तकनीक

इंटेल ने मोबाइल, लैपटॉप के लिए कोर आई 9 प्रोसेसर उतारे
इंटेल ने मोबाइल और लैपटॉप के लिए इंटेल कोर आई9 प्रोसेसर का अनावरण किया, जो गेमिंग और कंटेट सृजन का बेहतरीन अनुभव प्रदान करेगा। इंटेल द्वारा बनाया गया यह अब तक सबसे उच्च-प्रदर्शन करने का लैपटॉप प्रोसेसर है। कंपनी ने एक नया इंटेल कोर प्लेटफॉर्म विस्तार की भी घोषणा की, जो इंटेल ‘ऑप्टटेन’ मेमोरी के साथ 8वीं पीढ़ी के इंटेल कोर प्रोसेसर के फायदे मुहैया कराएगी।
इंटेल ने एक बयान में कहा कि नया 8वीं पीढ़ी का इंटेल कोर आई9, आई7 और आई5 प्रोसेसर्स फॉर लैपटॉप्स ‘कॉफी लेक’ प्लेटफार्म पर आधारित है। बयान में कहा गया है कि डेस्कटॉप प्रोसेसर गेमप्ले के दौरान 41 फीसदी अधिक फ्रेम मुहैया कराती है तथा 4के वीडियो एडिट करने में 59 फीसदी तेज प्रदर्शन करती है।
आठवीं पीढ़ी का इंटेल कोर आई9-8950 एचके प्रोसेसर पहला मोबाइल इंटेल प्रोसेसर है जो छह कोर और 12 थ्रेड्स से लैस है, जो यूजर्स को सबसे उच्च गुणवत्ता का मोबाइल वीआर और न्यू विंडोज मिक्स्ड रियलिटी अनुभव मुहैया कराता है।
इसके अलावा कंपनी इंटेल 300 सीरीज चिपसेट भी लांच किया, जो तेज कनेक्शन के लिए गीगाबिट वाई-फाई को एकीकृत करता है।

प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में हैं आसीम संभावनाएं
प्लास्टिक टेक्नोलॉजी का जिस प्रकार से विस्तार हो रहा है और इसका हर क्षेत्र में उपयोग हो रहा है उसको देखते हुए इस क्षेत्र में कई संभावनाएं उभरी हैं। इंडस्ट्री का निरंतर विस्तार होने के कारण इसमें विशेषज्ञों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट का कार्य इस इंडस्ट्री में बहुत ही महत्वपूर्ण है।
कार्य
प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट कच्चे माल को विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजार कर प्रोडक्ट्स का निर्माण करते हैं। वे शोध व अनुसंधान का कार्य भी करते हैं। इन्हीं कार्यों के फलस्वरूप हर दिन नए प्रकार के उत्पाद बाजार में आते हैं।
योग्यता
बीटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में प्रवेश पाने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथमेटिक्स विषयों के साथ 12 वीं में कम से कम 50 फीसदी अंक हासिल करना जरूरी है। एमटेक या पीजी डिप्लोमा करने के लिए केमिकल इंजीनियरिंग/ प्लास्टिक रबर टेक्नोलॉजी/ मैकेनिकल इंजीनियरिंग/ टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में बीटेक/ बीई डिग्री या डिप्लोमा आवश्यक है। फिजिक्स अथवा केमिस्ट्री में एमएससी करने वाले छात्र भी प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में एमटेक कर सकते हैं। जिन छात्रों ने गेट परीक्षा पास की है, उन्हें एमटेक में प्राथमिकता दी जाती है।
कल्पनाशील होना जरुरी
इस इंडस्ट्री में भविष्य संवारने के लिए युवाओं के पास शैक्षणिक योग्यता के साथ कठोर परिश्रम, कल्पनाशीलता तथा भौतिक व रसायन विज्ञान में गहरी रुचि आवश्यक है।
तेजी से बढ़ रही मांग
सरकार ने प्लास्टिक उद्योग को उच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र माना है। प्लास्टिक की मांग प्रतिवर्ष 10 से 14 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इस उद्योग में भारत का 3500 करोड रुपये का सालाना कारोबार है, जिसके 2014 तक 6500 करोड रुपये सालाना होने की उम्मीद है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में बढ़ती प्लास्टिक की खपत को देखते हुए आगामी वर्षो में 15 लाख लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। प्लास्टिक टेक्नोलॉजी का कोर्स पूरा कर लेने के बाद कंप्यूटर, इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स में नौकरी प्राप्त की जा सकती है। सार्वजनिक क्षेत्र में प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट को पेट्रोलियम मंत्रालय, ऑयल ऐंड नेचुरल गैस कमीशन, इंजीनियरिंग संयंत्रों, पेट्रोकेमिकल्स, विभिन्न राज्यों में पॉलिमर्स कॉरर्पोरेशन्स, पेट्रोलियम कंजर्वेशन, रिसर्च असोसिएशन ऑफ इंडिया आदि में करियर के अच्छे अवसर हैं। इसके अलावा मार्केटिंग व प्रबंधन के क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं।
कमाई
सरकारी क्षेत्र में प्लास्टिक टेक्नोलॉजिस्ट की शुरुआती सैलरी 8 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह होती है। प्राइवेट कंपनियों में शुरुआती स्तर पर 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह या इससे भी अधिक प्राप्त हो सकते हैं। 2 या 3 सालों के अनुभव के बाद 20 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं।
कोर्स कहां से करें
बीटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी (4 वर्ष)
एमटेक इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी (2 वर्ष)
डिप्लोमा/पीजी डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी (3-4 वर्ष)
डिप्लोमा/पीजी डिप्लोमा इन प्लास्टिक मोल्ड डिजाइन (3-4 वर्ष)
पीजी डिप्लोमा इन प्लास्टिक प्रोसेसिंग ऐंड टेस्टिंग (18 माह)।

तकनीक को शिक्षा से जोड़ें स्कूल
No Imageआई टी और कम्पयूटर के इस युग में तकनीक की अहम भूमिका हो गयी है। वहीं अगर एक शिक्षक छात्रों को उसी अंदाज में सिखा रहा है, जैसा कि उसने एक या दो दशक पहले सीखा था, तो यह बच्चों के भविष्य से खेलने जैसी बात होगी। इसलिए सभी निजी स्कूलों के साथ ही सरकारी स्कूलों को भी तकनीक अपनाते हुए उसे शिक्षा के साथ जोड़ना बेहद जरुरी है। शिक्षाविदों का मानना है कि जब शिक्षा तकनीक आधारित होती है, तो शिक्षा के मायने बदलने लगते हैं। इससे छात्रों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिलता है। वे चीजों को बेहतर तरीके से कम समय में सीख पाते हैं। वहीं, शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलता है।
स्मार्ट क्लास से कम होता है बस्ते का बोझ
इन बदलावों पर शिक्षाविदों का कहना कि स्मार्ट क्लास एक बेहतर कॉन्सेप्ट है। इसमें बच्चों को बोझ मुक्त शिक्षा मिलती है। इसमें डिजिटल लर्निंग को अहमियत दी जाती है और बच्चों को भारी स्कूल बैग से छुटकारा मिलता है। हम छात्रों को स्मार्ट क्लास के जरिए ही पढ़ाना चाहते हैं, ताकि वे कम समय में ज्यादा से ज्यादा चीजें सीख सकें।
शिक्षा के क्षेत्र में टेक्नॉलजी की भूमिका दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है।यही नहीं, जब नए सिलेबस तैयार किए जाते हैं, तो इस बात का ख्याल रखा जाता है कि इन स्टूडेंट्स का सामना पूरी दुनिया से होना है। आज इन्हें तकनीक आधारित शिक्षा दी जाएगी, तो इसका फायदा भविष्य में मिल सकेगा।
पुराने समय की बात करें, तो शिक्षा सीमित लोगों तक ही पहुंच सकती थी। उस दौर में सुविधाएं भी सीमित ही थीं। बच्चे शिक्षक की क्लास और उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए नोट्स पर ही निर्भर रहते थे लेकिन आज तस्वीर बदल गई है। इंटरनेट ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। आज एक क्लिक से किसी भी विषय के बारे में विस्तार से जानकारी मिल जाती है। यही नहीं, आज स्टूडेंट्स को ऑनलाइन लाइब्रेरी मिलती है। स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज, ई पोडियम, लैपटॉप और ग्राफिक्स टेबल जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। तकनीक ने शिक्षा के स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभाई है। यही कारण है कि टू टीयर और थ्री टीयर वाले शहरों में भी इसकी मदद से छात्रों को अच्छी शिक्षा मिलने लगी है।
वर्तमान में मोबाइल और विडियो अधारित शिक्षा भी सर्व सुलभ हो गयी हैं। छात्रों के लिए ये मददगार साबित हो रहे हैं। डिजिटल डिवास के माध्यम से स्मार्ट क्लास को साकार किया जा सका है। स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। अध्यान के दौरान कोई परेशानी हो रही हो, तो घर बैठे-बैठे ही चीजों को समझा जा सकता है। किसी भी समस्या का हल एक क्लिक की दूरी रह गया है। खास बात यह भी है कि किसी भी टॉपिक को आप तब तक देख पाते हैं,जब तक कि चीजें आपको पूरी तरह से समझ में नहीं आ जाती है।