिरपेक्ष लोगों पर विवादित बयान दिया था। कर्नाटक में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, जो लोग खुद को सेकुलर कहते हैं, वे अपने कुल के बारे में नहीं जानते। जिन्हें अपने मां-बाप के खून का पता नहीं, वे खुद को धर्मनिरपेक्ष बताते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि वह भारतीय संविधान को बदलने के लिए सत्ता में आए हैं और आने वाले दिनों में संविधान बदल दिया जाएगा।

एयर इंडिया ने ED को हटाया
सार्वजनिक विमानन कंपनी एयर इंडिया ने कार्यकारी निदेशक एएस सोमान को कुछ विवाद के कारण पद से हटा ‎दिया है। कंपनी ने पिछले सप्ताह जारी एक आदेश में सोमान को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय के कार्यकारी निदेशक का पद संभालने का निर्देश दिया। कंपनी ने अभी इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी है लेकिन कंपनी से जुड़े लोगों के अनुसार यह स्थानांतरण परिचालन और उड़ान की सेवाओं वाले विभाग में विवाद के कारण हुआ है। आदेश के अनुसार परिचालन के मौजूदा कार्यकारी निदेशक एके गोविल को सोमान का पद संभालने की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि सोमान को कंपनी में इस मार्च हुए भारी फेरबदल में प्रशिक्षण विभाग से निकाल उड़ान के भीतर की सेवाओं का कार्यकारी निदेशक बनाया गया था।

लालू अब गाय से डरे
कहते हैं जब किस्मत खराब हो और भाग्य साथ न दे रहा हो तो ऊंट पर बैठे इंसान को भी कुत्ता काट लेता है, ठीक इसी तरह राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव कह रहे हैं कि उन्हें शेर से नहीं बल्कि अब तो गाय से डर लगने लगा है। वैसे लालू यादव ने यह सब केंद्र सरकार समेत प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने के लिए कहा है, लेकिन समझने वाले तो यही समझ रहे हैं कि अब बिहार में जबकि उनके मित्र ने उनका साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है तो उन्हें अपने साये से भी डर लगने लगा होगा। गौरतलब है कि लालू यादव ने कहा है कि एक समय था जब लोग शेर से डरते थे, लेकिन अब वो गाय से डरते हैं। गाय से डरने की वजह गौरक्षकों द्वारा फैलाया गया आतंक है। बकौल लालू खौफ की वजह से ही बिहार के सारण में लगने वाला मवेशियों का मेला बिना मवेशियों के मेले में तब्दील हो गया है। इससे तो ऐसा लगता है कि इन गोरक्षकों से गायों को भी भय लगने लगा है।

स्वच्छता अभियान को आईना दिखाते शिंदे
महाराष्ट्र की देवेन्द्र फडणवीस सरकार के जल संरक्षण मंत्री राम शिंदे को सड़क किनारे हल्के होते हुए वीडियो तेजी से वायरल हुआ है, इसे लेकर राजनीतिक हल्के में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। कहा जा रह है कि एक तरफ स्वच्छ भारत अभियान का भाजपा पुरजोर तरीके से प्रचार कर रही है वहीं महाराष्ट्र की सत्ताधारी भाजपा सरकार के मंत्री ऐसा कृत्य करते दिखते हैं जो कि स्वच्छता अभियान की कलई खोलने जैसा प्रतीत होता है। दरअसल पहले से ही कहा जाता रहा है कि स्वच्छता अभियान कागजों पर ज्यादा और जमीन पर कम चल रहा है, इसलिए इसका असर उन्हीं जगहों पर दिखाई देता है जहां कि मीडिया के कैमरे चलते हैं, जबकि हकीकत में देखा जाए तो ग्रामीण अंचलों में ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी लोग अपनी आदतों को अभी तक बदल नहीं पाए हैं। मंत्री शिंदे का यह कृत्य सही मायने में अपनी सरकार को आईना दिखाने जैसा ही है।

गुरु को शिकस्त देने चेला मैदान में
हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इस बार हमीरपुर जिले की सुजानपुरा सीट से इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने उनका ही चेला कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहा है। राजेंद्र राणा को कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बनाया है। राजेंद्र राणा को राजनीति में लाने का प्रेम कुमार धूमल को है। उन्होंने इसे राजनीति का क ख गा घा पढ़ाया था। किंतु अब वही चेला उन्हें पटखनी देने की तैयारी कर रहा है। कहा जा रहा है राजनीति में सब कुछ जायज है। राजेंद्र राणा इन दिनों मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बहुत नजदीक है। राणा को एक रणनीति के तहत सुजानपुरा सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया है। गुरु-चेला के चुनाव मैदान में आमने-सामने होने से यह चुनाव बड़ा रोचक हो गया है।

फेरीवालों को किसकी शह
महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय हमेशा से ही शिवसेना और अब मनसे के निशाने पर रहे हैं। जब कभी उन्हें गुस्सा उतारना होता था फेरीवालों पर हाथ साफ कर देते थे। ‘जय महाराष्ट्र’ के नारे लगाने वाले उत्तर भारतीय फेरीवालों को गालियां देते और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना के साथ ही साथ आर्थिक नुक्सान पहुंचाते चले आए हैं। ऐसे में खबर आ रही है कि मुंबई के मलाड में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के ‘गुंडे’ पीटे गए हैं और फेरीवाले जान बचाकर भागने की बजाय उन गुंडों के सामने खड़े देखे गए। यह अलग बात है कि अब उन फेरीवालों को भड़काने और हिंसा करने का आरोप कांग्रेस नेता संजय निरूपम पर लग रहा है। बहरहाल सभी यही कह रहे हैं कि किसी को इतना भी मत डराओ कि उसके अंदर से डर ही खत्म हो जाए।

…लो उडी हंसी,फंसे
एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वाशिंगटन में एक ऐसा बयान दिया जो की हंसी और उपहास में तब्दील हो गया। दरअसल अमेरिका दौरे पर गए शिवराज ने मध्य प्रदेश की सड़कों को अमेरिका की सड़कों से बेहतर बताया है। अब यह कौन नहीं जानता कि राजधानी भोपाल तक की सड़कें तो जर्जर हालत में होती हैं फिर संपूर्ण प्रदेश की सड़कें अमेरिका से कैसे बेहतर हो सकती हैं। इस मामले में पीडब्ल्यूडी मंत्री रामपाल सिंह की बात को सच मानना ही पड़ेगा कि प्रदेश के कुछ सड़कों को महज इसलिए खराब रखा गया है ताकि लोगों को कांग्रेस सरकार की याद दिलाई जाती रहे। इस प्रकार मंत्री के बयान से यह तो सिद्ध हो गया कि सड़कें खराब हैं और मुख्यमंत्री चौहान जो विदेशों में कह रहे हैं वो सत्य से परे है। इसलिए हंसी तो उड़ना ही है।

अमेठी में सभा के मायने
गुजरात में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की सक्रियता मोदी के गढ़ में भी बढ़ गई है। इसे देखते हुए भाजपा और खासकर मोदी सरकार को कुछ सूझा नहीं इसलिए उन्होंने राहुल को अमेठी में घेरने की योजना बना डाली। यह सुनकर राजनीतिक विश्लेषकों ने पूछा है कि जब चुनाव गुजरात में हो रहे हैं तो अमेठी में जाकर भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह, सूचना प्रसारण मंत्री स्‍मृति ईरानी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ अमेठी में जनसभा को संबोधित करके क्या संदेश देना चाहते हैं। यह तो खिसियानी बिल्ली खंभा नौचे वाली कहावत को चरितार्थ करने वाली बात हो गई। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि केंद्र और राज्य में जब कांग्रेस सरकार में है ही नहीं तो फिर उसे किन मुद्दों पर घेरने की बात की जा रही है, सच तो यही है कि सरकार घिरती है विपक्ष नहीं।

संघ का महिला सर्वे चर्चाओं में
भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी। संघ और उसके अनुवांशिक संगठनों 49 फ़ीसदी महिला मतदाताओं की राय जानने के लिए और उनके हाव भाव , सोच और उनके नजरिए को जानने सर्वे कराया जा रहा है।
इस सर्वे में गांव और शहर में रहने वाली महिलाओं की सोच, विभिन्न धर्म, जिस में हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन और ईसाई महिलाओं के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग और दलित महिलाओं के बारे में भी सर्वे के माध्यम से जानने का प्रयास किया जा रहा है| उनकी सोच क्या है। संघ ने महिलाओं के लिए जो प्रश्नावली तैयार की है। उसमें मुझे लगता है। मैं आकर्षक नहीं हूं| मैं अपने काम से खुश नहीं रहती हूं| मैं सामान्यतः भविष्य के प्रति आशावादी नहीं हूं। मैं दूसरों के साथ खुश नहीं रहती हूं। मैं सोचती हूं कि निर्णय लेना मेरे लिए सरल नहीं है, मैं सोचती हूं कि मेरे जीवन का कोई उद्देश्य तथा अर्थ नहीं है। मैं सोचती हूं कि मैं स्वस्थ नहीं हूं। मेरे पास खुशी के यादगार पल नहीं है। यह प्रश्नावली गांव, शहर, कामकाजी महिलाएं, विधवा, ग्रहणी, आदिवासी, वनवासी, मजदूर और बुजुर्ग महिलाओं की सोच को दर्शाने वाला होगा। इस सर्वेक्षण से मिले निष्कर्ष के आधार पर संघ और भारतीय जनता पार्टी 2019 की लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करेगी। सूत्रों के अनुसार अभी तक का यह सबसे बड़ा सर्वे होगा । महिला मतदाताओं की संख्या 49 फ़ीसदी है। इसको फोकस करके 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी संघ और भाजपा द्वारा की जा रही है।

शाह की राहुल से रार या वंशवाद
अमेरिका में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने वंशवाद को लेकर जो कहा उसका असर हिन्दुस्तान में देखने को खूब मिल रहा है। दरअसल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राहुल को निशाने पर लेते हुए कहा है कि वंशवाद कांग्रेस की खासियत है, भारत का स्वभाव नहीं है। इसे समूचे भारत पर नहीं थोपा जाना चाहिए। ऐसा कहकर कहीं शाह ने खुद ही अपनी पार्टी को निशाने पर तो नहीं ला दिया है, क्योंकि भाजपा में ही ऐसे न जाने कितने वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने अपने परिजनों और करीबियों को राजनीति में लाने और पार्टी से टिकट दिलाकर चुनाव लड़ाने का रिकॉर्ड कायम किया हुआ है। समय-समय पर उनकी चर्चा होती है और खूब होती है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। ऐसे में महज कांग्रेस पर वंशवाद का ठीकरा फोड़ना अब किसी के गले नहीं उतरता है। इसलिए लोग पूछ रहे हैं कि शाह को वंशवाद से परेशानी है या फिर राहुल से यह वो और बता दें तो बेहतर होगा।

आखिर अमर सिंह जाना कहां चाहते हैं
वो अमर सिंह ही हैं जो पहले कभी खुद को मुलायमवादी बताते थकते नहीं थे। न जाने अब क्या हुआ कि वो कह रहे हैं कि अगर मुलायम सिंह भी बुलाएंगे तब भी वो सपा में नहीं जाएंगे। राज्यसभा सांसद अमर सिंह की इस साफगोई के पीछे का राज जानने वाले कहते हैं कि आमचुनाव करीब आ रहे हैं, इसलिए अमर सिंह अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाह रहे हैं। अब कहीं किसी पार्टी से बुलावा तो आ नहीं रहा इसलिए वो खुलकर कह रहे हैं कि अब न नायक हूं और न ही खलनायक हूं। यह कहकर अमर सिंह कहीं न कहीं संजय दत्त की याद दिला रहे हैं, क्योंकि जेल से निकलकर संजू बाबा ने जिस तरह से सामान्य जीवन जीना शुरु किया वह काबिले तारीफ है। क्या सपा से मुक्त होने के बाद अमर सिंह ऐसा कर सकते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

साजिशों से सतर्क रहने का समय
खबर है कि पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी के मदरसे, मदरसा चाचा नेहरु की वाटर सप्लाई में किसी अज्ञात व्यक्ति ने चूहा मारने वाला ज़हर मिला दिया। यह तो अच्छा हुआ कि ऐसा करते हुए मदरसे के कुछ बच्चों ने देख लिया अन्यथा मातम का माहौल बन जाता और तरह-तरह के सवालों के साथ ही साथ माहौल बिगाड़ने की भी कथिततौर पर कोशिशें हो जातीं सो अलग। गौरतलब है कि अलीगढ़ में स्थित इस को एक सोसायटी चलाती है, जिसकी प्रमुख पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी हैं। इस मदरसे में 4,000 छात्रों के रहने की व्यवस्था है अत: अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई हादसा हो जाता तो उसके बाद मातमी माहौल में क्या कुछ नहीं होता। इसलिए समाजसुधारकों का कहना है कि जब-जब चुनाव करीब आते हैं तो ऐसे तमाम संस्थानों को ज्यादा सतर्कता और सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि यही वह समय रहता है जबकि साजिशें आम होती हैं और उनसे बचकर चलना ही समझदारी होती है।
असली जेडीयू सामने आए तो बात बने
जेडीयू नेता शरद यादव के गुट ने अब मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को पार्टी अध्यक्ष पद से हटा दिया है। इससे पहले नीतिश गुट ने शरद यादव को पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने की घोषणा की थी। ऐसे में आमजन भ्रमित है कि आखिर जेडीयू का नेतृत्व कौन कर रहा है, क्योंकि दो बड़े नेता एक-दूसरे के खेमें को लगातार नुक्सान पहुंचाने में लगे हुए हैं और बता रहे हैं कि असली जेडीयू उनके पास है। गौरतलब है कि जेडीयू कार्यकारिणी की बैठक आयोजित करने और फिर नीतिश कुमार को अध्यक्ष पद से हटाकर गुजरात से पार्टी विधायक छोटू भाई वसावा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने का फैसला सामने आया है। यह फैसला शरद गुट ने लिया है। बकायदा संवाददाता सम्मेलन में जदयू नेता अरुण कुमार श्रीवास्तव ने इसकी जानकारी भी दे दी। इसलिए सभी कह रहे हैं कि असली जेडीयू सामने आए तो बात बने।

पेट्रोल पर अल्फांस बोलेंगे तो विवाद होगा ही
देश में महंगाई चरम पर है और ऐसे में यदि कोई यह कहे कि इस महंगाई के कारण कोई मर तो नहीं रहा फिर हाय-तौबा क्यों कर रहे हैं। इसका तो यही अर्थ हुआ कि लोगों को तब तक त्रस्त किया जाए जब तक कि उन्हें जिंदगी मौत से भी बदतर न लगने लगे। दरअसल केंद्रीय मंत्री बने अल्‍फॉन्‍स कन्‍नानथानम ने पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि ‘पेट्रोल कौन खरीदता है? कोई व्यक्ति जिसके पास कार, बाइक है। निश्चित रूप से वह भूख से मर नहीं रहा है जो भुगतान कर सकते हैं, उन्हें करना पड़ेगा।’ गौरतलब है कि अल्फांस वही हैं जिन्होंने विदेश से आने वाले लोगों को सलाह देते हुए कहा था कि जो भी विदेशी भारत घूमने आ रहे हैं वो अपने देश से बीफ खाकर आएं। इसलिए विवाद तो होना ही था सो शुरु हो गया।

फूलपुर के लिए सब कुछ लगेगा दांव पर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट खाली हो गई है, अत: अब यहां उपचुनाव होना है। भाजपा के लिए इन सीटों को हर हाल में जीतने की चुनौती है, तो वहीं विपक्ष भी अपनी खाई हुई विरासत को वापस पाने के लिए जी-जान से जुटेगा। दरअसल इलाहाबाद जिले की फूलपुर लोकसभा सीटका प्रतिनिधित्व देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू किया करते थे। भाजपा ने पहली बार 2014 में फूलपुर सीट पर जीत का परचम लहराया अब जबकि उपचुनाव होना हैं तो दोनों ही पार्टियां इसे जीतने के लिए हर संभव कोशिश करेंगी। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस अपनी विरासत वाली सीट को दोबारा पाने में कामयाब रहती है या फिर भाजपा जीत का परचम फिर लहराती है। कुल मिलाकर दोनों ही पार्टियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगेगी।

दुनिया की नींद हराम करने वाले परीक्षण
तमाम प्रतिबंधों और कड़ी आलोचनाओं के बावजूद उत्‍तर कोरिया ने एक और मिसाइल परीक्षण करके सभी की नींद हराम करने जैसा काम कर दिखाया है। इससे जापान समेत अमेरिका की चिंताएं जहां बढ़ गई हैं तो वहीं हाल ही में किए गए हाईड्रोजन बम परीक्षण से अन्य देशों को भी चिंता हो आई है। इसके बाद उत्‍तर कोरिया को इस दिशा में आगे बढ़ने से रोकने के लिए लगभग सभी देशों ने प्रतिबंधों की वकालत की। यहां तक कि चीन और रुस ने भी उसके परीक्षणों की नींदा कर डाली, लेकिन इससे भी उसे सबक मिलता दिखाई नहीं दे रहा है और वह लगातार भड़काने की चाल चलते हुए एक के बाद एक मिसाइल परीक्षण किए जा रहा है। फिलहाल जो उसने जो मिसाइल दागी वह जापान के ऊपर से गुजरते हुए प्रशांत महासागर में गिरी। इसलिए अब समझा जा रहा है कि जापान और अमेरिका मिलकर सैन्य कार्रवाई के लिए यदि मजबूर होते हैं तो यह उसकी अपनी करनी का ही फल माना जाएगा।

स्कूल में बच्चे की मौत और सरकार
हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री राम विलाश शर्मा ने रेयान इंटरनेशनल स्कूल की मान्‍यता को रद्द नहीं करने की बात कही है। यह वही स्कूल है जहां दूसरी कक्षा के बच्चे की हत्या कर दी गई थी। ऐसे में नाराज लोगों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और तोड़-फोड़ भी की, ऐसे में मांग उठ रही थी कि स्कूल की मान्यता रद्द की जाए। अत: शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्‍चों के भविष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। स्‍कूल में 1200 बच्‍चे पढ़ते हैं, इसलिए यह कदम ठीक नहीं होगा कि उसकी मान्यता ही खत्म कर दी जाए। बात तो सही है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि इस मामले में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही भी उजागर हुई है वहीं हत्या के आरोपी कंडक्टर अशोक के पिता और बहन ने तो स्कूल पर ही उसे फंसाने का आरोप लगा कर अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं।

बाल नोंचने वाली भाजपा विधायक
भाजपा की महिला विधायक राजकुमारी जाटव ने भाजपा के संगठन महामंत्री रामलाल को चोरों का दलाल कहते हुए बाल नोंचने की चेतावनी तक दे डाली। गौरतलब है कि सांसद रामलाल इन दिनों राजस्थान का दौरा कर पार्टी नेताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे हैं। ऐसे में पार्टी की महिला विधायक का यह सख्त रुख उनके काम काज पर सवालिया निशान लगाने के लिए काफी रहा है। दरअसल अनुशासन का मंत्र भूल सांसद भी महिला विधायक के साथ अपशब्दों का अदान-प्रदान करते देखे गए, जिससे जानकारों ने यह अनुमान लगाया कि कोई न कोई बात तो जरुर है जिस कारण सांसद भी पलट कर उसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं जो कि महिला विधायक कर रही थीं। बहरहाल राजनीतिक गलियारे में महिला विधायक को अब बाल नोंचने वाली विधायक के तौर पर पहचान तो मिल ही गई है।

महिला के पास रक्षा मंत्रालय
भारतीय इतिहास में यह पहली बार हुआ जबकि इंदिरा गांधी के बाद किसी महिला को रक्षामंत्री बनाया गया हो। जी हां वाणिज्य मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार मंत्री निर्मला सीतारमण को देश का नया रक्षामंत्री बनाया गया है। बात साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके काम से इतना ज्यादा खुश थे कि उन्हें रक्षामंत्री की जिम्मेदारी सौंप दी। अब देखना होगा कि जो कमाल उन्होंने वाणिज्य मंत्रालय में दिखाए थे और केंद्र सरकार को काफी सहूलियत पहुंचाई थी क्या अब रक्षा मंत्री के तौर पर भी वैसा ही कर पाएंगी, क्योंकि इस ओहदे पर देश और विदेश में सिर्फ और सिर्फ श्रीमती इंदिरा गांधी को ही लोग अभी तक पहचानते रहे हैं। उनकी तरह आज तक किसी महिला पर रक्षामंत्री का दायित्व नहीं सौंपा गया था। इस प्रकार अब सफल रक्षामंत्री बनकर दिखाने की चुनौती निर्मला सीतारमण के सामने है।

US तक पहुंची निजी जानकारी
केंद्रीय गृह सचिव के रूप में सेवानिवृत्त राजीव महर्षि की बात को यदि सच मान लिया जाए तो आमतौर पर हम जो स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं उसके जरिए तमाम निजी जानकारी सीआईए यानी अमेरिका की खुफिया एजेंसी के पास जमा हो रही है। कहने का अर्थ यह है कि स्मार्ट फोन के जरिए 40 प्रतिशत भारतीय अपनी निजी जानकारी सीआईए समेत पूरी दुनिया तक पहुंचा चुके हैं। गौरतलब है कि राजीव महर्षि ने यह बात आधार कार्ड को विभिन्न सेवाओं से जोड़ने संबंधी सवाल के जवाब में कही है। इस प्रकार जो खतरे पहले से थे अब वो और भी बढ़ गए हैं। राजीव महर्षि ने उन एप्लिकेशन पर भी चिंता जाहिर की है जो लोगों की जानकारी चुराती हैं और दूसरों तक पहुंचा देती हैं। इस पर चिदंबरम ने भी चिंता जाहिर की है, लेकिन हल क्या होगा इस पर अभी विचार नहीं हो रहा। मतलब साफ है कि जो हो रहा है होने दें बाकी आने वाले देखेंगे।

ट्रंप की फटकार का असर
आतंकवाद को पनाह देने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की फटकार का असर अब पाकिस्तान में दिखाई देने लगा है। दरअसल अभी तक जो खामोशी से काम किए जा रहे थे और आतंकवाद बढ़ता चला जा रहा था अब वो मुखर भी हो रहे हैं। ट्रंप पर जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कह दिया है कि ट्रंप की हाल ही में की गई पाकिस्तान के खिलाफ बयानबाजी के विरोध यूएस से द्विपक्षीय वार्ता और यात्रा स्थगित कर दी है। खबरों को सच माना जाए तो पाकिस्तानी सरकार ने ट्रंप की बयानबाजी को गंभीरता से लिया है और अब उसके जवाब के तौर पर कड़े कदम भी उठाए जा रहे हैं। इस पर जानकार कहते हैं कि यात्रा टाल देना समस्या का समाधान नहीं हो सकता बल्कि पाकिस्तान को बताना होगा कि आतंकी संगठनों और आतंकवादियों के खिलाफ उसने क्या किया है।

धार्मिक स्थलों की भरपाई क्यों
वर्ष 2002 के गुजरात दंगों में धार्मिक स्थलों को हुए नुकसान की भरपाई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के एक फैसले को पलटते हुए कहा है कि किसी धार्मिक स्थल के निर्माण या मरम्मत के लिए सरकार करदाता के पैसे को नहीं खर्च कर सकती है। अगर सरकार मुआवजा देना भी चाहती है तो उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च आदि को उसे भवन मानकर उसकी क्षतिपूर्ति की जा सकती है। गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने योजना बनाई थी कि क्षतिग्रस्त इमारतों को ज्यादा से ज्यादा 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। सरकार के मुताबिक धार्मिक स्थल या मस्जिद को धर्म के नाम पर नहीं बल्कि इमारत के तौर पर मुआवजा दिया जाएगा। इस प्रकार न तो अदालत को ही कोई आपत्ति होगी और न ही सरकार की मदद से ऐसी इमारतें ही वंचित रहेंगी। फिर भी जो लोग इन भवनों या इमारतों को धार्मिक ही मानते हैं और उसी आधार पर मदद लेना चाहते हैं तो उनके लिए दिक्कत होगी और ऐसे में उन्हें मदद क्यों दी जाए यह एक बड़ा सवाल आगे भी जारी रहने वाला है।

पुलिस कार्रवाई पर उठती शंकाएं
खबर है कि दिसंबर 2010 में सिरसा के डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में भक्तों को हथियारों की ट्रेनिंग देने की बात आर्मी इंटेलिजेंस द्वारा उठाई गई थी। यही नहीं बल्कि आशंका यह भी थी कि ट्रेनिंग के लिए पूर्व सैनिकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस सूचना के बाद सेना कर्मियों को ऐसी किसी भी गतिविधी में शामिल नहीं होने की हिदायत दी गई थी। खास बात यह रही कि इस मामले में पुलिस द्वारा डेरा मुख्यालय में तलाशी ली गई थी लेकिन पुलिस को हथियारों की ट्रेनिंग के संबंध में सबूत नहीं मिले थे। अब जबकि बाबा राम रहीम को दोषी करार दिया गया और पुलिस-प्रशासन ने कई इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया तो फिर पुलिस को एके-47 और एक माउजर समेत एक गाड़ी से दो राइफल और 5 पिस्तौल कैसे बरामद हो गई। इस कार्रवाई ने पुलिस को खुद अपनी ही कार्रवाईयों के कारण शंकाओं के घेरे में ले लिया है।

स्वाइन फ्लू और महिला विधायक की मौत
देश में इस समय या तो बाढ़ की खबरें आम हैं या फिर बारिश नहीं होने के कारण सूखे की स्थिति और उस पर बीमारियों से होती मौतें सुर्खियां बन हुई हैं। ऐसे में राजस्थान से खबर आती है कि स्वाइन फ्लू से भाजपा विधायक कीर्ति कुमारी की मौत हो गई। इससे पहले उत्तर प्रदेश में बच्चों की मौत की खबरों ने सभी की नींद उड़ाई हुई थी। यह मामूली बात नहीं है क्योंकि उपचार के दौरान मौत हो जाना अपने आपमें अनेक तरह के सवाल खड़े करता है। जहां तक बच्चों का सवाल था तो उसे ऑक्सीजन की कमी बताया गया जबकि भाजपा की महिला विधायक को स्वाइन फ्लू की शिकायत थी और अनेक चिकित्सकों की टीम उनके इलाज में लगी हुई थी बाबजूद इसके उनकी मौत हो जाना बताता है कि बीमारी भयावह स्थिति में पहुंच चुकी थी। इस समय अनेक राज्यों में स्वाइन फ्लू फैला हुआ है और उस पर सरकार और चिकित्सा विभाग को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

हत्यारी भीड़ का फिर टूटा कहर
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में पशु तस्करी करने के संदेह में भीड़ ने पीट-पीट कर दो नौजवानों की निर्मम हत्या कर दी। इससे पहले भी भीड़ द्वारा शक के आधार पर लोगों को मारे जाने के मामले सामने आ चुके हैं और इससे दु:खी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां तक कह दिया था कि गोरक्षा के नाम पर इंसानों की हत्या करना उचित नहीं है और ऐसे किसी भी घटना करने से पहले उनके सीने में ही क्यों न गोली मार दी जाए। इस प्रकार यह एक पीड़ा थी, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है जबकि गोरक्षकों को सरकार की ओर से गोशाला चलाने और जानबरों को सुरक्षित रखने के बदले खासी रकम दी जाती है। जानकार कहते हैं कि इस प्रकार उन्मादी भीड़ द्वारा महज शक में किसी इंसान की हत्या जैसा कृत्य किया जाना भारत की छवि को विदेशों में खराब करना है और इसके लिए प्रधानमंत्री को विदेश यात्राओं के दौरान खासा शर्मिंदा होना पड़ता है।

फैसले पर हिंसा के मायने
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत बाबा राम रहीम को सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद हिंसा भड़क गई। डेरा समर्थकों ने पंजाब, हरियाणा में हिंसा की जिस कारण तीन लोगों की मौत हो गई। हिंसक भीड़ ने मीडिया के वाहनों समेत अनेक वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जबकि कुछ पत्रकारों को भी पीटा गया। बेकाबू हिंसक भीड़ ने दो रेलवे स्टेशन बललूआणा और मलेर में भी आगजनी की। इस प्रकार शासन-प्रशासन के तमाम सुरक्षा इंतजाम धरे के धरे रह गए और बाबा राम रहीम के समर्थक हिंसा करने में कामयाब नजर आए। इस प्रकार संदेश यही गया कि न्याय व्यवस्था को भी भीड़ अपनी मर्जी से चलाना चाहती है और उसी के परिणाम स्वरुप फैसले पर यह हिंसा सामने आई है, जो कि कहीं से भी सही नहीं कही जा सकती है।
न्याय पाकर भी हार गई इशरत
तीन तलाक के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने वालीं इशरत जहां को जहां अदालत से न्याय हासिल हो गया, लेकिन अब उन्हें समाज से न्याय की दरकार है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खबर आ रही है कि इशरत का सामाजिक बहिष्‍कार कर दिया गया है। इस प्रकार अब कोर्ट के बाहर समाज में उनका संघर्ष शुरू हो गया है जो न तो आसान है और न ही किसी तय समय सीमा के लिए ही है अत: यह लंबा चलने वाला है। गौरतलब है कि जिन्होंने अदालत का रास्ता पहले कभी दिखाया होगा अब वो भी इशरत से दूरी बनाए रखने में अपनी भलाई समझ रहे हैं। दरअसल बताया जा रहा है कि इशरत को उनके ही रिश्तेदारों और पड़ोसियों की आलोचना और बदजुबानी का शिकार होना पड़ रहा है। इस प्रकार पीड़ित पक्ष की मानें तो इशरत जीतकर भी हार गई।

निजता तय अब आधार की बारी
सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार पर गुरुवार को बेहद अहम फैसला सुनाते हुए इसे मौलिक अधिकारों का हिस्सा घोषित कर दिया। इसी के साथ ही अब बेंच यह फैसला करेगी कि आधार कार्ड के विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाए या नहीं। इस संबंध में 5 जजों की आधार बेंच इस पर सुनवाई करेगी। इससे पहले नौ जजों की संविधान पीठ ने 1954 और 1962 में दिए गए फैसलों को पलटते हुए कहा कि राइट टू प्राइवेसी मौलिक अधिकारों के अंतर्गत प्रदत्त जीवन के अधिकार का ही हिस्सा है। कुल मिलाकर इससे केंद्र को करारा झटका लगेगा और योजनाकारों के लिए मुसीबतें खड़ी हो जाएंगी। दरअसल केंद्र की मंशा का आधार ही जब नहीं होगा तो फिर वो किस पर टिकेंगी, यह देखने वाली बात होगी।

तलाक पर सरकार निभाएगी जिम्मेदारी?
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के बहुमत से दिए गए फैसले में एक बार में तीन तलाक निरस्त करने के साथ ही छह माह में केंद्र से इस पर कानून बनाने के आदेश दे दिए गए हैं। जानकार कहते हैं कि विधायिका का अब दायित्व है कि वो तीन तलाक पर जल्द से जल्द कानून बनाए और फौरी तीन तलाक वाली व्यवस्था को असंवैधानिक व गैरकानूनी घोषित करे। चूंकि ऐसी मंशा और आदेश सुप्रीम कोर्ट के भी हैं अत: इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। हालांकि कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद का कहना है कि सरकार फैसले को पढ़ने के बाद परिस्थितियों के मुताबिक जरूरत पड़ने पर उचित निर्णय लेगी। इससे यह समझा जा सकता है कि अब तलाक रुपी गेंद सरकार के पाले में आ गई है और सभी की नजरें उसी पर टिक गई हैं।

मोदी के बाद गुमशुदा सुषमा की तलाश
बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुमशुदा होने वाले पोस्टर के बाद अब मध्य प्रदेश के विदिशा संसदीय क्षेत्र के लोगों ने सांसद सुषमा स्वराज के गुमशुदा होने वाले पोस्टर चस्पा किए हैं। भाजपा सांसद सुषमा चूंकि विदेश मंत्री भी हैं अत: अपने बयानों के जरिए हमेशा ही मीडिया में सुर्खियां बटोरती रहती हैं, लेकिन अपने स्वयं के संसदीय क्षेत्र में उनकी उपस्थिति को लेकर जनता खासी नाराज लग रही है। यही वजह है कि अब इस नाराजगी को कांग्रेस ने सुषमा स्वराज गुमशुदा वाले पोस्टर लगाकर उजागर करने का काम किया है। क्षेत्र में इन पोस्टरों के लगने से हड़कंप मचा हुआ है। बताया जाता है कि काफी लंबे समय से सांसद के अपने क्षेत्र में नहीं आने से अनेक काम रुके हुए हैं, जिससे जनता को खासी परेशानी भी हो रही है। इसी के मद्देनजर कांग्रेस ने शहर के प्रमुख चौराहों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में गुमशुदा वाले पोस्टर लगाए हैं। अब लोग कह रहे हैं कि जब प्रधानमंत्री और उनके प्रमुख मंत्रियों का अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों का यह हाल है तो फिर अन्य नेताओं की बात कैसे की जा सकती है।

राहुल के दौरों से घबराहट क्यों
ऑक्सीजन की कमी के चलते पिछले दिनों गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों के मौत का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है, ऐसे में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के गोरखपुर पहुंचने और मरने वाले बच्चों के परिजनों से मिलकर दर्द बांटने को लेकर सरकार में घबराहट देखी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो यहां तक कह दिया है कि राहुल मातम की जगह को पिकनिक स्पॉट न बनाएं। इस पर कांग्रेसी पूछ रहे हैं कि जब राहुल घटना के फौरन बाद घटनास्थल पर जाते हैं तो भी सवाल उठते हैं और अब जबकि एक सप्ताह बाद वो गमगीन परिजनों का दुख बांटने पहुंच रहे हैं तो भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं राहुल अगर नहीं जाते हैं, तब भी उनके विपक्षी कहते हैं कि राहुल कहां गायब हैं। मतलब सिर्फ सवाल खड़े करना विरोधियों का काम है जबकि राहुल लगातार समाजसेवा करने और लोगों से जुड़ने का काम कर रहे हैं। जहां तक योगी के बयान का सवाल है तो इसका मतलब तो यही है कि इन घटनाओं ने योगी सरकार को बेकफुट पर ला दिया है जिससे वो घबराई हुई है और इस तरह के बयान दे रहे हैं।

दूरी किरण से या उनके पद से?
खबर है कि पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी की तरफ से स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित जलपान समारोह का सत्तारूढ़ कांग्रेस और सहयोगी द्रमुक समेत विपक्षी अन्नाद्रमुक के तमाम नेताओं ने बहिष्कार कर दिया। इस समारोह में वैसे मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी, भाजपा के नामित विधायक और स्थानीय इकाई के पार्टी अध्यक्ष वी. सामीनाथन जरुर पहुंचे, लेकिन सब फीका-फीका रहा। गौरतलब है कि किरण बेदी द्वारा हाल ही में विधानसभा में तीन नामित सदस्यों के शपथ ग्रहण करवाए जाने को लेकर सरकार से टकराव हो गया। ऐसे में उनके समारोह में अधिकांश लोगों का शामिल नहीं होना बताता है कि किरण बेदी की जगह यदि कोई और होता तो भी ऐसा ही होता, क्योंकि बात टकराव की नहीं बल्कि अधिकार की जा है। आरोप तो यही हैं कि जब संवैधानिक पद पर भी भगवा रंग चढ़ने लगेगा तो विवाद कैसे नहीं होगा।

तेजस्वी की नजर में असली और नकली जदयू
जनादेश अपमान यात्रा पर निकले बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक तरफ जहां मुख्यमंत्री नीतिश कुमार पर निशाना साधा वहीं यह भी घोषणा कर दी कि असली जदयू शरद यादव की पार्टी है और नीतिश की जदयू तो नकली पार्टी है। गौरतलब है कि वैशाली में वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी पर हमला हुआ था जिस पर तेजस्वी का कहना है कि राजद हिंसा पर विश्वास नहीं करती और जनादेश अपमान यात्रा को डिस्टर्ब करने के लिए ही हमले की साजिश रची गई। इस प्रकार ऐसा प्रतीत होता है कि सियासत में करारी ठोकर के बाद तेजस्वी का दिल और दिमाग खुल गया है और अब उन्हें सब कुछ साफ साफ नजर आने लगा है, इसलिए उन्होंने असली नकली में फर्क भी कर दिया और साजिशों को भी जान लिया।

लव जिहाद अर्थात साजिशन प्यार
केरल के कथित ‘लव जिहाद’ मामले की जांच अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी। इस जांच की निगरानी शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश आरवी रवीन्द्रन करेंगे। गौरतलब है कि केरल की 24 वर्षीया युवती अखिला अशोकन उर्फ हादिया ने धर्म परिवर्तन करके 26 वर्षीय मुस्लिम युवक शेफीन जहां से शादी की थी, जिसे केरल उच्च न्यायालय ने गत 24 मई को निरस्त कर दिया था। इस मामले में आमजन चुटकी ले रहा है और कह रहा है कि अब वो जमाना नहीं रहा जबकि प्रेम दिल से होता था और जब दिमाग से काम लिया जाता था तो प्रेम कोसों दूर भाग जाया करता था। अब तो प्रेम भी दिल से नहीं दिमाग से करने और साजिश रचने का काम खूब हो रहा है। गौरतलब है कि अखिला और शेफीन जहां ने निकाह किया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने युवती के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए निकाह को निरस्त कर दिया था और अब उस फैसले के खिलाफ प्रेमी दुल्हे ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

युद्ध् को आमंत्रित करती जुबानी जंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के बीच लगातार जुबानी जंग जारी है। एक तरफ उत्तर कोरिया ने अमेरिकी द्वीप गुआम को नष्ट करने की धमकी दी तो वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने नई चेतावनी देते हुए कह दिया कि अगर उत्तर कोरिया ने अमेरिका या उसके किसी सहयोगी देश पर हमला करने के बारे में सोचा भी तो उसके साथ ऐसा होगा जो उसने ‘कभी सोचा भी नहीं होगा। ट्रंप अपने इस बयान को कड़ा नहीं मानते और कार्रवाई की बात भी करते हैं। इससे यह समझा जा रहा है कि अगर दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच जुबानी जंग यूं ही जारी रही तो कभी भी किसी भी समय विश्व युद्ध् का आगाज हो जाएगा। इसलिए इसे रोकना और शांति के लिए आगे बढ़ना जरुरी समझा जा रहा है। सवाल यही है कि बल्ली के गले में घंटी बांधेगा कौन?

उच्चाधिकारी की खुदकुशी से उठते सवाल
खबर है कि बिहार के बक्सर जिले के डीएम मुकेश कुमार पांडे ने ट्रेन से कटकर खुदकुशी कर ली। जो लोग खुदकुशी को गरीबी और कर्जे से जोड़कर अभी तक देखते आए हैं उनके लिए यह खबर चौंकाने वाली हो सकती है। दरअसल किसान कर्ज के कारण आत्महत्या करता है, कुछ पढ़-लिखे युवा बेरोजगारी के कारण और कुछ विद्यार्थी रीजल्ट अच्छा नहीं लाने के कारण खुदकुशी कर लेते हैं। ऐसे में 2012 बैच का एक आईएएस अधिकारी गाजियाबाद में ट्रेन के आगे आकर खुदकुशी कर ले तो सवाल उठना ही चाहिए। प्रथम दृष्टया इस खुदकुशी का मुख्य कारण पारिवारिक तनाव बताया गया है, लेकिन सोचने वाली बात यही है कि क्या इतना पढ़ा-लिखा व्यक्ति जिंदगी जीने का कोई और रास्ता तलाशने की बजाय मौत को गले लगाना क्यों उचित मानेगा? इससे तो आईएएस चयन और उनके प्रशिक्षण पर ही सवालिया निशान लगने लगेंगे।

तलाक का आधार चाय-नाश्ता
खबर है कि एक पति को सिर्फ इसलिए तलाक की इजाजत अदालत से मिल गई कि उसकी पत्नी उसे चाय-नाश्ता नहीं देती थी। पत्नी के इस व्यवहार को दिल्ली हाईकोर्ट ने पति के प्रति क्रूरता माना और तलाक की अर्जी को मंजूरी दे दी। खास बात यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। मतलब साफ है कि जो क्रूरता मानसिक तौर पर दी जाती है उसके सुबूत लाना बहुत मुश्किल काम होता है, ऐसे में दो अदालतों का फैसला बाकई गौर करने लायक हो गया है। दिल्ली हाइकोर्ट की जस्टिस दीपा शर्मा और जस्टिस हीमा कोहली की डबल बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पति-पत्नी पिछले 10 साल से एक दूसरे से अलग रह रहे हैं और उनका साथ रहना अब मुमकिन नहीं है, इसलिए उनकी तलाक की अर्जी मंजूर की जा रही है।

मेनन की नाराजगी और चौहान के अधिकार
कहने को तो भाजपा नेता अरविंद मेनन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल महज इसलिए गए थे कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के दौरे की तैयारियों का जायजा लेना था, लेकिन ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार चौहान से उनका पाला पड़ गया और उन्होंने मेनन को मीडिया से बात करने से रोक दिया। यहां नंदकुमार चौहान का कहना था कि प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों पर संगठन की ओर से सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष ही बोलने के लिए अधिकृत होता है। अत: मीडिया के सवालों का जवाब उन्हें ही देना चाहिए था इसलिए उन्होंने मेनन को जवाब देने से रोका। बहरहाल चौहान को कहना सुनना था सो उन्होंने किया लेकिन संभवत: मेनन इस बात को दिल पर ले बैठे और तीन दिन के दौरे को बीच में ही छोड़कर भुवनेश्वर जाने का कहकर दिल्ली रवाना हो गए। अब बाल की खाल निकालने वालों को तो मौका चाहिए था सो उन्होंने कहना शुरु कर दिया कि चौहान को संयत भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए था, ताकि काम भी हो जाता और मेनन नाराज भी न होते।

बूचड़खाने बंद तो क्या खुलेंगे शराबखाने?
बिहार में नीतिश सरकार की मंशा और कार्य अब बदल गए हैं, इसलिए बताया जा रहा है कि उत्तरप्रदेश के बाद बिहार में भी अवैध बूचड़खानों पर लगाम लगाने की तैयारी हो गई है। पशु और मत्स्य पालन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने करीब 140 बूचड़खानों को अवैध बताकर बंद करने की बात कह दी है। मौजूदा बिहार सरकार के इस रवैये पर राजद के प्रवक्ता मनोज झा का कहना था कि बूचड़खानों का बंद होना सिर्फ इस बात का उदाहरण है इस सरकार की प्राथमिकताएं किस तरह से बदल गईं हैं। नीतिश सिर्फ सरकार का चेहरा हैं, दरअसल सरकार तो मुख्य रुप से भाजपा ही चला रही है। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यदि ऐसा ही है तो फिर बिहार में क्या शराबखाने खुल जाएंगे, क्योंकि अब सरकार की कमांड तो भाजपा के हाथ में जो आ गई है।
विदेश में साड़ी और साड़ी में लुभाती विदेशी
भारतीय साड़ी को विदेशों में खासा पसंद किया जाता है, यही वजह है कि खास मौकों पर विदेशी हस्तियां भी साड़ी पहनना पसंद करती हैं। बात जब भारत में ही रहकर साड़ी पहनने की हो तो परेशानी भी सामने आ जाती है। दरअसल यहां हम बात कर रहे हैं भारत में प्रभारी अमेरिकी राजदूत मैरीके लॉस कार्लसन की जिन्हें एक अजब परेशानी ने घेर रखा है और वह यह कि 70वें भारतीय स्वतंत्रता दिवस कौन सी साड़ी पहने जिससे वो ज्यादा सुंदर दिख सकें। इसलिए ट्विटर पर उन्होंने साड़ी पहनी अपनी तस्वीर और वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में वे कहती हैं, मुझे यह तय करने में बहुत मुश्किल हो रही है कि मैं कौन सी साड़ी पहनूं। मुझे उम्मीद है कि इस चुनाव में आप मेरी मदद करेंगे। उन्होंने चार साड़ियां पसंद कीं अब उनमें से किसी एक को उन्हें चुनने में मदद करनी है। यह है साड़ी का विदेशियों में क्रेज और उन पर भारतियों का दीवानापन।
वेंकैया अब हमारे सबके
वेंकैया नायडू देश के 13वें उप-राष्ट्रपति चुन लिए गए और इसी के साथ उनकी भाजपा और संघ से जुड़ी यादें भी इतिहास का पन्ना हो गईं। दरअसल उच्च संवैधानिक पद पर आसीन होने के साथ ही उनकी प्राथमिकताएं और जिम्मेदारियां बदल गईं, जिसके तहत बताया जा रहा है कि उनका आदर और सम्मान उनके पद के मुताबिक ही होना चाहिए। ऐसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कहते हैं। बहरहाल उप राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने गोपाल कृष्ण गांधी को दोगुने से ज्यादा वोटों से हराया है। कुल 785 सांसदों में से 771 ने वोट डाला, जिसमें से नायडू को 516 वोट मिले वहीं गांधी को 244 वोट। इससे यह तो साबित हो गया कि यहां पर भी जमकर क्रास वोटिंग हुई और वह भी भाजपा के लिए, जिसने 37 साला इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति जैसे उच्च पदों पर पार्टी नेताओं को आसीन कर दिया।
चीन अब नेपाल से भारत को चिढ़ाएगा
पिछले दो माह से सिक्किम के डोकलाम में भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच तनाव ने अब नया मोड़ ले लिया है। दरअसल बताया जा रहा है कि चीन ने अब इस मुद्दे पर नेपाल के पास जाने का फैसला ले लिया है। चीन का यह फैसला भारत की चिंताएं बढ़ाने वाला है क्योंकि भारत, नेपाल के साथ भी विवादित क्षेत्र में ट्राइ-जंक्‍शन साझा करता है। इसके अलावा नेपाल अब भारत के पड़ोस में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों में लगा हुआ है। इससे सवाल यह उठ रहा है कि कहीं हम अपनी ही कूटनीतिक चाल में उलझ तो नहीं गए हैं। क्योंकि जो मसले बातचीत से हल होने चाहिए थे उन्हें इतने लंबे समय तक लटकाकर रखना भी एक कूटनीतिक चाल का परिणाम कहा जा रहा था, ऐसे में चीन का रुख नेपाल की ओर होना बताता है कि वह सियासी शतरंज को अब दूसरे की ओर से खेलना चाह रहा है। इसलिए ऐसा लग रहा है मानों वह नेपाल की ओर जाते हुए भारत को चिड़ाने का काम कर रहा है।

अपराध पर बंदिश लगाने की राजनीति
बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी का कहना है कि बालू माफिया राजद खासतौर पर लालू परिवार के फाइनेंसर हैं। उन्होंने इन सब का खुलासा करने और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कहकर सही मायने में खुद के आस-पास मौजूद अपराध जगत की ओर सभी का ध्यान दिलाने जैसा काम कर दिया है। अगर विरोधी इसे गंभीरता से लें तो नीतिश सरकार में मौजूद कथित अपराधियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। दरअसल ऐसोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार की नवगठित एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल में 29 मंत्रियों में से 22 पर आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। इनमें से नौ पर तो गंभीर प्रवृत्ती वाल मामले दर्ज हैं। इसलिए अब कहने वाले कह रहे हैं कि अगर इस सरकार को वाकई अपराध रोकना है और भ्रष्टाचार को समूल नष्ट करना है तो पहले अपने घर से इस मुहिम को शुरु करें ताकि दूसरों के लिए वह मिसाल कायम कर सकें। वर्ना कहावत तो यही है कि गुड़ खाएं और गुलगुलों से परहेज करें।
चीन के कर्जे तले दबता पाकिस्तान
पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा का कहना है कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह और शंघाई सहयोग संगठन के विस्तार को लेकर अविचल समर्थन के लिए अपने सदाबहार सहयोगी चीन का ‘कर्जदार’ है। यदि वाकई ऐसा कुछ हुआ है तो फिर पाकिस्तान को समझना होगा कि कर्ज उतारते-उतारते अच्छे-अच्छों के घर-मकान तक बिक जाते हैं। ऐसे में चीन तो उस रंगदार व्यवसायी की तरह है जो न सिर्फ कर्ज देना जानता है बल्कि उसे कर्ज उगाही करना भी आता है।
‘ब्लू व्हेल’ अर्थात खतरे की घंटी
ऑनलाइन गेम ‘ब्लू व्हेल’ के कारण मुंबई में एक नौंवीं की छात्र द्वारा आत्महत्या किए जाने को गंभीरता से लिया गया है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि यह ऑनलाइन गेम है और इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इस मामले में राज्य सरकार केंद्र से मिलकर कार्रवाई करेगी। दरअसल राज्य विधानसभा में यह मामला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधायक और पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने उठाया
था और कहा था कि यह घटना हम सभी के लिए ‘खतरे की घंटी’ है। अच्छी बात यह है कि राज्य सरकार का रुख भी इस मामले में सकारात्मक है, अत: हल निकलने में समय नहीं लगेगा।
उपराष्ट्रपति चुनाव और आप का रुख
राष्ट्रपति चुनाव में भले ही आम आदमी पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले थे लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि उनकी पार्टी उप राष्ट्रपति उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी का समर्थन करेगी। गौरतलब है कि गांधी ने केजरीवाल से मुलाकात की जिसके बाद मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया कि ‘आप उप राष्ट्रपति के लिये श्री गोपाल कृष्ण गांधी का समर्थन करेगी।’ गौरतलब है कि देश के अगले उपराष्ट्रपति के लिये पांच अगस्त को चुनाव होने हैं, ऐसे में उम्मीदवार तिनका-तिनका जोड़कर अपना आशियाना बनाने में लगे हुए हैं। ऐसे में जबकि नीतिश भी गांधी को समर्थन कर रहे हैं तो उम्मीदें बंधना लाजमी है।

क्या कुलसुम होंगी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री
पनामा मामले में फंसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया और इसी के साथ शुरु हो गया राजनीतिक अस्थिरता का दौर। ऐसे में मीडिया सूत्र बताते हैं कि नवाज शरीफ की पत्नी कुलसुम नवाज के तौर पर पाकिस्तान को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है। वैसे नवाज के भाई शहबाज शरीफ भी इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं, देखिए किसकी किस्मत जोर मारती है। दरअसल नवाज अपने कैबिनेट के किसी मंत्री को सत्ता सौंपने के हक में नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में कुलसूम और शहबाज पर ही सबकी निगाहें टिकी हैं, हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री और अपने भाई शहबाज को चुनना भी नवाज के लिए कानूनी समस्या ला सकता है।

शरद यादव से महागठबंधन को उम्मीद
बिहार में गठबंधन-गठबंधन का खेल खेलते मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड बना चुके नीतिश कुमार ने मानों राजनीतिक सिद्धांतों को ही उलट-पुलट के रख दिया है। पहले भाजपा के सहारे मुख्यमंत्री बने, फिर महागठबंधन के सहारे मुख्यमंत्री बने और अब गठबंधन तोड़कर छठीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली और तो और तमाम विरोधों के बावजूद विधानसभा में बहुमत भी हासिल कर लिया। ऐसे में जनता दल यूनाईटेड के सहसंस्थापक और वरिष्ठ नेता शरद यादव का क्या रुख रहता है, इसे लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं। बहरहाल जिससे उम्मीद रखो वही धोखा दे जाता है, कम से कम वर्तमान राजनीति में तो यही देखने में आ रहा है, इसलिए सभी सिर्फ देखने का काम कर रहे हैं।
जेटली और जेठमलानी के बीच बुरे फंसे केजरीवाल
मशहूर वकील राम जेठमलानी ने अपने पूर्व मुवक्किल और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ फिर हमला बोला है। उन्होंने दावा किया है कि खुद केजरीवाल ने ही उन्हें वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने को कहा था। उन्होंने दावा किया है कि दिल्ली के सीएम ने जेटली के खिलाफ और भी ज्यादा अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने को कहा था। बता दें कि जेठमलानी ने केजरीवाल को खत लिखकर जेटली द्वारा दायर मानहानि के केस को लड़ने से खुद को अलग कर लिया है और अब केजरीवाल उस नाव में सवार नजर आ रहे हैं जिसमें पतवार भी नहीं है।

पहले अक्षरा धर्म में तो आएं
कमल हासन की बेटी अक्षरा हासन को लेकर मीडिया में धर्म परिवर्तन की खबरें खूब अा रही हैं। ऐसे में जानकारों ने अब कहना शुरु कर दिया है कि जो शख्स खुद को पहले से ही नास्तिक बताता आ रहा है उसे पहले किसी धर्म में आने तो दें, फिर उसके बाद यदि वह अन्य धर्म अपनाता है तो वह धर्म परिवर्तन होगा। यह धर्म परिवर्तन नहीं है बल्कि आस्तिक और नास्तिक का सवाल है और ऐसे शख्स पर ज्यादा विचार करने की भी आवश्यकता नहीं है। गौरतलब है कि सोशल मीडिया में अक्षरा को लेकर शुरु हुई बहस से कमल हासन भी चिंतित नजर आए थे, लेकिन उन्होंने बेटी का साथ देना बेहतर समझा और उसका हौसला बढ़ाते हुए यहां तक कह दिया कि वह जो करेगी सही ही करेगी।
गुजरात पहुंची अब अम्मा की थाली
तमिलनाडू में दिवंगत अम्मा के दौर में शुरु हुई अम्मा थाली अब देश के संपन्न समझे जाने वाले राज्य गुजरात तक पहुंच गई है। इससे पहले अम्मा थाली मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में शुरु की जा चुकी है। अब गुजरात सरकार भी नई योजना के तहत 10 रुपये की रियायती दर पर श्रमिकों को डिब्बाबंद भोजन मुहैया कराने जा रही है। राज्य के राजस्व और शिक्षा मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडासामा ने वडोदरा में ‘श्रमिक अन्नपूर्णा योजना’ की शुरुआत कर दी है। इसे देखते हुए विरोधी पूछ रहे हैं कि जब राज्य इतना संपन्न है कि पूरे देश और दुनिया में उसे मॉडल के तौर पर ख्यात किया जा रहा तो फिर ये गरीब कहां से आएंगे जो दस रुपए में भरपेट भोजन करने के लिए मजबूर होंगे। बात तो सही है लेकिन यह अकाट्य सत्य भी है कि जहां संपन्नता होती है वहीं बहुतायत में गरीब और मजलूम भी पर्दे के पीछे दबे-कुचले पड़े नजर आते हैं। इसलिए विकास की धारा को कभी सही दिशा में बहता हुआ नहीं बताया जाता।

सिर्फ सफाई देने के लिए बची है कांग्रेस
चाहे पूर्व सरकारों के कार्यकाल में की गई कोई गलती हो या फिर आज के पार्टी नेताओं की भूल, अब कांग्रेस सिर्फ सफाई देती हुई नजर आती है। दरअसल चीनी राजदूत से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मुलाकात को लेकर सफाई देने का दौर चल रहा है। कांग्रेस ने ऐसी किसी मुलाकात में प्रियंका गांधी और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा की मौजूदगी से भी इंकार किया है। यही नहीं कांग्रेसी तो यहां तक कह रहे हैं कि जो तस्वीर चीनी राजदूत से मुलाकात का नाम देकर वायरल की जा रही है दरअसल वो एक फूड फेस्टिवल की है। यह देख आमजन कह रहा है कि कांग्रेस सफाई क्यों दे रही है सफाई तो प्रधानमंत्री मोदी को देनी चाहिए कि चीन और पाकिस्तान से तनाव के बावजूद विदेशों में उनके नेताओं से गलबहियां क्यों करते नजर आते हैं?

मुख्य मुद्दा दलित ही रहेगा क्या
राष्ट्रपति चुनाव से लेकर अब संसद के मानसून सत्र तक में दलित मुद्दा ही प्रभावी सिद्ध् होता दिख रहा है। विपक्ष दलित मुद्दे पर हंगामा कर रहा जबकि राज्यसभा में बहस के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती ने नाराज होकर अपना इस्तीफा ही सौंप दिया। गौरतलब है कि मायावती राज्यसभा में अपनी बात पूरी ना किए जाने से नाराज थी। मायावती की राज्यसभा के उपसभापति पी.जे. कुरियन से तीखी बहस भी हुई, जिसके बाद वे राज्यसभा से बाहर चली गईं और कांग्रेस ने भी उनके समर्थन में वॉकआउट किया। जबकि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने मायावती को देश के आदिवासियों की प्रमुख नेता करार दिया। कुल मिलाकर जब तक गुजरात विधानसभा चुनाव के साथ ही साथ आम चुनाव संपन्न नहीं हो जाते तब तक यह मुद्दा यूं ही छाया रहने वाला है।

सड़क निर्माण में व्यस्त भारत और चीन ?
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने जानकारी दी है कि भारत, चीन सीमा पर आवाजाही की दृष्टि से महत्वपूर्ण 73 सड़कों का निर्माण कर रहा है। एक प्रश्न के लिखित जवाब में किरण रिजिजू ने कहा कि इनमें से 46 का निर्माण रक्षा मंत्रालय और 27 का गृह मंत्रालय कर रहा है। अब तक 30 सड़कों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। वहीं दूसरी तरफ देखा यह जा रहा है कि चीन पाकिस्तान की मदद से आर्थिक गलियारा तैयार कर अपने आपको इस क्षेत्र का बॉस घोषित करने में लगा हुआ है। इसलिए जानकार कह रहे हैं कि इस पर भी सदन में जानकारी दी जानी चाहिए कि आखिर चीन भारत के खिलाफ क्या क्या कर रहा है। चीन असामान्य रूप से आक्रामक दिख रहा है। इस संबंध में विदेश सचिव एस जयशंकर जरुर कहते हैं कि सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में चीन का रुख असामान्य रूप से आक्रामक और अक्?खड़ है। बहरहाल पूरे मामले को ठंडा करने के लिए साथ ही यह भी कह दिया जाता है कि तनाव खत्म करने की कोशिश जारी है।