चौपाल

आनंदी के रोड शो की चर्चा
मध्य प्रदेश की नवागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का एमपी में रोड शो चर्चा में है,वह अपने परिवार के 14 सदस्यों के साथ अहमदाबाद से चार्टर बस में सवार होकर उज्जैन पहुंची। उनका मध्य प्रदेश सीमा में जगह-जगह स्वागत हुआ। उन्होंने आम जनता से मिलकर अभिवादन भी किया। नवनियुक्त राज्यपाल ने उज्जैन तक कोई भी सरकारी तामझाम को स्वीकार नहीं किया। यह अलग बात है कि मध्य प्रदेश शासन ने उनके मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही, उनकी सुरक्षा और उनके स्वागत के सारे इंतजामात कराए।
आनंदीबेन पटेल का झाबुआ जिले के पिटोल से मध्यप्रदेश में दोपहर 12 बजे आगमन हुआ। कलेक्टर आशीष सक्सेना और एसपी महेश चंद्र जैन ने उनकी आगवानी की। प्रतीक के तौर पर उन्हें तीर कमान भेंट किया। जिला प्रशासन ने उनसे राजभवन के वाहन में बैठने की गुहार लगाई। उन्होंने इंकार कर दिया। इसके बाद जगह-जगह भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। उज्जैन पहुंचने के बाद महाकाल मंदिर में उनके स्वागत की तैयारियां व्यापक स्तर पर की गई रेड कार्पेट बिछाया गया। उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन करके 15 मिनट तक परिवार के साथ पूजा-अर्चना की, उसके बाद वह राजभवन के वाहन पर सवार होकर भोपाल आई। मध्य प्रदेश के किसी भी राज्यपाल का शपथ ग्रहण के पूर्व इस तरह का रोड शो नहीं हुआ। जितनी सहजता, सरलता के साथ उन्होंने अपना पदभार ग्रहण किया। इसको लेकर वह चर्चाओं में हैं।

श्रीमंत कहा तो गंगाजल पिलाकर कराई शुद्धि
मध्यप्रदेश के मंत्री जयभानसिंह पवैया ने अशोकनगर जिले में भाजयुमो के कार्यक्रम में मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष अभिलाष पाण्डेय और जिलाध्यक्ष रविन्द्र लोधी द्वारा जूनियर सिंधिया को श्रीमंत कहने पर डांट लगाई और दोनों नेताओं को मंच पर ही गंगाजल पिलाया। साथ ही भविष्य में कभी भी इस प्रकार के सामंतवादी शब्द का प्रयोग न करने की शपथ दिलाई। पवैया भाजयुमो के अशोकनगर युवा सम्मेलन में अतिथि के रूप में आये थे। पवैया द्वारा किये गए इस कार्य से एक बात तो जाहिर होती है कि सांसद को श्रीमंत और महाराज जैसे शब्दों से सम्बोधित करना उन्हें पसंद नहीं हैं। पूर्व में भी पवैया द्वारा सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि शिलापत्तिका पर और भूमिपुजन के दौरान श्रीमंत शब्द नहीं लिखा दिखना चाहिए। इसके बाद हुए भूमिपूजन के कार्यक्रमों में शिलापत्तिकाओं में श्रीमंत शब्द अंकित करने से सरकारी नुमाइंदे बचते रहे।

महिला रेंजरों की भर्ती पर दो मंत्रियों में तकरार
महिला रेंजरों की भर्ती के लिए एमपी के वन महकमे द्वारा निकाले गए विज्ञापन में सीने के माप को लेकर विवाद शुरू हो गया है। इस मामले में प्रदेश के दो मंत्री आमने-सामने आ गए है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने इसे गलत बताया है। वहीं वन मंत्री गौरीशंकर शैजवार ने कहा कि जो सबके लिए नियम है वहीं लागू कर किए गए है। मालूम हो कि वन विभाग ने पीएससी के माध्यम से महिला रेंजरों सहित अन्य पदों के लिए भर्ती निकाली है। इसमें पुरुषों के साथ महिलाओं के लिए भी फिटनेस टेस्ट के मापदंड दिए गए है। इसमें पुरुषों के लिए सीने की माप के मानक के साभ में महिलाओं के लिए भी इसी तरह के मानक दिए गए है। इस बारे में श्रीमती चिटनिस ने टवीट कर कहा कि ये बेहद आपत्तिजनक है। इस बारे में पता अभी पता चला है। वे इस बारे में वनमंत्री से बात करेंगी। उधर भोपाल की पूर्व महापौर एवं कांग्रेस की वरिष्ट नेत्री विभा पटेल ने भी इसे महिलाओं का अपमान बताया है। उन्होंने इस मामले दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मंत्रियों के रिश्तेदारों के बीच लेन-देन थाने पहुंचा
राज्य की शिवराज सरकार के दो मंत्रियों के रिश्तेदार आपस में उलझ रहे हैं वह भी पैसों के लेनदेन को लेकर मामला इतना बढ़ा की थाने पंहुच गया,विवाद बढ़ता देख पुलिस ने इसे खत्म करने का प्रयास किया तब जाकर मामला शांत हुआ। जानकारी के अनुसार, प्रदेश के दो मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ( खनिज मंत्री ) और रामपाल सिंह (लोक निर्माण मंत्री) के रिश्तेदारों विनोद कुमार शुक्ल (बड़े भाई) और वीरेन्द्र सिंह सिमरिया (करीबी रिश्तेदार ) के बीच व्यवसायिक रुपयों के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया।हालांकि विवाद कई दिनों से चल रहा था और अब थाने तक पहुंच गया। विवाद शांत हो पाता इसके पहले ही मंत्री रामपाल के रिश्तेदार वीरेन्द्र सिंह ने मंत्री राजेन्द्र के भाई का वायब्रेटर रोलर (कीमत लगभग 25-30 लाख) तोड़ दिया। जिससे विवाद और बढ़ गया । मामले में अब राजनीति गरमाने लगी है। हालांकि इस मामले से अपने आप को दूर करते हुए मंत्री रामपाल ने साफ कहा है उन्हें इस बारे में कुछ जानकारी नहीं है। इस मामले में शुक्ला ने थाने में शिकायती आवेदन देने के साथ ही एमपीआरडीसी के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी है। वहीं पीडब्ल्यूडी मंत्री के रिश्तेदार की ओर से सुरेन्द्र पटेल ने भी पुलिस में शिकायत की है।आवेदन पर पुलिस जांच कर रही है।

नकली खाद और बीज की चर्चा
मध्यप्रदेश में पिछले दिनों बालाघाट के सांसद बोधसिंह भगत और राज्य के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन के बीच का विवाद सुर्खियों में रहा है। इससे मध्यप्रदेश का कृषि विभाग भी चर्चाओं में रहा। दरअसल, पिछले 2 सालों में मध्य प्रदेश मैं नकली बीज के मामले में 28 कंपनियों के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं। 85 मामलों में नकली बीज बेचने वाली कंपनियों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। 126 मामलों में जांच के बाद जुर्माना और लाइसेंस निलंबन के आदेश दिए गए हैं। मध्यप्रदेश में नकली बीज बेचने की शिकायतें लगातार मिलती रही है। इसकी जांच भी समय-समय पर होती रही है। कृषि विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई करने के बाद भी मध्यप्रदेश में नकली बीज और खाद का मामला थम नहीं रहा है। जिसके कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सांसद बोधसिंह भगत ने वारासिवनी स्थित अपने फार्महाउस के लिए धान का जो बीज यशोदा हाइब्रिड बीज कंपनी से खरीदा था। वह नकली निकला था। सांसद की शिकायत पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस पर कार्यवाही की। इस कंपनी का लाइसेंस बिना जांच रिपोर्ट आए निरस्त कर दिया गया था। इस कंपनी के बीज की जब जांच रिपोर्ट आई तो इसमें बीज सही पाया गया। संयुक्त संचालक ने जो लाइसेंस निरस्त किया था उस आदेश को को संशोधित कर दिया गया। इसको लेकर सांसद बोधसिंह भगत और मंत्री गौरी शंकर बिसेन के बीच विवाद बढ़ा था। मलाजखंड की सभा में सार्वजनिक रूप से यह विवाद सामने भी आया। नकली खाद नकली बीज और नकली दवाइयों का शिकार किसान हो रहा है। कई मामलों में सहकारी समितियों की भी संलिप्तता सामने आई। सांसद और मंत्री के विवाद से यह मामला अब केंद्र तक पहुंच गया है। प्रदेश पार्टी संगठन भी इस मामले को लेकर होने वाले नुकसान का आंकलन कर रहा है। किसान आंदोलन के दौरान पार्टी को नकली खाद ,बीज को लेकर जो नुकसान उठाना पड़ सकता है ।इसका आकलन अब संगठन कर रहा है।

किसान आंदोलन
मंदसौर गोली कांड के बाद प्रदेश का माहौल बड़ी तेजी से बदला शिवराज के उपवास के बावजूद प्रदेश सरकार की किसान हितैषी छवि को बड़ा धक्का
लगा है। प्रदेश में किसान आंदोलन के बाद के परिदृश्य में जहां एक ओर कांग्रेस अपनी वापसी की संभावनाएं तलाशने में जुटी हुई है, वहीं सत्तारुढ़ भाजपा किसानों के गुस्से को शांत करने के लिए हरसंभव प्रयास में भिड़ गई है। इसी कड़ी में वह जून अंत सं जुलाई के शुरू तक किसान संदेश यात्रा निकाल रही है। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का सत्याग्रह प्रदेश कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम कर गया है,मंदसौर में चली गोली और 6 किसानों की मौत के बाद प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार को घेरने के लिए काफी तेजी दिखाई है। सिंधिया के टेंट में कूलर, एसी नहीं होने के साथ ही पलंग पर सोना और मटके का पानी पीने की बातें भी प्रदेश में सुर्खियों में रही। इसके अलावा गांधी विचारक सुब्बाराव का भी आना देश भर में कांग्रेस की गांधीवादी विचारधारा को लेकर नई चर्चा की शुरूआत कर गया।

मुकाबले को तैयार
मध्यप्रदेश में बीते दिनों कांग्रेस के प्रदर्शन,विधानसभा के अंदर के संग्राम कांग्रेस द्वारा नेता प्रतिपक्ष का चयन कर लेने और सीएम तथा नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की राज्यपाल के अभिभाषण पर तकरार के मामले ही प्रमुख रहे। कांग्रस ने पूरी ताकत के साथ भोपाल में बड़ा कार्यक्रम कर एकजुटता का परिचय दिया है। उसने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का चयन भी कर लिया जिस पर फिर से अजय सिंह राहुल की वापसी हो गई है। पार्टी के बड़े नेताओं का एक मंच पर इस तरह साथ आकर सरकार विरोधी प्रदर्शन कर विधानसभा का घेराव करना प्रशंसा के लायक है। पार्टी अब जनता को यह भरोसा दिलाने का प्रयास कर रही है कि वह उसके लिए चौकीदार की भूमिका में काम पूरी मुस्तैदी से करेगी। इस बात का लोगों को एहसास कराने खुद दिगिवजय आगे आए और उन्होंने सभा मंच से साफ किया कि कहीं कोई सेटिंग नहीं है। वह और उनके साथ राज्य सरकार से मुकाबले के लिए तैयार हैं।
दिखाई वचनबद्वता
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने
साफ किया है कि वह रेत के अवैध उत्खनन करने वालों को छोडेंगे नहीं उन्होंने इस काम में लगे वाहनों को राजसात करने का कानून इसी सत्र में बनाने का भरोसा दिया है। इसके ठीक बाद सरकार ने सागर के महापौर से जो कि भाजपा के ही सदस्य हैं, उनसे भ्रष्टाचार के माामले में फंसे होने पर वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार वापस लेकर अपने कहे हुए वाक्यों के प्रति वचनबद्वता दिखाई है। इसी दौरान सरकार की ओर से अगले साल का बजट भी पेश किया गया। जिसे प्रेक्षक चुनाव पूर्व बजट कह रहे हैं। जिसमें सभी को साधने की कोशिश की गई है।

भागवत का आकर्षण
मध्यप्रदेश में पिछले दिनों आरएसएस के सरसंघचालक मोहनराव भागवत की यात्रा का आकर्षण रहा तो आईएसआई का नेटवर्क उजागर होने की गूंज देश में सुनाई दी. भागवत मप्र के आदिवासी बहुल बैतूल जिले के हिन्दू सम्मेलन में शिरकत करने आए थे. वह बैतूल जेल के उस कमरे तक पहुंचे जहां कभी संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरू गोलवरकर ने महात्मा गांधी की हत्या के बाद तीन महीने का समय काटा था.
भागवत का पुरानी भोपाल रियासत के इलाके में करीब सप्ताह भर का प्रवास रहा . वह भोपाल,बैतूल व होशंगाबाद में ठहरे. उन्होंने साफगोई से कहा कि हिन्दुस्तान में रहने के कारण सबकी राष्ट्रीयता एक ही यानि हिंदू है. इसलिए भारत के मुसलमानों की राष्ट्रीयता भी हिंदू ही है. भागवत ने कट्टरता बढऩे पर चिंता जाहिर कर लोगों को पांच संकल्प दिलाए हैं. उन्होंने रोजगार देने वाली शिक्षा के प्रबंधकीय तरीके विकसित करने पर जोर दिया है. उनके प्रवास पर राजनीतिक प्रेक्षकों की विशेष नजर रही. लेकिन वह राजनीतिक मेल-मुलाकातों से दूर ही रहे.उन्होंने जनता-जनार्दन से श्रम और श्रमिकों दोनों के सम्मान की रक्षा की अपील कर यह संदेश भी दिया कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता है. हां काम भलीभांति और मन लगाकर करने की नीयत होना चाहिए.
सावधान-खबरदार
वहीं शान्त तासीर वाले मध्यप्रदेश में आईएसआई का नेटवर्क पकड़े जाने से लोग भौंचक्के हैं. उन्हें ये समझ नहीं आ रहा कि आखिर ये सब कैसे और क्यों इतने दिनों से चल रहा था. इस नेटवर्क ने नेताओं तक अपराधियों की आसान होती जा रही पहुंच की ओर भी इशारा किया है. नेताओं का अब इस बात की समझदारी बरतनी पड़ेगी कि उनके साथ आ रहे लोगों की प्रकृत्ति क्या है. सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच एैसे लोगों की बढ़ती पहुंच चिंताजनक है.

मंत्री के कारोबार का मामला छाया रहा
भाजपा भ्रष्टाचार और गड़बडिय़ों से मुक्त सुशासन देने की बात कर रही है,लेकिन इसमें वह कितनी तप कर निकलती है. इसे अभी देखा जा रहा है. इसी बीच मध्यप्रदेश में इस सप्ताह प्रमुख रूप से कटनी में करीब छह माह की पुलिस कप्तानी करने के बाद वहां से अचानक स्थानांतरित कर छिंदवाड़ा भेजे गए गौरव तिवारी का मामला ही छाया रहा है. जनता के बीच इस तबादले के बाद ये धारणा रही कि यह कार्रवाई हवाला कारोबारियों के दबाव के चलते की गई है.
अलबत्ता ये बात और है कि गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह उनके तबादले को एक सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत हुआ बता रहे हैं. हालांकि पुलिस प्रमुख ऋषि कुमार शुक्ला उन्हें भोपाल से लेकर जबलपुर तक महकमे का गौरव बताते रहे,पर वे अपने गौरव का हवाला कारोबारियों के दबाव की वजह से किए गए तबादले को नहीं रोक सके.
उनके तबादले के बाद जिस प्रकार से लोग कटनी में विरोध स्वरूप सडक़ों पर खड़े हुए वह भी प्रदेश के राजनीतिक नेतृत्व को नहीं हिला सका. हां कटनी में एक्सिस बैंक से जुड़ी जो कार्रवाई पुलिस और फिर उसकी जांच सीआईडी को देने की बात की गई है,उसके बीच इस पूरे प्रकरण की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रवर्तन निदेशालय से जांच की बात कही है. जिससे अब ये उम्मीद जगी है कि इस मामले की सही तौर पर जांच हो सकेगी. जिससे यह भी जाना जा सकेगा कि आखिरकार राज्य के प्रदेश भाजपाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के बेटे और शिवराज के मंत्री संजय पाठक के बीच किस प्रकार के व्यवसायिक रिश्ते है.