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विचारों को पेश करने में घबराते हैं तो करें ये उपाय
कई लोगों के लिए अपने विचारों को सभी के सामने पेश करने में मुश्किल होती है। जो लोग अपनी बात ऑफिस, दोस्त और रिश्तेदारों के सामने नहीं रख पाते उन लोगों को पब्लिक स्पीकिंग कॉमन फोबिया होता है। वहीं आज के दौर में बोलना जरूरी है। बिना बोले सफलता हासिल करने में मुश्किल आ सकती है। लोगों के सामने अपनी बात रखने के लिए भी बोलना जरूरी है। अगर आप भी लोगों के सामने बोलने में और अपनी बात रखते वक्त घबरा जाते हैं तो ये टिप्स आपके काम आ सकते हैं। इस प्रकार दूर होगा पब्लिक स्पीकिंग फोबिया का डर।
फॉलो करें ये बातें।
अध्ययन करें : बोलने का मतलब ये नहीं है कि आप कुछ भी बोल देंगे। आप जिस विषय में बोलना चाहते हैं उसकी सारी जानकारियां प्राप्त कर लें। याद रखें जिस विषय पर आप बोलना चाहते हैं उसका जितना अध्ययन करेंगे उतना अच्छा बोल पाएंगे साथ ही आपका आत्मविश्वास बना रहेगा।
योजना बनाएं: आपको बोलने के पहले प्लानिंग करना भी जरूरी हैं जिससे की आप अपने विचार सही ढंग से पेश कर सके। आप यदि किसी भी तरह के ऑडियो या विजुअल का यूज कर अपनी बात रख रहे हैं, तो उसे भी आप खुद ही तैयार करें।
रुके भी : किसी विषय के बारे में अपनी बात रखते समय बिल्कुल भी तनाव महसूस न करें। बोलते समय अपनी बातों में ठहराव जरूर लेकर आएं। ताकि आपकी बात ज्यादा से ज्यादा लोग समझ सके।
सही जवाब दें: विषय का सही तरह से अध्ययन करें जिससे की आप ऑडियंस के सवालों का जवाब दे सके।
धबरायें नहीं : जब भी कोई इंसान धबराता है तो उसकी सांस बढ़ने लगती है जिससे उसका डर साफ दिखाई देती है। अगर ऐसा है तो अपनी सांस पर नियंत्रण करना सीखें।

करियर का चयन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
करियर में सफलता के लिए अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार सही क्षेत्र का चयन बेहद अहम होता है। किसी कार्य को करने की अच्छी काबिलियत होने पर भी यदि आपको उस कार्य में रूचि नहीं है और वह काम करने पर आप बोरियत महसूस करते हैं तो आप उस कार्य से संबंधित करियर में तरक्की नहीं कर पायेंगे। इसलिए अपनी रूचि के अनुसार कोर्स का चयन कर करियर बनाएं। वहीं अगर आप किसी लोकप्रिय या पसंदीदा कोर्स के माध्यम से करियर बनाना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। दरअसल पसंदीदा कोर्स करने से कई बार कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
शौक से अलग- कई बार चलन में ऐसे कोर्स होते हैं, जिसमें आपको बिल्कुल भी रुचि नहीं होता है, लेकिन आप सामाजिक दबाव में आकर यह कर लेते हैं और आगे दिक्कत होती है। रुचि के विपरीत होने से आप ना मन लगाकर काम नहीं कर पाएंगे और इससे आपकी तरक्की में बाधा आयेगी।
वर्क कल्चर हो सकता है अलग- अगर आप अपने स्वभाव के विपरीत वर्क कल्चर में काम कर रहे हैं तो आपके लिए यह गलत है। आप भले ही अच्छा वेतन प्राप्त कर रहे हो, लेकिन इससे आपको सुकून नहीं मिलेगा। पुरे दिन का एक बड़ा हिस्सा इसी वर्क कल्चर में काम करते हुए बीतना है, इसलिए इसका ध्यान रखें।
कम वेतन- पसंदीदा कोर्स करने से वेतन कम होने की संभावना बढ़ सकती है। दरअसल इन कोर्स के कई उम्मीदवार नौकरी ढूंढते हैं और ज्यादा उम्मीदवार होने की वजह से वेतन पर काफी असर पड़ता है।
करियर ग्रोथ के कम अवसर- कुछ पसंदीदा करियर विकल्प में शुरुआत में आपको अच्छा वेतन मिलता है, लेकिन करियर ग्रोथ के अवसर ज्यादा नहीं होते हैं। उच्च पदों के लिए सीमित अवसर हैं। ऐसे में पसंदीदा करियर विकल्प चुनने पर आपको करियर ग्रोथ के सम्बन्ध में निराश होना पड़ सकता है।

डिजिटल या ऑनलाइन मार्केटिंग में हैं शानदार अवसर
तकनीक बदलने के साथ ही करियर के नये विकल्प भी सामने आ रहे हैं। आज हर जगह डिजिटलाइजेशन हो रहा है। ऐसे में अगर आप अच्छा पैसा कमाना चाहते हैं तो डिजिटल या ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिये लाखों की कमाई कर सकते हैं। अगर आप इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो इन बातों को जानें।
डिजिटल मार्केटिंग इंटरनेट, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिये की जाने वाली मार्केटिंग है। इसे ऑनलाइन मार्केटिंग भी कह सकते हैं। डिजिटल मार्केटिंग में सोशल मीडिया, मोबाइल, ईमेल, सर्च इंजिन ऑप्टिमाइजेशन (एसईओ) आदि को टूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
वर्क प्रोफाइल
आज बड़ी से बड़ी कंपनी में डिजिटल मार्केटिंग स्पेशलिस्ट की बड़ी अहमियत होती है। ये डिजिटल मार्केटिंग टीम के अहम सदस्य होते हैं। डिजिटल मार्केटिंग मटेरियल को तैयार करने और उसे मेंटेन रखने की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। ये कंपनी के लिए वेब बैनर ऐड, ईमेल्स और वेबसाइट्स बनाकर उनकी ब्रांडिंग करते हैं। इंटरनेट और डिजिटल टेक्नोलॉजी के लिए मार्केटिंग कैंपेन तैयार करते हैं, जिसे मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक पहुंचाया जाता है।
डिजिटल मार्केटिंग में जॉब प्रोफाइल्स
डिजिटल मार्केटिंग का दायरा बहुत बड़ा है। यहां आप इन पदों पर नौकरी पा सकते हैं: डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर, कंटेंट मार्केटिंग मैनेजर, सोशल मीडिया मार्केटिंग स्पेशलिस्ट, वेब डिजाइनर, ऐप डेवलपर, कंटेट राइटर, सर्च इंजिन मार्केटर, इनबाउंड मार्केटिंग मैनेजर, एसईओ एग्जीक्यूटिव, कनवर्जन रेट ऑप्टिमाइजर आदि।
योग्यता
इस फील्ड में काम करने के लिए ग्रेजुएट होना आवश्यक है। जो छात्र मार्केटिंग, कम्युनिकेशन या फिर ग्राफिक डिजाइन में ग्रेजुएट हैं, वे डिजिटल मार्केटिंग में करियर बना सकते हैं।
जॉब
यहां वेब डिजाइनर, ऐप डिजाइनर और सोशल मीडिया मैनेजमेंट के जानकारों के लिए काफी अवसर हैं। इसके अलावा, डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी और ई-कॉमर्स कंपनियों में भी ढेर सारे अवसर हैं। इसके साथ ही वहीं देशी-विदेशी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स, सर्विस प्रोवाइडिंग कंपनीज, रिटेल कंपनीज आदि भी अनेक अवसर उपलब्‍ध करा रही हैं।
काम की बात
डिजिटल मार्केटिंग की सबसे अच्छी बात यह है कि यह अभी उभरता हुआ कारोबार है। इसमें ऐसा दावा कोई नहीं कर सकता कि उसे सबकुछ मालूम है। आप अपनी रुचि को देखते हुए आगे बढ़ सकते हैं और मोटी कमाई कर सकते हैं। इसमें अपने को हमेशा ही अपडेट करते रहना पड़ता है।
आने वाले समय के साथ ही इसमें पेशेवर और एक्सपर्ट लोगों की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में आप जरुरी योग्यता हासिल कर इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं।

अपना करोबार शुरु करते समय इन बातों का ध्यान रखें
अगर आप अपना कारोबार करने की योजना बना रहे हैं और चाहते हैं कि आपका काम सफल हो, तो कुछ बातों का ध्यान रख कर आप अपना कारोबार बढ़ा सकते हैं। इससे आपको लाभ ही होगा। इन नियमों का पालन करें।
सकारात्मक रहें
आपको ऐसे लोग मिल जाएंगे जो कहेंगे इस कारोबार में नुकसान है, कोई फायदा नहीं है। इसलिए सफलता चाहते हैं तो उसे दिन-प्रतिदिन एक बड़े स्तर पर ले जाने की कोशिश करें और सकारात्मक सोचें।
दृढ़ता के साथ काम करें
अपने लक्ष्य के लिए कितने गंभीर है, ये आपके दृढ़ लक्ष्य पर निर्भर करता हैं। एक कारोबार में लाभ और हानि दोनों हो सकती है, लेकिन इन सब के बारे में ना सोचकर आप एक दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहें। ऐसे में सफलता जरुर मिलेगी।
योजना के साथ काम करें
कोई भी कारोबार एक योजना के बिना अधूरा है। कब क्या करना है, कैसे करना है, आप कितने पैसे कहां लगाना चाहते हैं। ये सब कुछ आप की योजना में शामिल होना आवश्यक है।
जिसमें एक्सपर्ट हों वहीं करें
आप एक कारोबार शुरू करने जा रहे हैं तो जरूरी नहीं है कि आप सब कुछ स्वयं कर लेंगे। जिस चीज में आप बेहतर हैं, सिर्फ वही करें सभी कामों में हाथ ना डालें।
सेहत का रखें ख्याल
जितना काम जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी आपकी सेहत है। अगर किसी वजह से आपके कारोबार में नुकसान हो जाता है, तो उसका असर सेहत पर ना पड़ने दें।

इन क्षेत्रों में तेजी से बढ़ेगा करियर
अगर आप तेजी से सफलता हासिल करना चाहते हैं तो पारंपरिक को्र्स की जगह नये कोर्स करें। समय और जरुरतों के अनुसार कारोबार जगत की मांगें बदलती रहती हैं। आजकल कुछ ऐसे कोर्स आये हैं जिनको कर आप आसानी से नौकरी हासिल कर सकते हैं और अपना स्वयं का काम भी शुरु कर सकते हैं।
कॉरपोरेट लॉ
लीगल सेक्टर में रूचि रखने वाले स्टूडेंट्स अब कॉरपोरेट लॉ में अपना करियर बना रहे हैं। नौकरी और कमाई के अच्छे अवसर होने की वजह से आप भी इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। हाल ही के कुछ सालों में कॉरपोरेट लॉ के मामले में वकालत में भी खास बदलाव आया है।
कॉरपोरेट्स लॉयर, कॉरपोरेशंस को उनके कानूनी अधिकारों और सीमाओं के बारे में सलाह देते हैं। कॉरपोरेट लॉ एक व्यापक व आकर्षक करियर बन गया है। कॉरपोरेट लॉयर अपने क्लाइंट्स को कानूनी तरीके से कारोबार करने में मदद करता है। उसकी जिम्मेदारी नई फर्म के लिए शुरुआती दस्तावेज तैयार करने से लेकर कॉरपोरेट ऑर्गनाइजेशन करने तक की रहती है।
कंपनियां लीगल को अपने कारोबार के कोर स्ट्रेटेजिक फैक्टर के रूप में हैं, इसलिए स्वतंत्र वकीलों और इन-हाउस लीगल टीम की मांग लगातार बढ़ी है। रोजगार के बाजार में वकीलों की मांग अचानक बहुत तेजी से बढ़ी है। एक अनुमान के मुताबिक भारतीय फर्म पिछले साल से दोगुनी संख्या में वकीलों को नौकरी पर रखेंगी। मांग न केवल सीनियर पोजीशन पर बढ़ी है, बल्कि प्रवेश स्तर पर भी बढ़ी है।
स्पा थेरेपी: हाल के दिनों में सेवा क्षेत्र में बेहद तेजी आयी है।यह कोर्स कोई भी कर सकता है, बशर्ते उसे लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से आराम पहुंचाने में रुचि हो और वह उसमें अपना करियर बनाने की इच्छा रखता हो। पहले साल में शुरुआती वेतन 1 से 2 लाख रुपये तक हो सकता है। आप अपना स्वयं का स्पा सेंटर भी खोल सकते हैं।
ब्रांड प्रबंधन : अगर आपके अंदर अच्छी चीजों के प्रति गहरा लगाव है तो लग्जरी ब्रांड मैनेजमेंट आपके लिए अच्छा करियर हो सकता है। भारत में जिस तरह से दिनों दिन लग्जरी मार्केट विकसित होती जा रही है, उसे देखते हुए इस क्षेत्र में दक्ष पेशेवरों के लिए काफी अवसर निकलते जा रहे हैं।
टी टेस्टिंग: आजकल चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए चाय की पत्ती बनाने वाली कंपनियां लंबे समय से पेशेवर टी टेस्टरों की सेवाएं लेती आ रही हैं। ये टी टेस्टर चाय की पत्ती के स्वाद, उसकी क्वालिटी और तैयारी को जांचने के लिए पेशेवरों को नौकरी पर रखती हैं।
एथिकल हैकिंग: हाल के दिनों में साइबर अपराधों के बढने के साथ ही सरकारी के साथ ही निजी क्षेत्रों में हैकरों की मांग बढ़ती जा रही है। एथिकल या वैध हैकर कॉरपोरेट नेटवर्क की तह में जाता है और उसकी सुरक्षा के लिए कुछ नए उपाय निकालता है। इसमें शुरुआती वेतन प्रति माह 27,000 से 30,000 रुपये मिल सकते हैं।

अच्छी नौकरी हासिल करने ये तैयारी करें
हर किसी युवा का सपना होता है कि उसे जल्दी से जल्दी अच्छी नौकरी मिल जाए। खास करके अगर उनकी उम्र 20-25 साल हो। कुछ छात्र कॉलेज से निकलने के बाद भी संशय में होते हैं कि उन्हें क्या करना है। अगर आप जल्‍दी नौकरी करना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें।
प्रोफाइल बनाएं: सबसे पहले बारी आती है मजबूत प्रोफाइल की और अच्छे प्लेटफॉर्म की।
अपने रिज्यूमे को अपडेट करें: अगर आप बेहतरीन नौकरी चाहते हैं तो अपने रिज्यूमे को लगातार अपडेट करना न भूलें। पुराना रिज्यूम किसी भी कंपनी को न भेजें।
इंटर्नशिप करें: आपके लिए जितनी जल्दी संभव हो, इंटर्नशिप शुरू कर दें। सारे छात्र जानते हैं कि नौकरी पाने के लिए इंटर्नशिप करना कितना जरूरी है लेकिन वे इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। आप चाहें तो कॉलेज की छुट्टियों में इंटर्नशिप कर सकते हैं। हो सकता है कि यह आपको अच्छी नौकरी दिला दें।
मेंटर जरूर खोजें: हमारे जीवन में कुछ भी अच्छा करने के लिए हमें एक मेंटर की जरूरत होती है। एक ऐसा मेंटर जो आपको अच्छी तरह जानता हो और आप उसे बेहतर जानते हों। ज्यादातर छात्र अपने माता-पिता को ही अपना मेंटर मानते हैं यह एक अच्छी बात है। मगर परिवार से हट कर भी आपका एक मेंटर होना चाहिए जो आपको कुछ नया करने के लिए उत्साहित करे। खासकर के आप जिस क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उससे जुड़ा हुआ एक मेंटर जरूर खोजें।
प्रोफेशनल डेवलपमेंट ग्रुप ज्वॉइन करें: अपने कॉलेज के दिनों से ही पेशेवर ग्रुप को ज्वॉइन करना शुरू कर दें। इसके लिए आप अपने कॉलेज के एल्यूमनाई से भी जुड़ सकते हैं। ऐसा करने से आपको पेशेवरों के बारे में जानकारी मिलेगी। यहीं से आप नेटवर्किंग भी शुरू कर सकते हैं। हो सकता है कि इन्हीं ग्रुप्स में से कोई आपको जॉब की पेशकश कर दे। अपडेट रहें: आप जिस क्षेत्र में नौकरी चाहते हैं उसको लेकर अपडेट रहें।

अगल-अलग भाषाएं सीख कर जल्दी पायें नौकरी
अगर आप कैरियर में तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं तो हिंदी और अंग्रेजी के साथ ही अलग-अलग भाषाएं सीखना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में अलग-अलग भाषा आपको एक अच्छी नौकरी भी दिला सकती है। अगर इन भाषाओं का ज्ञान हिंदी के साथ हो तो आपको नौकरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इससे आप अन्य प्रतियोगियों से कहीं आगे निकल जाते हैं।
स्पेनिश: अगर किसी भाषा को वाकई वैश्विक भाषा का दर्जा मिल सकता है तो वो स्पेनिश है। दुनिया भर में इस भाषा से जुड़े रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। अमेरिका में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं, जो स्पेनिश बोलते हैं। इसके अलावा मुसाफिरों की तादाद भी काफी है। इसे सीखना तुलनात्मक रूप से आसान है। स्पेन के अलावा ये भाषा दक्षिण अमेरिका के कई देशों और मेक्सिकों में भी बोली जाती है।
जर्मन: जर्मनी के अलावा स्विटजरलैंड में भी ये भाषा काफी प्रचलित है और ये दोनों देश यूरोप में कारोबार का केंद्र माने जाते हैं। ऐसे में ये भाषा कारोबार के लिहाज से अहम है।
फ्रेंच: दुनिया भर में 20 करोड़ से ज्यादा लोग यह भाषा बोलते हैं। दुनिया के 40 से ज्यादा देशों में आप फ्रेंच बोल-सुन सकते हैं। ये 8 देशों की भाषा है और संयुक्त राष्ट्र में इसे आधिकारिक दर्जा हासिल है।
अंग्रेजी: अंगेजी लंदन, अमेरिका समेत यूरोप में प्रमुख तौर पर बोली जाने वाली भाषा है। इससे करियर की असीम संभावनाएं आपके लिए खुलती हैं।
जापानी: अंग्रेजी में कई ऐसे शब्द हैं, जो इसी भाषा में पहुंचे हैं। अगर एशिया के रोबोटिक केंद्र में जगह बनानी है तो जापानी सीखना अनिवार्य समझ लीजिए।
अरबी: 30 करोड़ लोग यही भाषा बोलते हैं। दुबई और आबु धाबी जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों की भाषा है। ये भाषा कई क्षेत्रों में रोजगार दिला सकती है। पश्चिम एशिया और अफ्रीका के कई देशों में ये भाषा इस्तेमाल होती है।

नौकरी से बाहर होने के समय करें ये काम
अगर किसी कारण से अपकी नौकरी या रोजगार में बाधा आई है और आप कुछ समय के लिए उसे जारी नहीं रख पा रहे हैं तो इस कठिन समय में भी आप कुछ तैयारियां करते रहें क्योंकि करियर में ब्रेक के बाद लोगों को नई नौकरी या रोजगार तलाशने में काफी सारी परेशानियों को सामना करना पड़ता है और अगर मिल जाए तो भी लय में आने में समय लगता है। इसलिए अगर आप भी करियर में ब्रेक के बाद फिर से नौकरी करने की तैयारी कर रहे है तो ये इन बातों का ध्यान रखें
फ्रीलांस
करियर में ब्रेक लेने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप बिल्कुल आराम से बैठे रहें बल्कि आप घर बैठे-बैठे ही फ्रीलांस के तौर पर काम कर सकते है। आमतौर पर नियोक्ता उन्हीं लोगों को प्राथमिकता देते हैं जो काम कर रहे हों। अगर आपका रेज्यूमे आपको जॉब मार्केट से बाहर दिखाता है तो काम मिलने में काफी परेशानी होती है। ऐसे में फुल टाइम काम छोड़ने के बाद भी कुछ न कुछ फ्रीलांस लेते रहें, भले ही इसमें आपको टाइम मैनेजमेंट करना पड़े और पैसे भी आपके अनुसार न हों।
घर से कर सकते हैं काम
बड़े शहरों में दूरियों के कारण कई बड़ी कंपनियां अपने एम्प्लॉयीज को वर्क-फ्रॉम-होम या फ्लैक्जी- आर की सुविधा देती हैं। अगर कोई कंपनी कम घंटों का काम, घर से काम या प्रोजेक्ट-बेस्ड काम देती हैं और आपकी परिस्थितियां काम की इजाजत देती हैं, तो हर हाल में काम करें।
ब्रिज प्रोग्राम
कई बड़ी कंपनियां इस तरह के प्रोग्राम करती हैं ताकि वे करियर से ब्रेक लिए हुए स्किल्ड लोगों को खुद से दोबारा जोड़ सकें। यह किसी ब्रिज की तरह काम करता है और आपको तकनीकी रुप से या किसी भी तरह की अपेडट की ट्रेनिंग देती है ताकि आप अपने को अलग-थलग न पाएं। कंपनी आपको अस्थायी तौर पर काम पर रखती है, ट्रेनिंग देती है और अच्छे प्रदर्शन के बाद काम पर रख लेती है।
नेटवर्किंग करें
कई बार लम्बे समय तक काम से दूर रहने की वजह से अपने काम से जुड़े लोगों से नेटवर्क टूट जाता है, कम ही लोग हैं जो काम छोड़ने के बाद भी पेशेवर नेटवर्किंग कर पाते हैं। पेशेवर लोगों से दोबारा संपर्क और संबंध के लिए कई संस्थाएं वर्कशॉप चलाती हैं। इनका रजिस्ट्रेशन पहले से करवाना होता है और आमतौर पर इनका कोई शुल्क भी होता है। इसमें आपको अपने पेशे से संबंधित एचआर हेड्स से मिलने का मौका मिलता है।

कम बजट में विदेश में पढ़ना है तो इन देशों में जायें
No Imageअगर आप विदेश में उच्च शिक्षा लेना चाहते हैं और आपके पास सीमित बजट है तो आप इन देशें की और रुख कर सकते हैं। इन देशों में उच्च शिक्षा के लिए फीस या तो बहुत कम ली जाती है या बिलकुल नहीं होती। यह देश हैं।
स्पेन
स्पेन यूरोपीय संघ के नागरिकों को मुफ्त यूनिवर्सिटी एजुकेशन ऑफर करता है वहीं यूरोपीय संघ के बाहर के छात्रों से बहुत ही मामूली फीस ली जाती है। भारत से जाने वाले छात्र यहां काफी कम बजट में भी शिक्षा हासिल कर सकते हैं।
यूनान
यूनान में विदेशी छात्रों को बहुत किफायती शिक्षा मुहैया कराई जाती है और वहां रहने-सहने का खर्च भी बहुत कम है।
बेल्जियम
बेल्जियम में विदेशी छात्रों को नाममात्र की ही फीस देनी पड़ती है जो छात्रों को भारी नहीं लगती है।
फ्रांस
फ्रांस में हायर एजुकेशन लगभग मुफ्त है। सिर्फ कुछ पब्लिक यूनिवर्सिटीज में फीस लगती है, वह भी मामूली।
चेक गणराज्य
यहां सभी देश के नागरिकों के लिए शिक्षा मुफ्त है पर इंग्लिश में पढ़ने के लिए करीब 70,000 रुपये फीस देनी पड़ती है।
फिनलैंड
फिनलैंड में पहले किसी भी देश के नागरिक से कोई ट्युशन फीस नहीं ली जाती थी लेकिन 2018 से इंग्लिश में पढ़ाए जाने वाले बैचलर्स और मास्टर्स प्रोग्राम के लिए मामूली फीस ली जाती है।
ऑस्ट्रिया
इसमें यूरोपीय यूनियन के बाहर के छात्रों को करीब 55,000 रुपये फीस देनी पड़ती है जो काफी कम है।
स्वीडन
स्वीडन की यूनिवर्सिटियां ईयू, ईईए और नॉर्डिक देशों से बाहर के नागरिकों से ग्रैजुएट और पोस्ट ग्रैजुएट प्रोग्राम्स के लिए बेहद कम ऐप्लिकेशन और ट्युइशन फीस लेती हैं।
नॉर्वे
नॉर्वे में ग्रैजुएट, पोस्ट ग्रैजुएट और डॉक्टोरेट लेवल के प्रोग्राम्स पूरी तरह मुफ्त हैं पर आपको नॉर्वे की भाषा नॉर्वेगियन पर दक्षता हासिल होनी चाहिए क्योंकि ज्यादातर अंडरग्रैजुएट कोर्स इसी भाषा में पढ़ाए जाते हैं।
जर्मनी
जब मुफ्त या न के बराबर खर्च में शानदार हायर एजुकेशन की बात आती है तो जर्मनी इस लिस्ट में टॉप पर है। वहां मात्र 11,500 से लेकर 19,000 रुपये तक ऐडमिनिस्ट्रेशन फीस के तौर पर लिया जाता है।

स्नातक की पढा़ई के साथ करें ये अतिरिक्त कोर्स
No Imageआजकल नौकरी के लिए जिस प्रकार प्रतिस्पर्धा का दौर है उसमें सफलता के लिए अब केवल स्नातक शिक्षा ही प्रर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही आपको मौजूदा दौर के अनुसार भी चलना होगा। ऐसे में
स्नातक की पढा़ई के साथ ही अपना करियर संवारने के साथ आप कुछ अतिरिक्त कोर्स भी कर सकते हैं।
ऑफिस मैनेजमेंट
अच्छी नौकरी पाने के लिए आप स्नातक के साथ ही ऑफिस मैनेजमेंट का कोर्स कर सकते हैं। ये कोर्स कई इंस्टीट्यूट में उपलब्ध है। कई संस्थानों में तो वीकेंड पर इसकी पढ़ाई करवाई जाती है।
कंप्यूटर कोर्स
आज के जमाने में कंप्यूटर की जानकारी होना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप किसी भी नजदीकी इंस्टीट्यूट से बेसिक कंप्यूटर का कोर्स कर सकते हैं। ये आपके लिए बेहद फायदेमंद रहेगा।
डिजिटल मार्केटिंग
आजकल दुनिया डिजिटल बनती जा रही है। वैसे भी बढ़ती इस तकनीकी दुनिया में ऑनलाइन मार्केटिंग का गुण सीखना काफी जरूरी हो गया है। डिजिटल मार्केटिंग का क्रैश कोर्स कर आप दूसरे उम्मीदवारों से अपने को काफी आगे कर लेते हैं।
अंतरराष्ट्रीय भाषा
कोई भी अंतरराष्ट्रीय भाषा जानना आपके लिए एक अतिरिक्त योग्यता हो सकता है। जब नौकरी की बात आती है तो ऐसे व्यक्ति को प्राथमिकता दी जाती है जिसे कोई अंतरराष्ट्रीय भाषा आती हो।
पर्सनालिटी डेवलेपमेंट
अच्छी पर्सनालिटी वाला व्यक्ति हर जगह सफल हो जाता है पर आम तौर पर लोग पर्सनालिटी का मतलब लुक को मान लेते हैं जबकि ऐसा नहीं है। आप किस तरह बात करते हैं, आपकी बॉडी लैंग्वेज कैसी है, साक्षात्कार में सफलता के लिए ये काफी हद तक फायदेमंद रहती है।

ये हैं देश के सबसे महंगे स्कूल
भारत में कई ऐसे स्कूल हैं, जहां पढ़ाई करवाने के लिए अभिभावकों को काफी मोटी फीस देनी होती है। इन स्कूलों की इतनी फीस है कि आप इससे एक घर तक खरीद सकते हैं। यह फीस हजारों में नहीं बल्कि लाखों में होती है। देश के सबसे महंगे स्कूल और उनकी फीस।
स्कूल, देहरादून- दून स्कूल की फीस 9 लाख से 10 लाख रुपये हैं। इस फीस के साथ एडमिशन के समय साढ़े लाख रुपये सिक्योरिटी फीस भी जमा की जाती है, जिसे बाद में वापस कर दिया जाता है. सिक्योरिटी फीस के साथ साथ वन टाइम एडमिशन फीस भी ली जाती है, जो 3 लाख 50 हजार है. इसमें 25 हजार रुपये तक के अलग खर्चे भी हो जाते हैं।
सिंधिया स्कूल, ग्वालियर- यह स्कूल ग्वालियर फोर्ट में बना हुआ है। यह स्कूल बॉय बोर्डिंग स्कूल जो कि 1897 में स्थापित किया गया था। इसकी फीस करीब 7-8 लाख रुपये हैं. इस स्कूल से मुकेश अंबानी, सलमान खान जैसे दिग्गजों ने पढ़ाई की है।
इकॉल मॉन्डियल वर्ल्ड स्कूल, मुंबई- यह मुंबई का पहला इंटरनेशनल स्कूल है। स्कूल में आईबी प्राइमेरी प्रोग्राम, मिडिल ईयर, डिप्लोमा प्रोग्राम भी करवाए जाते हैं। यहां 12वीं कक्षा में पढ़ाई करने की कीमत 10 लाख 90 हजार रुपये तक हो सकती है।
वुडस्टॉक स्कूल- वुडस्टॉक उत्तराखंड के मसूरी में है। इस स्कूल में 12वीं कक्षा की फीस करीब 16 लाख रुपये है, इसमें इस्टेब्लिशमेंट फीस 4 लाख रुपये भी है। यह फीस वापस भी नहीं होती है।
मर्सडीज बेंज इंटरनेशनल स्कूल, पुणे- यह स्कूल पुणे के हिंजावाडी में है। इसमें तीन तरह के प्रोग्राम होते हैं, जिसमें केजी से 5वीं कक्षा तक पीवाईपी सेक्शन, छठी कक्षा से 10 तक एमवाईपी और 11वीं से 12वीं तक डीपी सेक्शन होता है. इस स्कूल में कम बच्चों पर अधिक टीचर होते हैं. इसकी फीस करीब 16 लाख रुपये है।

प्रवेश से पहले हासिल कर लें जानकारी
अगर आप कहीं प्रवेश लेने जा रहे हैं तो फर्जी संस्थानों से सावधान रहें।कई बार डिस्टेंस एजुकेशन (दूरस्थ शिक्षा या रेग्युलर टीचिंग (नियमित शिक्षा) पर आधारित कोर्स चलाने के लिए निजी संस्थानों को विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ से मंजूरी दी जाती है। जिसके तहत क्लास इन संस्थानों द्वारा लगाई जाती है और परीक्षा उस यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित की जाती है जिससे मान्यता ली गई होती है। इस प्रकर के मामलों में प्रवेश से पहले यूनिवर्सिटी द्वारा जारी ऑर्डर या नोटिफिकेशन की कॉपी मांगे। यह भी देख लें कि यह अनुबंध कब तक मान्य है। अगर फिर भी संदेह हो तो सीधे यूनिवर्सिटी से भी सचाई की जांच के लिए संपर्क करें।
उच्च शिक्षा के नाम पर लूट रहे फर्जी संस्थान
आजकल उच्च शिक्षा के नाम पर देश में खूब फर्जीवाड़ा हो रहा है। कुछ शातिर लोग मासूम छात्रों को अपना शिकार बनाते हैं। वे फर्जी संस्थान कई बार फर्जी बोर्ड, यूनिवर्सिटी के नाम से वेबसाइट तक बना लेते हैं और सर्टिफिकेट भी जारी कर देते हैं। जानकारी न होने पर आप ठगे जाते हैं।
भ्रामक विज्ञापनों को ऐसे पहचानें
ऐसे विज्ञापनों में कभी भी स्पष्ट तौर पर जानकारी नहीं दी जाती। जैसे दावा किया जाता है कि मान्यताप्राप्त संस्थान है, लेकिन यह नहीं स्पष्ट किया जाता है कि किस कोर्स या किस ट्रेनिंग के लिए और कहां से मान्यता प्रदान की गई है। होता यही है कि विज्ञापन किसी कोर्स का होता है और मान्यता किसी दूसरे कोर्स या ट्रेनिंग की मिली होती है।
रजिस्टर्ड और रेकग्निशन के फर्क को पहचानें
संस्था या ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट का रजिस्ट्रेशन होने का यह मतलब यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि सभी तरह के कोर्स चलाने के लिए उन्हें मान्यता मिली हुई है। ये दोनों बिलकुल अलग-अलग मुद्दे हैं।
यूनिवर्सिटी से मान्यता की जांच है जरूरी
कई बार डिस्टेंस एजुकेशन या रेग्युलर टीचिंग पर आधारित कोर्स चलाने के लिए प्राइवेट इंस्टिट्यूट्स को विभिन्न यूनिवर्सिटीज़ से मंजूरी दी जाती है। जिसके तहत क्लास उक्त इंस्टिट्यूट द्वारा कराई जाती है और एग्जाम उस यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित किया जाता है जिससे मान्यता ली गई होती है। ऐसे दावों की सचाई जानने के लिए यूनिवर्सिटी द्वारा जारी ऑर्डर या नोटिफिकेशन की कॉपी मांगने से नहीं कतराना चाहिए। यह भी देख लें कि यह अनुबंध कब तक मान्य है। अगर फिर भी शक की गुंजाइश हो तो सीधे यूनिवर्सिटी से भी सचाई की जांच के लिए संपर्क किया जा सकता है।
कोरे आश्वासनों पर न जाएं
यह भी देखने में आता है कि दस्तावेज मांगे जाने पर इंस्टिट्यूट का मैनेजमेंट आवेदन के कागजों का वह पुलिंदा दिखाता है, जिसे मान्यता प्राप्ति के लिए आवेदन के रूप में यूनिवर्सिटी या रेग्युलेटरी संस्थाओं के पास भेजा गया है। इस आधार पर वे विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि यूनिवर्सिटी उन्हें जल्द मान्यता प्रदान की जाने वाली है। ऐसे आश्वासन अमूमन कोरे ही साबित होते हैं।
​इंस्टिट्यूट की वेबसाइट से जानकारी लें
हरसंभव कोशिश करें कि नए संस्थानों के कोर्सों की तुलना में पुराने संस्थानों का चयन करें। इस बारे में शुरुआती जानकारी के लिए संस्थान की वेबसाइट उपयोगी हो सकती है। जितना ज्यादा पुराना संस्थान होगा, उसकी विश्वसनीयता भी उतनी ही ज्यादा होगी।
इंस्टिट्यूट का प्लेसमेंट रेकॉर्ड देखें
इंस्टिट्यूट के मैनेजमेंट से बीते बरसों के दौरान जॉब पाने वाले स्टूडेंट्स और जॉब देने वाली कंपनियों से संबंधित जानकारी लें और बाकायदा इन कंपनियों से सचाई जानने की कोशिश करें। अगर जॉब संबंधी दावों में सचाई है तो उम्मीद रखनी चाहिए कि इंस्टिट्यूट की वैल्यू है।
​​आम लोगों को बहकाने के लिए निजी संस्थाएं ‘यूनिवर्सिटी’ या ‘विश्वविद्यालय’ शब्द का इस्तेमाल अपने नाम के साथ करने लगती हैं। यूजीसी समय-समय पर ऐसी फर्जी यूनिवर्सिटी या संस्थानों की सूची प्रमुख अखबारों और अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करती है। ऐडमिशन लेने से पहले एक बार इस सूची से जांच कर लेनी चाहिए।
बरतें ये सावधानी
कोई भी डीम्ड यूनिवर्सिटी डिस्टेंस एजुकेशन प्रणाली से 2018 से कोई भी कोर्स नहीं करा सकती।
देशी और विदेशी इंस्टिट्यूट/यूनिवर्सिटीज़ द्वारा आज के दौर में तमाम तरह के आकर्षक ऑनलाइन कोर्सेस करवाए जा रहे हैं। इनकी सचाई का पता लगाना तो और भी मुश्किल है। नामी देसी और विदेशी यूनिवर्सिटीज और कंपनियों (माइक्रोसॉफ्ट, कोर्सेरा आदि) को छोड़ दें तो इनमें से ज्यादातर की क्वॉलिटी और जॉब क्षमता के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है। इस बारे में इतना ही सुझाव दिया जा सकता है कि अपने विषय/ट्रेड के अनुसार ऑनलाइन कोर्स का चयन ज्ञान हासिल करने के लिए किया जा सकता है पर करियर बनाने के लिए तो आपको नियमित कोर्स पर ही निर्भर होना पड़ेगा।
विदेशी यूनिवर्सिटी में प्रवेश से पहले हासिल कर लें जानकारी क्योंकि आजकल कई विदेशी संस्थान भी धोखेबाजी में लगे हैं। इसके लिए सबसे पहले संबंधित देशों के भारत स्थित केन्द्रों से जानकारी लेनी चाहिये।
अमेरिकी यूनिवर्सिटी के बारे में नई दिल्ली स्थित यूनाइटेड स्टेट्स एजुकेशनल फाउंडेशन इन इंडिया) से पता लगाया जा सकता है। इसी प्रकार अन्य देश के भी केन्द्र हैं।
अगर फर्जी संस्थानों में फंस जायें तो क्या करें ?
ऐसे में दूसरे छात्रों के साथ मिलकर प्रबंधकों से सीधे बात करें और उनसे ब्याज समेत फीस वापस करने को कहें। फीस लौटाने में आनाकानी करें तो उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। इस दौरान अपना पैसा और समय इस तरह के फर्जी कोर्स में बर्बाद नहीं करते हुए कोई दूसरा कोर्स, रेग्युलर कॉलेज या डिस्टेंस एजुकेशन/ओपन यूनिवर्सिटी से करें। इस तरह आपका कीमती साल भी बर्बाद होने से बच जाएगा। इस बारे में संबंधित रेग्युलेटरी संस्था में शिकायत दर्ज करें ताकि भविष्य में और युवा इसके शिकार न हों।
निजी यूनिवर्सिटीज के बारे में जानें
प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को कॉलेजों से एफिलिएट करने (जोड़ने) और उन्हें फ्रेंचाइज आधार पर इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। इसी तरह से ऑफ कैंपस सेंटर्स चलाने की स्वतंत्रता भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी को नहीं है।

आईटी क्षेत्र में रोजगार की बढ़ती संभावनाएं
तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए आईटी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ते जा रहे हैं। इसमें कई क्षेत्र हैं जिसे युवाओं की जरुरत है। माना जा रहा है कि साल 2020 तक भारत विश्व का सबसे बड़ा इंटरनेट बाजार होगा और यहां इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की तादाद 73 करोड़ से ज्यादा होगी। आज छोटी-बड़ी कोई भी कंपनी हो सबकी अपनी वेबसाइट है। हर कारोबार ऑनलाइन भी चल रहा है। इन सबको बनाने से लेकर उनकी सुरक्षा तक की जिम्मेदारी आईटी क्षेत्र से जुड़े लोगों की ही होती है। ऐसे में आई के कोर्स में डिप्लोमा से भी आप अच्छी नौकरी हासिल कर सकते हैं।
आईटी तकनीक एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा सूचना, डाटा स्टोर करना और डाटा या सूचना की शेयरिंग के साथ इसकी सुरक्षा भी तय की जाती है। यह कंप्यूटर साइंस की एक विशेष ब्रांच है जिसमें कंप्यूटर से जुड़े जितने भी ऐप्लिकेशन हैं, उनकी प्रैक्टिकल नॉलेज पर जोर दिया जाता है।
कोर्स
इसमें आप यूजी, पीजी से लेकर एमफिल और पीएचडी तक कर सकते हैं। यदि आप इसमें बीटेक करना चाह रहे हैं तो 12 वीं गणित में होनी चाहिये। बीटेक के बाद एमटेक व पीएचडी तक किया जा सकता है।
एमटेक या पीएचडी: एमटेक या पीएचडी करने के लिए आपको स्टेट लेवल के एग्जाम जैसे नेट, गेट आदि को क्वालिफाई करना होगा।
यदि आप प्राइवेट इंस्टिट्यूट में ऐडमिशन लेना चाहते हैं तो प्राइवेट इंस्टिट्यूट हर साल इंट्रेंस टेस्ट ऑर्गनाइज्ड कराते हैं। कुछ संस्थान टेस्ट+इंटरव्यू+ग्रुप डिस्कशन के द्वारा प्रवेश लेते हैं।
जॉब प्रोफाइल: कंप्यूटर प्रोग्रामर, डाटाबेस एडमिनेस्ट्रेटर, डाटाबेस डिजाइनर, डाटा वेयरहाउस डिजाइनर, ईआरपी, नेटवर्किंग एडमिनेस्ट्रेटर, नेटवर्क इंजिनियर, प्रॉजेक्ट मैनेजर, क्वॉलिटी एश्यारेंस स्पेशलिस्ट, सिस्टम इंजिनियर, टेक्निकल राइटर्स आदि।
करियर संभावनाएं: यदि करियर ग्रोथ व जॉब के नजरिए से देखा जाए तो इंजिनियरिंग की जितनी भी कोर ब्रांचेज हैं। उनमें से सबसे ज्यादा ग्रोथ व जॉब आईटी के स्टूडेंट्स को मिलती है। मान लीजिए यदि 40 प्रतिशत सभी कोर ब्रांचेज को मिलाकर जॉब मिल रहीं है तो 60 प्रतिशत अकेले आईटी से जुड़े कोर्स करने वालों को मिलती है।
देश की टॉप इंडस्ट्रीज जैसे टाटा कंसल्टेन्सी सर्विसेज, एल एंड टी, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, इरकॉन इंटरनैशनल जैसी तमाम कंपनियों के अलावा मेडिकल सेक्टर, गवर्नमेंट सेक्टर, सेमी गवर्नमेंट सेक्टर में जॉब के अच्छे विकल्प हैं।
सैलरी: करियर की शुरुआत 3 से 4 लाख तक के सालाना पैकेज से होती है और बाद में एक्सपीरियंस के साथ पैकेज बढ़ता जाता है।
देश के टॉप संस्थान:
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ इंफर्मेशन टेक्नॉलजी
बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी
नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी
यदि आप देश के टॉप संस्थानों में ऐडमिशन लेना चाहते हैं तो नैशनल लेवल के इंजिनियरिंग इंट्रेस एग्जाम क्वालिफाई करने होंगे।
सर्टिफिकेट कोर्स इन इंफर्मेशन टेक्नॉलजी
सर्टिफिकेट/डिप्लोमा प्रोग्राम: इंफर्मेशन टेक्नॉलजी की फील्ड में बहुत से ऐसे सर्टिफिकेट/डिप्लोमा कोर्स हैं जिन्हें कर आप बेहतर करियर बना सकते है। जैसे जावा सर्टिफिकेट कोर्स, पाइथन ट्रेनिंग कोर्स, डॉट नेट टेक्नॉलजी कोर्स, नेटवर्किंग, डाटा साइंस ट्रेनिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, वेबसाइट डिजाइनर, डाटा एनालिटिक, डिजिटल मीडिया सिक्यॉरिटरी, साइबर सिक्यॉरिटी, बिग डाटा एनालिसिस, ग्राफिक डिजाइनिंग आदि।

ऑफिस में न करें हर बात साझा
ऑफिस में एकसाथ रहते हुए हमारे कई दोस्त भी बनते हैं जिनसे हम सुख-दुख साझा करते हैं। इस बीच हमें यह याद रखना चाहिए कि किन बातों में समन्वय रखना है। कहीं ऐसा न हो कि बिना सोचे-समझे की गई आपकी किसी बात का बवाल न बन जाए।
अपनी समस्याएं अपने साथियों से साझा न करें पर यह ध्यान रखें कि क्या बताना है और क्या नहीं। बेहद निजी जानकारी या बातें बताने से बचें। हो सकता है कि आप भावुकता में आकर अपनी किसी निजी समस्या को उनसे साझा कर दें और ये बातें दूसरों तक भी पहुंच जाएं।
न करें बॉस की बुराई
बॉस की बुराई कभी भूलकर भी किसी से न करें। कार्यस्थल पर आपका कितना भी अच्छा दोस्त हो लेकिन कभी भी संबंध खराब होने की स्थिति में ये बातें बॉस तक भी पहुंच सकती हैं।
न करें गॉसिप
भले ही आपके ऑफिस में कोई चटपटी गॉसिप चल रही हो, आप इसका हिस्सा कतई न बनें।
अगर आप बॉस से किसी की बात कर के ये सोचते हैं कि आप उनकी नजर में वफादार बन रहे हैं तो यह गलत है। आपकी यह आदत बॉस की नजर में आपको इधर-उधर की बातों में शामिल रहने वाला साबित कर सकती है।
अपने बॉस को प्रभावित ऐसे करें
समय पर पहुंचे
ध्यान रखें कि शुरुआती दिनों में हमेशा समय पर पहुंचे, क्योंकि शुरुआती दिनों में ही छवि बन जाती है। इसलिए कोशिश करें कि समय पर बॉस से पहले उपस्थित रहें ताकि समय और काम के लिए वह आपकी दिलचस्पी देखकर आपसे प्रभावित हो सके। यदि कोई बैठक भी हो तो उसमें भी समय से पहुंच जाएं ताकि ​आपके कारण किसी को कोई तकलीफ न हो।
बीच में न काटे बात
कुछ लोग अपने आपको ज्यादा समझदार दिखाने के लिए बॉस की बात को बीच में काटते हुए बात करते हैं। वह दिखाना चाहते हैं कि उन्हें भी काम के बारे में काफी कुछ पता है लेकिन आप ऐसा कतई न करें। बल्कि जब बॉस की पूरी बात खत्म हो जाए तो अपनी बात पूरी विनम्रता के साथ रखें। ध्यान रखें कि कुछ भी ऐसा न बोलें जिसका असर विपरीत हो और आपकी बनी बनाई छवि बॉस की नजर में खराब हो जाए।
कुछ लोग नई नौकरी में खुद को फ्रेंडली साबित करने के लिए ग्रुप बनाकर गप्पे मारने और दूसरो की बातों में समय व्यतीत करते हैं। पर आप ऐसा बिल्कुल न करें। ध्यान रखें कि शुरुआती दिनों में बॉस की नजर आपके हर काम पर होगी इसलिए ग्रुप बनाने से बचें और अपना ज्यादा से ज्यादा समय अपने काम पर लगाएं। इससे उन्हें लगेगा कि आप इधर—उधर में समय बिताने वाले लोगों में से नहीं हैं।
काम के प्रति गंभीरता रखें
अक्सर नया माहौल होने के कारण काम अच्छे से समझ में नहीं आता और ऐसे में वह दिए गए समय पर पूरा भी नहीं हो पाता। ऐसे में आप थोड़ा देर और रुककर उसे पूरा करके ही जाएं, क्योंकि इससे पता चलेगा कि आप अपने काम के ​प्रति कितने जागरुक है और आपके लिए डेडलाइन कितनी महत्वपूर्ण है।
जब भी कोई नया काम आता है उसमें रुचि लें । आप बॉस से बोलकर उसमें जुड़े और अपनी भागीदारी निभाएं। इससे आपको ज्यादा से ज्यादा बॉस के नजदीक रहने का मौका भी मिलेगा और यदि आपने वह काम अच्छा कर दिया तो इससे आपके नंबर भी बॉस की नजर में बढ़ जाएंगे।

टेलीफोन पर जब हो साक्षात्कार
आजकल ज्यादातर कंपनियां पहले दौर का साक्षात्कार फोन पर लेती हैं क्योंकि ये उम्मीदवारों को शार्टलिस्ट करने के लिए बहुत ही ज्यादा आसान और प्रभावशाली तरीका होता है। साथ ही जो उम्मीदवार दूर रहते हैं उनके लिए भी यह सुविधाजनक रहता है।
बायोडाटा अपने सामने रखें
अपने बायोडाटा के प्रमुख बिंदुओं को हाइलाइट कर अपने सामने रखें जिसे आप साक्षात्कार के दौरान शामिल करना चाहते हैं। ये कंपनी द्वारा पूछे किसी प्रश्न के जवाब देने के दौरान भी आपके काम आएगा। इसके साथ ही एक पेन और नोटपैड रखना भी बेहतर होगा। याद रखें फोन और लैपटॉप पर अपना बायोडाटा ना खोलें। ये कभी भी बंद हो सकते हैं।
आरामदायक माहौल पैदा करें
साक्षात्कार के दौरान शोर-शराबे से दूर रहें। कोई शांत सी जगह खोजें और कोशिश करें की उस वक्त कोई और वहां न आए।
पहले सुनें
पहले कंपनी के मैनेजर को सुनें की वो क्या चाहते हैं उसे एक पेपर पर नोट करें। फिर उनके जरूरत के हिसाब से अपने जवाब दें।
बात करते वक्त अपनी आवाज से अच्छा प्रभाव बनाना भी जरूरी है। ऐसे में साक्षात्कार से पहले अपना गला ठीक रखें और बीच-बीच में पानी पीते रहें। सबसे जरुरी ये है कि अपनी मुस्कुराहट बरकरार रखें।
कोई काम न करें
टेलीफोनिक साक्षात्कार के दौरान कोई भी अन्य काम न करें। इससे आपका साक्षात्कार खराब हो सकता है।

अब ओपन स्कूल के छात्र भी दे सकेंगे नीट
अब एनआईओएस और ओपन स्कूल के स्टूडेंट्स भी सीबीएसई नीट 2018 के लिए आवेदन कर सकते हैं।अनारक्षित श्रेणी और 25 साल से ज्यादा उम्र के उम्मीदवार भी अब परीक्षा दे सकेंगे। जिन छात्रों ने निजी तौर पर 12वीं की परीक्षा पास की है, वे नैशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट दे सकते हैं।
सभी शर्त पूरा करने वाले सभी आवेदक अब अपना ऑनलाइन आवेदन आखिरी तारीख से पहले जमा कर सकते हैं। जिन छात्रों ने 12वीं में बायॉलजी अतिरिक्त विषय के तौर पर ले रखा था, वे भी इसके लिए आवेदन कर सकेंगे।
गौरतलब है कि नीट की शर्तों को लेकर अदालत में याचिका दाखिल की गई थी जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला दिया है। नीट 2018 के लिए 9 मार्च तक पंजीकरण कराया जा सकता है और परीक्षा का आयोजन 6 मई, 2018 को होगा।

इन ऐप से घर बैठे कमाई करें
अगर आप घर बैठे अपनी आमदानी बढाना चाहते हैं तो आपके पास अच्छा अवसर है। इसके लिए बस आपकों इंटरनेट की प्राथमिक जानकारी होनी चाहिये। इसके लिए आजकल कई ऐप आ गये हैं। इन ऐप पर आप अपने काम की कीमत तय कर सकते हैं और आपको हायर करने वाला आपके प्रोजेक्टस देख कर आप को पेमेंट भी कर देता है। आप अपनी पसंद का काम चुनकर उसपर बिडिंग (काम देने वाले के बजट के अनुसार बोली) लगा सकते हैं। काम देने वाले के बजट के अनुसार अगर आप की बोली कम औऱ उसके बजट में हुई तो आपको काम अलॉट हो जाता है। काम मिलने के बाद आपको इसे समय पर पूरा भी करना होता है। इन ऐप में जब आपका पेमेंट किया जाता है, तो कुछ पैसे कमिशन फीस के तौर पर भी काटे जाते हैं। यहां आपको उन पांच ऐप के बारे में बताया जा रहा है, जिनको गूगल प्लेस्टोर में यूज़र्स ने फीडबैक में ठीक-ठाक रेटिंग दी है।
गूगल प्लेस्टोर पर 4.7 की रेटिंग पाने वाली एफी एक फ्रीलांसिंग ऐप है। इस ऐप में दुनियाभर से ‘काम देने वालेऔर ‘काम करने वाले लोग जुड़े हुए हैं। इस ऐप में आपको दुनियाभर के किसी भी कोने से काम देने वाला मिल सकता है। इसके साथ ही आप भी किसी और को काम दे सकते हैं। इस ऐप में यूजर को प्रीमियम व बेसिक सब्सक्रिप्शन के विकल्प मिलते हैं, जिसके आधार पर आपको काम जल्द से जल्द मिलने और अच्छी कमाई होने का दावा किया जाता है। इस ऐप में 20 विभिन्न कैटेगरी हैं, जिसमें लोकेशन के आधार पर काम के चयन जैसे फीचर दिए गए हैं। इस ऐप में यूजर को ब्लॉगिंग, वॉयसओवर, प्रमोशन, डिजिटल मार्केटिंग, वेब डिजाइनिंग से लेकर फोटोग्राफी और कंटेंट से लेकर प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में काम मिलता है।
गूगल प्लेस्टोर पर 4.6 की रेटिंग वाली फ्रीलांसिंग ऐप फिवर आपको 116 तरह की कैटिगरी में काम दिलाने का दावा करती है। इस ऐप पर आप अनुवाद, प्रोडक्शन, स्क्रिप्ट लेखन, वेबसाइट डिजाइनिंग और वॉयसओवर जैसे कई फ्रीलांस काम पा सकते हैं या किसी को काम दे सकते हैं। इस ऐप पर आप जो काम करना चाहते हैं, उसका ब्यौरा भर देने पर काम देने वाला क्लाइंट आपसे संपर्क करता है।
टास्कर्स ऐप को गूगल प्लेस्टोर पर 4.6 रेटिंग मिली हैं। इस ऐप के द्वारा आप देश-विदेश तक के लोगों के लिए काम करने का मौका पा सकते हैं।यह ऐप ब्लॉगिंग, वॉयसओवर, प्रमोशन, डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में काम दिलाने का दावा करता है। भारत में इस ऐप का ऑफिस गुजरात के सूरत शहर में है।
ट्रूलांसर डॉट कॉम ऐप को गूगल प्लेस्टोर पर 4.4 रेटिंग मिली हैं। यहां भी आप काम ढूंढ सकते हैं और दूसरों को काम दे सकते हैं। इस ऐप पर पेमेंट के विकल्प के लिए पेपाल, पेटीएम जैसे वॉलेट माध्यमों का प्रयोग किया जाता है। यहां आप किसी वेब डिजाइनिंग से लेकर फोटोग्राफी और कंटेंट से लेकर प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में काम चुन सकते हैं।
फ्रीलांसर ऐप की गूगल प्लेस्टोर पर 4.1 रेटिंग है। इस ऐप के जरिए आपको अनुवाद, प्रोडक्शन, स्क्रिप्ट लेखन, वेबसाइट डिजाइनिंग और वॉयसओवर जैसे कई फ्रीलांस काम मिल सकते हैं। फ्रीलांसर डॉट कॉम का ऑफिस ऑस्ट्रेलिया में है। यह ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों पर उपलब्ध है।

फ्रीलांस के जरिए कमाई करें
अगर आप नौकरी करने के बाद कुछ काम करके और पैसा कमाना चाहते हैं तो आप फ्रीलांस के क्षेत्र में आ सकते हैं। आप यह काम अपने समय के अनुसार कर सकते हैं और इसके लिए आपको ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी होगी। अपने फील्ड से जुड़े फ्रीलांस काम करें- हर फील्ड से जुड़े फ्रीलांस काम होते हैं, जो कि आपके लिए अच्छी कमाई का जरिया बन सकते हैं। इसलिए आप भी अपने फील्ड के अनुसार दूसरा काम कर सकते हैं और दिन में दो-तीन घंटे काम करके आप अच्छा पैसा कमा सकते हैं।
लोकल प्रोडक्ट बेचें- अगर आप अपने होम टाउन से अलग कहीं रहते हैं तो आप उस शहर में अपने होम टाऊन से जुड़े कुछ फेमस प्रोडक्ट लाकर बेच सकते है। आप छोटे स्तर पर उसका कारोबार भी कर सकते हैं। इन प्रोडक्ट में खाने के सामान से लेकर कपड़े आदि भी शामिल है।
सोशल मीडिया एक्‍सपर्ट बनें- आजकल हर कोई सोशल मीडिया पर काम कर लेता है। अगर आप नौकरी के बाद फ्री रहते हैं तो आप किसी कंपनी या व्यक्ति का सोशल मीडिया हैंडल कर सकते हैं। इसके लिए आपको कुछ खास करने की आवश्कता नहीं है. बस इसके लिए आपके कॉन्टेक्ट होने आवश्यक है।
पीजी का काम शुरू करें- अगर आप नौकरी से वक्त निकाल सकते हैं तो आप अपनी प्रोपर्टी पर या किराए की प्रोपर्टी पर पीजी बना सकते हैं। इसके लिए आपको पीजी में रहने वाले लोगों की व्यवस्था करनी होगी। यह बिजनेस किसी कॉलेज, ऑफिस के पास अच्छा चल सकता है।
कंपनियों के लिए विज्ञापन- विज्ञापन एक बहुत बिजनेस बनकर उभरा है। कई कंपनियां ऐसी हैं जो लोगों को सिर्फ विज्ञापन देखने के पैसे देती हैं। आपको बता दें कि इस तरह की कई वेबसाइट्स हैं जो केवल विज्ञापन पढ़ने के पैसे देती हैं।

 

काउंसलिंग सर्विस की मदद ले सकते हैं छात्र
सीबीएसई यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन ने बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे छात्रों के लिए काउंसलिंग सर्विस शुरू कर दी है। बोर्ड परीक्षाओं के शुरू होने में अब कुछ दिन ही शेष हैं और इसी के साथ ही छात्रों पर पढ़ाई का दबाव भी बढ़ चुका है। ऐसे में छात्रों के लिए काउंसलिंग सर्विस शुरू करना एक उपयोगी कदम की तरह है। जानकारी अनुसार यह काउंसलिंग सेवा 13 अप्रैल 2018 तक जारी रहेगी। इस काउंसलिंग सर्विस को सही तरीके से चलाने के लिए 91 प्रशिक्षित लोगों का चयन किया गया है। इनमें प्राचार्य, प्रशिक्षित काउंसलर्स, साइकोलॉजिस्ट और कुछ खास शिक्षकों की मदद ली जा रही हे। सीबीएसई ने बकायदा स्टेटमेंट जारी कर काउंसलिंग सर्विस की जानकारी दी है। जो छात्र या छाताएं काउंसलिंग का लाभ उठाना चाहते हैं उन्हें एक खास नंबर पर कॉल करना होगा। यह नंबर-1800 11 8004 है, जिस पर छात्र कॉल कर सकते हैं। इस नंबर पर सुबह 8 से रात 10 बजे तक कॉल किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त बोर्ड ने कुछ खास शिक्षकों को भी इस काम के लिए चुना है जो शारीरिक रूप से कमजोर छात्रों की मदद करेंगे। सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के शुरू होने से पहले यह सर्विस पिछले कुछ सालों से देता आ रहा है। टोल फ्री नंबर के अलावा छात्र ऑनलाइन काउंसलिंग के लिए मेल करके भी लाभ उठा सकते हैं। गौरतलब है कि 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 5 मार्च 2018 से शुरू होने जा रही हैं। 0वीं की बोर्ड परीक्षाएं 04 अप्रैल 2018 तक चलेंगी वहीं 12वीं की परीक्षाएं 12 अप्रैल 2018 तक चलने वाली हैं।

आत्मविश्वास से परीक्षा में मिलेगी सफलता
बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। हर कोई अच्छे नंबर लाने के लिए तैयारी में जुटा हुआ है। एग्जाम्स के दौरान तैयारियों को लेकर छात्रों में तनाव का माहौल होना आम बात है। कई बार यह तनाव उनके लिए बेहद नुकसानदेह हो जाता है। आत्मविश्वास की कमी की वजह से तैयारी होने के बावजूद वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। ऐसे में छात्रों को परीक्षा के तनाव से बाहर निकालना बेहद जरूरी हो जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स के बारे में बताने वाले हैं। ये टिप्स परीक्षा का तनाव कम करने में कारगर हो सकते हैं।
हल्का-फुल्का व्यायाम – परीक्षाओं के समय हम सबसे ज्यादा मानसिक श्रम यानी कि दिमागी मेहनत करते हैं। इसके बावजूद हमें शारीरिक व्यायाम करना चाहिए। हल्के-फुल्के व्यायाम आपके दिमाग को तरोताजा करने में काफी मददगार होते हैं। इसके साथ ही कुछ समय खेलना भी कारगर होता है।
दिन में 5-6 बार खाएं – छोटे-छोटे अंतराल पर कुछ न कुछ खाते रहने से शरीर में ऊर्जा का स्तर संतुलित रहता है। परीक्षाओं के दौरान मानसिक मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है। ऐसे में नाश्ता, लंच और डिनर का रेगुलर डाइट प्लान पर्याप्त नहीं होता। परीक्षा के दौरान हेल्दी भोजन की कोशिश करें और कैफीन से परहेज करें।
अच्छे से करें तैयारी – परीक्षाओं को लेकर सबसे ज्यादा तनाव तब होता है जब आपकी तैयारी ठीक से नहीं होती। तैयारी के लिए ठीक से योजना बनायें। हर विषय के अलग-अलग समय निर्धारित कर लें। बोरिंग और कठिन विषयों को तब पढ़ने की कोशिश करें जब आप सबसे ज्यादा फ्रेश माइंड महसूस कर रहे हों। इन विषयों को सुबह के समय पढ़ा जा सकता है। इसके अलावा जो टॉपिक्स आसान हैं उन्हें तब पढ़ने की कोशिश करें जब आप थकान महसूस कर रहे हों।
कॉफी से करें परहेज : विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के दौरान कॉफी, लिकर या फिर शक्तिवर्द्धक औषधियों के इस्तेमाल से परहेज करना चाहिए। कॉफी जहां आपके दिमाग को धीमा करती है वहीं दवाएं और एल्कोहल का सेवन करने से आप वह सब कुछ भूल सकते हैं जो आपने अभी तक पढ़ा है।
पर्याप्त नींद लें : बहुत से लोग परीक्षा से एक दिन पहले रात भर जागकर पढ़ने में विश्वास रखते हैं। यह पूरी तरह से सेहत के प्रतिकूल होता है। पर्याप्त नींद आपके द्वारा तैयार की गई चीजों को याद रखने के लिए बेहद जरूरी है। नींद की कमी की वजह से आपको चिड़चिड़ापन और भूलने जैसी समस्या हो सकती है। डॉक्टर्स के मुताबिक परीक्षा से पहले वाली रात को कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेना जरूरी होता है।

विदेश में एमबीबीएस करने जा रहे है तो रखें ध्यान
अगर आप विदेश में डॉक्टरी पढ़ना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। विदेशी यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को अब जल्द नीट की परीक्षा पास करनी होगी, क्योंकि सरकार उनके लिए यह परीक्षा अनिवार्य करने की योजना बना रही है ताकि सिर्फ सक्षम छात्र ही विदेशों के विश्वविद्यालयों में दाखिला ले सकें। वर्तमान में देश में किसी भी सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने के इच्छुक छात्रों को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पास करनी होती है। यह परीक्षा वर्ष 2016 से अस्तित्व में आयी थी।
एफएमजीई पास करना जरुरी
फिलहाल जो विद्यार्थी चिकित्सा की पढ़ाई करने के लिए विदेश जाते हैं, उनमें करीब 12 से 15 प्रतिशत स्नातक ही मेडिकल ग्रैजुएट्स एक्जामिनेशन (एफएमजीई) की परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाते हैं। इस परीक्षा का आयोजन भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) करता है। विदेश से पढ़ाई कर लौटने वाले छात्रों में से मुश्किल से 12 से 15 प्रतिशत स्नातक ही मेडिकल ग्रैजुएट्स एक्जामिनेशन (एफएमजीई) की परीक्षा पास कर पाते हैं। अगर वे एफएमजीई की परीक्षा पास नहीं करते हैं तो भारत में डॉक्टरी के लिए पंजीकृत नहीं होते पाते हैं।’’
ऐसे मामलों में वे गैर कानूनी रूप से डॉक्टरी का पेशा चलाते हैं जो खतरनाक हो सकता है। इसलिए इस कदम का उद्देश्य यह तय करना है कि सिर्फ सक्षम छात्र ही विदेशों के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिये जायें।’’ वर्तमान में मेडिकल पाठ्यक्रम का अध्ययन करने के इच्छुक छात्रों को भारत के बाहर किसी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिये एमसीआई से आवश्यक सर्टिफिकेट लेना होता है। हर साल करीब 7,000 छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिये विदेश जाते हैं। उनमें से अधिकतर चीन और रूस जाते हैं।
नए प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद भारत से बाहर जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक उन्हीं छात्रों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) दिया जायेगा, जिन्होंने नीट की परीक्षा पास की हो।

12 वीं के बाद करें ये पाठयक्रम
अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल नहीं हुए हैं तो भी 12 वीं के बाद भी आपके पास कैरियर बनाने के कई अवसर उपलब्ध हैं। कई बार छात्रों को समझ नहीं आता कि 12वीं के बाद किस प्रकार वह रोजगार हासिल कर सकते हैं। 12 के बाद भी कई ऐसे पाठयक्रम हैं जिसमें 12 पास दाखिला लेकर अच्छे पैसे कमा सकते हैं।
टूरिज्म कोर्स
अगर आपको घूमना पसंद है तो आप यह कोर्स कर सकते हैं जिसे करने के बाद आपको पैसे कमाने के साथ साथ घूमने का भी मौका मिलेगा। 12वीं के बाद होने वाले टूरिज्म कोर्स करने के बाद अच्छे पैसे कमा सकते हैं। देश में कई कॉलेज यह कोर्स करवा रही है और इसकी फीस भी कई प्रोफेशन कोर्स के मुकाबले कम है।
इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्सेस
अगर आपका सपना बचपन से ही इंजीनियर बनने का रहा है और आप कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पा रहे हैं तो आप इंजीनियरिंग का डिप्लोमा भी कर सकते हैं। 12वीं के बाद आप पॉलिटेक्नीक डिप्लोमा करके इंजीनियरिंग की फील्ड में अच्छा पैसा कमा सकते हैं। कंपनियां भी कुशल डिप्लोमाधारियों को हायर करने में ज्यादा रूचि दिखाती हैं। इसी के साथ इस कोर्स के बाद आप कई सरकारी नौकरियों के भी काबिल हो जाते है।
होटल मैनेजमेंट
12वीं के बाद होटल मैनेजमेंट कोर्स भी अच्छा विकल्प है और आजकल युवाओं में यह काफी लोकप्रिय भी हो रहा है। 12वीं के बाद इस कोर्स को करके आप देश और विदेशों के होटलों में नौकरी कर सकते हैं और अच्छा पैसा कमा सकते हैं।
एनिमेशन एंड मल्टीमीडिया
12 वीं के बाद एनिमेशन और मल्टीमीडिया में कोर्स करके आप आप काम सीख सकते हैं। जिससे आप हजारों ही नहीं लाखों रुपये काम सकते हैं। अगर आप यह कोर्स कर लेते हैं और आप क्रिएटिव हैं तो बहुत पैसा कमा सकते हैं।
अन्य कोर्स
इन कोर्स के अलावा आप कम्प्यूटर के कई कोर्स, अकाउंटिंग कोर्स, इंटीनियर डिजाइनिंग, कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग, जिम इंस्ट्रक्टर, फूड मैनेजमेंट आदि कोर्स भी किए जा सकते हैं। इनमें दक्ष होने पर आप आसानी से करियर बना सकते हैं।

ऐसे होंगे सफल
हर इंसान अपनी जिंदगी में सफल होना होना चाहता है। सफलता पाने के लिए हर व्यक्ति जी तोड़ मेहनत करता है और अपनी मेहनत से ही सफलता पा भी लेते है। अपने करियर को जिंदगी में सफता पाने के लिए सही दिशा में कदम आपको ही उठाने पड़ते है। अपनी जिंदगी को सही तरीके से चलाने के सारी चीजें आप खुद ही योजना बनाते हैं। इसलिए अपने करियर के चुनाव और करियर में आगे बढ़ने के लिए आपको स्वयं को जानने की जरुरत है ताकि आप अपनी कमियों को पहचान कर उनको दूर कर सकते है।
बहाने न बनायें
अगर आप वास्तव में अपने काम को लेकर गंभीर हैं तो बहाने न बनायें। जब लोग अपना काम समय पर और सही तरीके से नहीं कर पाते तो वे दूसरों को दोष देने लगते हैं। यह बहाने सिर्फ आपके काम को ही नहीं, बल्कि आपके कॅरियर ग्राफ को भी प्रभावित करते हैं। साथ ही कुछ लोग अपने काम को दूसरों पर टालने के लिए इन बहानों का सहारा लेने लगते हैं। बाद में यह उनकी आदत में शामिल हो जाता है और वे कभी भी सफलता नहीं हासिल कर पाते।
आत्मविश्वास रखें
किसी भी काम में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले आपको आप पर भरोसा होना चाहिये। जब आप स्वयं ही खुद पर भरोसा नहीं करेंगे तो फिर दूसरे आप पर भरोसा कैसे कर सकते हैं। अगर आपको लगता है कि आप यह काम नहीं कर पाएंगे तो अपने से कहें कि मैं यह कर सकता हूं और दूसरों से बेहतर कर सकता हूं। ऐसा करने से आपके भीतर आत्मविश्वास पैदा होगा। आत्मविश्वास ही वह गुण है जिससे आपकी क्षमताओं में भी इजाफा होता है।

अपना कारोबार शुरु करें
देश में बढ़ती बेरोजगारी देखते हुए अब स्वरोजगार पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में युवा स्टार्टअप के जरिये अपना स्वयं का कारोबार शुरु कर रहें हैं। सरकार भी इसको बढ़ावा दे रही है। स्टार्टअप के तहत दूर दराज के ग्रामीण इलाकों में भी नये तरीके अपना कर कई करोबार शुरु किए जा सकते हैं। इसमें कम निवेश पर भी अच्छी खासी आय हो सकती है।आज हम आपको बात रहे है कुछ ऐसे ही व्यवसायों के बारे में जिन्हें आप कम लागत में ही शुरु कर लाखों रुपये कमा सकते हैं
डेयरी शुरु करें
गांव में रहने वाले अपने पास गाय या भैंस रखते ही हैं। बस एक या दो और गाय या भैंस खरीद कर डेयरी बिजनेस की शुरुआत कर सकते हैं। आपको एक अच्छी गाय 30 हजार रुपए तक की कीमत में और एक भैंस 50 हजार रुपए तक में मिल सकती है। शहरों में दूध की काफी मांग रहती है, इसलिए दूध का बिजनेस फायदेमंद हो सकता है। दूध 50 रुपए प्रति लीटर तक बिक जाता है। दूध की बिक्री के लिए आप डेयरी कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं या फिर स्थानीय स्तर पर दूध बेचने वालों से भी संपर्क कर सकते हैं।
सब्जियों की खेती
धान और गेहूं उगाने के अलावा सब्जियों की खेती आपको मालामाल कर सकती है। अगर आपके पास छोटी सी जमीन भी है तो इसमें आप सब्जी उगा सकते हैं। आजकल तो भारत सरकार देश के अलग अलग हिस्सों में कृषि सेंटर भी खोल रही है जहां आपको कम जमीन में अधिक पैदावार की तकनीक आसानी से मिल जाएगी। मिर्च, गोभी, टमाटर जैसी सब्जियां जमकर मुनाफा देती हैं।
मछली पालन
मछली पालन एक अच्छा बिजनेस साबित हो सकता है। शहरों में मछली की मांग काफी ज्यादा है। आप मछली पालन के लिए छोटी जमीन से काम शुरू कर सकते हैं। जमीन खोदने के बाद निकलने वाली मिट्टी तो बेच ही सकते हैं, जो गड्ढा बनेगा उसे तालाब की शक्ल देकर जलस्तर बढ़ाने में भी मदद कर सकते हैं। ये कारोबार आपको लाखों की कमाई करा सकता है।
फूलों की खेती
आजकल हर त्योहारों, कार्यक्रमों, शादियों और पूजा-पाठ में फूलों की मांग काफी ज्यादा होती है। आप अपनी जमीन पर फूलों की खेती कर सकते हैं। सूरजमुखी, गुलाब, गेंदे की खेती बेहद फायदे की है। फूल बिक्रेता या कंपनियों से संपर्क कर आप अपने फूल बेच सकते हैं।
पेड़ लगायें
अगर आपके पास एक या दो बीघे की भी खेती है तो आप उसमें शीशम, सागौन जैसे बेशकीमती पेड़ लगा सकते हैं। अच्छे तरीके से लगाए गए ये पेड़ 8-10 साल बाद आपको करोड़पति बना सकते हैं। एक शीशम का पेड़ 40 हजार रुपए में बिक जाता है। सागौन का पेड़ तो उससे भी कीमती है।

 

तो सीधे बन सकेंगे सहायक प्राध्यापक
उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की भर्ती के लिए यूजीसी न्यूनतम योग्यता से जुड़े नए नियम बना रहा है। इसी नियम में यह प्रावधान किया गया है। यूजीसी के मसौदे में शामिल नियमों के मुताबिक कला, वाणिज्य, मानविकीय, शिक्षा, विधि, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, भाषा, पुस्तकालय विज्ञान, पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय में सहायक प्राध्यापक की सीधी भर्ती में यह नियम लागू होगा कि यदि आपने दुनिया के शीर्ष-500 सूची में रहे किसी उच्च शिक्षा संस्थान से पीएचडी की है तो आपको सहायक प्राध्यापक बनने के लिए यूजीसी या सीएसआईआर की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) पास करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दुनिया के प्रसिद्ध शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों की रैंकिंग जैसे एजुकेशनल रैंकिंग और एकेडमिक रैंकिंग ऑफ वर्ल्ड यूनिवर्सिटीज में कभी भी शीर्ष 500 में स्थान पाने वाले किसी भी संस्थान से पीएचडी करने वाले छात्र-छात्राओं को यह लाभ मिलेगा। अपनी पीएचडी के आधार पर ही आप सहायक प्राध्यापक पद के योग्य हो जाएंगे।
सीएसआईआर की परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ती है
वर्तमान नियमों के मुताबिक किसी भी संस्थान से पीएचडी करने वाले छात्र-छात्रा को भारतीय विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में बतौर शिक्षक पढ़ाने के लिए यूजीसी या सीएसआईआर की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ती है। यूजीसी इन मसौदा नियमों पर संबंधित पक्षों से चर्चा करेगा। यदि इसमें कोई बड़े बदलाव नहीं हुए तो नए अकादमिक सत्र से पहले इसे लागू कर दिया जाएगा।
दो भारतीय ही शीर्ष 500 में शामिल
टॉप 500 संस्थानों में वर्ष 2018 की रैंकिंग में सिर्फ भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरू और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई को ही स्थान दिया गया है। इस रैंकिंग में पिछले साल आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास भी शीर्ष 500 में शामिल थे।
वर्ष 2018 की क्यूएस रैंकिंग में शीर्ष-500 संस्थानों में भारत के आठ उच्च शिक्षा संस्थानों को जगह दी गई है। इसमें आईआईएससी-बेंगलुरू, आईआईटी-मुंबई, आईआईटी-दिल्ली, आईआईटी-कानपुर, आईआईटी-मद्रास, आईआईटी-खडग़पुर, आईआईटी-रूड़की और दिल्ली-विश्वविद्यालय शामिल है। पिछले साल आईआईटी-गुवाहाटी भी इसमें शामिल था।

 

सीबीएसई 12वीं की गणित परीक्षा की ऐसे करें तैयारी
परीक्षाएं करीब है और ऐसे में छात्रों पर तैयारी का दबाव है। सीबीएसई 12वीं में गणित के पेपर की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि 12वें के गणित संबंधित प्रश्न कई प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में भी पूछे जाते हैं। गणित को सबसे कठिन विषय माना जाता है। अगर आप गणित के पेपर के लिए पूरी और सही तैयारी करेंगे तो ये कई प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में भी आपके काम आएगी।
एनसीआरटीई की किताब का पूरा अभ्यास करें
गणित की परीक्षा की तैयारी करने के लिए एनसीईआरटीई की गणित की पार्ट 1 और पार्ट 2 किताब का अभ्यास करना बेहद जरूरी है। बोर्ड परीक्षा में आने वाले पेपर के लिए एनसीआरटीई की किताब सबसे अच्छी क्योंकि इससे सभी टॉपिक को बेहतर और आसान तरीके से समझा जा सकता है। एनसीआरटीई की किताब का पूरा अभ्यास करने के बाद परीक्षार्थी चाहें तो आर एस अग्रवाल या आरडी शर्मा से भी अभ्यास कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि ज्यादा किताबों का इस्तेमाल करने से संशय हो सकता है इसलिए किताबों की संख्या सीमित रखें।
सभी चैप्टर को बराबर अहमियत दें
परीक्षा में गणित के विभिन्न चैप्टरों की वेटेज अलग-अलग होती है। पहली बार पढ़ते समय सभी चैप्टरों को समान अहमियत दें। सबसे पहले सभी चैप्टरों के सार को समझने की कोशिश करें। एक चैप्टर पूरा पढ़ने के बाद उससे संबंधित सभी प्रश्नों का अभ्यास करें। दूसरी किताबों में उस चैप्टर से संबंधित प्रश्नों का भी अभ्यास करें। एक चैप्टर का अभ्यास पूरा करने के बाद ही दूसरे चैप्टर को पढ़ने की शुरुआत करें। जब सभी चैप्टर पूरे हो जाएं तब पिछले साल के सीबीएसई के प्रश्नपत्रों का अभ्यास करें।
परीक्षा से ठीक पहले सीबीएसई के पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास करने से पढ़ी हुई चीजें देर तक जहन में रहती है। पुराने प्रश्नपत्रों के सेट हल करने से न सिर्फ विभिन्न चैप्टरों के अंकों का पता चलता है बल्कि विभिन्न चैप्टरों से पूछे जाने वाले सवाल का पैटर्न भी पता चलता है। सीबीएसई के प्रश्नपत्रों के पैटर्न में ज्यादा बदलाव नहीं होता।
कैलकुलस पर ज्यादा ध्यान दें
एक बार सारे चैप्टरों का पूरा अभ्यास करने के बाद कैलकुलस पर ज्यादा ध्यान दें क्योंकि प्रश्नपत्र में कैलकुलस का मार्क्स वेटेज ज्यादा होता है। इसके साथ ही प्रोबैबलिटी चैप्टर का भी जमकर अध्ययन करें क्योंकि ये ज्यादा अंकों वाले टॉपिक हैं। अगर आप सैंपल पेपर हल करेंगे तो पाएंगे कि हर साल प्रोबैबलिटी के प्रश्नों का पैटर्न एक जैसा ही होता है। सीबीएसई बोर्ड सैंपल पेपर हल करने का अभ्यास करने से परीक्षा में समय प्रबंधन में भी आसानी होती है।
विस्तार से प्रश्नों का जवाब दें
परीक्षा में प्रश्न पत्र हल करते समय अपने सभी जवाब विस्तारपूर्वक दें। इससे परीक्षक को पेपर की जांच करने में आसानी होती है। प्रूफ वाले सवाल हल करते समय हर अंक और स्टेप को विस्तार से लिखें। बीच के स्टेप न भूलें क्योंकि इससे मार्क्स कट सकते हैं। हर एक स्टेप लिखना बेहद जरूरी है।
विषय अनुसार अंक
रीलेशन एंड फंक्शन – 10 फीसदी
ऐलजेबरा – 13 फीसदी

कैलकुलस – 44 फीसदी

वेकटर्स एंड थ्री डाइमेंशनल ज्योमेट्री – 17 फीसदी

लीनियर प्रोग्रामिंग – 06 फीसदी

प्रोबैबलिटी – फीसदी

आईआईटी एडवांस परीक्षा में एक साथ देख सकेंगे हिंदी-अंग्रेजी में सवाल
इस साल होने वाली आईआईटी एडवांस परीक्षा में छात्र अपनी इच्छानुसार अंग्रेजी और हिंदी में प्रश्नों को देख सकेंगे। पूर्ण रूप से ऑनलाइन हो रही परीक्षा में छात्रों के लिए विकल्प उपलब्ध होगा। इससे पहले परीक्षा ऑफलाइन परीक्षा होती थी और छात्रों को अंग्रेजी या हिंदी में प्रश्नपत्र मिलते थे। वर्ष 2018 की जेईई एडवांस परीक्षा आईआईटी कानपुर आयोजित कर रहा है। इस संबंध में उसने विवरणिका जारी कर दी है। इसके मुताबिक जेईई एडवांस के लिए पंजीकरण 2 मई से शुरू होंगे और ये 7 मई तक किए जाएंगे। जेईई एडवांस परीक्षा 20 मई को सुबह 9 बजे से 12 बजे व दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच होगी।
यह पहली बार है जब छात्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक साथ सवाल देख सकेंगे। अब तक परीक्षा ऑफलाइन होने के कारण प्रश्नपत्र हिंदी या अंग्रेजी में ही आता था। ऑनलाइन प्रश्नपत्र की खास बात यह भी रहेगी कि छात्र स्क्रीन पर एक साथ सभी सवाल देख पाएंगे। इसके साथ ही कितने सवाल हल कर दिए हैं, कितने शेष हैं और कितनों को समीक्षा करने के लिए रखा है, इसकी जानकारी अलग-अलग रंगों में स्क्रीन पर दिखेगी। हालांकि, छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा के साथ-साथ उन पन्नों को भी जमा करना होगा, जिसपर उन्होंने रफ काम किया है।
रैकिंग के नियमों में भी बदलाव
अकसर दो छात्रों के एक ही अंक होने पर रैंकिंग निर्धारित करने में समस्या आती है। इसके मद्देनजर इसे स्पष्ट किया गया है। अब समान अंक मिलने पर उस छात्र की रैकिंग ऊपर होगी, जिसे कम नकारात्मक अंक मिले हैं। अगर इस कसौटी पर भी दोनों छात्रों के समान अंक होंगे तो पहले गणित और फिर भौतिकशास्त्र में मिले अंक के आधार पर रैंकिंग तय की जाएगी।

इस प्रकार बढ़ेगी प्रोडक्टिविटी
अगर आप ऑफिस के काम में दबाव का अनुभव कर रहे हैं और बेहतर परिणाम नहीं मिल रहा है। तो कुछ उपाय अपनाकर सफलता हासिल कर सकते हैं। इनसे ऑफिस में आपकी प्रोडक्टिविटी तो बढ़ेगी ही साथ ही काम का माहौल पहले से ज्‍यादा बेहतर हो जाएगा।
लंबी सैर वाले ब्रेक का इंतजार किए बिना चार छोटी वॉक लीजिए और आप ऐसा कर 11 घंटे तक अपना मूड फ्रेश बनाए रख सकते हैं।
पौधा रोपें, फल पाएं।
अपने डेस्क पर एक छोटा पौधा रख लीजिए कुदरत के करीब रहने से दबाव खुद ब खुद कम होने लगता है।
वर्क रिपोर्ट के अलावा नॉवेल भी पढ़िए।
जब कभी लोग नॉवेल पढ़कर काम करना शुरू करेंगे, तो दिमाग ज्यादा तेज काम करता है।
नींद यानी नई ताजगी और उर्जा।
काम के बीच में पावर नैप (झपकी) लेने से अलर्टनेस भी आती है और काम भी बेहतर होता है। बोरियत से निपटकर रिचार्ज होने का यह जोरदार तरीका है।
ईमेल से ऐसे निपटें
सेनबॉक्स, मेलस्टॉर्म या इंकी जैसे मेल सोर्टिंग सर्विस का फायदा उठकर अपने भारी- भरकम इनबॉक्स की दिक्कत से पार पा सकते हैं।
पानी बड़े काम की चीज है।
कॉफी या चाय भी ताजगी के लिए अच्छे हैं, लेकिन इस मामले में पानी का मुकाबला कोई नहीं कर सकता।
मजाक करें, खुश रहें।
थोड़ा बहुत हंसी- मजाक ऑफिस में ना केवल माहौल को हल्का बनाता है, बल्कि प्रोडक्टिविटी भी बढ़ाता है।
स्नैक टाइम।
डार्क चॉकलेट, केले या बादाम ऐसे ब्रेक हैं, जो दिमाग तेज चलाते हैं, साथ ही ताकत भी देते हैं।
खुशबू से काम बनता है।
दफ्तर में सुंगध भी काम की रफ्तार और असर बढ़ाती है।
नई धुन, नया गाना।
म्यूजिक से भी काम में बेहतरी आती है लेकिन ऐसा म्यूजिक चुनिए, जिसमें बोल ना हों, मद्धम संगीत का जादू असरदार है।

बीएचयू में प्रवेश के लिए करें ऑनलाइन आवेदन
No Imageबीएचयू में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। पहले ही दिन ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट के विविध पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए करीब एक हजार आवेदन हुए। ऑनलाईन फार्म में इस बार बदलाव किया गया है। अब बिना आधार नम्बर के फार्म नहीं भरा जा सकेगा। आवेदन की अंतिम तिथि 21 फरवरी है।
बीएचयू का प्रवेश फार्म मोबाइल ओरियंटेड है। अभ्यर्थी को ऑनलाइन फार्म भरते समय रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर भी देना अनिवार्य है। इसी पर फार्म व प्रवेश परीक्षा के अलावा कटऑफ लिस्ट की जानकारी दी जाएगी। ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के लिए होने वाले सभी आवेदन आधार से लिंक कर दिए गए हैं। 15 से 29 अप्रैल तक ग्रेजुएट तथा 13 से 27 मई तक पोस्ट ग्रेजुएट की प्रवेश परीक्षाएं संपन्न कराने की योजना है।
इसबार बीएचयू प्रवेश परीक्षा के लिए चार नए सेंटर रांची, पटना, रायपुर तथा झांसी में बनाये गये हैं। इनके अलावा वाराणसी के साथ ही मिर्जापुर, गोरखपुर, लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, भोपाल, वडोदरा, गुवाहाटी, दीमापुर, कोचि, जयपुर, एलहाबाद तथा भुवनेश्वर में भी परीक्षाएं होंगी।
बीएचयू में ऑनलाइन आवेदन के लिए बेवसाइट के लॉगइन कर आवेदन पत्र तथा परीक्षा से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जम्मू कश्मीर, असम और मेघालय के उन अभ्यर्थियों को छोड़कर जिनके पास आधार संख्या नहीं है, सभी भारतीय नागरिक अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के समय आधार के प्रमाणीकरण से गुजरना होगा।

इग्नू में एमफिल-पीएचडी में प्रवेश शुरु
इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में साल 2018 के लिए एम.फिल और पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गयी है।
इग्नू के इकाई के निदेशक ने बयान जारी करते हुए कहा कि इग्नू ने जुलाई 2018 सत्र के लिए पी.एच.डी और एम.फिल कोर्सेज में एडमिशन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षा केन्द्रों पर 4 मार्च को आयोजित होगी। इसमें आवेदन करने के लिए अंतिम तिथि 16 फरवरी है।
एम.फिल में प्रवेश्
एम.फिल. में समाज शास्त्र, राजनीति शास्त्र, अर्थ शास्त्र, भूगोल(जियोग्राफी), अनुवाद अध्ययन, समाज सेवा, वाणिज्य, रसायन और डिस्टेंस एजुकेशन के शिक्षा के लिए आवेदन मांगे गए हैं। अर्थशास्त्र विषय को छोड़कर सभी विषयों में प्रवेश, परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। वहीं छात्र अर्थशास्त्र के प्रवेश के मानदंडों को यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर देखा जाकर देख सकते हैं।
पीएचडी में प्रवेश
पीएचडी में प्रवेश के लिए फिजियोलॉजी, मानव-शास्त्र, समाज शास्त्र, पुस्तकालय और सूचना विज्ञान, राजनीति शास्त्र, लोक प्रशासन, इतिहास, लिंग और विकास अध्ययन, महिला अध्ययन, भूगोल, अनुवाद अध्ययन, सांख्यिकी, भोजन और पोषण विज्ञान, पर्यावरणीय अध्ययन, भूविज्ञान, प्रबंधन, जीवन विज्ञान, वाणिज्य, हिन्दी, दूरस्थ शिक्षा, नर्सिग, समाज सेवा, भौतिकी, रसायन और जैवरसायन के लिए आवेदन मांगे हैं। जो छात्र इस इस साल इग्नू में पीएचडी और एम.फिल में एडमिशन लेना चाहते हैं, वह आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

गार्डन डिजाइनिंग में बनाएं करियर
अगर आप प्रकृति के करीब हैं और आपकी रुचि पेड़ पौधों को लगाने और बगीचों को संवारने में है तो आप गार्डन डिजाइनिंग (बगीचों को सजाने और संवारने) में भी अपना करियर बना सकते हैं। आज के दौर में युवाओं के सामने करियर बनाने के काफी विकल्प मौजूद हैं। अगर आपको प्रकृति से बेहद प्रेम हैं, तो यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें करियर बनाकर अच्छी खासी कमाई हो सकती हैं। गार्डन डिजाइनिंग की मांग लगातार बढ़ रही है। गार्डन डिजाइनिंग में करियर के लिए होनी चाहिये ये योग्यताएं।
क्रिएटिव होना जरुरी
गार्डन डिजाइनर्स बनने के लिए क्रिएटिव होना बेहद जरूरी है। इसके लिए आपको प्रकृति से प्रेम तथा लगाव होना आवश्यक है, क्योंकि इसमें ज्यादा समय प्रकृति के बीच ही बीतता है। साथ ही गार्डन डिजाइनिंग में धैर्य की बहुत जरूरत होती है।
अधिकांश वे लोग इस पेशे में आते हैं, जिनके पास जिनके पास लैंडस्केप आर्किटेक्चर, हॉर्टीकल्चर, गार्डनिंग आदि में डिग्री होती है। भारत में कुछ इंस्टीट्यूट्स गार्डनिंग और लैंडस्केपिंग में शॉर्ट ऑर लॉन्ग टर्म कोर्स करवाते हैं। वहीं अगर आप कुछ एडवांस करना चाहते हैं, तो फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केप गार्डनिंग में सर्टिफिकेट कोर्स करने के अलावा लैंडस्केपिंग में मास्टर्स कर सकते हैं। सर्टिफिकेट कोर्स लिए स्टूडेंट्स का हायर सेकंडरी, जबकि मास्टर्स के लिए आर्किटेक्चर में ग्रेजुएट होना जरूरी है।
किसी भी गार्डन या लैंडस्केप की आर्ट डिजाइनिंग को गार्डन डिजाइनिंग कहते हैं। इस क्षेत्र में धैर्य की बहुत जरूरत होती है. इसमें आपको शारीरिक रूप से भी सक्षम होना होगा, क्योंकि आठ से दस घंटे मैदान में काम करना पड़ सकता है। इसके अलावा, अपने कस्टमर्स से अच्छे संबंध होने चाहिए, ताकि वे बार-बार आपकी सेवा लेने आएं।
विदेश में अच्छी संभावनाएं
भारत में एक गार्डन डिजाइनर 1.5 से 4 लाख रुपए के बीच आसानी से कमा सकता है। वहीं अनुभव होने पर तो और भी अधिक कमाई होती है। वैसे ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन जैसे देशों में इससे ज्यादा पैकेज पर काम करने के विकल्प होते हैं। वहीं धीरे-धीरे भारत में इसका मार्केट अभी विकसित हो रहा है। कॉर्पोरेट कंपनीज भी वर्किंग प्लेस को एनवायर्नमेंट फ्रैंडली बनाने पर जोर देनी लगी हैं। गार्डन डिजाइनर्स लैंडस्केप कॉन्ट्रैक्टिंग, गार्डन कंसल्टेंसी, गार्डन राइटिंग और रिटेल नर्सरी जैसे सेक्टर्स में काम कर सकते हैं। अगर गार्डन डिजाइनर्स बनकर बाग -बगीचों की दुनिया में छाना चाहते हैं तो आप सिर्फ अपनी किएटिविटी पर ध्यान दें। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें क्रिएटिविटी ही सबसे अहम होती है।

इन पेशेवरों की रहेगी मांग
साल 2018 में नौकरियों को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस साल कुछ खास स्किल्स वाले पेशेवरों के लिए खूब मौके होंगे।
डेटा पर जोर
आप आपरेशंस, सेल्स, फाइनैंस या टेक्नॉलजी किसी भी फंक्शन में कार्य करें, आपके डेटा स्किल्स के आधार पर आपके योगदान बढ़ या घट सकते हैं। आपके एंप्लॉयर बड़ी मात्रा में डेटा प्रोड्यूस करते हैं और आपसे उसे डेटा का इस्तेमाल आइडिया पेश करने या नतीजों की निगरानी के लिए करने की उम्मीद रखते हैं।
प्रॉडक्ट के लिए सलूशन
प्रॉडक्ट डिजाइन आइडिया को उन प्रॉडक्ट्स में बदलना है जो बिजनस मुनाफे के साथ बेचते हैं। आप बड़ी समस्याओं का हल निकालने, कस्टमर की जरूरतों, बिजनस मॉडल और कॉस्ट को समझने के साथ अच्छी वैल्यू बनाते हैं।
कॉस्ट और रेवेन्यू घटाने पर जोर
जब कंपनी के सरवाइवल पर संकट हो तो उसे ऐसे जरूरतें होती है जिनसे कॉस्ट कम हो और नतीजे बेहतर रहें। इसके लिए आपको कॉस्ट और रेवेन्यू की बेहतर जानकारी होनी चाहिए। अपनी कंपनी की वेरिएबल कॉस्ट और फिक्स्ड कॉस्ट के बारे में जानें। प्रत्येक प्रोसेस में समय या धन के लिहाज से सोचें।
बेचने की कला को अपनाएं
यह स्वीकार करें कि आप जन्म से ही सेल्स से जुड़े हैं। यह जानें कि कौन सी चीज सबसे बेहतर है और अपने सेल्स स्किल्स में सुधार करना जारी रखें। आपके एंप्लॉयर को इंटरनल टीमों, मैनेजर, क्लाइंट्स और वेंडर के साथ बेहतर डील के लिए आपके सेल्स स्किल्स की जरूरत है।

स्टार्ट-अप से करें कमाई
अगर आप कारोबार करना चाहते हैं पर आपके पास बजट कम है तो आप स्टार्ट-अप से अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। इसमें निवेश भी कम करना होगा और आप अच्छा पैसा भी कमा सकते हैं। अगर आप इन बिजनेस में क्रिएटिव और मेहनत से काम करेंगे तो आप जल्द ही हर महीना लाखों रुपये कमा सकते हैं।
इवेंट मैनेजमैंट – आजकल इवेंट का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। खास बात ये है कि इसमें आपको किसी खास डिग्री की आवश्यकता नहीं है और आप क्रिएटिव तरीके से काम करके इसमें पैसा कमा सकते हैं। इवेंट में आप वेडिंग, ऑफिशियल प्रोग्राम, पार्टी आदि की अरेजमेंट कर सकते हैं और इसमें आपको निवेश नहीं करना होता, सिर्फ इवेंट की व्यवस्था करनी होती है। आप अच्छे संपर्क बनाकर इसमें पैसे कमा सकते हैं।
ऑटो गैराज- आपको सुनकर भले ही ये अजीब लगे, लेकिन कई लोग इससे अच्छा पैसा कमा रहे हैं। यह गैराज किसी एक दुकान पर नहीं होगा, बल्कि यह डिमांड पर कहीं जाएगा। मतलब आजकल गाड़ियों की संख्या अधिक हो गई और बीच रास्ते में गाड़ी खराब हो जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आप ऐसे लोगों की मदद कर पैसे कमा सकते हैं।
ड्राइविंग स्कूल – देश में कारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ड्राइविंग सीखने वालों की संख्या भी बड़ी है। ऐसे में ड्राइविंग स्कूल चलाना भी एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इस काम को करने के लिए शुरुआती तौर पर आपके पास सिर्फ एक कार होना जरूरी है। जिससे आप दूसरों को ड्राइविंग सिखा सकें।
होम बेस्ड फूड सर्विस- घर से बाहर दूसरे शहरों में रह रहे लोगों के लिए घर का खाना एक सपने जैसा होता है। इसलिए आप इन शहरों में टिफिन आदि का कारोबार करके आप कम इनवेस्ट में अधिक पैसे कमा सकते हैं। इसकी पब्लिसिटी के लिए आप सोशल मीडिया या किसी ऐप का सहारा ले सकते हैं।
होम सर्विस- इस होम सर्विस में आप कपड़ों से लेकर घर,गाड़ी आदि तक का काम कर सकते हैं क्योंकि लोगों के पास काम की व्यस्तता की वजह से यह सब काम करने का वक्त नहीं होता है। ऐसे में आप उनके लिए ऑनलाइन रुप से ये काम करके अच्छे पैसे कमा सकते हैं। विदेशों और मेट्रो सिटी में कई लोग इस तरह से कमाई कर रहे हैं।
ट्रांसलेटर- यह एक फ्रीलांस काम की तरह है। इस काम को आप किसी बिजनेस या नौकरी के साथ भी कर सकते हैं। आप यह भाषाओं के लिए कर सकते हैं। आजकल कई क्षेत्रीय भाषाओं के लिए भी कई लोगों की मांग है।
सोशल मीडिया कंसलटेंट- आज प्रचार करने का सबसे अच्छा साधन है सोशल मीडिया। हर कोई खुद के लिए या अपनी संस्था के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले सकते हैं। ऐसे में आप सोशल मीडिया से संबंधित कोई कोर्स करके या इसके बारे में पढ़कर आप पैसे कमा सकते हैं। इसके लिए आपको कई लोगों के सोशल अकाउंट संभालने होंगे।

मोटिवेशनल क्षेत्र में बनायें कैरियर
देश भर में अवसाद के बढ़ते मामलों को देखते हुए मोटिवेशनल स्पीकर के क्षेत्र में भी आप कैरियर बना सकते हैं। आजकल 22 से 25 साल के उम्र के लोग भी अवसाद के शिकार हो जाते है। जिस तरह अवसाद तेजी से बढ़ रहा है, उसी के साथ मोटिवेशनल स्पीकर की मांग भी बाजार में बढ़ती जा रही है। अगर आप अपनी बातों से लोगों को प्रेरित कर सकते हैं तो आप आपमें मोटिवेशनल स्पीकर बनने की क्षमता है।
मोटिवेशनल स्पीकर्स कुछ भी शुरू करने से पहले लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। इसके बाद ही वे उन्हें प्रेरित करने की शुरुआत करते हैं।
इसके लिए आपको अच्छे-खासे होमवर्क की जरूरत पड़ती है।
प्रेरित करते हुए महान लोगों की बातों के उदाहरण के साथ प्रस्तुतीकरण से कही हुई बात को समझाना पड़ता है।
ये एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें आप लोगों से बात करके अच्छी कमाई कर सकते हैं।
यह एक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण करियर है।
इस क्षेत्र में आपकी सफलता या असफलता उन दर्शकों पर निर्भर करती है, जिसे आप प्रेरित कर रहे हैं। यदि आप लोगों में बातों से जोश भर देते हैं तो यकीन मानें आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
इस क्षेत्र के लिए विषय का विस्तृत ज्ञान होना बहुत जरूरी है। इसके लिए फिलॉस्फी से लेकर लिटरेचर तक हर तरह की किताबें पढ़नी चाहिए। ताजा मामलों से भी अपने को अपडेट रखना चाहिए।
कोर्सेज
कुछ प्रबंधन स्कूलों में स्पीकिंग पावर पर काम करवाया जाता है। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप मोटिवेशनल स्पीकर बनने के लिए मैनेजमेंट कोर्स ही करें। इस करियर की जरूरत को ध्यान में रखते हुए मजबूत इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच बनाएं रखें।
कमाई
मोटिवेशनल स्पीकर की आमदनी कम से कम 40-50 हजार से शुरू होकर लाखों में होती है। यदि किसी स्पीकर की कोई किताब नाम कमा लेती है अथवा वह अपने दम पर कोई बड़ा काम कर जाता है तो इसकी मांग और बढ़ जाती है।
अवसर
आजकल बहुत सी कंपनियां, एजेंसियां, एनजीओ, मैनेजमेंट सहित अन्य दूसरे स्कूल-कॉलेज मोटिवेशनल स्पीकर को नियुक्त करने लगे हैं। इसके अलावा कुछ खास कार्यक्रमों में भी मोटिवेशनल स्पीकर्स को आंमत्रित किया जाता है।
प्रमुख संस्थान हैं।
फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट
टाई हॉवर्ड मोटिवेशनल स्पीकर ट्रेनिंग स्कूल

केट में गैर तकनीकी छात्रों को भी मिल रही सफलता
देश के टॉप मैनेजमेंट स्कूलों में प्रवेश् के लिए हुए कॉमन ऐडमिशन टेस्ट (कैट) के इस बार के परिणाम कुछ अलग रहे हैं। इसमें सौ फीसदी हासिल करने वाले 20 आवेदकों में दो महिलाएं और तीन गैर तकनीकी क्षेत्र से हैं। 2016 में भी कैट में 20 छात्रों ने सौ फीसदी अंक हासिल किये थे पर वे सभी पुरुष इंजिनियर थे।
पिछले पांच वर्षों में 100 फीसदी लाने वाले लगभग सभी छात्र इंजिनियरिंग से जुड़े थे। पिछले वर्ष कोई महिला टॉपर नहीं थी। इससे पिछले दो वर्षों में से प्रत्येक में एक महिला टॉपर रही थी।
26 नवंबर 2017 को कैट की परीक्षा में 1,99,632 उम्मीदवार शामिल हुए थे। यह पिछले तीन वर्षों में कैट देने वाले उम्मीदवारों की सबसे बड़ी संख्या थी। देश के 20 इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) के अलावा एफएमएस, एसपीजेआईएमआर, एमडीआई, एनआईटीआईई, जेबीआईएमएस जैसे टॉप बिजनस स्कूल अपने फ्लैगशिप प्रोग्राम में ऐडमिशन के लिए कैट के स्कोर स्वीकार करते हैं। देश के आईआईएम में लगभग 4,000 सीटें हैं।
पिछले कई वर्षों से आईआईएम में पढ़ने वालों में पुरुष और इंजिनियरों की बड़ी संख्या होती है। अब आईआईएम में अधिक डायवर्सिटी लाने की कोशिश की जा रही है। कैट में अब विविधता बढ़ाने के प्रयास जारी है। इससे अलग-अलग विषयों के छात्रों और महिलाओं को कैट की परीक्षा देने का प्रोत्साहन मिल रहा है। 2017 की परीक्षा में महिला उम्मीदवारों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई थी।

साइबर सिक्यॉरिटी कोर्स जनवरी से होगा शुरु
दिल्ली यूनिवर्सिटी जनवरी से साइबर सिक्यॉरिटी का कोर्स शुरू कर रहा है। डीयू इस कोर्स को इंस्टिट्यूट ऑफ साइबर सिक्यॉरिटी एंड लॉ के तहत सितंबर में लॉन्च करने वाला था, मगर पूरे इंतजाम ना होने की वजह से यह लेट हो गया।
हालांकि, अब ‘पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा इन साइबर सिक्यॉरिटी और लॉ’ प्रोग्राम जनवरी से शुरू होने वाला है। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. तरुण दास ने बताया, इसे जल्द शुरू किया जाएगा, पूरी उम्मीद है कि यह जनवरी में शुरू हो जाए।
यह एक्सपर्टाइज कोर्स है। इसे साइबर सिक्यॉरिटी के लिए एक्सपर्ट प्रफेशनल तैयार करने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। वर्चुअल वर्ल्ड, वेबसाइट, सोशल मीडिया एक्सपर्ट, इंडस्ट्रियल ऐप्लिकेशंस, मोबाइल डेटा, क्लाउड इंटरफेस में प्रफेशनल्स तैयार करने के लिए यह कोर्स कारगर होगा।

कैरियर मार्गदर्शन है अहम
जीवन में कैरियर मार्गदर्शन सबसे अहम है। इसके जरिये ही हम सही राह पकड़ पाते हैं। यह एक ऐसा महत्वपूर्ण विषय है जिसका सही चयन करना बहुत ही जरूरी है। सही कैरियर मार्गदर्शन से ही आप अपने इच्छा अनुसार कैरियर के बारे में जान सकते हैं और यह भी जान सकते हैं कि क्या वह व्यवसाय या कैरियर आपके लिए सही है या नहीं । गलत कैरियर मार्गदर्शन से आपका जीवन बर्बाद हो सकता है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में व्यवसाय ही ऐसा चीज है जिसके माध्यम से अत्यधिक ज्ञान के साथ-साथ वह पैसे कमा सकता है और अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है।
आप जरूर सोचने लगेंगे कि कौनसे कैरियर या व्यवसाय से आपको ज्यादा पैसे मिलेंगे। पर लोग यह नहीं सोचते की उस कैरियर या व्यवसाय से जुड़ने को अपनाने के बाद वह कैसे उस कैरियर के माध्यम से सफल हो सकते हैं या लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे ।
बहुत सारे व्यक्ति अपना कैरियर चुनने से पहले ही अहम बातों को भूल जाते हैं –
अपने आपसे पूछना कि आखिर वह कैरियर किस पक्के कारण से उसके लिए सही है ।
सबसे मुख्य बात सही करियर को चुनने समय यह है कि आप अपने करियर से कितने खुश हैं। वाही सही है जो दिल को खुशी दे। आपके लिए सही करियर का चुनाव आप और आपका ज्ञान स्वयं है। आपको वही करियर जमेगा जिसके विषय में आपको ज्ञान है और जिस क्षेत्र में आपको ज्यादा जानकारी है।
जबरदस्ती में चुने हुए करियर से कभी भी सफलता नहीं मिलती। ऐसे चुनाव से मात्र मानसिक तनाव और जीवन बर्बाद होता है क्योंकि ऐसे लोगों को ना तो उस विषय में जानकारी होती है या ना तो वह सही तरीके से उस कार्य को कर सकते हैं।
किसी भी प्रकार के मुश्किल में शिक्षित और बड़े लोगों से पूछने में न झिझकें। जितना हो सके अपने गुरुओं, परिवार के लोगों से या मित्रों की मदद लें। आपने के विषय में आप जितना ज्ञान बटोरेंगे उतना ही सफलता आपका करियर आपको प्रदान करेगा।

इस प्रकार आगे बढ़ेंगे
सभी लोग जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं पर कई बार योग्यता होते हुए भी कुछ लोग आगे नहीं बढ़ पाते।
यह भी देखा गया है कि तमाम प्रयास के बाद भी उन्हें कई बार सफलता नहीं मिलती। इसकी एक मुख्य वजह आपकी कुछ छोटी-छोटी गलतियां होती हैं। अगर आप इन गलतियों पर ध्यान देंगे तो आपकी सारी मुश्किलें दूर हो सकती है।
नजरअंदाज करना सीखें
ऑफिस में आपके काम को लेकर आपकी आलोचना करने वाला हर आदमी जरूरी नहीं कि आपका शुभचिंतक ही हो। हो सकता है कि वह आपको तंग करने या आपको विचलित करने के लिए ऐसा कर रहा हो। ऐसे में यह जरूरी है कि आप ऐसे लोगों की बात को नजरअंदाज करें। इससे आपको ही फायदा होगा। आप व्यर्थ में ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान देकर अपना ही नुकसान करेंगे।
अपनी गलती मानें
हो सकता है कि आपका बॉस आपके काम में कमियां निकालता हो। ऐसे में आपको चाहिए कि आप उनकी बातों पर ध्यान दें और यह जानने की कोशिश करें कि आखिर वह ऐसा क्यों कह रहे हैं। आपको चाहिए कि आप अपनी गलतियों को जान समझ सकें ताकि आगे से आप उसे न दोहराएं। ऐसा करने से आप ऑफिस मे किसी तनाव के काम कर पाएंगे।
आलोचना से घबराएं नहीं
कई बार आपके द्वारा किए गए हर काम की आलोचना होती है। ऐसे में आपको लगता है कि आपके लिए ऑफिस काम करने जैसा माहौल नहीं है। इस वजह से आप काफी दुखी भी होते हैं और आपका ध्यान आपके काम से हट जाता है। अपने कार्यक्षेत्र में बेहतर करने के लिए जरूरी है कि आप पहले आलोचनाओं को सहना सीखें। ऐसा करने से आप अपनी कमियों के बारे में जान पाएंगे और उसपर बेहतर तरीके से काम भी कर पाएंगे। आपकी सकारात्मक सोच आपकी मुसीबत को दूर कर सकती है।
काम में सुधार करते रहें।
अगर आपसे कभी गलती हुई है तो उसे स्वीकार करना सीखें और उसे सुधारने का तरीका सोचें। गलती करना मानवीय स्वभाव है, लिहाजा आपसे भी अगर गलती हुई हो उसमें डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। आपको चाहिए कि आप उस गलती को सुधारने पर काम करें।

ऐंड्रॉयड और आईफोन पर किसी नंबर को ऐसे करें ब्लॉक
गैजट्स और स्मार्टफोन ने हमारे जीवन में एक अहम जगह बना ली है। अब हम किसी को न तो पत्र लिखते हैं और न ही किसी को कॉल करने के लिए पीसीओ की लाइन में खड़े होते हैं। स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी में बड़े बदलाव ला दिया हैं। हालांकि स्मार्टफोन पर किसी से जुड़ना जितना आसान है, उतना ही अनचाहे फोन काल से बचना भी है। आज हम आपको बता रहे हैं कि आप ऐंड्रॉयड या आईफोन डिवाइस पर किस तरह किसी नंबर को ब्लॉक कर सकते हैं।
ऐंड्रॉयड पर ऐसे करें नंबर ब्लॉक:
– अपने फोन का ऐप खोलें और कॉल हिस्ट्री पर जाएं
– उस नंबर पर जाएं जिसे आप ब्लॉक करना चाहते हैं और उसे लॉन्ग प्रेस करें
– इसके बाद एक ड्रॉप डाउन मेन्यू आएगा जिसमें बेसिक शॉर्टकट ऑप्शन्स होंगे
– ब्लॉक नंबर को सलेक्ट करें
– इसके बाद आपके पास एक कन्फर्मेंशन मेसेज आएगा जिसमें लिखा होगा कि अब आपको इस नंबर से टेक्स्ट मैसेज या कॉल्स नहीं आएंगे
-ब्लॉक पर टैप करें और वह नंबर ब्लॉक हो जाएगा।
ऐंड्रॉयड फोन में ब्लॉक नंबरों की लिस्ट देखने के लिए सबसे पहले फोन ऐप खोलें और ऊपर दिए गए 3 डॉट्स पर टैप करें। सेटिंग में जाएं उसमें कॉल ब्लॉकिंग का ऑप्शन होगा। इसमें आपको ब्लॉक किए गए नंबरों की लिस्ट मिलेगी। अगर आप किसी नंबर को इस लिस्ट से हटाना चाहते हैं तो बस इसके सामने दिए गए क्रॉस पर क्लिक कर दें।

बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंकों के लिए करें योजनाबद्ध तैयारी
बोर्ड परीक्षा की तैयारी छात्र साल भर से करते हैं। दिसबंर के दूसरे सप्ताह से ही छात्र प्री-बोर्ड और बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में लग जाते हैं। छात्र दिन रात की मेहनत कर परीक्षा में बेहतर अंक लाने का प्रयास करते हैं हालांकि कई बार इतनी मेहनत के बाद भी उनका परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं होता। इसकी एक सबसे बड़ी वजह तैयारी को योजनाबद्ध तरीके से न करना होता है। ऐसे मे छात्रों को चाहिए कि वह बोर्ड की तैयारी को योजनाबद्ध तरीके से शुरू करें।
अपनी तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए।
परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले आपको अपना टाइमटेबल बनाना चाहिए। ध्यान रखें कि आपका टाइम टेबल पूरी तरह से सिलेबस के आधार पर तैयार किया गया हो। संभव हो तो ऐसे विषय को ज्यादा तरजीह दें जिन्हें आप कठिन मानते हैं।आप उन विषय को भी समय जरूर दें जो आपके लिए आसान है। ऐसा करने से आप तय समय के अंदर ही सभी विषय के सिलेबस को समय दे पाएंगे। आपकी यह रणनीति परीक्षा में बेहतर नंबर लाने में आपकी मदद करेगा।
खाने का रखें पूरा ख्याल
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि छात्र परीक्षा की तैयारी के दौरान खाना-पीना भी सही से नहीं लेते। इसका असर भी उनकी सेहत पर ही पड़ता है। ऐसा करने से परीक्षा की तैयारी करते समय आपके बीमार होने की संभावना बढ़
जाती है। लिहाजा आपको चाहिए कि तैयारी करते समय आप पढ़ाई के साथ-साथ आपको अपने खान-पान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
बीच-बीच में आराम करें
तैयारी करते समय समय-समय पर ब्रेक लेना जरूरी है. पढ़ाई के बीच में लिया जाने वाला यह ब्रेक आपको पहले पढ़ी गई चीजों को दोबारा से दोहराने का मौका देता है. इसके साथ ही यह ब्रेक
आपके मेमोरी को बेहतर करने में भी मददगार होता है. आम तौर पर छात्रों को अपनी पढ़ाई के बीच 10 से 15 मिनट का ब्रेक लेते रहना चाहिए.
कठिन विषय को ज्यादा समय दें
बोर्ड की तैयारी के दौरान आपके पास सीमित समय होता है। ऐसे में आपको चाहिए कि आप उन विषय की तैयारी पहले शुरू करें जो आपके लिए कठिन हैं। बोर्ड की तैयारी शुरू करते समय छात्र का दिमाग
तरोताजा होता है। ऐसे में आपको कठिन विषय की तैयारी में काफी मदद मिलेगी।
जरूरत से ज्यादा तनाव न लें
बोर्ड परीक्षा की तारीखों के नजदीक आते ही अक्सर छात्र तनाव में आ जाते हैं और वह पहले पढ़े हुए चीजों को लेकर भी संदेह में आने लगते है। ऐसे में आपको चाहिए कि आप जरूरत से ज्यादा तनाव न लें। इसका विपरीत असर आपकी ही तैयारी पर भी पड़ता है। इस प्रकार आपका परीक्षा परिणाम बेहतर रहेगा।

फॉरेंसिक साइंस में रोजगार के कई अवसर
अपराधों की जांच में फॉरेंसिक विज्ञान के बढ़ते उपयोग को देखते हुए इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। हाल के दिनों में फॉरेंसिक साइंस का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके प्रयोग को देखते हुए इस क्षेत्र में रोजगार की काफी संभावनाएं पैदा हुई हैं।
किसी अपराध की जांच के लिए वैज्ञानिक सिद्धांतों का उपयोग फॉरेंसिक विज्ञान कहलाता है। इस क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर फॉरेंसिक साइंस विज्ञानी होते हैं।
ये पेशेवर नई तकनीकों का इस्तेमाल कर सबूतों की जांच करते हैं और अपराधियों को पकड़ने में मदद करते हैं। ये क्राइम लैबोरेटरी आधारित जॉब है, जिसमें सबूतों की समीक्षा करना होता है.
इस क्षेत्र में प्रवेश लेने के लिए फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, मेडिकल टेक्नोलॉजी या जेनिटिक्स जैसे विषयों में बैचलर डिग्री होनी चाहिए। वहीं, कुछ दूसरे जॉब में लैब अनुभव भी मांगा जाएगा। बैचलर डिग्री के अलावा आप मास्टर डिग्री या डिप्लोमा फॉरेंसिक साइंस में कर सकते हैं।
इस क्षेत्र में ज्यादातर जॉब सरकारी सेक्टर में है। यहां पुलिस, लीगल सिस्टम, इंवेस्टिगेटिव सर्विस जैसे जगहों पर जॉब मिल सकती है। वहीं, प्राइवेट एजेंसी भी फॉरेंसिक साइंटिस्ट्स को हायर करती है। ज्यादातर फॉरेंसिक साइंटिस्ट इंटेलि‍जेंस ब्यूरो और सीबीआई की ओर से हायर किए जाते हैं। इसके अलावा एक टीचर के रूप आप फॉरेंसिक साइंस को किसी इंस्टीट्यूट में पढ़ा कर अच्छा खासा कमा सकते हैं। योग्यता के आधार पर आपका वेतन 20-50 हजार रुपये तक या उससे ज्यादा भी हो सकती है।
जरुरी योग्यताएं
बातचीत करने में कुशल हो क्योंकि कोर्ट में अपनी बातों को साबित करने के लिए बेहतर संवाद के तरीके आना जरूरी हैं। कई तरह के टेस्ट रिपोर्ट लिखने होंगे, इसलिए राइटिंग स्किल भी अच्छी होनी चाहिए।
फॉरेंसिक साइंस कोर्स के लिए शीर्ष संस्थान
इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फोरेंसिक साइंस, नई दिल्ली
लोक नायक जयप्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीट्यूट
ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फोरेंसिक साइंस, दिल्ली
अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई
सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री, हैदराबाद
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, भोपाल
गर्वेमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, भोपाल

आईटी क्षेत्र में हैं कई संभावनाएं
अगर आपकी रूचि कप्यूंटर साइंस में है और आईटी सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं तो पहले इस क्षेत्र की कुछ बातों को जान लेना आपके लिए जरुरी रहेगा। इंफॉर्मेशन टेक्नॉलोजी आईटी इंजीनियर के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषयों का होना जरूरी है। इंफॉर्मेशन टेक्नॉलोजी ऐसा डिपार्टमेंट है, जहां कम्प्यूटर की जानकारी रखने वालों की हमेशा जरूरत रहती है। आई कंपनियों में दक्ष लोगों की मांग लगातार बढ़ रही है। आई टी में करियर बनाने के लिए कई रास्ते हैं। इनमें तीन इंजीनियरिंग के प्रमुख कोर्स है। जिसमें कम्प्यूटर साइंस, इलेक्ट्रानिक्स व कम्यूनिकेशन है। इसके आलावा सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग में भी काफी संभावनाएं हैं।
आईटी के अंतर्गत आने वाले बीटैक आईटी में आपको सिखाया जाता है कि बिजनेस को तैयार करने के लिए कैसे काम किया जाता है। इसकी सारी जानकरी दी जाती है। जिसमें डेटाबेस, बिजनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि की जानकारी शामिल है।
अगर आप इंजीनियरिंग नहीं करते हैं, तो आप बीएससी आईटी और बीएससी कम्प्यूटर साइंस् भी कर सकते हैं। 12वीं कक्षा में पीसीएम विषय वाले कम्प्यूटर एप्लीकेशन कोर्स कर सकते हैं। 12वीं में गणित बिषय वाले बीएससी कम्पयूटर साइंस कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा मोबाइल एप्लीकेशन विकास में भी काफी रोजगार हैं। कई गैजेट्स वी‍डियो, मूवी प्लेयर और गेमिंग डिवाइस के रूप में आज मार्केट में आ रहे हैं। आईटी क्षेत्र फील्ड दिन-प्रतिदिन काफी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यहां छात्रों के लिए काफी अवसर हैं।

एआईसीटीई ला रही लड़कियों के लिए स्कॉलरशिप
महिला सशक्तीकरण के तहत लड़कियों को तकनीकी शिक्षा में सशक्त बनाने के उद्देश्य से एआईसीटीई लड़कियों के लिए स्कॉलरशिप योजना ला रही है। लड़कियों को स्कॉलरशिप स्कीम टू गर्ल चाइल्ड (एसएसजीसी) योजना के तहत छात्रवृत्ति दी जाएगी। इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक उम्मीदवार 30 नवंबर से पहले इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
योग्यता
इस योजना का फायदा एक परिवार की दो लड़कियां ही उठा सकती हैं। साथ ही आवेदक के परिवार की आय 8 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम होनी चाहिए। साथ ही आरक्षत वर्ग के आवेदकों को नियमों के अनुसार राहत भी दी जाएगी। जिसमें एससी वर्ग के उम्मीदवारों को 15 फीसदी, एसटी को 7.5 फीसदी और ओबीसी को 27 फीसदी सहायता मिलेगी।
चयन प्रक्रिया
उम्मीदवारों का चयन एआईसीटीई कॉलेज की कॉलेज के अंकों के आधार पर किया जाएगा।
30 हजार रुपये मिलेंगे
चयनित उम्मीदवारों को 30 हजार रुपये ट्यूशन फीस, 10 महीने के लिए हर महीना दो हजार रुपये, सॉफ्टवेयर, बुक, लैपटॉप आदि खरीदने के लिए 30 हजार रुपये तक की सहायता भी दी जाएगी।
कैसे करें आवेदन
उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरकर आवेदन करना होगा।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बनायें कॅरियर
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र (प्रोसेस्ड फूड) तैयार करने वाली मल्टीनेशनल कंपनियां बड़ी तादाद में भारत का रुख कर रही हैं। ऐसे में यह क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। जिसको देखते हुए इस क्षेत्र में पारंगत लोगों की मांग भी बढ़ रही है। इस क्षेत्र में कभी भी मंदी नहीं हो सकती। यही कारण है कि अब युवाओं की इसमें रुचि इसमें बढ़ती जा रही है। इस क्षेत्र को युवा अब आकर्षक कॅरियर के रूप में देख रहे हैं और इसके लिए जरुरी तकनीकी शिक्षा भी हासिल कर रहे हैं। कारोबार जगत के संगठन (फिक्की) की एक रिपोर्ट के मुताबिक फूड प्रोसेसिंग के कारोबार में भारत में कुशल लोगों की बेहद कमी है। आने वाले समय में फूड टेक्नोलॉजी का भविष्य बहुत ही सुनहरा होने वाला है। अगर आंकड़ों की मानें तो आने वाले कुछ सालों में यह उद्योग इस रफ्तार से बढ़ेगा कि नौकरियों की बहार होगी।
जरुरी योग्यता
ऐसे में यदि आप इस उभरते क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी अथवा मैथमेटिक्स विषयों के साथ 10+2 में कम से कम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। एमएससी कोर्स करने के लिए फूड टेक्नोलॉजी से संबंधित विषयों में स्नातक की डिग्री भी आवश्यक होती है।
फूड टेक्नोलॉजिस्ट का काम
फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के तहत वे सभी कार्य शामिल हैं, जिनसे प्रोस्सेड फूड जैसे- मक्खन, सॉफ्ट ड्रिंक, जेम व जेली, फ्रूट जूस, बिस्कुट, आइसक्रीम आदि की गुणवत्ता, स्वाद और रंग-रूप बरकरार रह सके। इसके अलावा वह कच्चे और बने हुए माल की गुणवत्ता, स्टोरेज तथा हाइजिन आदि की निगरानी भी करता है। वह कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। कच्चे माल से लेकर प्रोडक्ट तैयार होने तक कंपनी को उसकी हर स्तर पर जरूरत होती है। ग्लोबल स्तर पर कंपनी का भविष्य फूड टेक्नोलॉजिस्ट की योग्यता पर ही निर्भर रहता है।
मैनुफैक्चर्ड प्रोसेसेज : इस प्रक्रिया के जरिए कच्चे कृषि उत्पादों और मीट आदि पशु उत्पादों के भौतिक स्वरूप में बदलाव लाया जाता है। इससे यह उत्पाद खाने और बिक्री योग्य बन जाते हैं। वैल्यु एडेड प्रोसेसेज के जरिए कच्चे खाद्य उत्पादों में कई ऐसे बदलाव किए जाते हैं। जिससे वह ज्यादा समय के लिए सुरक्षित रहते हैं और कभी भी खाने लायक बन जाते हैं। उदाहरण के लिए टमाटर से बने सॉस और दूध से तैयार आईसक्रीम जैसे उत्पादों को देखा जा सकता है।
किस लिए है जरूरत
फूड टेक्नोलॉजिस्ट की जरूरत आज सभी देशों को है। इसका उदेद्श्य लोगों को ऐसी खाघ सामाग्री पहुंचाना है जो गुणवत्ता और स्वाद के साथ-साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर हो।
इस क्षेत्र में किये जाने वाले प्रमुख कोर्स
बीएससी (ऑनर्स) फूड टेक्नोलॉजी
बीटेक फूड टेक्नोलॉजी
एमटेक फूड टेक्नोलॉजी
पीजी डिप्लोमा इन फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी
एमबीए(एग्री बिजनेस मैनेजमेंट
अवसर
इस कोर्स के बाद आपके पास नौकरी के कई सारे विकल्प होते हैं। आप फूड प्रोसेसिंग यूनिटों, रिटेल कंपनियों, होटल, एग्री प्रोडक्टस बनाने वाली कंपनियों से जुड़ सकते हैं। या फिर खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता जांचने, उनके निर्माण कार्य की निगरानी करने और खाद्य वस्तुओं को संरक्षित करने की तकनीकों पर काम करने वाली प्रयोगशालाओं से भी जुड़ सकते हैं।
वेतनमान
इस क्षेत्र में आप शुरुआती स्तर पर आप 8 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं। सालों के अनुभव के बाद 30 हजार रुपये प्रतिमाह या इससे भी ज्यादा कमाया जा सकता है। यदि आप स्वरोजगार से जुड़ते हैं, तो आपकी कमाई और बढ सकती है। इस क्षेत्र में सैलरी और काम दोनों दिलचस्प होते हैं।
किस तरह की होती है पढ़ाई
जिस तरह अलग-अलग तरह के खाने को देखकर मन खुशी बढ़ती है। ठीक उसी तरह फूड टेक्नोलॉजी में पढ़ाई जाने वाली पढ़ाई भी बहुत दिलचस्प होती है। फूड टेक्नोलॉजी तथा इससे संबंधित कोर्सेज के अंतर्गत खाद्य पदार्थों के रख-रखाव से लेकर पैकेजिंग, फ्रीजिंग आदि की तकनीकी जानकारियां शामिल होती हैं। इसके अंतर्गत पोषक तत्वों का अध्ययन, फल, मांस, वनस्पति व मछली प्रसंस्करण आदि से संबंधित जानकारियां भी दी जाती है।
यहां होते हैं कोर्स
यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली
इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी
जी. बी. पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रिकल्चर ऐंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर, उत्तराखंड
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी
कानपुर यूनिवर्सिटी, कानपुर, उत्तर प्रदेश
कोलकाता विश्वविद्यालय, कोलकाता
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर, पंजाब
मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई
नागपुर यूनिवर्सिटी
सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट, मैसूर
बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, रांची, बिहार।

सांकेतिक भाषा में भी है बेहतर करीयर
यह बात सच है कि सांकेतिक भाषा सीखना आसान काम नहीं होता है, लेकिन यदि इसे करियर के नजरिए से सीखा जाए तो बेहतर परिणाम दे सकता है। इसके लिए जरुरी है कि आपकी सोच रचनात्मक हो। सांकेतिक भाषा अर्थात साइन लैंग्वेज जिसे हम मूक-बधिरों की भाषा के तौर पर जानते हैं को सीखना आपके कॅरियर के नए रास्ते खोलती है। सांकेतिक भाषा यानी साइन लैंग्वेज सीखने पर आप शिक्षा, समाज सेवा, सरकारी नौकरी के क्षेत्र और व्यापार से लेकर परफॉर्मिंग आर्ट, मेंटल हेल्थ सरीखे अनेक क्षेत्रों में नौकरी पा सकते हैं। इससे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी करीयर बनाने के रास्ते खुलते हैं। सांकेतिक भाषा का जानकार एक तरह से इंटरप्रेटर का काम करता है जो कि सामने वाले की बातों को सुनकर, उसके शब्दों को तय संकेतों में ढालकर दूसरे तक पहुंचाता है। इसके लिए अनेक स्कूल-कॉलेजों में कार्स कराया जाता है, जहां मूक-बधिर छात्रों के साथ ही साथ सामान्य छात्र भी सांकेतिक भाषा सीखते हैं। इस विषय में स्नातक करने के बाद छात्र या छात्रा शिक्षा के क्षेत्र में अपना कॅरियर बना सकते हैं। सांकेतिक भाषा के महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में तो खासतौर पर तब इसका महत्व बढ़ जाता है जबकि दुनिया में सबसे ज्यादा मूक-बधिर देश में ही मौजूद हैं। इस कारण सांकेतिक भाषा सिखाने वाले शिक्षकों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त सांकेतिक भाषा सीखने के बाद आप समाज सेवा के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर सकते हैं, इसके अतिरिक्त सरकारी संस्थानों और बिजनेस से लेकर परफॉर्मिंग आर्ट्स, मेंटल हेल्थ, मेडिकल और कानून सहित अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जहां आपको काम करने का अवसर मिलता है। देश में सांकेतिक भाषा की पढ़ाई के लिए संबंधित प्रमुख संस्थानों में इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली, अली यावर जंग नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द हियरिंग हैंडीकैप्ट, मुंबई एवं रामकृष्ण मिशन विवेकानंद यूनिवर्सिटी, कोयंबटूर प्रमुख हैं।

करीयर बनाने का सही अवसर पहचानें
यह तो सफल व्यक्ति मानते ही हैं कि अमीर बनने के लिए भाग्य के भरोसे नहीं बैठा जा सकता है। इसके लिए जरुरी होता है सही समय पर सही योजना पर बेहतर कार्य करके दिखलाना। यह बात सामान्य से लेकर मैनेजमेंट और करियर से जुड़े दिग्गज लोग भी कहते और समझाते आए हैं। ऐसे तमाम योग्य व्यक्तियों का कहना होता है कि संपन्नता प्राप्त करना या नहीं करना यह आप पर ही निर्भर करता है। आपकी सोच, आपका बर्ताव और आपका नजरिया इस बात का तय करता है कि आप अमीर बनेंगे या दिरद्र नारायण ही रहेंगे। मनुष्य जीवन तो हमेशा ही अमीर बनने के अवसर प्रदान करता है, यह आप पर निर्भर है कि आप इस मौके को भुना पाते हैं या नहीं। यहां आपको ऐसे ही कुछ सुनहरे पल और अवसरों के बारे में जानकारी देने की कोशिश करते हैं। सबसे पहले कम उम्र में ही अमीर बनने के अवसर तलाशे जाने चाहिए। यदि आप अमीर बनना चाहते हैं तो कम उम्र में मिलने वाले कमाई के अवसरों को कतई नहीं छोड़ें। दरअसल कम उम्र में कमाई गई पूंजी आगे चलकर बड़ी रकम बनने का माद्दा रखती है। विशेषज्ञों की मानें तो यदि आपने कम उम्र में कमाई गई पूंजी को सही फाइनेंशियल मार्केट में इन्‍वेस्‍ट किया तो वह आपके 40 पार होते-होते आपको करोड़पति बना सकती है। इसके साथ ही पारंपरिक व्यवसाय या कार्य के अतिरिक्त नए बिजनेस में हाथ आजमाने से नहीं चूकना चाहिए। यह जरुरी नहीं कि प्रत्येक नए बिजनेस में आपको हानि ही हो, बल्कि यह आपको बड़ा लाभ दिला सकता है। इस प्रकार नया बिजनेस आपको अमीर बनने का चांस मुहैया करा सकता है। बस आपको उसके सही समय पर प्रारंभ करने की जानकारी होनी चाहिए। रिस्क तो हर व्यापार में होता है, लेकिन रिस्‍क के डर से बेहतर अवसर को गंवाना समझदारी नहीं हो सकती है। इसके साथ ही रातों रात अमीर बनने वाली परिकथाओं से आप प्रभावित होते हैं तो कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन इसके लिए भी परिश्रम के साथ सही दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। इसके लिए आपके अंदर इनोवशन होना चाहिए, क्योंकि इस दिशा में अनेक ऐसे लोग हैं जिन्होंने बहुत कम समय में अमीर बनकर लोगों को चकित किया है। इसे बेहतर आइडिया देना भी कहा जा सकता है।

आईआईएस बैंगलोर शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में शामिल
दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी की लिस्ट जारी हो गई है जिसमें भारत के विश्वविद्यालय भी जगह बनाने में कामयाब हुए हैं। भारत की एक यूनिवर्सिटी ने टॉप 100 में जगह बनाई जबकि अन्य विश्वविद्यालयों ने टॉप 500 में जगह बनाई है। इस रैंकिंग में इंजीनियरिंग और टैक्नोलॉजी, कम्प्यूटर साइंस के आधार पर जारी की गई है। इस बार रैंकिंग में एशिया के विश्वविद्यालयों का दबदबा रहा है। रैंकिंग में एशिया के 132 संस्थानों ने जगह हासिल की है और शीर्ष 10 में भी एशिया की यूनिवर्सिटी के नाम शामिल है।
इस रैंकिंग में इंजीनियरिंग कैटेगरी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएस), बैंगलोर ने शीर्ष 100 में जगह बनाई है आईआईएस को 89वीं रैंक मिली है। वहीं आईआईटी कानपुर को विश्व रैंकिंग में 201-250 के बैंड में रखा गया है। इस बार टॉप 100 में किसी भी आईआईटी को जगह नहीं मिली है।वहीं क्‍वाकरली सायमंस (क्यूएस) एशिया यूनिवर्सिटी की एशिया रैंकिंग में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्‍बे (आईआईटी बॉम्बे), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली (आईआईटी दिल्ली) और आईआईटी मद्रास ने जगह हासिल की है।
दुनिया की टॉप रैंकिंग में स्टैंनफोर्ड यूनिवर्सिटी (यूएस), कैलीफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफॉर्ड (यूके) का नाम सबसे ऊपर है। यह रैंकिंग कई आकलनों का आधार पर जारी की गई है। यह एकेडमिक रेप्युटेशन, एम्प्लॉयर रेप्युटेशन, फैकल्टी, स्टॉफ, पेपर आदि बातों को ध्यान में रखकर जारी की जाती है।

जनऔषधि केंद्र खोलकर हासिल करें रोजगार
यदि आप भी रोजगार की तलाश में हैं तो सरकार की तरफ से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। आप भी इन योजनाओं का फायदा उठाकर हर महीने अच्छी कमाई कर सकते हैं। इससे माध्यम से आप शहर, गांव या कस्बे कही पर भी रोजगार कर सकते हैं।
सरकार ने नए बदलाव के तहत प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र के लिए लगने वाली शुल्क और प्रोसेसिंग फी को खत्म कर दिया है। इसके अलावा इस योजना के तहत दवाई की दुकान खोलने के लिए सरकार की तरफ से पहले ही लाभार्थी को सहायता राशि दी जा रही है। यानी आप यदि मेडिकल स्टोर खोलना चाहते हैं तो आपको किसी तरह का निवेश करने की जरूरत नहीं है।
दरअसल केंद्र सरकार देशभर में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र के माध्यम से लोगों को सस्ती दवाएं मुहैया कराना चाहती है। इस कारण इस योजना का प्रसार किया जा रहा है। पिछले दिनों देश में 20 हजार से ज्यादा जनऔषधि केंद्र खोले गए हैं। इस योजना से हर महीने 30 हजार रुपए महीने तक की कमाई कर सकते हैं।
जनऔषधि केंद्र खोलने के लिए सरकार की तरफ से कुछ अर्हताएं निर्धारित की गई हैं। इन अर्हताओं को पूरा करने वाला व्यक्ति जनऔषधि केंद्र का लाभार्थी हो सकता है। इसके तहत तीन कैटेगरी बनाई गई हैं. पहली कैटेगरी के तहत कोई भी बेरोजगार जो फार्मासिस्ट, डॉक्टर या रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर स्टोर खोल सकता है। दूसरी कैटेगरी के तहत ट्रस्ट, एनजीओ, प्राइवेट अस्पताल, सोसायटी और सेल्फ हेल्प ग्रुप भी जनऔषधि केंद्र भी इसके लिए आवेदन कर सकता है। तीसरी कैटेगरी के अंतर्गत राज्य सरकारों की तरफ से नॉमिनेट की गई एजेंसी स्टोर खोल सकती है।
यदि आप भी जनऔषधि केंद्र के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो आपके पास दुकान के लिए कम से कम 120 वर्गफुट कवर्ड एरिया होना चाहिए। यदि सरकार आपके आवेदन पर जनऔषधि केंद्र खोलने की मंजूरी देती है तो सरकार की ओर से आपको 650 से ज्यादा दवाओं के साथ ही 100 से ज्यादा उपकरण बिक्री करने के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।
जनऔषधि केंद्र खोलने के लिए करीब 2.5 लाख रुपए का खर्च आता है। जनऔषधि केंद्र खोलने वालों को सरकार की तरफ से 2.5 लाख रुपए की सरकारी सहायता दी जाएगी। यानी योजना के तहत मेडिकल स्टोर खोलने वार आपको किसी प्रकार का निवेश नहीं करना पड़ेगा.
इस तरह मिलेगी 2.5 लाख की मदद
योजना के तहत मेडिकल स्टोर खोलने के लिए पहले आपको एक लाख रुपए की दवाइयां खरीदनी होंगी। बाद में सरकार की तरफ से इसे महीने के आधार पर रीइंबर्समेंट किया जाएगा। सरकार दुकान शुरू करने में लगने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर यानी रैक, डेस्क आदि के लिए आपको एक लाख तक की मदद करेगी। फर्नीचर में खर्च हुई रकम को सरकार की तरफ से आपको छह महीने में वापस कर दिया जाएगा। जनऔषधि केंद्र खोलने के लिए कंप्यूटर आदि पर खर्च होने वाले 50 हजार रुपए भी आपको सरकार की तरफ से दिए जाएंगे।
आपकी दुकान से हर महीने जितने रुपए की दवाओं की बिक्री की जाएगी, उस पर आपको 10 फीसदी का इंसेटिव दिया जाएगा. यह इंसेटिव हर महीने अधिकतम 10 हजार रुपए तक होगा। यानी यदि आप एक महीने में एक लाख रुपए से ज्यादा की दवाएं सेल करते हैं तब भी 10 हजार रुपए का ही इंसेटिव मिलेगा। यह इंसेटिव आपको तबतक मिलेगा, जबतक 2.5 लाख रुपए की लिमिट पूरी नहीं हो जाती है।
आप जनऔषधि केंद्र को अनुमित मिलने के बाद हर महीने जितने पैसों की दवाएं बेचेंगे। उस रकम का 20 फीसदी आपको कमीशन के रूप में मिलेगा। इस तरह यदि आपने हर महीने एक लाख रुपए की दवाओं की बिक्री की तो 20 हजार रुपए कमीशन और इंसेटिव मिलाकर आपको कुल 30 हजार रुपए की आय हुई। वहीं यदि आप दवाओं की बिक्री ज्यादा करते हैं तो आपकी कमाई बढ़ जाएगी.

पढ़ने के लिए सबसे बेहतर है कनाडा का मांट्रियल
अब पढ़ने के लिए सबसे बेहतर शहरों के नाम सामने आये हैं। कनाडा का मांट्रियल शहर इसमें शीर्ष पर है। इन शहरों को दुनियाभर के छात्रों ने ही नंबर देकर इनकी रैंकिंग तैयार की है। इन शहरों को यहां मिलने वाली सुविधाओं और स्टूडेंट फ्रेंडली माहौल को देखते हुए स्थान मिले हैं। इन टॉप 100 शहरों की लिस्ट तैयार करने के लिए छात्रों को शहर और वहां की यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ सवाल दिए गए थे। जिसके आधार पर रैंकिंग दी गई। मोंटरियल के बाद पेरिस को दूसरा जबकि लंदन को तीसरा स्थान मिला है।
छात्रों के लिए बेहतर शहरों की इस रैंकिंग में यह काफी ज्यादा दिलचस्प था कि अमेरिका और ब्रटेन के सिर्फ एक-एक शहर ही इनमें शामिल हैं जबकि यहां दुनिया की सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट मौजूद हैं।
छात्रों के लिए दुनिया के सबसे बेस्ट 10 शहर
शहरों की यह रैंकिंग कई आधारों पर तय थी। जिसमें शहर में यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता, छात्रों के लिए सुविधाएं, अफॉर्डिबिल्टी (कम खर्चीला होने) , छात्रों की शहर में रहने की इच्छा, नौकरी मिलने के अवसर, शहर का अंतराष्ट्रीय व्यवहार, सुरक्षा और प्रदुषण आदि पर भी शहरों को नंबर दिए गए।
भारत भी शामिल
इन 100 शहरों की लिस्ट में भारत भी अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा. हालांकि भारत के ये शहर टॉप 50 में भी शामिल नहीं हैं। मुंबई शहर को जहां 85वां रैंक मिला है। वहीं राजधानी दिल्ली को 86वीं रैंक मिली है। इन दोनों ही शहरों में देश की सबसे टॉप सेंट्रल यूनिवर्सिटी (दिल्ली यूनिवर्सिटी, मुंबई यूनिवर्सिटी) मौजूद हैं। जहां हर साल देश विदेश से कई छात्र पढ़ने आते हैं।
रहने में आने वाले खर्च (अफॉर्डिबिल्टी) के मामले में दिल्ली को मुंबई से ज्यादा नंबर मिले हैं। इसमें दिल्ली को 73 और मुंबई को 63 नंबर दिए गए हैं। छात्रों की शहर में रहने की इच्छा के मामले में दोनों शहरों को लगभग बराबर अंक मिले हैं। इसके अलावा एम्पलॉयर एक्टिविटी में मुंबई को 61 और दिल्ली को 56 अंक मिले हैं।
भारत की इन दो शहरों का इस लिस्ट में शामिल होना काफी अहम बात है, लेकिन 80 से ऊपर की रैंक मिलना सिर्फ यही दिखाता है कि हमारे यहां शिक्षा व्यवस्था बाकी के शहरों और देशों से कितनी पीछे है। हमें अभी अपनी शिक्षा प्रणाली को जहां बेहतर बनाने की जरूरत है। वहीं ऐसे संस्थानों में सुविधाएं मुहैया भी करवाना जरूरी है।

बायोडाटा में न करें ये गलतियां
अगर आज कहीं नौकरी के लिए जा रहे हैं तो अपने बायेडाटा पर ध्यान दें क्योंकि इसी को देखकर नियोक्ता आपके बारे में अपनी एक राय बनाता है। इसलिए नौकरी चाहिए तो सीवी को गंभीरता से लें। एक नियोक्ता के लिए बायोडाटा आवेदनकर्ता की पूरी पहचान होता है और उसी के आधार पर वो नियुक्ति की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाता है, पर लोग अकसर बायोडाटा में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिसकी वजह से योग्य होने के बावजूद उन्हें कई बार नौकरी नहीं मिलती है। इसलिए जब भी बायोडाटा बनाए इन इस प्रकार की भूल न करें।
ध्यान रहे जितना अहम बायोडाटा होता है, उतना ही जरूरी लिखावट और शैली भी होती है। इसमें अलग-अलग तरह के फॉन्ट का इस्तेमाल करने से नियोक्ता को उसे पढ़ने में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा सीवी में कभी-कभी अलग-अलग तरह के रंगों का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। इससे नियोक्ता पर आपका प्रभाव खराब पड़ता है.
ज्यादा फोन नंबर न दें
बायोडाटा में एक से ज्यादा फोन नंबर देना व्यवहारिक नहीं माना जाता। आप जितने ज्यादा फोन नंबर देंगे आपके अहम संदेश को मिस करने के की आशंका भी बढ़ जाएगी। इसलिए बायोडाटा में हमेशा एक ही नंबर दें और इस संशय को दूर ही रखें। बायोडाटा में अपना मोबाइल नंबर देना सबसे ठीक रहता है, ताकि आपकी जॉब को लेकर जो भी लेटेस्ट अपडेट हो जल्द से जल्द मिल सके.
स्पेलिंग मिस्टेक न करें
बायोडाटा में अगर आप स्पैलिंग मिस्टेक करते हैं तो जॉब मिलना संभव नहीं है। इससे नियोक्ता पर आपकी छवि एक गैरजिम्मेदार व्यक्ति की बनती है। साथ ही ये आपके लिखने की क्षमता पर भी सवाल खड़े करता है। इसलिए जब भी बायोडाटा बनाए तो उसमें स्पैलिंग को सही प्रकार से देख लें।
कितना बड़ा होना चाहिए बायोडाटा
बायोडाटा बनाने की प्रक्रिया में उसकी लंबाई एक सबसे अहम फैक्टर होता है। जहां एक तरफ आपको सीवी में अपने हर एक अनुभव के बारे में बताना जरूरी होता है। वहीं दूसरी ओर उसकी लंबाई भी छोटी रखनी अतिआवश्यक होती है। जो बायोडाटा ज्यादा बड़े नहीं होते हैं उनके अवसर भी ज्यादा होते हैं, पर इसे छोटा करने के चक्कर में कभी भी अपनी किसी अहम बात को न छोड़ें।
जॉब से जुड़ी उपलब्धियों के बारे में ही बतायें
नियोक्ता उन उपलब्धियों के बारे में कभी भी जानना नहीं चाहेंगे, जिनका आपकी जॉब से दूर-दूर तक कोई नाता न हो। इसलिए बायोडाटा में हमेशा अपने जॉब से जुड़ी उपलब्धियों के बारे में बताएं। ऐसा करने से आपका सीवी छोटा और प्रभावी रहेगा।

युवाओं में बढ़ रहा कोलोरेक्टल कैंसर
युवाओं में तेजी से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। पहले माना जाता था कि इस प्रकार का कैंसर 50 साल की उम्र के ऊपर के लोगों में ही होता है पर अब यह 20 साल के आसपास की उम्र वाले युवाओं में भी होने लगा है। कोलोरेक्टल कैंसर को बड़ी आंत का कैंसर भी कहते हैं। ये कैंसर बड़ी आंत (कोलोन) या रेक्टम (गैस्ट्रो इंटस्टाइनल का अंतिम भाग) में होता है। दुनियाभर में कैंसर की तेजी से फैल रही यह तीसरी किस्म है। इस कैंसर में पेट से जुड़ी कई प्रॉब्लम्स जैसे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, बवासीर और कब्ज की समस्या होती हैं।
देर करने पर बढ़ेगी समस्या
ज्यादातर लोगों को इस कैंसर के शुरुआती संकेत के बारे में पता नहीं होता है। ऐसे में वे इसे अनदेखा करने की गलती करते हैं जबकि समय रहते इस कैंसर का इलाज शुरू होने पर इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।

रोजग़ार निर्माण की भूमिका में युवा
(डॉ. दीपक मोटवानी)
तेजी से बढ़ती विभिन्न समस्याओं के लिए एक तरफ जहां देश की बढ़ती आबादी को जिम्मेदार बताया जाता है, वहीं हमारे देश की 65 प्रतिशत आबादी युवा है। इन युवाओं पर ना सिर्फ हमारी सभ्यता और परंपराओं की जिम्मेदारी है, बल्कि इन्हें रफ्तार से बदलते दौर के साथ कदम ताल करना भी आवश्यक है। डिजिटल क्रांति के इस युग में जहां हर काम आज मोबाइल एप्प या किसी वेबसाइट से हो जाता है, ऐसे में रोजगार भी एक महत्वपूर्ण समस्या बनता जा रहा है। एक तरफ जहां सरकारी नौकरी के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही रह गयी है, वही दूसरी ओर महंगाई अपने चरम पर है। देश के युवाओं के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है और ऐसे समय में देश के कुछ युवा ना सिर्फ व्यापक समस्याओं का समाधान कर रहे है, बल्कि वो अन्य युवाओं को रोजगार भी प्रदान कर रहे है। इंटरप्रेन्योरशिप के जरिये युवा अनेक समस्याओं के लिए नायाब समाधान लेकर आ रहे है और इस समाधान को अधिकतम लोगों तक पहुचाने के लिए अन्य युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है। इसे हम इस तरह समझ सकते है, कुछ समय पूर्व तक हमें कोई भी टिकट बुक करने के लिए रेल्वे स्टेशन, हवाई अड्डा या बस अड्डा जाना पड़ता था, लेकिन आज ये सब सुविधा मात्र एक एप्प के जरिये उपलब्ध है। हम कभी भी, कही से भी और कही की भी टिकट आसानी से बुक कर सकते है। इससे हमारा समय तो बचता ही है, साथ ही यातायात प्रदूषण और ईंधन की भी बचत होती है। इस एप्प को बनाने, इसे संचालित करने और एप्प की जानकारी को सभी तक पहुंचाने के लिए एक टीम की जरूरत होती है। युवाओं को रोजगार का अवसर मिलता है और उन्हें साथ ही बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है। इसी तरह से बहुत से युवा अनेक तरह के नए प्रयोग करते है और अन्य युवाओं को रोजगार भी मुहैया कराते है। यह कहने में हमें कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि आज के युवाओं के लिए रोजगार निर्माण का दायित्व भी युवाओं पर ही है।
(लेखक आंत्रप्रेन्योर जानकार हैं)

यहां-वहां भटकने की बजाय किताबें पढ़ें ऑनलाइन
अक्सर यह देखा जाता है कि बच्चे किताबों की तलाश में यहां से वहां भटकते नजर आते हैं, ऐसे में यदि आपको सलाह दी जाए कि आप बाजारों में किताब तलाशने की बजाय ऑनलाइन किताब पढ़ें तो शायद समस्या का समाधान निकल आएगा। ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश के राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने अपने किताबों को डिजिटाइजेशन के जरिए करने का प्रयास किया है। बताया जाता है कि पुस्तकें समय पर उपलब्ध नहीं होने या बाजार में नहीं मिलने की वजह से अब कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। विद्यार्थी अब महज एक क्लिक करेंगे और उनकी मनपसंद किताब उनके सामने होगी। इसी प्रकार शिक्षक भी क्लिक कर पुस्तक हासिल करेंगे और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पढ़ा सकेंगे। इसके लिए एससीईआरटी ने अपनी किताबों का डिजिटाइजेशन कराकर ई-बुक तैयार कराया है और इसे अपनी वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट एससीईआरटीयूपी डॉट सीओ डॉट इन पर अपलोड करने का कार्य किया है। अब इसी वेबसाइट के जरिए छात्र भी किताबें पढ़ सकेंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि किताबों की अनुपलब्धता के कारण जिन स्कूलों में कोर्स पूरा नहीं हो पाता था उनके शिक्षक अब बच्चों को वेबसाइट से किताबें डाउनलोड कर आसानी से कोर्स पूरा करा सकेंगे। इस प्रकार उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूल, राजकीय सहायता प्राप्त और अनुदानित मदरसों में कक्षा एक से आठ तक के करीब एक करोड़ 70 लाख विद्यार्थियों को ऑनलाइन किताबें उपलब्ध हो सकेंगी, जो कि एक अनुकरणीय पहल है।

कृषि क्षेत्र में कैरियर बनाने के बेहतर चांस
यह तो सभी जानते हैं कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, ऐसे में कृषि कार्य को अहमियत भी ज्यादा दी जाती है। इसलिए सलाह दी जाती है कि ऐग्रिकल्चरल इंजिनियरिंग करें क्योंकि यह फील्ड एक बहुत ही ग्रोइंग सेक्टर के रुप में उभरा है। ऐसा करते हुए आप बहुत से अलग-अलग क्षेत्रों के बारे में जानकारी एकत्र करते और सीखते हैं। इनमें मुख्यत: ऐनिमल ऐंड प्लांट साइंस, जियॉलजी, इन्वाइरनमेंट साइंस, कोर इंजिनियरिंग ब्रांचेस, मॉडर्न एग्रिकल्चरल टेक्नॉलजी प्रमुख हैं। ये आपको अनेक क्षेत्रों में सफलता दिलाने वाला साबित होता है। इसके साथ जॉब के लिए सरकारी एवं निजी दोनों ही सेक्टर में अप्लाई किए जा सकते है। गवर्नमेंट सेक्टर में फूड डिपार्टमेंट, राज्य स्तर पर डेयरी बोर्ड में भी काफी अच्छे विकल्प हैं। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में फर्टिलाइजर्स फर्म, रिसर्च एंड डिवेलपमेंट फर्म्स, ऐग्रिकल्चरल मशीनरी मैन्युफैक्चरिंग फर्म्स, फूड प्रॉडक्ट्स प्रॉसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग फर्म्स में काफी नौकरियां हैं।
डिप्लोमा होल्डर्स के लिए भी होती हैं नौकरियां:
कृषि क्षेत्र में डिप्लोमा होल्डर्स के लिए भी अनेक संभावनाएं होती हैं इनमें प्रमुखत: ऐग्रिकल्चर ऑफिसर, क्वालिटी अश्योरेंस ऑफिसर, फार्म मैनेजर, रिसर्च इंजिनियर, प्रॉसेस मैनेजर और परचेस मैनेजर के पदों पर आवेदन किए जा सकते हैं। इस प्रकार डिग्रीधारियों के साथ ही साथ डिप्लोमा करने वालों को भी एग्रीकल्चर क्षेत्र में अनेक संभावनाएं देखी गई हैं।

नौकरी के साथ व्यवसाय ऐसे करें
अगर आप अपनी मौजूदा नौकरी के साथ ही अपना व्यवसाय भी करना चाहते हैं तो इसके लिए पहले से तैयारी कर लें। आजकल लोग अपनी आय बढ़ाने नौकरी के साथ ही छोटा-मोटा करोबार भी करते हैं। यह चलन तेजी से बढ़ते जा रहा है। इस प्रकार का कोई भी काम शुरु करने से पहले सभी पक्षों पर गौर कर लेना जरुरी होता है।
पहली बात तो ये कि जो भी काम आप शुरू करना चाह रहे हैं उसकी अच्छी समझ होनी चाहिए।
मगर उससे भी पहले ज़रूरी ये है कि आपके अंदर वो काम करने की भरपूर ललक होनी चाहिए।
दूसरी बात ये कि आपको एक साथ कई काम करना आना चाहिए।
आपका मल्टीटास्किंग होना ज़रूरी है, वरना नौकरी के साथ कोई धंधा करने का इरादा घाटे का सौदा भी हो सकता है।
तीसरी और सबसे अहम बात है कि आपके पास इस नए काम के लिए समय भी होना चाहिए। वरना सिर्फ़ इरादों से काम नहीं चलने वाला।
नौकरी के साथ नया काम शुरू करने से पहले ख़ुद से सवाल कीजिए कि आप ये काम क्यों शुरू करना चाहते हैं?
क्या आप ये काम पैसों के लिए करना चाहते हैं? या फिर आपके अंदर ये नया काम करने का जोश और ललक है।
क्या आप इस काम को शुरू करके आगे चलकर पूरी तरह कारोबारी बनना चाहते हैं? नौकरी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं?
इन सवालों के सही जवाब मिल जाएं तो आपको नया काम शुरू करने में आसानी होगी।
जो भी काम आप शुरू करना चाहते हैं उसमें वक़्त लगना तय है।
जैसे कि आप नई वेबसाइट शुरू करना चाहते हैं तो रजिस्ट्रेशन से लेकर डिज़ाइनिंग और लॉन्च तक ढेर सारे काम होते हैं.
बेहतर होगा नुक़सान उठाने से पहले आप बीमा करा लें।
इसी तरह दूसरे कामों में भी वक़्त और पैसे लगेंगे। तो अपनी प्लानिंग में इन सब बातों का ख़्याल रखें।
बाज़ार में उतारने के लिए कोई नया उत्पाद बनाना है तो उसकी मांग, उसके बाज़ार, उसमें नई ख़ूबियों की ज़रूरत के बारे में ख़ूब सोच विचार कर लें।
फिर उसकी सही क़ीमत के बारे में भी फ़ैसला लेना ज़रूरी है।
उस उत्पाद की मार्केटिंग कैसे करेंगे, ये देख लेना सबसे ज़रूरी है क्योंकि प्रोडक्ट बनाना आसान है पर उसके लिए बाजार तलाशना कठिन।
अगर आपके उत्पाद के लिए बाज़ार नहीं है, तो उसे बनाना बेकार होगा।
जब ख़रीदार नहीं होंगे, तो, आपका वक़्त, आपकी मेहनत और आपके पैसे, सब बेकार जाएंगे।
नए प्रोडक्ट पर आप प्री-सेल या प्री-ऑर्डर के ऑफर से अपने उत्पाद के लिए संभावनाएं तलाश सकते हैं।
आपकी बनाई चीज़ों के ग्राहकों के बारे में आपको अच्छे से पता होना चाहिए
नया काम शुरू करने से पहले आप अपनी नौकरी की शर्तें देख लें।
हो सकता है कि नौकरी की कुछ शर्तें ऐसी हों, जो आपके नया काम शुरू करने में अड़ंगा डालें।
इस बारे में जानकारी न होने पर आपकी नौकरी पर भी मुसीबत आ सकती है।
नौकरी के साथ नया काम करने के लिए टाइम मैनेजमेंट में सावधानी बरतना ज़रूरी है।
अपने वक़्त को इस तरह अपने और दफ़्तर के काम में बांटिए कि दोनों को नुक़सान न हो।
अपने टारगेट ऐसे तय कीजिए कि आपको जरुरत से ज़्यादा मेहनत न करनी पड़े। वरना पहले ही मोर्चे पर मात मिल सकती है।
और सबसे ज़रूरी बात, आपका नया काम चल निकले, आपके उत्पाद की मांग ख़ूब हो जाए, तो ये देख लें कि इस काम के साथ आपकी नौकरी चल सकती है कि नहीं।
अगर काम इतना मिल रहा है कि नौकरी की ज़रूरत नहीं, तो आप अपने इस काम पर ध्यान दीजिए।
अगर नौकरी की अभी भी आपको ज़रूरत है, तो दोनों के बीच तालमेल बनाए रखने पर ज़ोर रहना चाहिए।

एक ही परीक्षा से सरकारी और निजी क्षेत्र में मिलेगी नौकरी
देश में जिस प्रकार शिक्षित बेरोजगारों की तादाद बढ़ रह है उसको देखते हुए अब एक नया प्रयोग किया जा रहा है।
नौकरी की तलाश में बैठे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। अब एक ही परीक्षा से एक नहीं कई नौकरियों के दरवाजे खुल जाएंगे। इसके लिए बेरोजगारों को तो न तो उसे बार-बार परीक्षा के लिए फॉर्म भरना पड़ेगा और न ही बार-बार फॉर्म भरने के लिए उसे अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ेगे। केंद्र सरकार ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है जिसके जरिए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नौकरियों के लिए अवसर मिलेगा। सरकार की योजना के मुताबिक यदि कोई युवा सरकारी नौकरी पाने के लिए कोई परीक्षा फार्म भरता है और उसमें सफल नहीं हो पाता है तो उसकी उस परीक्षा के स्कोर को अन्य नौकरियों में चयन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकारी नौकरी के अंकों से मिलेगी निजी क्षेत्र में नौकरी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकारी नौकरी के लिए दी गई परीक्षा का स्कोर होगा देश की नामी गिरामी निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने के काम आएगा। सरकार की योजना के अनुसार यदि कोई बेरोजगार संघ लोक सेवा आयोग या कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में बैठता है और उसमें कुछ नंबरों से सफल नहीं हो पाता है तो कट ऑफ लिस्ट के हिसाब से एक नई मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। इस मेरिट लिस्ट से प्रतिभाशाली युवाओं का चयन प्राइवेट कंपनियों में नौकरी के लिए किया जाएगा।
युवाओं के अंक पोर्टल पर डाले जाएंगे
कुछ कम नंबरों से सरकारी नौकरी के लिए असफल रह गए युवाओं के रिजल्ट को एक पोर्टल पर डाल दिया जाएगा। इस पोर्टल से प्राइवेट कंपनियां उम्मीदवारों द्वारा परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर अपने लिए सुयोग्य कर्मचारी चुन सकेंगी। सरकार को उम्मीद है कि उसके इस प्रयास से सरकारी नौकरी पाने में विफल हजारों बेरोजगारों को प्राइवेट नौकरी मिलने में बहुत आसानी होगी।
कार्मिक विभाग तैयार कर रहा पोर्टल
एक ही एक्जॉम से कई नौकरियों के इस सरकारी प्रयास के लिए केंद्र सरकार के तीन मंत्रालय मिलकर कार्य कर रहे हैं। इनमें वाणिज्य मंत्रालय, कंपनी मामलों का मंत्रालय और केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय शामिल हैं। केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग मंत्रालय को एक ऐसा पोर्टल तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी हैं जिसमें एसएससी और यूपीएससी सहित सभी केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों का पूरा ब्योरा रहेगा। इसके लिए उम्मीदवारों की सहमति फॉर्म भरते वक्त ही ले ली जाएगी। यानी उम्मीदवारों से यह पूछ लिया जाएगा कि क्या वह सरकारी के अलावा प्राइवेट नौकरी करने का इच्छुक है। यदि अभ्यर्थी अपनी सहमति जताता है तो उसका पूरा ब्योरा परिणाम आने के बाद नाम, पता, योग्यता, प्राप्त अंक, रैंकिग आदि पोर्टल पर डाल दी जाएंगीं। इसके बाद पोर्टल को देख कर प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां यहां से डाटा लेकर अपने लिए उपयुक्त उम्मीदवारों का चुनाव कर पाएंगीं। कंपनी मामलों का मंत्रालय इसमें प्राइवेट कंपनियों को शामिल करने के लिए उनसे बात कर रहा है। मंत्रालयों के अधिकारियों का कहना है कि यह योजना तभी सफल हो पाएगी जब प्राइवेट कंपनियां ज्यादा से ज्यादा तादाद में इसमें रुचि दिखाएं और इसमें शामिल हों। उनका कहना है कि हम कंपनियों को बेहतर उम्मीदवार उपलब्ध कराने का प्लेटफार्म तैयार करना चाहते हैं इससे कंपनियों और उम्मीदवारों दोनों को फायदा होगा।

खाड़ी देशों में नौकरी करने जा रहे हैं तो रहें सावधान
अगर आप खाड़ी देशों में नौकरी करने जा रहे हैं तो सावधान रहें। इसके लिए केन्द्र सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए संबंधित विभाग में नामांकन करायें और सभी दस्तवेज तैयार करें जिससे बाद में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आये और अगर आती है तो ऐसे हालात में सरकार आपकी सहायता कर सके। आजकल विदेशों में नौकरी के नाम पर कई एजेंट जालसाजी में लगे हैं। उनके लुभावने वादों मं आकर आप मुसीबत में फंस सकते हैं इसलिए सतर्क रहें।
हाल में कतर संकट के चलते सऊदी अरब में सैकड़ो भारतीय नागरिक फंस गए हैं। सऊदी अरब ने अपने यहां से कतर के नागरिकों को निकल जाने का आदेश दिया है। इनमें वे लोग शामिल हैं जो कतर के बड़े औद्योगिक घरानों के मालिकों के लिए काम करने के लिए गए थे। इनमें से अधिकतर के पास वैध दस्तावेज नहीं हैं। इसलिए ये सऊदी अरब में ही अटक गये हैं।
गौरतलब है भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे कई दक्षिण एशियाई देशों के लोग सऊदी अरब में कतर के मालिकों के लिए घरेलू नौकर और खेती किसानी का काम करते हैं। इनमें से अधिकतर प्रवासी श्रमिक अवैध रूप से यहां रह रहे थे। कतर संकट के बाद सऊदी में रहने वाले इन श्रमिकों की जब जांच पड़ताल हुई तो ये पकड़े गए। इनमें से अधिकतर के कतर के मालिकों ने उनकी जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया है और उन्हें खुद ही सऊदी अरब से बाहर निकल जाने को कहा है।
सऊदी अरब के मानवाधिकार समूहों ने पहले से ही बहुत कमजोर स्थिति में रहने वाले इन कामगारों के भविष्य को लेकर चिंता जतायी है। कतर की नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिटी के प्रमुख ने बताया है कि इन कामगारों को रहने की जगह और पैसों की बहुत तंगी झेलनी पड़ रही है। कमिटी के चेयरमैन अली बिन स्माइख अल-मारी ने कहा, बहुत सारे प्रवासी कामगारों पर इस फैसले का असर पड़ा है। प्रभावित होने वाले लोगों में ज्यादातर किसान हैं, जो कतर और सऊदी के बीच पशुधन को लाने-ले जाने का काम करते थे।
अल-मारी ने कहा, आम तौर पर ये कामगार कतर के लोगों के साथ यात्रा करते हैं। कई कतर नागरिक लोगों को खेतों में काम करने के लिए रखते हैं और कुछ को अपने घरेलू नौकर, ड्राइवर बना कर अपने साथ लेकर यात्रा करते हैं। कमिटी प्रमुख ने बताया कि ऐसे कई कामगारों को खुद कतर की यात्रा करने की अनुमति नहीं है और अब वे अवैध रूप से सऊदी अरब में रहने को मजबूर हैं। अल-मारी ने बताया, उनके पास रहने की जगह नहीं है और पैसे भी नहीं।
कतर के साथ एक अनुबंध में बंधे होते हैं भारतीय
कतर में एक खास तरह के करार का चलन है, जिसमें कर्मचारी अपने मालिकों से साथ एक अनुबंध में बंधे होते हैं। अब तक पता नहीं चल सका है कि कतर के मालिकों ने अपने लिए काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को बिना सही कागजात दिये सऊदी में ही क्यों छोड़ दिया। कतर संकट के कारण इंसानों को ही नहीं बल्कि करीब 12,000 ऊंट और भेड़ों को भी पैदल रास्ते से सऊदी अरब से कतर की ओर लौटा दिया गया है। इसलिए सऊदी अरब या कतर में नौकरी करने जा रहे हैं तो अपने पास वैध पासपोर्ट और वीजा जरूर रखें।

अमीर और सफल होने के राज
अमीर और सफल लोग रोज क्‍या करते हैं, इस पर हाल ही में एक शोध हुआ है। ऐसे लोगों की कुछ सामान्य आदतें आम लोगों से अलग हटकर होती हैं। सहयोगी की सहायता करना। ऐसे लोग जानते हैं कि अगर सफलता पानी है तो साथी को सहयोग करना होगा और उसका समर्थन भी हासिल करना होगा। ऐसा कम ही देखा गया है कि जिन लोगों के जोड़ीदार के साथ खराब रिश्‍ते हों और वे सफलता के किसी मुकाम पर हों। अगर आप मानसिक तौर पर परेशान हैं तो उसका असर आपके काम पर भी पड़ता है।
अधिकतर लोग कहते हैं कि वे कोई नया काम को करने से पहले उसकी वजह तलाशते हैं कि वे उसे आखिर क्‍यों कर रहे हैं।
इन लोगों का कहना है कि वे कार्यस्थ्ल पर कम दोस्‍त बनाते हैं। कभी दोस्‍ती को काम के बीच नहीं आने देते। ऐसे लोग जोखिम लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। आइडिया देने से पीछे नहीं हटते। इनमें से अधिकतर ने कहा कि उनका आइडिया काम का हो या नहीं, एक बार दिमाग में आने के बाद वो उसे दूसरे लोगों से जरूर साझा करते हैं। इन लोगों ने बताया कि वे कभी किसी टॉपिक पर सबकी सलाह ना लेते हैं और ना ही सुनते हैं। अपने विश्‍वासपात्र लोगों से सलाह तो लेते हैं पर करते वही हैं जो उन्‍हें ठीक लगता है।

मुंहासों को ठीक करने करें ये उपाय
किशोरावस्था में कदम रखते ही हार्मोन में आये बदलावों के कारण कई प्रकार की समस्याएं भी आती हैं। इन्हीं में से एक है चेहरे पर होने वाले मुंहासे (एक्ने) । एक्ने को आयुर्वेदिक उपचार से ठीक किया जा सकता है। दरअसल त्वचा के नीचे स्थित सिबेशस ग्लैंड्स से त्वचा को नम रखने के लिए एक तेल निकलता है। ये ग्रंथियां चेहरे, पीठ, छाती और कंधों पर सबसे ज्यादा होते हैं।
अगर ये ज्यादा सक्रिय हो जाएं तो रोमछिद्र चिपचिपे होकर बंद हो जाते हैं और उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो आगे चलकर एक्ने का कारण बनते हैं। सिबेशस ग्लैंड्स की अति सक्रियता की प्रमुख वजह एंड्रोजन हार्मोन की अधिकता होती है। एंड्रोजन पुरुष सेक्स हार्मोन है और यह लड़के और लड़कियों दोनों में ही होता है। किशोरावस्था में इसका प्रभाव ज्यादा होता है। आइए हम आपको एक्‍ने के उपचार के लिए आयुर्वेद तरीकों के बारे में बताते हैं।
एक्ने की समस्या
कुछ लड़कियों को पीरियड्स से पहले बार-बार मुंहासे निकल आते हैं जो बिगड़कर एक्ने का रूप ले सकते हैं। ऐसा ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन के ज्यादा सिक्रीशन की वजह से भी होता है। इससे त्वचा पर छोटे-छोटे दानों के गुच्छे जैसे बन जाते हैं। इसी तरह सिबेशस ग्रंथियों से उत्पन्न सीबम त्वचा के पिगमेंट मिलकर रोमछिद्रों को ब्लॉक कर देता है तो ब्लैकहेड्स बनते हैं। अगर त्वचा की अंदरूनी परत में सीबम जमा हो जाता है तो व्हाइटहेड्स बनते हैं। कई बार ब्लैकहैड्स और व्हाइटहेड्स त्वचा के भीतर फैलने के बाद फूट जाते हैं, जिससे बाहरी त्वचा पर एक्ने और ज्यादा फैल सकता है।
दरअसल टीनेज में हार्मोंस में लगातार बदलाव आते रहते हैं, नतीजन चेहरे पर दाग, धब्बे, मुंहासे और एक्ने की समस्या होने लगती हैं। एक्ने ऐसी समस्या है जो आमतौर पर टीनेज और युवावस्था में अधिक होती है। अगर आपके परिवार में पहले भी परिवार वालों को एक्ने रहे हैं यानी आपके मां या पिता को भी यह समस्या रही है तो भी आपको इससे बचाव के लिए तैयार रहना चाहिए। एक्ने त्वचा का एक विकार है। एक प्रकार से यह मुंहासों का ही बिगड़ा हुआ रूप है।
गाय के ताजे दूध में चिरौंजी पीसकर इसका लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं और सूखने पर धो लें। इससे एक्ने की समस्या से निजात मिलेगी।
चमेली के तेल को सुहागा में मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर लगाकर मसलें। सुबह बेसन को पानी से गीला कर गाढ़ा-गाढ़ा चेहरे पर लगाकर मसलें और पानी से चेहरा धो डालें। इससे चेहरे पर होने वाली जलन पर बहुत आराम मिलेगा।
मसूर की दाल 2 चम्मच लेकर बारीक पीस लें। इसमें थोड़ा सा दूध और घी मिलाकर फेंट लें और पतला-पतला लेप बना लें। इस लेप को मुंहासों पर लगाएं।
मुंहासों को दूर करने के लिए जायफल भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए साफ पत्थर पर पानी डालकर जायफल घिसकर लेप को कील-मुंहासों पर लगाएं।
अन्‍य आयुर्वेदिक उपाय
शुद्ध टंकण और शक्ति पिष्टी (आयुर्वेदिक दुकानों में उपलब्ध) 10-10 ग्राम मिलाकर एक शीशी में भर लें। थोड़ा सा यह पावडर और शहद अच्छी तरह मिलाकर कील-मुंहासों पर लगाएं।
लोध्र, वचा और धनिया, तीनों 50-50 ग्राम खूब बारीक पीसकर शीशी में भर लें। एक चम्मच चूर्ण थोड़े से दूध में मिलाकर लेप बना लें और कील-मुंहासों पर लगाएं। आधा घंटे बाद पानी से धो डालें।
सफेद सरसों, लोध्र, वचा और सेन्धा नमक 25-25 ग्राम बारीक चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें। एक चम्मच चूर्ण पानी में मिलाकर लेप बना लें और कील-मुंहासों पर लगाएं।
मसूर, वट वृक्ष की कोंपलें (नरम छोटी पत्तियां), लोध्र, लाल चन्दन, सब 10-10 ग्राम बारीक चूर्ण करके मिला लें। एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ पीसकर लेप बना लें। इसे कील-मुंहासों पर लगाएं।
आयुर्वेद उपचार के साथ ही एक्ने की समस्‍या से बचने के लिए चेहरे की साफ-सफाई रखना जरूरी हैं, ऐसे में चेहरे को बार-बार पानी से धोएं।

साक्षात्कार में भ्रामक जवाब न दें
सिविल सेवाओं की परीक्षाओं में साक्षात्कार बेहद कठिन माना जाता है और इसकी तैयारी करते समय पूरी तरह गंभीर होना जरुरी है। साक्षात्कार द्वारा प्रतियोगी की आवेदित पद हेतु क्षमता का सही-सही आकलन किया जाता है। यह आकलन संबंधित विषयों के विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है, इसलिए प्रत्याशियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सतही ज्ञान के बल पर भ्रामक उत्तर न दें। बेहतर तो यही होगा कि राज्य सेवा के अंतर्गत उपलब्ध पदों के लिए आवेदन करते समय ही उन पदों की प्रकृति तथा आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त कर उसकी पूर्ति हेतु सभी संभावित क्षेत्रों का ज्ञान अर्जित करें।
अकसर देखा गया है कि साक्षात्कार के दौरान प्रत्याशी से पहला सवाल यही किया जाता है कि उसने सिविल सेवा का क्षेत्र ही क्यों चुना या आवेदित पद के लिए ही वह क्यों आवेदन कर रहा है।
प्रत्याशियों के पास इसका सौद्देश्यपूर्ण जवाब होना चाहिए। महज देशसेवा, समाजसेवा जैसे उत्तर पर्याप्त नहीं होते हैं। जब तक प्रत्याशियों को इस बात का ज्ञान न हो कि साक्षात्कार में किस तरह के प्रश्न पूछे जाएँगे या क्या किया जाएगा तब तक वे इसकी पूर्णरूपेण तैयारी भी नहीं कर पाएँगे। आमतौर पर सिविल सेवा परीक्षा का साक्षात्कार विश्वविद्यालयीन प्रायोगिक परीक्षाओं की मौखिक परीक्षाओं (वाइवा) जैसा नहीं होता है और न ही अन्य नौकरियों के लिए लिए जाने वाले साक्षात्कार की तरह प्रत्याशियों की खिंचाई वाला होता है।
इसके बोर्ड में बैठने वाले सभी सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ होने के साथ ही साक्षात्कार लेने के प्रति अत्यंत गंभीर होते हैं। वे प्रत्याशियों को परेशान कर उलझाने के स्वाभाविक तरीके से बातचीत के लहजे में साक्षात्कार लेते हैं। उनका उद्देश्य प्रत्याशियों की प्रतिक्रया, व्यवहार, आत्वविश्वास, दृढ़ निश्चयता, सकारात्मकता, नकारात्मकता, अभिरुचि, निर्णय लेने की क्षमता, उसकी पृष्ठभूमि आदि का आकलन होता है। वे टालमटोल कर भ्रामक जवाब के बजाय ईमानदारीपूर्वक प्रत्याशियों द्वारा प्रश्न के उत्तर न जानने के जवाब को ज्यादा तरजीह देते हैं, क्योंकि उन्हें भी पता होता है कि कोई भी व्यक्ति सर्वज्ञाता नहीं होता है।
साक्षात्कार के दौरान उत्तर देते समय आत्मविश्वास तथा निश्चित दृष्टिकोण सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। यदि प्रश्न का विश्लेषण कर तर्कपूर्ण जवाब दिए जाएँ तो साक्षात्कार लेने वाला निश्चित ही प्रभावित होता है। हाँ, इसके लिए ज्यादा ज्ञान बघारने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपके ज्ञान के प्रमाण स्वरूप मुख्य परीक्षा के प्राप्तांकों की सूची उनके पास पहले ही उपलब्ध होती है। साक्षात्कार में बड़बोलेपन की बजाय मितभाषी प्रत्याशी के चयन की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि वह साक्षात्कार हेतु निर्धारित 15-20 मिनट में साक्षात्कार लेने वालों के ज्यादा से ज्यादा प्रश्नों के जवाब देकर उन्हें संतुष्ट कर सकता है।
साक्षात्कार के समय केवल विषयगत ज्ञान की जानकारी नहीं ली जाती। अपने प्रदेश, उसके राजनीतिक, सामाजिक, भौगोलिक स्थिति की जानकारी ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिए तथा समसामयिक विषयों की जानकारी के साथ-साथ समस्याओं के समाधान की भी जानकारी यथेष्ठ मानी जाती है। साक्षात्कार के लिए बौद्धिक ज्ञान जितना आवश्यक है, उतना ही व्यावहारिक ज्ञान भी जरूरी है, क्योंकि सिविल सेवा से जुड़े सभी पद लोकहित तथा जनसंपर्क के अंतर्गत आते हैं।
लिहाजा इन पदों के प्रत्याशियों से यह अपेक्षा की जाती है कि उनका दृष्टिकोण लोकहित तथा कल्याणकारी भावनाओं के अनुरूप हो। बुद्धिमत्ता, व्यवहार के अलावा प्रत्याशी के हावभाव, वेशभूषा तथा प्रतिक्रिया का भी साक्षात्कार में आकलन किया जाता है। आकर्षक व्यक्तित्व तथा सौम्य व्यवहार साक्षात्कार में सफलता की कुंजी माने जाते हैं।

काउंसलिंग की अनदेखी न करें
अक्सर हम करियर काउंसिलिंग का समय पहचानने में देरी कर देते हैं। दरअसल, करियर काउंसलिंग का सही समय वह है जब बच्चे आगे की राह चुनने की दहलीज पर होते हैं। इसे आप हाई स्कूल (सेकेंडरी) ही मानिए क्योंकि इसके बाद ही स्टूडेंट्स के लिए केरियर की दिशा तय करने करने का समय होता है और यही वह समय है जब उन्हें सही सलाह की जरूरत होती है। अभिभावकों को इसी समय में बच्चों को करियर संबंधी सलाह उपलब्ध कराना चाहिए। इससे उसे सही सिर्फ सही विषय चुनने में मदद मिलती है, बल्कि वह यह भी जान पाता है कि किन विषयों में वाकई उसका रूझान है। अगर 11वीं में सही विषय का चुनाव न किया तो पूरा करियर ही पलट सकता है। पेशेवर काउंसलर मनोवैज्ञानिक तरीके से छात्र से बातचीत करते हैं और
काउंसलर पता लगा लेता है रुझान
मनोवैज्ञानिक या साइकोमेट्रिक टेस्ट के आधार पर छात्रों की प्रतिभाको समझते हैं। काउंसिलिंग का महत्व अभिभावकों को बच्चे की पढाई पर ध्यान तो देना ही चाहिए, जरूरत उन्हें यह समझने की भी है कि बच्चे की रूचि किन विषयों में है और वह उनमें कैसा कर रहा है। यह भी देखना चाहिए कि किन विषयों को पढने में बच्चे का मन नहीं लगता। इसके बाद अभिभावक करियर के चुनाव में बच्चे की मदद कर सकते हैं पर आज की भागदौड भरी जिंदगी में अभिभावकों के पास बच्चों के लिए कितना वक्त निकाल पाता हैं, यह सब को मालूम है। बच्चे का परिणाम भले ही अभिभावकों को पता हो, लेकिन वे अक्सर उसकी पसंद को समझ नहीं पाते हैं।। सिर्फ किसी विषय में अच्छे नंबर लाना ही उस विषय में बच्चे के आगे बेहतर करने की गारंटी नहीं हो सकता। अभिभावकों के लिए इस बात को समझना जरूरी है। इंजिनियरिंग-मेडकिल जैसे क्षेत्रों के प्रति बढ़ते रुझान का ही यह परिणाम है कि मन मुताबिक पढाई न कर पाने की वजह से बच्चे तनाव में घिर रहे हैं। यहीं पर बच्चों को काउंसिलिंग की जरूरत होती है ताकि उनके अभिभावक उनकी प्रतिभा को पहचान सकें और उसे अपनी पसंद के रास्ते पर बढने की इजाजत दे सकें।
अंक ही विषय में सफलता की गारंटी नहीं
यह कतई जरूरी नहीं है कि साइंस में 90 या 100 फीसदी अंक लाने वाला छात्र यही पसंद करे। हो सकता है उसकी रूचि गणित में न हो क्योंकि 10वीं के बाद पढ़ाई का लेवल अचानक हाई हो जाता है और अगर स्टूडेंट की रूचि उसमें न हो तो उसका प्रदर्शन प्रभावित होने लगता है। काउंसिलिंग में इन्हीं बातों को पैरेंट्स को समझाने की कोशिश की जाती है। नए क्षेत्रों की जानकारी काउंसिलिंग का एक सबसे बडा फायदा यह भी है कि काउंसिलर आपको वैसे विषय या उभरते क्षेत्रों के बारे में भी बताते हैं जिनसे आप अनजान होते हैं। आप ने उस फील्ड के बारे में कभी सोचा ही नहीं होता है। मार्केट ट्रेंड (देश-विदेश) के बारे में बताते हैं और इन सबसे ऊपर आपको अच्छा इंस्टीट्यूट चुनने में मदद करते हैं। विषय पसंद का होने से आप अपनी पसंद की राह पर बढ़ तो सकते हैं, लेकिन इस गला काट प्रतियोगिता के जमाने में अच्छे इंस्टीट्यूट का चुनाव करके ही आप दूसरों पर बढते ले सकते हैं। आज प्रबंधन में कई नए विषय आ गए हैं। इसी तरह लॉ का क्षेत्र बढ़ गया है। फैशन टेक्नॉलजी का बुखार और खुमार तो है ही, खेल के क्षेत्र में हो रहे सुधार और कमाई से इस क्षेत्र में नए विकल्प पर भी उभरे हैं।

सफलता के लिए कॉलेज की गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाएं
हर कोई अपनी कॉलेज जीवन में सफलता हासिल करना चाहता है, पर तमाम तरीके अपनाने के बावजूद भी बहुत से लोग इस लक्ष्य से दूर रह जाते हैं। इस प्रकार आप अपने कालेज को सफल बना सकते हैं। क्लास में बढ़ाएं अपनी भागीदारी : नियमित तौर पर क्लास जाकर वहां होनी वाली गतिविधियों में अपनी भागीदारी बढ़ाएं। इसके आपको एक साथ कई फायदे होंगे। अपने सहपाठियों से आपकी जान-पहचान बढ़ेगी, आप का आत्मविश्वास बढ़ेगा और इसके साथ ही पढ़ाई में भी आप पीछे नहीं रहेंगे।
सवाल पूछने से न घबराएं : कभी भी आपके मन में कोई सवाल आता है तो उसे पूछने से पीछे न हटें, बस बेवजह सवाल करने से बचें। सवालों को मन में दबा लेने से आपकी सोचने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
नियमित तौर पर शिक्षकों से बात करें शिक्षकों से नियमित तौर पर बातचीत कर अपनी शंकाएं दूर करते रहें। इसके अलावा जरूरत पड़े तो क्लास के बाद भी अलग से समय लेकर शिक्षकों से मिलें। अपने भविष्य के बारे में सोचें। समय मिलने पर अपने भविष्य के बारे में भी सोचते रहें। अपने करियर को लेकर लक्ष्य तय करें और इसके लिए कदम बढ़ाना शुरू कर दें। हर चीज को बाद के लिए न छोड़ें। अच्छे नोट्स संभाल कर रखें, ऐसे नोट्स जो बाद में भी आपके काम आ सकते हैं। उन्हें संभाल कर रखें। भविष्य में जब भी आपको नोट्स में मौजूद तथ्यों की जरूरत पड़ेगी, आपका वक्त खराब नहीं होगा।इसके अलाव जो भी जिम्मेदारी मिले उसे लेने से पीछे न हटें। इसके साथ ही कभी भी जिम्मेदारियों से दूर न भागें। जिम्मेदारी निभाकर आप खुद को साबित कर सकते हैं और अपने लिए नए मौकों का रास्ता खोल सकते हैं। खुद को चुनौती देते रहें। हमेशा खुद को नई-नई चुनौतियां दें और खुद ही अपनी समीक्षा करें। इसके अलावा अपनी सफलता को लेकर नियमित तौर पर खुद से सवाल करते रहें।

इच्छाओं को समर्पित करने से ही मिलेगा लक्ष्य
सभी इच्छाएं खुशी के लिए होती हैं। इच्छाओं का लक्ष्य ही यही है। किंतु इच्छा आपको कितनी बार लक्ष्य तक पहुंचाती है? इच्छा तुम्हें आनंद की ओर ले जाने का आभास देती है, वास्तव में वह ऐसा कर ही नहीं सकती। इसीलिए इसे माया कहते हैं। इच्छा कैसे पैदा होती है? किसी सुखद अनुभव की स्मृति या भूत के प्रभाव से इच्छा पैदा होती है। कुछ सुनने से भी इच्छा जागृत हो सकती है या किसी विशेष स्थान या व्यक्ति के संपर्क से। किसी और व्यक्ति की जरूरत या इच्छा भी तुम्हारी अपनी इच्छा के रूप में पैदा हो सकती है। मान लो कोई भूखा है, तो तुम्हें उसे खिलाने की इच्छा हो सकती है, या कोई तुमसे बात करना चाहता हो तो तुम्हारी भी उससे बात करने की इच्छा हो सकती है। कभी-कभी नियति या कोई घटना जिसमें तुम्हें भाग लेना है, तुममें इच्छा जाग्रत करती है, पर तुम अपने कृत्यों का कारण नहीं जानते। इच्छाएं अपने आप उत्पन्न होती हैं, वे तुमसे पूछकर नहीं आतीं। जब इच्छाएं उत्पन्न होती हैं, तुम उनका क्या करते हो? यदि तुम सोचते हो कि तुम इच्छाहीन हो जाओ, तो यह भी एक और इच्छा है। मैं एक उपाय बताता हूं- सिनेमा देखने के लिए टिकट खरीदनी पड़ती है और यह टिकट प्रवेश द्वार पर देनी पड़ती है। यदि तुम उस टिकट को पकड़े रखोगे तो अंदर कैसे जाओगे? उसी प्रकार, यदि तुम किसी कॉलेज में दाखिल होना चाहते हो तो आवेदन पत्र की जरूरत है। उसे भरकर जमा करना पड़ता है। उसे पकड़कर नहीं रख सकते। इसी प्रकार जीवन-यात्रा में भी अपनी इच्छाओं को पकड़कर मत रखो, उन्हें समर्पित करते जाओ। जैसे-जैसे समर्पण करते जाओगे, इच्छाएं भी कम उत्पन्न होंगी। सौभाग्यवान वे हैं जिनमें इच्छा उत्पन्न ही नहीं होती, क्योंकि इच्छा जागृत होने के पहले ही वे तृप्त हैं।