चर्चित चेहरे 1

प्रजनेश एटीपी रैंकिंग में फिसल गए
भारत के प्रजनेश गुनेश्वरन एटीपी की नवीनतम एकल रैंकिंग में दो स्थान फिसल कर 92वें पायदान पर पहुंच गए हैं। प्रजनेश की रैंकिंग चीन में खेले गये लियूझोउ ओपन के प्री-क्वार्टर फाइनल में चोटिल होने के कारण पीछे हुई है। प्रजनेश की चोट के कारण ताइपे के तुंग लिन वु को वाक ओवर मिला है। वहीं एकल रैंकिग में सुमित नागल दूसरे सर्वश्रेष्ठ भारतीय खिलाड़ी है वह 129वीं रैंकिंग पर बने हुए है। इसके अलावा रामकुमार रामनाथन की रैंकिंग में भी दो स्थान की गिरावट आई है वह 195 स्थान पर पहुंच गए हैं। शीर्ष 300 रैंकिंग में शशि कुमार मुकुंद (235) और साकेत मायनेनी (260) भी शामिल है। युगल रैंकिंग में भारत के रोहन बोपन्ना 40वीं रैंकिंग के साथ सर्वश्रेष्ठ भारतीय बने हुए है। दिविज शरन और लिएंडर पेस को हालांकि तीन-तीन स्थानों का नुकसान हुआ है और वे क्रमश: 48वें और 95वें स्थान पर पहुंच गये। पूरव राजा 101वें पायदान पर है।
वहीं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की रैंकिंग की बात करें तो इटली के मात्तेओ बेर्रेटिनी पहली बार शीर्ष 10 में पहुंचे हैं। विएना में गत सप्ताह खेले गए टूर्नामेट में वह उपविजेता रहे थे जिससे उसकी रैंकिंग में दो स्थान का सुधार हुआ और वह नौवें पायदान पर पहुंच गये हैं जबकि एक साल पहले उनकी रैंकिंग 53 थी। इसके अलावा शीर्ष वरीयता प्राप्त सात खिलाड़ियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। रूस के कारेन खाचेनोव एक स्थान के लाभ के साथ आठवें पायदान पर पहुंच गये जबकि पिछली रैंकिंग में आठवें स्थान पर कायम जापान के केई निशिकोरी 11वें स्थान पर फिसल गये हैं।

पैरालिंपियन मरीकी ने बीमारी से ली इच्छामृत्यु
बेल्जियम की चैंपियन पैरालिंपियन मरीकी वरवूर्ट ने 40 साल की उम्र में इच्छा मृत्यु के जरिए अपने जीवन को समाप्त कर लिया है। इच्छामृत्यु बेल्जियम में वैध है और इस ऐथलीट ने 2016 रियो ओलिंपिक्स के बाद घोषणा कर दी थी कि अगर बीमारी के कारण उनकी स्थिति और खराब होती है तो वह इस राह पर चल सकती हैं। मरीकी ने हालांकि उस समय कहा था कि खेल ने उन्हें जीने का कारण दिया है।
2016 पैरालिंपिक्स के दौरान उन्होंने कहा था, ‘मैं अब भी प्रत्येक लम्हे का लुत्फ उठा रही हूं। जब यह लम्हा आएगा, जब अच्छे दिनों से अधिक बुरे दिन होंगे, तब के लिए मेरे इच्छामृत्यु के दस्तावेज तैयार हैं लेकिन अभी यह समय नहीं आया है।’ वीलचेयर दौड़ में वरवूर्ट ने दो-दो पैरालिंपिक खेलों में एक स्वर्ण , दो रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किया था। लंदन ओलिंपिक 2012 में 100 मीटर वीलचेयर दौड़ में इस ऐथलीट ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था, वहीं 200 मीटर दौड़ में उन्होंने रजत पदक जीता था। 4 साल बाद ब्राजील में जब रियो पैरालिंपिक खेलों का आयोजन हुआ तो इस चैंपियन खिलाड़ी ने यहां भी दो पदक हासिल किए थे। इस बार 400 मीटर वीलचेयर दौड़ में उन्हें सिल्वर और 100 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। हाल के दिनों में मरीकी की आंखों की रोशनी काफी कम हो गई थी और उन्हें मिरगी के दौरे पड़ते थे। उन्होंने इच्छामृत्यु के दस्तावेजों पर 2008 में ही हस्ताक्षर कर दिए थे। मंगलवार को इस चैंपियन खिलाड़ी ने अपने दुखों का अंत करने के लिए इच्छामृत्यु की राह को चुन लिया। 14 साल की उम्र से मरीकी वरवूट मांसपेशियों की बीमारी से पीड़ित थीं जिससे उन्हें लगातार दर्द होता था। उनके पैरों में लकवा हो गया था और वह बमुश्किल सो पाती थीं।

रोहित और मयंक की जोड़ी ने बनाये नये रिकार्ड
रोहित शर्मा और मयंक अग्रवाल ने भारत की तरफ से सबसे बड़ी शुरुआती साझेदारी का एक नया रेकॉर्ड बनाया। दोनों ने 82 ओवर में 317 रन बनाए। इससे पहले वीरेंदर सहवाग और गौतम गंभीर ने कानपुर में इसी टीम के खिलाफ 218 रन की शुरुआती साझेदारी बनाई थी।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए यह सबसे बड़ी साझेदारी है। मयंक और रोहित से पहले सहवाग और राहुल द्रविड़ ने चेन्नै में दक्षिण अफ्रीकी टीम के खिलाफ मार्च 2008 में दूसरे विकेट के लिए 268 रन जोड़े थे। सहवाग ने इसी मैच में 319 रन बनाए थे जिसके बाद वह मैन ऑफ द मैच रहे। फरवरी 2010 में कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वीवीएस लक्ष्मण और महेंद्र सिंह धोनी ने 7वें विकेट के लिए नाबाद 259 रन की साझेदारी की थी। सहवाग ने इसी मैच में दिग्गज सचिन तेंडुलकर के साथ तीसरे विकेट के लिए 249 रन की साझेदारी की थी।
300 रन की भागीदारी निभाने वाली तीसरी भारतीय सलामी जोड़ी
रोहित और मयंक की जोड़ी टेस्ट क्रिकेट इतिहास में 300 रन की भागीदारी निभाने वाली तीसरी भारतीय सलामी जोड़ी बन गयी। रोहित और मयंक के अलावा टेस्ट क्रिकेट में पहले विकेट के लिये 300 रन से ज्यादा की भागीदारी निभाने वाली अन्य भारतीय जोड़ियां वीनू मांकड़ और पंकज रॉय (1956 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 413 रन) तथा वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ (2006 में पाकिस्तान के खिलाफ 410 रन) की हैं।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की सर्वश्रेष्ठ साझेदारी
साझेदारी बल्लेबाज विकेट कहां कब
317 रन रोहित शर्मा-मयंक अग्रवाल पहले विकेट के लिए विशाखापत्तनम अक्टूबर 2019
268 रन वीरेंदर सहवाग-राहुल द्रविड़ दूसरे विकेट के लिए चेन्नै मार्च 2008
259* रन वीवीएस लक्ष्मण-एमएस धोनी 7वें विकेट के लिए कोलकाता फरवरी 2010
249 रन वीरेंदर सहवाग-सचिन तेंडुलकर तीसरे विकेट के लिए कोलकाता फरवरी 2010
भारत की सर्वश्रेष्ठ शुरुआती साझेदारी
साझेदारी बल्लेबाज किस टीम के खिलाफ कहां कब
413 रन वीनू माकंड-पंकज रॉय न्यूजीलैंड चेन्नै जनवरी 1956
410 रन वीरेंदर सहवाग-राहुल द्रविड़ पाकिस्तान लाहौर जनवरी 2006
317 रन रोहित शर्मा-मयंक अग्रवाल दक्षिण अफ्रीका विशाखापत्तनम अक्टूबर 2019
289 रन मुरली विजय-शिखर धवन ऑस्ट्रेलिया मोहाली मार्च 2013

अन्नू रानी विश्व ऐथलेटिक्स में क्वॉलिफाइ करने वाली पहली भारतीय
भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी ने खेल में महिलाओं को बराबरी का मौका देने की मांग की है। अन्नू ने कहा कि वे भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं और देश को गौरवान्वित कर सकती हैं। अन्नू विश्व ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप की भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल्स के लिए क्वॉलिफाइ करने वाली पहली भारतीय महिला हैं हालांकि वह यहां आठवें स्थान पर रहीं। क्वॉलिफाइंग में 62.43 मीटर के प्रयास के साथ अपना ही राष्ट्रीय रेकॉर्ड तोड़ने वाली अन्नू फाइनल्स में मंगलवार को 61.12 मीटर का ही सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। अन्नू ने कहा, ‘मुझे काफी समर्थन मिला और उनका आभार व्यक्त करना चाहती हूं। मैं कहना चाहती हूं कि महिलाओं को भी बराबरी के अवसर मिलने चाहिए (खेल में) और लोगों को उन पर भरोसा करना चाहिए। वे भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं और काफी अच्छे परिणाम दे सकती हैं।’
उन्होंने कहा, ‘यह मेरी दूसरी विश्व चैंपियनशिप है और मैं फाइनल में जगह बनाने और फिर आठवां स्थान हासिल कर अच्छा महसूस कर रही हूं। फाइनल में अपने क्वॉलिफिकेशन दौर के प्रदर्शन से बेहतर नहीं कर पाई लेकिन मैं आठवें स्थान से खुश हूं। भविष्य में मैं बेहतर प्रदर्शन करूंगी।’ अन्नू 2018 एशियाई खेलों में 53.93 मीटर के निराशाजनक प्रदर्शन के साथ छठे स्थान पर रहीं थीं और उन्होंने कहा कि करियर के इस मुश्किल क्षणों से बाहर निकलने के लिए उन्हें काउंसलिंग और प्रेरणादायी विडियो देखने की जरूरत पड़ी थी। उन्होंने कहा, ‘2018 एशियाई खेलों के बाद मैं मानसिक रूप से निराश थी। इसके बाद वापसी करने में मुझे समय लगा। मैंने खुद को प्रेरित किया और इसी के कारण आज मैं यहां हूं।’

बियांका अमेरिकी ओपन जीतने वाली पहली कनाडाई
अमेरिकी ओपन टेनिस चैंपियनशिप के महिला एकल फाइनल के रोमांचक मुकाबले में कनाडा की बियांका एंड्रेस्क्यू ने इतिहास रचते हुए अमेरिका की दिग्गज खिलाड़ी सेरेना विलियम्स को हरा दिया। फाइनल मुकाबले में बियांका ने धमाकेदार खेल दिखाते हुए अमेरिकी दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सेरेना विलियम्स को 6-3, 7-5 से हराकर अमेरिकी ओपन टेनिस चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया। बियांका यूएस ओपन में एकल के फाइनल का खिताब जीतने वाली कनाडा की पहली महिला खिलाड़ी हैं। विश्व में नंबर 15 बियांका ने सेमीफाइनल में 12वें नंबर की स्विस खिलाड़ी बेलिंडा बेनकिक को 7-6, (7-3), 7-5 से मात दी थी। वहीं सेरेना विलियम्स ने सेमीफाइनल में यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना को 6-3, 6-1 से हराकर महिला एकल के फाइनल में रिकॉर्ड 10वीं बार जगह बनाई थी। यह पिछले छह प्रमुख टूर्नामेंट में सेरेना का चौथा फाइनल था। वह पिछले दो वर्षों से विंबलडन में उपविजेता रही हैं, 2018 में एंजेलिक कर्बर और जुलाई में सिमोना हालेप से सेरेना को हार मिली थी।
मैं अभी रुकने वाली नहीं : बियांका
बियांका ने कहा है कि उसकी जीत का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। 19 साल की बियांका का कहना है कि इस खिताब के बाद वह अभी रुकने वाली नहीं हैं। बियांका ने रॉकफेलर सेंटर में फोटोशूट भी कराया है। वह अमेरिका के कई मॉर्निंग शोज में अपनी जीत पर प्रतिक्रिया भी दे चुकी हैं। जीत के बाद बढ़ी व्यस्तता पर बियांका कहती हैं, ‘मैं शिकायत नहीं कर रही, लेकिन मैंने नहीं सोचा था कि यह इतना व्यस्तता भरा होगा। यह एक बेहतरीन उपलब्धि है, लेकिन मुझे इसकी आदत डालनी पडे़गी। मैं अभी रुकने वाली नहीं हूं। मैं इस जीत पर सौभाग्यशाली महसूस कर रही हूं।’ बियांका करियर की सबसे बेहतरीन 5वीं रैंकिंग पर पहुंच गई हैं। इस जीत से पहले कनाडा में ज्यादातर लोग बियांका को नहीं जानते थे, लेकिन अब उन्हें सिलेब्रिटी स्टेटस की आदत डालनी होगी। एक कार्यक्र में बियांका ने कहा, ‘मेरी जिंदगी में क्या चल रहा है यह देखने का मेरे पास वक्त नहीं था। यह साल मेरे लिए उत्साह भरा रहा है, यह ट्राफी पकड़ना बेहतरीन है।’ एक अन्य अमेरिकी टीवी शो में उन्होंने कहा, ‘मैंने 7 साल की उम्र में टेनिस खलने शुरू किया था, तब से ही मैं इसे जीतने का सपना देख रही थी।’

बांगड़ का टीम इंडिया के साथ सफर समाप्त हुआ
बल्लेबाजी कोच संजय बागड़ का टीम इंडिया के साथ सफर समाप्त हो गया है। बांगड़ ने 2014 में टीम के साथ काम करना शुरू किया था लेकिन विश्व कप में टीम के सेमीफाइनल में बाहर होने से ही उन पर दबाव बढ़ गया था। नंबर चार पर बेहतरीन बल्लेबाज तलाश न पाने का खमियाजा बांगड़ को भुगतना पड़ा। यूं तो टीम इंडिया के कोचिंग स्टाफ का कार्यकाल विश्व कप के साथ ही समाप्त हो रहा था लेकिन इसे पहले ही विंडीज दौरे तक बढ़ा दिया गया था। इसके बाद टीम के नए सिरे से कोचिंग स्टाफ का चयन हुआ तो बांगड़ के अलावा बाकी सब को दोबारा चुन लिया गया। रवि शास्त्री एक बार फिर मुख्य कोच बने और भरत अरुण को गेंदबाजी कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई। टीम की फील्डिंग सुधारने की जिम्मेदारी भी आर. श्रीधर के पास ही रही हालांकि बैटिंग कोच की जिम्मेदारी पूर्व टेस्ट क्रिकेटर विक्रम राठौड़ को सौंपी गई।
बांगड़ का कहना है कि कोचिंग स्टाफ से हटाए जाने के बाद वह निराश थे। उन्होंने कहा, ‘निराश होना स्वाभाविक था। कुछ दिनों तक मैं ऐसा रहा लेकिन मैं बीसीसीआई और अन्य कोचों डंकन फ्लेचर, अनिल कुंबले और रवि शास्त्री का धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझे पांच साल तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करने का मौका दिया। यह ब्रेक मुझे तरोताजा और खुद को दोबारा तलाशने का मौका देगा।’ बांगड़ जब टीम इंडिया के बल्लेबाजी कोच रहे अगर उस दौरान टीम के प्रदर्शन पर एक नजर डाली जाए तो यह अच्छा कहा जा सकता है। टीम ने इस दौरान 52 टेस्ट मैच खेले और कुल 30 में जीत हासिल की। टीम को 11 में हार का सामना करना पड़ा। इन 30 में से टीम ने 13 मैच विदेशी धरती पर जीते। भारतीय टीम के बल्लेबाजों ने इन 52 टेस्ट मैचों में 70 शतक लगाए।
एकदिवसीय क्रिकेट की बात करें तो बांगड़ के कार्यकाल में भारतीय टीम ने 122 में से 82 मैचों में जीत हासिल की। 35 मुकाबलों में उसे हार मिली। वहीं भारतीय बल्लेबाजों ने कुल 74 शतक जड़े। वहीं 66 टी20 इंटरनैशनल मैचों से टीम ने 43 मैच जीते और 21 हारे। उनके कार्यकाल में कप्तान विराट कोहली ने 43 शतक लगाए, रोहित ने 28 और शिखर धवन ने 18 शतक लगाये। चेतेश्वर पुजारा ने टेस्ट क्रिकेट में 12 शतक लगाए। बांगड़ ने कहा, ‘विराट हमेशा अपनी कमियों को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत किया करते हैं। हमने उनके संतुलन, क्रीज पर पोजिशन, सीमिंग कंडीशंस में उनकी अप्रोच पर काम किया। शिखर शुरुआत में ऑफ-साइड के खिलाड़ी समझे जाते थे। वह गेंद की लाइन की साइड में रहते। हमने उनके साथ काम किया ताकि वह गेंद की लाइन के पीछे आकर खेल सकें। इससे उनके लिए रन बनाने के नए क्षेत्र खुल गए। इसके साथ ही शॉर्ट बॉल पर आउट होने की उनकी कमी को दूर करने का भी मौका मिला।’ बांगड़ ने आगे कहा, ‘रोहित की बात करें, तो हमने एंगल के साथ फेंकी जाने वाली गेंदों पर उनकी हेड पोजिशन पर काम किया। पुजारा के मामले में उनके स्टांस की चौड़ाई कम की और उन्हें थोड़ा और सीधा होकर खड़े होने की सलाह दी। इसके बाद ये उन खिलाड़ियों की मेहनत है कि उन्होंने पिछली बातें भूलकर नया सीखा और रन बनाये।’

भारतीय मुक्केबाजी की पहचान हैं मैरी कॉम
( योगेश कुमार गोयल द्वारा )भारत की ओलम्पिक पदक विजेता चर्चित महिला मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम (मैंगते चंग्नेइजैंग मैरी कॉम) को हाल ही में एशिया की सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट का खिताब मिला है। 36 वर्षीया मैरी कॉम को यह पुरस्कार 29 अगस्त को ‘एशियन स्पोर्ट्स राइटर्स यूनियन’ (एआईपीएस एशिया) द्वारा आयोजित एशिया के पहले पुरस्कार समारोह में प्रदान किया गया। 1978 में अस्तित्व में आई एशियन स्पोर्ट्स राइटर्स यूनियन द्वारा पहली बार ये पुरस्कार दिए गए, जिसका लक्ष्य एशियाई एथलीटों के प्रदर्शन को मान्यता देना और उन्हें सम्मानित करना है। मैरी कॉम विश्व की ऐसी एकमात्र महिला मुक्केबाज हैं, जिन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में अभी तक सात पदक जीते हैं और वह छह बार की विश्व चैम्पियन भी रह चुकी हैं। पिछला स्वर्ण पदक उन्होंने 24 नवम्बर 2018 को नई दिल्ली में आईबा (एआईबीए) विश्व चैम्पियनशिप के फाइनल में अपने से 13 वर्ष छोटी यूक्रेन की सना ओखोटा को परास्त कर जीता था। वह 2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018 में विश्व चैम्पियनशिप जीत चुकी हैं जबकि 2001 में उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। उससे पहले मैरी कॉम और आयरलैंड की केटी टेलर के नाम विश्व चैम्पियनशिप में पांच-पांच स्वर्ण पदक का रिकॉर्ड था लेकिन केटी प्रोफैशनल बॉक्सर बन जाने के कारण आईबा विश्व चैम्पियनशिप में शामिल नहीं हुई थी। विश्व चैम्पियन में छठा स्वर्ण जीतकर मैरी कॉम ने क्यूबा के महान् मुक्केबाज माने जाते रहे फेलिक्स सेवोन के उस रिकॉर्ड की भी बराबरी की थी, जो उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में 6 स्वर्ण और एक रजत जीतकर कायम किया था।
मैरी कॉम ने 28 जुलाई 2019 को इंडोनेशिया में 23वें प्रेसिडेंट्स कप मुक्केबाजी टूर्नामेंट में आस्ट्रेलिया की एप्रिल फ्रैंक्स को 5-0 से करारी शिकस्त देते हुए महिलाओं के 51 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मैडल जीतकर भी देश को गौरवान्वित किया था। स्वर्ण जीतने के बाद उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, ‘‘प्रेसिडेंट्स कप इंडोनेशिया में यह गोल्ड मैडल मेरे लिए और देश के लिए है, जिसे जीतने का अर्थ है कि आपने औरों से अधिक मेहनत की है।’’ पिछले साल नवम्बर माह में विश्व चैम्पियन बनने से पहले मई 2018 में इंडिया ओपन में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था।
तीन बच्चों की मां का दायित्व बखूबी निभा रही सुपरमॉम मैरी कॉम ने गृहस्थ जीवन और पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए 35 साल की उम्र में 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद विश्व चैम्पियनशिप जीतकर साबित कर दिखाया था कि उनके इरादे इतनी गृहस्थ जिम्मेदारियों के बाद भी कितने बुलंद हैं और उनके पंच में अभी भी कितनी ताकत है। वैसे तो उनके मुक्कों का लोहा पूरी दुनिया मानती रही है किन्तु 2018 से पहले हुई विश्व चैम्पियनशिप में वह चोटग्रस्त होने के कारण हिस्सा नहंी ले सकी थी। वह 15 स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदकों के साथ अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में 19 पदक जीतकर मुक्केबाजी में दुनियाभर में भारत को गौरवान्वित कर चुकी हैं। दो वर्ष के अध्ययन प्रोत्साहन अवकाश के बाद वापसी करते हुए उन्होंने जब लगातार चौथी बार विश्व गैर-व्यावसायिक बॉक्सिंग में स्वर्ण जीता था, तब उनकी इस विराट उपलब्धि से प्रभावित होकर एआईबीए ने उन्हें मैग्नीफिसेंट मैरी (प्रतापी मैरी) का सम्बोधन दिया था। विश्व पटल पर मुक्केबाजी में भारत का नाम रोशन करने के लिए मैरी कॉम को भारत सरकार द्वारा 2003 में ‘अर्जुन पुरस्कार’, 2006 में ‘पद्मश्री’, 2009 में सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार’ तथा 2013 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित जा चुका है। 2014 में मैरी कॉम के जीवन पर आधारित फिल्म ‘मैरी कॉम’ भी प्रदर्शित हो चुकी है, जिसमें बॉलीवुड की सुपरस्टार प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम का किरदार निभाया था।
मैरी कॉम के अब तक के बेहतरीन प्रदर्शन पर नजर डालें तो उन्होंने 2001 में पहली बार महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप जीती थी, जिसमें उन्होंने रजत पदक हासिल किया था। उसके बाद 2002 में आईबा वर्ल्ड वुमेन्स सीनियर बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में स्वर्ण, 2003 में एशियन महिला चैम्पियनशिप में स्वर्ण, 2004 में ताईवान में आयोजित एशियन महिला चैम्पियनशिप में स्वर्ण, 2005 तथा 2006 में आईबा महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण, 2008 में निंग्बो (चीन) में विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। 2009 में हनाई (वियतनाम) में एशियन इंडोर गेम्स में स्वर्ण, 2010 में ब्रिजटाउन (बारबाडोस) में विश्व महिला एमेच्योर बॉक्सिंग चैम्पियनशिप तथा अस्ताना (कजाकिस्तान) में स्वर्ण, 2011 में हाइकू (चीन) में एशियन वुमेन्स कप में स्वर्ण, 2012 में उलानबटोर (मंगोलिया) में एशियन वुमेन्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण, 2014 में इंचियोन (दक्षिण कोरिया) में एशियाई खेलों में स्वर्ण, 2017 में हू चेई मिन्ह (वियतनाम) में एशियन वुमेन्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण, 2018 में गोल्डकोस्ट (आस्ट्रेलिया) में कॉमनवैल्थ खेलों में स्वर्ण और 2018 में नई दिल्ली में आईबा महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर मैरी कॉम ने अनोखा इतिहास रचा है। 2010 के एशियाई खेलों तथा 2012 के लंदन ओलम्पिक में मैरी कॉम ने कांस्य पदक जीता था।
1 मार्च 1983 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में एक गांव में एक गरीब किसान के घर जन्मी मैरी कॉम का आरम्भिक जीवन संघर्षों और अभावों में बीता। ऐसे माहौल में उनके लिए खेलों में रूचि के बावजूद परिवार के कमजोर आर्थिक हालातों के चलते प्रोफैशनल ट्रेनिंग के ख्वाब संजोना बेहद मुश्किल था। प्राथमिक शिक्षा लोकटक क्रिश्चियन मॉडल स्कूल और सेंट हेवियर स्कूल से पूरी करने के बाद मैरी आगे की पढ़ाई के लिए इम्फाल के आदिमजाति हाई स्कूल गई किन्तु परीक्षा में फेल होने के बाद स्कूल छोड़ दिया और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय से परीक्षा दी। 17 साल की उम्र में जब एक रिक्शेवाले ने उनके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की थी तो मैरी ने अपने मुक्के के पंच से उसे लहूलुहान कर दिया था। मैरी कॉम की शादी ओन्लर कॉम के साथ हुई थी और उनके जुड़वां बच्चे हैं।
मुक्केबाजी में आने से पहले वह एक एथलीट थी और उनके मन में बॉक्सिंग के लिए जुनून उस वक्त पैदा हुआ, जब उन्होंने 1999 में खुमान लम्पक स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स में कुछ लड़कों के साथ 4-5 लड़कियों को भी बॉक्सिंग रिंग में बॉक्सिंग के दांव-पेंच आजमाते देखा। उस वक्त उन्हें अहसास हुआ कि अगर वे लड़कियां बॉक्सिंग कर सकती है तो फिर वह क्यों नहीं? अगले ही दिन वह भी बॉक्सिंग के रिंग में पहुंच गई और पहले ही दिन के अभ्यास के दौरान मैरी के मुक्कों से एक लड़का और दो लड़की रिंग में घायल हो गए। उसी दौरान वहां मौजूद कोच की नजर मैरी कॉम पर पड़ी, जिसने उन्हें बॉक्सिंग खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। बस, यहीं से मैरी कॉम ने बॉक्सिंग में ही अपना कैरियर बनाने की ठान ली। हालांकि उनके पिता उनके बॉक्सिंग में प्रैक्टिस के फैसले के सख्त खिलाफ थे क्योंकि पिता का मानना था कि बॉक्सिंग का खेल महिलाओं के लिए नहीं है किन्तु मैरी कॉम ने हार नहीं मानी और अपनी लग्न, जज्बे तथा कड़ी मेहनत के बल पर वह मुकाम हासिल कर दिखाया, जिसकी मैरी कॉम जैसी कठिन परिस्थितियों में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। फिलहाल वह गरीब बच्चों को बॉक्सिंग का प्रशिक्षण देने के लिए एक बॉक्सिंग एकेडमी भी चला रही हैं। बहरहाल, छह बार विश्व चैम्पियनशिप जीतकर विश्व रिकॉर्ड बना चुकी और एशिया की सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट का खिताब अपने नाम कर चुकी मैरी कॉम का इरादा अब 2020 के टोक्यो ओलिम्पक में भी रिकॉर्ड कायम करने का है। लंदन ओलम्पिक में कांस्य पदक जीतने वाली मैरी कॉम से अब टोक्यो ओलम्पिक में भी भारत को बड़ी उम्मीदें रहेंगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि ओलम्पिक में भी उनके मुक्कों का लोहा पूरी दुनिया मानेगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि टोक्यो ओलम्पिक के बाद मैरी कॉम बॉक्सिंग से संन्यास ले सकती हैं।

ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेटर लेनिंग के नाम हैं कई रिकार्ड
ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मैग लेनिंग ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच के दौरान शतक लगाने के साथ ही दक्षिण अफ्रीका के हाशिम अमला और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली का सबसे तेज 13 शतक लगाने का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। लेनिंग ने यह रिकॉर्ड महज 76 पारियों में ही बना लिया। एकदिवसीय में लेनिंग से पहले सबसे सबसे कम पारियों में 13 शतक बनाने के रिकॉर्ड हाशिम अमला के नाम था। अमला ने 83 पारियों में तो कोहली ने 86 पारियों में यह रिकॉर्ड अपने नाम किया था।
इससे तेज 13 एकदिवसीय शतक
76 पारियां- मेग लैनिंग
83 पारियां- हाशिम अमला
86 पारियां- विराट कोहली
दर्ज हैं कई रिकॉर्ड
महिला एकदिवसीय क्रिकेट में सर्वाधिक शतक।
एकदिवसीय क्रिकेट में 3 हजार रन तक पहुंचने वाली दूसरी सबसे तेज महिला क्रिकेटर।
ट्वेंटी 20 अंतर्राष्ट्रीय में 2,000 रन सबसे पहले बनाए।
61 महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के बाद शून्य पर आऊट होने वाली खिलाड़ी।
एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा 625 रन बनाने वाली महिला क्रिकेटर।
महिलाओं के ट्वंटी-20 अंतर्राष्ट्रीय में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर (133)।

श्रीसंत को राहत
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पूर्व क्रिकेटर एस. श्रीसंत पर लगे आजीवन प्रतिबंध को घटाकर अब सात साल कर दिया है। बीसीसीआई लोकपाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि श्रीसंत पर लगे प्रतिबंध को घटाकर सात साल करने का फैसला किया गया है। इससे अब 13 सितंबर 2020 को श्रीसंत पर लगा प्रतिबंध समाप्त हो जाएगा। गौरतलब है कि श्रीसंत पर 13 सितंबर 2013 को आजीवन प्रतिबंध लगा था।
इससे पहले मार्च 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने श्रीसंत पर आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में आजीवन प्रतिबंध हटा दिया था। पर शीर्ष अदालत का कहना था कि बीसीसीआई के पास अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई से श्रीसंत को सुनवाई का अवसर देने और तीन महीने में सजा तय करने का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि बीसीसीआई श्रीसंत पर अपने लगाए प्रतिबंध पर फिर से विचार करे।
करियर का समापन 100 टेस्ट विकेट के साथ करना चाहता हूं: श्रीसंत
श्रीसंत ने कहा है कि वह अपने टेस्ट करियर का समापन 100 टेस्ट विकेट से करना चाहते हैं। ऐसे में अगर उन्हें एक बार फिर टीम इंडिया में अवसर मिलता है तो वह यह उपलब्धि हासिल करने का पूरा प्रयास करेंगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के लोकपाल डीके जैन ने श्रीसंत पर लगे प्रतिबंध को हटाने के आदेश दिए थे। श्रीसंत इस बात से काफी उत्साहित हैं।श्रीसंत पर आईपीएल-2013 में स्पॉट फिक्सिंग के मामले में आजीवन प्रतिबंध लगाया गया था।
प्रतिबंध हटने के बाद श्रीसंत ने कहा, ‘ मैं अपने सभी शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने मेरे लिए दुआएं की। उनकी दुआ कबूल हो गई है। मैं अब 36 साल का हूं और अगले साल 37 साल का हो जाऊंगा। मेरे अभी टेस्ट में 87 विकेट हैं और मेरा लक्ष्य है कि मैं अपने करियर का अंत 100 टेस्ट विकेटों के साथ करूं। मैं आश्वस्त हूं कि मैं भारत की टेस्ट टीम में वापसी कर सकता हूं। मैं हमेशा से विराट कोहली की कप्तानी में खेलना चाहता था।’ श्रीसंत केरल के ऐसे दूसरे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने भारत के लिए 27 टेस्ट मैचों में 87 विकेट लिए हैं। वहीं 53 एकदिवसीय मैचों में उनके नाम 75 विकेट हैं और 10 टी-20 मैचों में सात विकेट ले चुके हैं। इसके साथ ही कहा कि वह फिर से केरल की तरफ से रणजी ट्राफी में खेलना चाहते हैं।

डक एटीपी मुख्‍य मुख्‍य ड्रॉ मैच जीतने वाले पहले बहरे खिलाड़ी
दक्षिण कोरिया के ली डक एटीपी मुख्‍य ड्रॉ का मैच जीतने वाले पहले बहरे खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने हेनरी लाकसोनेन को हराकर यह उपलब्धि हासिल की है। जीत के बाद 21 वर्षीय ली ने कहा कि उनकी इस कमजोरी के कारण लोग उनका मजाक बनाते थे। उन्होंने कहा कि मुश्किल जरूर थी, लेकिन उनके परिवार और दोस्‍तों की मदद से यह आसान हो गया। इस युवा खिलाड़ी ने कहा कि वह‌ हर किसी को ये दिखाना चाहते थे कि वो भी यह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप कोशिश करेंगे तो आप कुछ भी कर सकते हैं।
विश्व के 212वें नंबर के खिलाड़ी ली ने 15 साल की उम्र में पेशेवर टेनिस में कदम रखा था और अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ एटीपी एकल 130वीं रैंकिंग 2017 में हासिल की। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी यह कमजोरी कोर्ट पर थोड़ी परेशान करती है। वह लाइन कॉल नहीं सुन सकते। न ही अंपायर की कॉल को और उन्हें इशारों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। मैच के बाद कोरियन ट्रांसलेटर और ली के सवालों को समझाने का काम उनकी मंगेतर ने किया।
ली को अपना मैच जीतने के लिए काफी इंतजार भी करना पड़ा। ली जीत से सिर्फ दो अंक ही दूर थे, तभी बारिश होने लगी, जिसके बाद करीब पांच घंटे बाद कोर्ट पर दोनों खिलाड़ियों ने वापसी की। ली ने कहा कि उन्होंने सोचा कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ करेंगे और ध्यान लगाने की कोशिश करेंगे, लेकिन वह विजेता बनकर निकले।

भारद्वाज की द्रोणाचार्य अवॉर्ड से जिम्मेदारी भी बढ़ी
पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज को इस साल के द्रोणाचार्य अवॉर्ड (लाइफ टाइम कैटिगरी) मिला है। भारद्वाज 90 के दशक से दिल्ली क्रिकेट में सक्रिय हैं। संजय भारद्वाज के कोच रहते ही दिल्ली से गौतम गंभीर, अमित मिश्रा, नवदीप सैनी, मनजोत कालरा, रीमा मल्होत्रा और जोगिंदर शर्मा जैसे खिलाड़ी निकले हैं। संजय भारद्वाज ने कहा कि अवॉर्ड मिलने से जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। अब मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अगर मुझे इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है तो उसका श्रेय मेरे शिष्यों को जाता है। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के बिना ऐसा संभव नहीं हो सकता था।
रोहतक के रहने वाले संजय भारद्वाज एनएसए डिप्लोमा करने के बाद 1989 में दिल्ली आ गए थे। टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी गंभीर और अमित मिश्रा 1991 में उनके पास कोचिंग के लिए आए थे। इन दोनों खिलाड़ियों को निखारने के बाद संजय ने दिल्ली क्रिकेट में अपनी अलग ही पहचान बना ली थी। उन्होंने करीब 20 साल के अनुबंध पर कोच के तौर पर अपनी भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने अपना क्लब (एलबी शास्त्री क्लब) खोल लिया। संजय ने कहा कि अवॉर्ड के लिए चुने जाने पर सबसे पहले गंभीर ने ही मुझे बधाई दी।
संजय भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में क्रिकेट का स्तर बहुत आगे हो गया है। यहां की स्टेट टीम में जगह बनाने के लिए खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर वाला क्रिकेट खेलना होगा। ऐसे में कोच की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। मेरी कोशिश जारी है और आगे भी जारी रहेगी। संजय ने कहा कि शुरुआती उतार-चढ़ाव के दिनों में सलवान ट्रस्ट ने काफी मदद की, मैं उसका हमेशा आभारी रहूंगा।
इस साल के द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए बैडमिंटन कोच विमल कुमार, टेबल टेनिस कोच संदीप गुप्ता और ए‌थलेटिक्स कोच मोहिंदर सिंह ढिल्लो को चुना गया है। इसके अलावा तीन कोचों को लाइफटाइम कैटेगरी से भी सम्‍मानित किया गया है। इसमें क्रिकेट से भारद्वाज के अलावा हॉकी से मेजबान पटेल, कबड्डी से रामबीर सिंह खोखर हैं।

खेल रत्न पुरस्कार पाने वाली पहली महिला पैरा-ऐथलीट हुई दीपा
खेल जगत में सर्वोच्च सम्मान-राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला पैरा-ऐथलीट दीपा मलिक ने यह सम्मान अपने पिता बाल कृष्णा नागपाल को समर्पित किया है। दीपा ने कहा कि उनका यह सम्मान सही मायने में ‘सबका साथ-सबका विकास’ है। वह खेल रत्न जीतने वाली भारत की दूसरी पैरा-ऐथलीट हैं। उनसे पहले देवेंद्र झाझरिया को 2017 में खेल रत्न मिला था।
दीपा ने रियो पैरालिंपिक-2016 में शॉटपुट (गोला फेंक) में रजत पदक जीता था। दीपा ने एफ-53 कैटिगरी में यह पदक जीता था। वहीं, दीपा ने एशियाई खेलों में एफ 53-54 में भाला फेंक में और एफ 51-52-53 में शॉटपुट में कांस्य पदक जीता था।
ओलंपिक के लिए पैरा खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा
खेल रत्न से सम्मानित किये जाने की घोषणा के बाद दीपा ने कहा, ‘मुझे ऐसा लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावना ‘सबका साथ, सबका विकास’ पूरे देश में आ गई है। मैं ज्यूरी सदस्यों और खेल जगत की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने पैरा-ऐथलीटों की मेहनत, उनके द्वारा जीते गए पदकों का सम्मान किया। यह पूरे पैरा-मूवमेंट के लिए मनोबल बढ़ाने वाली बात है। यह अवार्ड टोक्यो पैरलिंपिक से पहले खिलाड़ियों के प्रेरक होगा।’
49 साल की दीपा ने कहा कि यह अवॉर्ड सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे पैरा-ऐथलीट समुदाय के लिए है। दीपा ने कहा, ‘मैं सिर्फ निजी तौर पर नहीं बल्कि पूरी पैरा-ऐथलीट कम्यूनिटी के लिए खुश हूं। यह पदक पूरी दिव्यांग कम्यूनिटी के लिए है। मैं साथ ही भारतीय पैरालिंपिक समिति की भी शुक्रगुजार हूं, क्योंकि आज मैं जो भी हूं उन्हीं के बदौलत हूं। साथ ही अलग-अलग समय पर मेरे दोस्त, साथी खिलाड़ी, कोच की भी शुक्रगुजार हूं। मैं इस बात से खुश हूं कि मैं नई बच्चियों के लिए एक प्रेरणा स्थापित कर सकी।’ उन्होंने कहा, ‘मैं इस अवॉर्ड को अपने पिता को समर्पित करती हूं क्योंकि वह इस तरह के सम्मान का इंतजार कर रहे थे। मैंने उन्हें पिछले साल खो दिया। आज वह होते तो मुझे सर्वोच्च खेल सम्मान से सम्मानित होते हुए देखकर बहुत खुश होते।’ दीपा अगले साल तोक्यो पैरालिंपिक 2020 में नहीं खेलेंगी क्योंकि उनकी कैटिगरी तोक्यो पैरालिंपिक खेलों में शामिल नहीं हैं।

सर्वाधिक कमाई वाली महिला खिलाड़ियों में सिंधु एकमात्र भारतीय
भारत की बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु को फोर्ब्स द्वारा जारी विश्व में सर्वाधिक कमाई करने वाली महिला खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया गया है। सिंधु फोर्ब्स सुची में शामिल अकेली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। सिंधु को सर्वाधिक कमाई करने वाली खिलाड़ियों में 13 वां स्थान मिला है। फोर्ब्स ने सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दुनिया की 15 महिला खिलाड़ियों की यह सूची जारी की है। इस सूची में अमेरिका की अनुभवी टेनिस स्टार सेरेना विलियम्स अभी भी शीर्ष पर बरकरार हैं।
फोर्ब्स द्वारा जारी सर्वाधिक कमाई करने वाली महिला खिलाड़ियों की 2019 की इस सूची के अनुसार सिंधू की कमाई 55 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 38 करोड़ 86 लाख 87 हजार भारतीय रुपये) है। फोर्ब्स ने कहा, ‘सिंधू भारतीय बाजार में कमाई करने वाली शीर्ष महिला ऐथलीट हैं।
वहीं नंबर एक पर बनी हुई सेरेना की कुल कमाई 29.2 मिलियन डॉलर (तकरीबन एक करोड़ अमेरिकी डॉलर) है। सेरेना अगले साल तक टेनिस खेलेंगी। इसके बाद वह कपड़ों की सीरीज क्लोथिंग लाइन में ‘एस बाइ सेरेना’ में आएंगी, और 2020 तक वह जूलरी और सौंदर्य उत्पादों को भी लॉन्च करेंगी।
इस सूची में दूसरे स्थान पर जापान की नाओमी ओसाका हैं। ओसाका की कुल कमाई 24 लाख अमेरीकी डॉलर है। 15 महिला ऐथलीट्स वाली इस सूची में उन्हीं महिला खिलाड़ियों को शामिल किया गया है, जिनकी कमाई 50 लाख अमेरिकी डॉलर है।
2018 में सिंधु फोर्ब्स की लिस्ट में 7वें पायदान पर थी
पीवी सिंधु 2018 में फोर्ब्स की सर्वाधिक भुगतान की सूची में 7वें पायदान पर थी। 2016 के ओलिंपिक में सिंधु ने सिल्वर मेडल जीता था। इसके बाद सिंधु के पास एंडोर्समेंट की बाढ़ आ गई थी। इसमें स्पोर्ट्स ड्रिंक से लेकर मोबाइल फोन से लेकर कार के टायर तक शामिल हैं।
सेरेना सूची में शीर्ष पर कायम
सेरेना विलियम्स 2.92 करोड़ डॉलर की कमाई के साथ सूची में शीर्ष पर हैं। 2019 अमेरिकी ओपन चैंम्पियन नाओमी ओसाका 2.43 करोड़ डॉलर कमाई के साथ सूची में दूसरे स्थान पर हैं। जर्मन टेनिस स्टार एंजेलिक केरबर 1.18 करोड़ डॉलर कमाई के साथ सूची में तीसरे स्थान पर हैं।
सर्वाधिक भुगतान वाली महिला एथलीट्स की सूची (2019)
1 सेरेना विलियम्स: 29.2 मिलियन डॉलर (टेनिस)
2 नाओमी ओसका: 24.3 मिलियन डॉलर (टेनिस)
3 एंजलिक केर्बर: 11.8 मिलियन डॉलर (टेनिस)
4 सिमोना हालेप : 10.2 मिलियन डॉलर (टेनिस)
5 स्लोअन स्टीफेंस : 9.6 मिलियन डॉलर (टेनिस) ।

रोहित टी20 में सबसे आगे
टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज होने के साथ-साथ ही सबसे अधिक 2400 रन से ज्यादा बनाने वाले पहले बल्लेबाज भी हैं। रोहित ने बनाये हैं ये रिकार्ड
सबसे ज्यादा शतक
टी20 अंतरराष्ट्रीय में रोहित के नाम सबसे ज्यादा शतक भी हैं। क्रिकेट के इस सबसे छोटे प्रारुप में रोहित ने अब तक 4 शतक लगाये हैं। उनके बाद ऑस्ट्रेलिया के क्रिस गेल और न्यूजीलैंड के कॉलिन मनरो 3-3 शतकों के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं।
2400 रन पार करने वाले अकेले बल्लेबाज
रोहित ने रविवार को 67 रन की पारी खेली, तो उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय में 2400 रन का आंकड़ा भी पार कर लिया। अब रोहित के नाम 2422 से अधिक रन दर्ज हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली हैं, जो रोहित से 112 रन पीछे रहने के साथ ही दूसरे नंबर 2 पर हैं।
चौक और छक्के मारने में अव्वल
अगर टी20 क्रिकेट में कुल बाउंड्रीज (चौके और छक्के) को जोड़ दिया जाए, तो भी रोहित सबसे आगे हैं। उन्होंने अभी तक 107 छक्कों के साथ 215 चौके भी लगाये हैं। इस प्रकार उनके नाम अब तक कुल 322 से ज्यादा बाउंड्री हो गयी हैं।
50 या उससे अधिक रन बनाने में भी अव्वल
50 रन या इससे अधिक की पारियां खेलने वाले बल्लेबाजों की बात करें, तो रोहित इसमें भी सबसे आगे हैं। रोहित ने नाम (4 शतक + 7 अर्धशतक) कुल 21 अर्धशतकीय पारियां हैं। उनके बाद विराट कोहली का नाम आता है, जो 20 अर्धशतक के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
स्ट्राइक रेट में भी नंबर 1
रोहित की प्रति गेंद रन बनाने की जो रफ्तार है। वह उसमें भी सबसे आगे हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक रन बनाने वाले 10 बल्लेबाजों की सूची में रोहित 136.91 के स्ट्राइक रेट के साथ शीर्ष पर हैं।

दक्षिण अफ्रीका के इन दो दिग्गजों ने खेल को अलविदा कहा
डेल स्टेन
दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है हालांकि वह एकदिवसीय और टी20 मुकाबले खेलते रहेंगे। दक्षिण अफ्रीका की ओर से सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट लेने वाले 36 साल के स्टेन ने कहा, ‘‘आज मैं खेल के उस प्रारूप को अलविदा कह रहा हूं जिसे मैं सबसे अधिक चाहता हूं। ’’ स्टेन ने 2004 में इंग्लैंड के खिलाफ पोर्ट एलिजाबेथ में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। उन्होंने अपना अंतिम टेस्ट मैच इसी मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ इस साल फरवरी में खेला था। स्टेन ने कहा, ‘‘मेरी राय में टेस्ट क्रिकेट इस खेल का सर्वश्रेष्ठ प्रारूप है। यह मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से आपकी परीक्षा लेता है। यह सोचकर बहुत बुरा लग रहा है कि मैं आगे टेस्ट नहीं खेल पाऊंगा लेकिन फिर कभी नहीं खेल पाने के बारे में सोचकर तो रूह ही कांप उठती है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैं अब अपना पूरा ध्यान सीमित ओवरों के प्रारुप पर लगाऊंगा और तय करूंगा कि मैं खेल में लंबे समय तक खेल सकूं। मैं अब दक्षिण अफ्रीका की तरफ से छोटे प्रारूपों में खेलना जारी रखने को लेकर उत्साहित हूं। ’’
स्टेन ने 93 टेस्ट मैचों में 439 विकेट लिये हैं और वह सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाजों में की सूची में शीर्ष दस में शामिल हैं। उन्होंने अपने करियर में 26 बार पारी में पांच या इससे अधिक विकेट और मैच में पांच बार दस या इससे अधिक विकेट लिये। उन्होंने निचले क्रम के बल्लेबाज के रूप में 1251 रन भी बनाये जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं। स्टेन अपने करियर के दौरान चोटों से जूझते रहे। चोटिल होने के कारण ही वह पिछले महीने इंग्लैंड में समाप्त हुए विश्व कप में भी नहीं खेल पाये थे। क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) के मुख्य कार्यकारी तबांग मूरे ने स्टेन को ‘सर्वकालिक महान क्रिकेटरों से एक’ करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘वह विश्व क्रिकेट के बेजोड़ तेज गेंदबाजों से में एक था। उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी आक्रमण की शानदार तरीके से अगुवाई की और हमारी भविष्य की पीढ़ियों के लिये एक मानदंड तैयार किया। वह हमारे युवा तेज गेंदबाजों के लिये बेहतरीन मेंटर रहे हैं।’’
हाशिम अमला
दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज बल्लेबाज हाशिम अमला ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। अमला हालांकि घरेलू क्रिकेट और घरेलू टी20 लीग के लिए खेलते रहेंगे।
अमला ने 124 टेस्ट मैचों में 9282 रन बनाए हैं। वह दक्षिण अफ्रीका के लिए टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले एकलौते बल्लेबाज हैं। दक्षिण अफ्रीका के लिए 181 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में 8113 रन बनाए हैं।
36 वर्षीय अमला ने दिसंबर 2004 में कोलकाता में भारत के खिलाफ टेस्ट में पदार्पण किया था। उन्होंने इस साल फरवरी में पोर्ट एलिजाबेथ में श्रीलंका के खिलाफ आखिरी टेस्ट मैच खेला था। इसके अलावा उन्होंने 2008 में चटगांव में बांग्लादेश के खिलाफ एकदिवसीय में पदार्पण किया था। उन्होंने इस साल जनवरी में चेस्टर ली स्ट्रीट में श्रीलंका के खिलाफ अपना आखिरी एकदिवसीय मैच खेला था। अपने 15 साल के करियर में उन्होंने 349 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 18000 से ज्यादा रन बनाए हैं।

अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नजर नहीं आयेंगे मलिंगा
श्रीलंकाई क्रिकेट टीम ने पहले एकदिवसीय क्रिकेट मैच में बांग्लादेश को 91 रनों से हराकर तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा को जीत के साथ विदायी दी है। अपने अंतिम मैच में भी मलिंगा ने तीन विकेट लेकर एक और अहम उपलब्धि अपने नाम की है। मलिंगा ने इसी के साथ ही एकदिवसीय में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में भारत के अनिल कुंबले को पीछे किया है। कुंबले के एकदिवसीय में 337 विकेट हैं जबकि मलिंगा के 338 विकेट हैं। इस मैच में श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए आठ विकेट के नुकसान पर 314 रन बनाए थे। लंकाई टीम की ओर से कुशल परेरा ने 111 और एंजेलो मैथ्यूज ने 48 रन बनाये। बांग्लादेश की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए 41.4 ओवरों में 223 रनों पर ही ढेर हो कर मैच हार गई। श्रीलंका की ओर से मलिंगा के अलावा नुवान प्रदीप ने तीन विकेट लिए। धनंजय डी सिल्वा ने दो और लाहिरू कुमारा ने एक विकेट लिया। वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश के लिए मुश्फीकुर रहीम ने 67 और सब्बीर रहमान ने 60 रन बनाये । इसी के साथ श्रीलंका ने तीन मैचों की एकदिवीसय सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है।
अंतिम मैच में कुंबले से आगे निकले
मलिंगा ने अपने अंतिम मैच में 38 रन देकर तीन विकेट लेने के साथ दिग्गज भारतीय लेग स्पिनर को अनिल कुंबले के 338 विकेटों के रिकार्ड को पीछे छोड़ दिया। मलिंगा के नाम अब 339 विकेट हैं और वह एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले विश्व के 9वें और श्रीलंका के तीसरे गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने अपने 15 साल के एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय करियर में 226 एकदिवसीय मैच खेलकर यह उपलब्धि हासिल की है। इस यॉर्कर मास्टर ने इस मैच में 38 रन देकर 3 विकेट लिए।
रोहित, सचिन और बुमराह ने दी शुभकामनाएं
मलिंगा के संनयाय पर आईपीएल में मुंबई की टीम के उनके साथी गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, कप्तान रोहित शर्मा और कोच सचिन तेंदुलकर ने बधाई दी है।
मैच के बाद मलिंगा ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह उनके संन्यास लेने का यही सही समय है और अब उन्हें आगे बढ़ जाना चाहिए क्योंकि श्रीलंका टीम को 2023 के हिसाब से तैयारी करनी है। वे पिछले 15 साल से देश के लिए क्रिकेट खेल रहे थे।
रोहित ने ट्वीट में उन्हें सबसे बड़ा मैच विनर कहा, अगर मुझे पिछले एक दशक में मुंबई की टीम के लिए मैच विनर को चुनने को कहा जाए तो निश्चित तौर पर यह खिलाड़ी टॉप पर होगा। बतौर कप्तान उन्होंने मुझे तनाव के क्षणों में राहत दी है और कभी नाकाम नहीं हुए। उनकी टीम में ऐसी जगह थी। भविष्य के लिए आपको शुभकामनाएं।
वहीं सचिन ने भी मलिंगा को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। सचिन ने कहा, शानदार एकदिवसीय केरियर के लिए बधाई। भविष्य के लिए आपको शुभकामनाएं।
अपने संदेश में बुमराह ने कहा कि वे हमेशा ही मलिंगा की प्रशंसा करते रहे हैं। अपने संदेश में बुमराह ने कहा, क्लासिक माली स्पेल। आपने क्रिकेट के लिए जो सबकुछ किया उसके लिए धन्यवाद। मैं आपकी हमेशा तारीफ करता रहा और करता रहूंगा। यार्करमैन कहो जाने वाले मलिंगा अपनी सटीक यार्कर के जाने जाते थे। स्लो यार्कर, वाइड यार्कर जैसी विविधता के कारण डेथ ओवर्स में बल्लेबाज उन्हें खुल कर नहीं खेल पाते थे। इसके अलावा अजीब से एक्शन के कारण भी कई बार मलिंगा पर सवाल उठे लेकिन जांच के बाद उनका एक्शन हमेशा सही साबित हुआ। मलिंगा ने 226 एकदिवसीय मैचों में 29.02 के औसत से कुल 339 विकेट लिए हैं वे श्रीलंका के लिए सबसे ज्यादा एकदिवसीय विकेट लेने वाले गेंदबाजों में तीसरे नंबर के गेंदबाज हैं! इसके अलावा 30 टेस्ट मैचों में मलिंगा ने 33.15 के औसतसे 101 विकेट लिए हैं।

दिव्यांग जूडो खिलाड़ी ने जमाई धाक
बोलने और सुनने में अक्षम ऋतिक सिंह ने दिखाया है कि अगर हिम्मत और जज्बा हो तो सब कुछ संभव है। जन्म से दिव्यांग ऋतिक के अनुसार, जब उन्होंने जूडो खेलने की इच्छा जताई थी तो लोगों ने उनका मजाक बनाया। 16 साल के ऋतिक ने जूडो ट्रेनिंग के कुछ महीनों के अंदर ही जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी धाक जमाकर सबका ध्यान खींचा।
ऋतिक ने इसी साल गोरखपुर में हुई राष्ट्रीय जूनियर जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने के साथ ही बेस्ट जूडोका का अवॉर्ड भी जीता है। ग्रिपिंग पर शानदार पकड़, क्विक अटैक उनकी खासियत है। चे तेचिकावारा (ब्लैक बेल्ट, जापान) उनके रोल मॉडल हैं। उन्होंने कहा, ‘टीवी पर खिलाड़ियों को जूडो में पदक जीतता देख मैंने भी जूडो सीखने की ठानी। सुनने और बोलने में अक्षम होने की वजह से मुझे दिक्कत हुई पर मैंने हार नहीं मानी। वर्ल्ड चैंपियन मिकी तनाटा (जापान) से मिलने के बाद उन्हें मैंने अपना रोल मॉडल बनाया। मैं ओलिंपिक में स्वर्ण जीतना चाहता हूं।’
इन स्पर्धाओं में हासिल की जीत
2013 में दिल्ली में दूसरे नैशनल ब्लाइंड ऐंड इंडिया डेफ जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण
2014 में गोवा में आयोजित थर्ड नैशनल ब्लाइंड ऐंड डेफ जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण
2016 में लखनऊ में नैशनल ब्लाइंड ऐंड इंडिया डेफ जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण
2017 में हरियाणा में आयोजित 5वीं नैशनल ब्लाइंड ऐंड डेफ जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण
इस तरह की ट्रेनिंग
ऋतिक हर रोज सुबह और शाम के वक्त करीब पांच से छह घंटा ट्रेनिंग करते हैं। सुबह स्ट्रेचिंग करने के अलावा रनिंग, योग के बाद हल्की प्रैक्टिस के बाद रिलैक्स करते हैं। शाम को कोच की मौजूदगी में ट्रेनिंग के बाद मैच के लिए रणनीति तैयार करने के दौरान अपनी खामियों पर कोच से बात करके उसे ठीक करते हैं।

कठिन हालातों से निकले नवदीप
वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम इंडिया में शामिल दिल्ली के तेज़ गेंदबाज नवदीप सैनी आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की ओर से खेलते हैं। आईपीएल 2019 में अपनी रफ्तार भरी गेंदबाजी से उन्‍होंने कई लोगों का ध्‍यान खींचा था। उन्होंने आईपीएल में अपनी रफ्तार और बाउंसर से बड़े खिलाड़ियों को भी हैरत में डाल दिया था।
नवदीप मध्यवर्गीय घर से हैं उनके घर की हालत इतनी भी मजबूत नहीं थी कि परिवार अपने बेटे की इच्छाओं को पूरी कर सके। परिवार की हालत क्रिकेट एकेडमी की फीस भरने तक की नहीं थी, जिसके बाद नवदीप को मजबूरी में टेनिस गेंद से अभ्यास करना पड़ा और यही उनकी ताकत बन गयी। नवदीप के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि वह एक जोड़ी स्पोर्ट्स शू तक नहीं खरीद सकते थे।
लीग ने बदल दी जिंदगी
लोकल टूनामेंट में खेलने के लिए नवदीप को करीब 200 रुपये मिलते थे। दिल्ली के तेज गेंदबाज सुमित नरवाल की ओर से आयोजित करनाल प्रीमियर लीग में खेलते समय नवदीप ने कुछ लोगों को प्रभावित किया। यहां से इस गेंदबाज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
पूर्व सलामी बल्लेबाज गंभीर ने करीब 15 मिनट नवदीप की गेंदबाजी देखी और तुरंत उन्हें दिल्ली की टीम में शामिल कर लिया। दिल्ली का ना होने की वजह से नवदीप को इस टीम से खेलने को लेकर दिक्कत आई। गंभीर ने चयनकर्ताओं से बातचीत की और बाहरी खिलाड़ी के तौर पर विचार किया गया। नवदीप ने दिल्ली एवं जिला क्रि‌केट संघ (डीडीसीए) से जुड़ी किसी भी क्रिकेट लीग में हिस्सा नहीं लिया था। इसके बावजूद सभी बाधाओं को पार करते हुए गंभीर नवदीप को दिल्ली टीम में शामिल करने में सफल रहे।
इसके बाद उन्होंने गंभीर के विश्वास को सही साबित करते हुए 2017-2018 के सीजन में कुल 34 विकेट लिए। घरेलू सत्र में उनके प्रदर्शन ने उनके लिए कई दरवाजे खोल दिए। 2017 में दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका दौरे से पहले नवदीप को टीम इंडिया के नेट अभ्यास के लिए चुना गया। इसके बाद उन्हें अफगानिस्‍तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच के लिए टीम में जगह मिली।

युवराज ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा
टीम इंडिया के 2011 विश्व कप क्रिकेट के हीरो रहे ऑलराउंडर युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। अब युवराज पूरी तरह से कैंसर पीड़ितों की सहायता के लिए कार्य करेंगे। संन्यास की घोषणा करते हुए 37 साल के युवराज ने कहा कि मैंने जीवन में कभी भी हार नहीं मानी और अब मैं पूरी तरह से अपने एनजीओ के लिए काम करुंगा। इस एनजीओ का लक्ष्य उद्देश्य कैंसर रोगियों का उपचार करना और उन्हें ठीक बनाये रखना है। युवराज ने अपने कैरियर में 40 टेस्ट मैच और 304 एकदिवसीय मैच खेले हैं।
2011 विश्व कप को लेकर इस आक्रामक बल्लेबाज ने कहा कि यह मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था। साथ ही कहा कि यह क्रिकेट को अलविदा कहने का बिल्कुल सही समय है। युवराज ने साल 2000 में क्रिकेट में पदार्पण किया था। 2011 विश्व कप के बाद कैंसर के कारण वह एक साल से ज्यादा समय तक खेल से बाहर भी रहें हैं। इसके बाद भी इस जुझारु खिलाड़ी ने टीम इंडिया में वापसी की पर वह अपनी पहले जैसी जगह नहीं बना पाये। युवराज ने 2019 विश्व कप के लिए टीम में जगह बनाने के प्रयास किये पर जब उनके सभी प्रयास विफल हो गये तो उन्होंने संन्यास का निर्णय ले लिया।
युवराज ने 19 साल की उम्र में टीम इंडिया के लिए पहला एकदिवसीय मैच खेला था। भारत की अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप की जीत में हीरो रहे युवराज ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में खासी धूम मचाई। खास तौर पर एकदिवसीय क्रिकेट में वह लंबे समय तक टीम इंडिया के स्थाई बल्लेबाज रहे।
एक ओवर में छह छक्के का रिकार्ड बनाया
साल 2007 में खेले गए टी20 विश्व कप में इंग्लैंड के गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड पर युवराज ने 6 गेंद में 6 छक्के लगाकर विश्व रिकार्ड अपने नाम किया था। युवराज ने अब तक के इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक लगाने का रिकार्ड बनाया है। युवराज ने इंग्लैंड के खिलाफ मात्र 12 गेंदों का सामना करते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया था। इस पारी के दौरान युवी ने 3 चौके और 7 छक्के लगाकर 58 रनों की यादगार पारी खेली। यह रिकार्ड आज तक बना हुआ है। वहीं इंग्लैंड में नेटवेस्ट सीरीज में युवराज सिंह ने मो कैफ के साथ मिलकर तूफानी परी खेलते हुए टीम इंडिया को जीत दिलाई थी।
विदेशी ट्वेंटी20 लीग में खेलेंगे
युवराज अब आईसीसी से मान्यता प्राप्त विदेशी ट्वेंटी20 लीग में फ्रीलांस क्रिकेटर के तौर पर जुड़ेंगे। उन्हें जीटी20 (कनाडा), आयरलैंड और हॉलैंड में यूरो टी20 स्लैम में खेलने के प्रस्ताव मिल रहे हैं। युवराज ने कहा कि काफी समय से लग रहा था कि अब आगे बढ़ने का वक्त आ गया है। युवराज ने साल आईपीएल में मुंबई इंडियंस की ओर से खेला था पर उन्हें अधिक अवसर नहीं मिले और यह भी उनके खेल का अलविदा कहने का एक कारण माना जा रहा है।
इस चैंपियन खिलाड़ी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 40 टेस्ट, 304 एकदिवसीय और 58 टी20 मैच खेले। 304 एकदिवसीय में से युवराज ने भारत के लिए 301, जबकि बाकी 3 एकदिवसीय एशिया एकादश के लिए खेले।
40 टेस्ट की 62 पारियों में युवी के नाम कुल 1900 रन हैं, जिसमें 3 शतक और 11 अर्धशतक हैं। वहीं एकदिवसीय करियर में युवराज ने 278 पारियों में कुल 8701 रन बनाये। इस दौरान उन्होंने 14 शतक और 52 अर्धशतक बनाये। 58 टी20 में 1177 रन बनाने वाले युवराज ने नाम यहां 8 अर्धशतक हैं। उन्होंने टेस्ट में कुल 9 विकेट, एकदिवसीय में 111 और टी20 में 28 विकेट लिए हैं।
पिता का सपना पूरा किया
बांए हाथ के इस बल्लेबाज ने अंतिम बार भारत के लिए फरवरी 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला । इससे पहले वह चैंपियंस ट्रॉफी 2017 और उसके बाद वेस्ट इंडीज दौरे पर गई भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे। उन्होंने अपने करियर का आखिरी एकदिवसय मैच 30 जनवरी 2017 को वेस्ट इंडीज के खिलाफ एंटीगुआ में खेला था।
अपने संन्यास की घोषणा करते हुए युवराज ने कहा, ‘बचपन से मैंने अपने पिता का देश के लिए खेलने का सपना पूरा करने की कोशिश की।’ उन्होंने यहां अपने क्रिकेट करियर को याद करते हुए कहा, ‘अपने 25 साल के करियर और खास तौर पर 17 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे। अब मैंने आगे बढ़ने का फैसला ले लिया है। इस खेल ने मुझे सिखाया कि कैसे लड़ना है, गिरना है, फिर उठना है और आगे बढ़ जाना है।’
युवी ने यहां एक क्रिकेटर के तौर पर कामयाब होने का श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने कहा, ‘मैंने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी। मैंने अपने पिता का सपना पूरा किया।’
युवी ने कहा कि आईपीएल के दौरान वह सचिन से रिटायरमेंट पर बात कर रहे थे। युवी बोले, ‘सचिन ने मुझसे कहा था कि तुम्हें तय करना है कि कब अपना करियर खत्म करना है, तुमसे बेहतर कोई भी यह फैसला नहीं ले सकता।’
युवराज से पूछा गया कि उन्हें किस बात का मलाल रहेगा। इसपर वह बोले कि उन्हें ज्यादा टेस्ट मैच न खेलने का मलाल रहेगा।

टेनिस को अभी अलविदा नहीं कहेंगे पेस
भारत के सबसे अनुभवी टेनिस खिलाड़ी 45 साल के लिएंडर पेस ने कहा वह अभी खेल को अलविदा नहीं कहेंगे और उनका लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक-2020 में भाग लेना है। पेस ने अब तक सात ओलंपिक खेले हैं।अटलांटा ओलंपिक में पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी थे। पेस ने 18 ग्रैंडस्लैम युगल खिताब जीते हैं.
पेस ने कहा, ‘यह ओलंपिक अभी बहुत दूर है। मैं ओलंपिक में पहले ही विश्व रिकॉर्ड कायम कर चुका हूं। अब एक और बार इसमें भाग लेना शानदार होगा।’ पेस के इस समय तक खेलने से सभी हैरान हैं।
अपने को भाग्यशाली मानते हैं पेस
पेस ने कहा कि इतना लंबा करियर होने पर वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं। पेस ने इस दौरान 18 ग्रैंडस्लैम युगल खिताब जीते है और उनके पास 1000 से ज्यादा रैकेटों का संग्रह हैं। पेस ने पहले दौर के मैच के बाद कहा कि मैं लगभग 30 साल से टेनिस खेल रहा हूं। मैंने पीट संप्रास के जैसे खिलाड़ी को यहां देखा है, मैंने पैट राफ्टर को खेलते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि टेनिस में मेरा सफर शानदार रहा है, मैं भाग्यशाली हूं कि इतने लंबे समय से खेल रहा हूं। खासकर यहां (फ्रेंच ओपन) चार बार जीत दर्ज कर। फ्रेंच ओपन में पहली बार 1989 में खेलने वाले लिएंडर पेस ने इंडियन वेल्स क्वालीफाइंग में युवा रोजर फेडरर को भी हराया था।
उन्होंने कहा कि मेरे पास राड लीवर के अलावा फेडरर, राफेल नडाल, नोवाक जोकोविच, एंडी मर्रे, मार्टिना नवरातिलोवा जैसे चैम्पियन खिलाड़ियों के रैकेट है। नवरातिलोवा के साथ मैंने काफी खेला है। मेरे पास सेरेना विलियम्स, वीनस विलियम्स, मार्टिना हिंगिंस के रैकेट के साथ ब्योर्न बोर्ग का लकड़ी वाला रैकेट है। मेरे पास मेरा पहला रैकेट भी है।

छेत्री ने भूटिया को पीछे छोड़ा
भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री ने एक और अहम उपलब्धि अपने नाम कर ली है। छेत्री भारत की ओर से सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले फुटबॉलर बन गए हैं। छेत्री ने अब तक 108 मैच खेले हैं। इसी के साथ ही उन्होंने पूर्व कप्तान बाईचुंग भूटिया को पीछे छोड़ दिया। भूटिया ने कुल 107 मैच खेले थे।
छेत्री ने किंग्स कप के पहले मैच में कैरेबियाई द्वीप कुराकाओ के खिलाफ मैदान पर उतरने ही यह रिकार्ड बनाया। इस दौरान भारतीय कप्तान ने 68वां गोल भी किया। छेत्री के नाम पहले से ही अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में भारत की ओर से सबसे अधिक गोल का रिकार्ड भी है।
घरेलू कैलेंडर को लेकर भ्रम दूर करें
वहीं छेत्री ने खेल के आगामी सत्र के घरेलू कैलेंडर को लेकर बनी भ्रम की स्थिति को तत्काल दूर करने को कहा है। छेत्री ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का आई लीग में विलय होगा और अगर ऐसा है तो फिर यह कब होगा। इससे खिलाड़ी और प्रशंसक भारतीय घरेलू फुटबाल के भविष्य को लेकर संशय में हैं।
छेत्री ने कहा कि मैं इस मसले पर जल्द जवाब चाहता हूं। जब आपको पूरे कैलेंडर जैसे टीमों और लीग के बारे में पता होता है तो अच्छा होता है।
उन्होंने कहा कि मैंने सुना है कि शीर्ष स्तर पर लोग काफी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। मैं जानता हूं कि यह आसान नहीं है। मुझे यही उम्मीद है कि हमें जल्द ही जवाब मिलेगा।

अपूर्वी विश्व रैंकिंग में शीर्ष पर आई
निशानेबाज अपूर्वी चंदीला आईएसएसएफ निशानेबाजी विश्व रैंकिंग में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल वर्ग में नंबर एक खिलाड़ी बन गई हैं। अपूर्वी के 10 मीटर एयर राइफल वर्ग में 1926 रैंकिंग अंक हैं जिसके साथ वह शीर्ष स्थान पर पहुंच गई हैं। इस निशानेबाज ने ट्वीटर पर अपने नंबर एक बनने की खुशी जाहिर की। ओलंपियन निशानेबाज ने लिखा- मेरे निशानेबाजी करियर में विश्व नंबर एक बनना एक बड़ी उपलब्धि है।
अपूर्वी ने इसके साथ ही ओलंपिक कोटा भी हासिल कर लिया है। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में टोक्यो ओलंपिक के लिए कोटा सुनिश्चित किया है। इस निशानेबाज ने आईएसएसएफ विश्वकप 2019 में विश्व रिकार्ड तोड़ते हुए देश के लिए पहला स्वर्ण पदक हासिल किया था। उन्होंने 252.9 के स्कोर के साथ 10 मीटर महिला एयर राइफल फिनाले में स्वर्ण जीता था। हाल में हुए बीजिंग आईएसएसएफ विश्वकप में वह चौथे नंबर पर रही थी।
वहीं पुरूष वर्ग में दिव्यांश सिंह पंवार 10 मीटर एयर राइफल वर्ग में विश्व के चौथे नंबर के खिलाड़ी बन गए हैं। इसके अलावा अभिषेक वर्मा ने भी ओलंपिक कोटा हासिल किया है। 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में तीसरी रैंकिंग पर पहुंच गए हैं जबकि युवा निशानेबाज सौरभ चौधरी विश्व की छठी रैंकिंग पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा अनीश भनवाला भी 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल वर्ग में शीर्ष-10 में पहुंच गये हैं।

कठिन हालातों में गोमती ने जीता स्वर्ण
भारत को एशियाई एथलेटिक्‍स चैंपियनशिप में 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक दिलाने वाली गोमती मरिमुथु का यहां तक का सफर आसान नहीं रहा है। तमिलनाडु की इस महिला एथलीट ने कहा कि आज वह आज जिस मुकाम पर है वहां पर पहुंचाने में उनके पिता की बड़ी भूमिका है।
गोमती ने कहा, ‘मुझे अच्‍छा खाना खिलाने के लिए मेरे पिता जानवरों के लिए रखा खाना खाते थे।’ इस दौरान वह भावुक हो गईं और उनकी आंखों से काफी देर तक आंसू बहते रहे। उनके पिता का कुछ साल पहले निधन हो गया था। गोमती अभी बेंगलुरु में इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट में टैक्‍स असिस्‍टेंट के पद पर तैनात हैं।
पिता को याद करते हुए गोमती ने बताया, ‘जब मैं चैंपियनशिप की तैयारी कर रही थी तब मेरे पिता चल नहीं पाते थे। मेरे गांव में बस की सुविधा नहीं है। पिता अभ्यास के लिए मुझे सुबह 4 बजे उठाते। गोमती का पदक एशियन एथलेटिक्‍स चैंपियनशिप में भारत का पहला स्वर्ण पदक था।
उन्‍होंने बताया कि भारत सरकार से उन्‍हें मदद नहीं मिली फिर भी उन्‍हें स्वर्ण पदक जीतने का भरोसा था। गोमती ने कहा ‘मैंने काफी अभ्‍यास किया था और मुझे पदक जीतने का भरोसा था। मैंने अकेले तैयारी की। मैं अपने खुद के पैसों से तैयार हुई।’ भारतीय टीम के कोच ने फोन के जरिए वर्कआउट शेड्यूल को लेकर उनकी मदद की।
एशियन एथलेटिक्‍स चैंपियनशिप के अनुभव को याद करते हुए गोमती ने बताया, ‘यदि तमिलनाडु सरकार मेरी मदद करती है तो मैं कड़ी मेहनत करूंगी और ओलंपिक मेडल जीतने की कोशिश करूंगी। अभी इस प्रतियोगिता में एक साल का समय बचा है। इस टूर्नामेंट के लिए काफी कम समय था और मैं चोट से वापसी कर रही थी इस वजह‍ से दौरान अपना सर्वश्रेष्‍ठ समय नहीं निकाल सकी।’
उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें हर कदम पर अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ा। सरकार ने मदद की होती तो अच्‍छा रहता। अब तमिलनाडु और भारत सरकार ने मदद की पेशकश की है। इससे वह ओलंपिक में पदक के लिए प्रयास करेगी।

आईपीएल में हैट्रिक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने कुरेन
आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ शानदार हैट्रिक जमाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने किंग्स इलेवन पंजाब के सैम कुरेन को खेलते समय इसके बारे में पता ही नहीं चला। कुरेन की ही हैट्रिक से पंजाब ने दिल्ली कैपिटल्स को 14 रन से हराया।
कुरेन को इस साल पंजाब ने सात करोड़ 20 लाख रुपये में खरीदा। कुरेन ने कहा ,‘‘ मुझे हैट्रिक के बारे में पता ही नहीं चला। जब हम मैच जीते तो एक खिलाड़ी मेरे पास आकर बोला कि तुमने हैट्रिक बनाई है। मुझे पता ही नहीं था।’’ दिल्ली को 21 गेंद में 23 रन चाहिये थे और उसके सात विकेट बाकी है पर कुरेन की गेंदबाजी से मैच बदल गया।
युवराज के रिकार्ड की बराबरी की
कुरेन ने न सिर्फ आईपीएल-12 की पहली हैट्रिक बनाई, बल्कि आईपीएल में सबसे कम उम्र (20 साल 302 दिन) में हैट्रिक जमाने का कारनामा किया।
कुरेन ने युवराज के 10 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी कर ली. दरअसल, दोनों की हैट्रिक वाले मैच में गजब की समानताएं हैं.
युवराज और कुरेन: दोनों ने किंग्स इलेवन पंजाब की ओर से खेलते हुए हैट्रिक ली।
युवराज और कुरेन: दोनों ने एक ओवर की लगातार तीन गेंदों पर हैट्रिक नहीं ली, यानी उन्हें अपनी हैट्रिक पूरी करने में दो ओवर लगे।
युवराज ने पहली बार आईपीएल में पारी की शुरुआत की, जबकि कुरेन अपने टी-20 करियर में पहली बार सलामी बल्लेबाज के तौर पर उतरे।
कुरेन आईपीएल की हैट्रिक के एक खास क्लब में शामिल हो गए। इस क्लब में ‘हैट्रिक मैन’ अमित मिश्रा और प्रवीण तांबे पहले से शामिल हैं। इनकी एक जैसी बात ये है कि हैट्रिक के दौरान तीनों बल्लेबाज शून्य (0) पर आउट हुए।
सबसे कम उम्र में दो हजार रन बनाने वाले बल्लेबाज बने सैमसन
राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाज संजू सैमसन आईपीएल में सबसे कम उम्र में दो हजार रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गये हैं। सैमसन ने विराट कोहली को पीछे छोड़कर यह अहम उपलब्धि हासिल की। संजू ने सीएसके के खिलाफ 10 गेंद पर 8 रन की पारी खेली और टूर्नामेंट में सबसे कम उम्र में 2 हजार रन पूरा करने के मामले में विराट को पीछे छोड़ दिया। संजू सैमसन ने 24 साल 140 दिन की उम्र में लीग में 2 हजार रन पूरे किये। उन्होंने 84वें मुकाबले में यह आंकड़ा हासिल किया। सैमसन ने आई पीएल में पहले दिल्ली की ओर से खेला था पर अब वह राजस्थान की तरफ से खेलते हैं। इन सब के साथ मिलाकर उन्होंने दो शतकों के साथ ही कुल 2007 रन बनाए हैं।
विराट ने 24 साल 175 दिन में टूर्नामेंट में अपने दो हजार रन पूरे किए थे। वहीं सुरेश रैना ने 25 साल 155 दिन में ऐसा कारनामा किया था और वह इस सूची में अब तीसरे नंबर पर हैं। रोहित शर्मा ने25 साल 344 की उम्र में दो हजार रन बनाये।

रैना, विराट आईपीएल में पांच हजार रन बनाने वाले बल्लेबाज बने
बल्लेबाज सुरेश रैना और विराट कोहली ने आईपीएल के 12 वें सत्र में अपने पांच हजार पूरे किये हैं।
बल्लेबाज सुरेश रैना ने आईपीएल-12 के शुरुआती मैच में ही एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। रैना ने आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स और रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु के बीच खेले गए मैच में अपने 15 रन पूरे करते ही एक अहम रिकार्ड अपने नाम कर लिया। रैना ने आईपीएल के शुरुआती मैच में ही अपने पांच हजार रन पूरे कर लिए। रैना को इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए केवल 15 रन चाहिए थे। इससे पहले उनके 4985 रन थे। रैना 19 रन पर मोईन की गेंद पर आऊट हो गई। अब रैना के नाम पर 177 मैचों में 5004 रन दर्ज हो गए हैं।
आईपीएल में रैना का रिकॉर्ड-
जालन्धर : आईपीएल-12 के तहत चेन्नई सुपर किंग्स और रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु के बीच खेले गए ओपनिंग मैच में ही चेन्नई के बल्लेबाज सुरेश रैना ने बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। रैना जब खेलने आए थे तब उन्होंने महज 15 रन चाहिए थे आईपीएल में अपने 5 हजार रन पूरे करने के लिए। रैना भले ही 19 रन पर मोईन की गेंद पर आऊट हो गई लेकिन इससे पहले वह आईपीएल में 5 हजार रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बन गए। अब रैना के नाम पर 177 मैचों में 5004 रन दर्ज हो गए हैं।
विराट दूसरे बल्लेबाज बने
वहीं रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट 5000 रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज़ बन गये हैं। रैना आईपीएल में पांच हजार रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। विराट ने 165 मैचों की 157 पारियों में अपने 5000 रन पूरे किए। इस दौरान उन्होंने चार शतक और 34 अर्धशतक लगाए हैं। कोहली अब आईपीएल में सर्वाधिक रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं. आईपीएल में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड अब तक चेन्नई सुपर किंग्स के बल्लेबाज रैना के नाम हैं। रैना ने अब तक 178 मैचों की 174 पारियों में 5034 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं. उन्होंने इसी 12 वें सत्र के पहले मैच में ये उपलब्धि हासिल की थी। विराट के नज़रिये से ये रिकॉर्ड इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने आईपीएल की शुरुआत से सिर्फ आरसीबी के लिए ही खेला है और उनके लिए ही 5000 रन पूरे किए हैं। जबकि रैना ने दो टीमों (चेन्नई सुपर किंग्स और गुजरात लायल्स) के लिए मिलाकर ये उपलब्धि हासिल की है। मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा इस मामले में 175 मैचों की 170 पारियों में 4555 रन के साथ ही तीसरे नंबर पर हैं।

प्रजनेश एटीपी रैंकिंग में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर पहुंचे
भारत के प्रजनेश गुणेश्वरन एटीपी की ताजा रैंकिंग में करियर के सर्वश्रेष्ठ 84वें स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं युकी भांबरी लगभग दो साल में पहली बार शीर्ष 200 से बाहर हो गए हैं। इंडियन वेल्स एटीपी टेनिस टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्रजनेश को 61 रेटिंग अंक का लाभ हुआ जिससे उनकी रैंकिंग 13 स्थानों से बेहतर हुई है।
पुरुष एकल रैंकिग में प्रजनेश के बाद रामकुमार रामनाथन 139 रैंकिंग के साथ ही दूसरे सर्वश्रेष्ठ भारतीय है। उन्हें तीन स्थान का नुकसान हुआ। दोनों खिलाड़ी इस सप्ताह मियामी मास्टर्स के एकल मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने का प्रयास करेंगे।
वहीं घुटने की चोट के कारण कोर्ट से दूर चल रहे युकी 36 स्थान नीचे आने के साथ ही 207वें स्थान पर पहुंच गए हैं।
एकल रैंकिंग साकेत मायनेनी 251 और शशि कुमार 268 का नंबर आता है। मुकुंद पांच महीने पहले शीर्ष 400 से बाहर थे और उन्होंने इस दौरान अच्छा प्रदर्शन किया।
युगल में जीवन को करियर की सर्वश्रेष्ठ 64वीं रैंकिंग
युगल में बायें हाथ के जीवन नेदुंचेझियान को करियर की सर्वश्रेष्ठ 64वीं रैंकिंग मिली है। उनसे ऊपर रोहन बोपन्ना 36वें और दिविज शरन 41वें स्थान पर काबिज है। पूरव राजा (80) और दिग्गज लिएंडर पेस (94) भी शीर्ष पांच भारतीय युगल खिलाड़ियों में शामिल है।
महिला वर्ग डब्ल्यूटीए रैंकिंग में अंकिता रैना को दो स्थान का नुकसान हुआ है, पर 168वीं रैंकिंग के साथ वह सर्वश्रेष्ठ भारतीय है। उनके बाद करमन कौर थांडी है जो सात स्थानों के सुधार के साथ 203वें स्थान पर हैं।

शरणार्थी बच्चे ने शतरंज में किया कमाल
आठ साल के नाइजीरियाई शरणार्थी तानी ने अमेरिका में न्यूयॉर्क स्टेट शतरंज चैंपियनशिप में ट्रॉफी जीतकर सबको हैरान कर दिया है। तानी का यहां तक का सफर बेहद कठिन रहा पर हार नहीं मानने का जज्बा और कड़ी मेहनत के बल पर उसने यह हासिल की है। उसने मुकाबले में एलीट निजी स्कूल के बच्चों को शिकस्त दी। कमाल की बात यह है कि तानी, जिस नाम से उसे जाना जा रहा है, ने शतरंज खेलना करीब एक साल पहले ही सीखा है। फिर अपने खेल में तेजी से सुधार किया और आज इस 8 साल के खिलाड़ी के पास 7 ट्रॉफी हैं।
उसका परिवार नाइजीरिया से 2017 में पलायन कर गया, जब बोको हरम आतंकवादियों ने कई लोगों पर हमला किया था। तानी के पिता कायोदे एडेवुमी ने कहा, ‘मैं किसी भी अपने को खोना नहीं चाहता था।’ इसके बाद तानी, उसके पिता और बड़ा भाई करीब एक साल पहले न्यूयॉर्क आ गए। तानी को स्थानीय स्कूल के एक टीचर ने शतरंज खेलना सिखाया। उसकी मां, ओलुवातोयिन ने फिर एक क्लब को ईमेल किया कि वह भी तानी को भेजना चाहती है लेकिन पैसे नहीं होने के चलते वह फी भरने में असमर्थ है। स्कूल के शतरंज प्रोग्राम देखने वाले रसेल माकोफ्स्की ने फीस माफ करने का फैसला किया और तानी को हौंसला मिला। तानी के पिता एक कैब ड्राइवर हैं जो किराए पर गाड़ी लेकर चलाते है जबकि मां हर शनिवार उसे 3 घंटे के प्रैक्टिस सेशन पर लेकर जाती हैं। तानी फिलहाल मई में होने वाली एलिमेंट्री नैशनल चैंपियनशिप के लिए तैयारी कर रहा है।

फेडरर 100 वां एकल खिताब जीतने वाले दूसरे खिलाड़ी बने
स्विटजरलैंड के अनुभवी टेनिस स्टार रोजर फेडरर ने यूनान के स्टीफेनोस सिटसिपास को 6-4, 6-4 से हराकर दुबई टेनिस चैंपियनशिप के साथ ही अपने करियर का 100वां एकल खिताब रहा है। फेडरर यह उपलब्धि हासिल करने वाले विश्व के दूसरे खिलाड़ी हैं। इसके पहले जिम्मी कोनर्स ने 100 वां एकल खिताब जीता था। कोनर्स ने करियर में 109 खिताब जीते थे। सबसे अधिक खिताब जीतने वाली (महिला और पुरुष) लिस्ट में रोजर फेडरर तीसरे नंबर पर हैं।
फेडरर ने 2001 में करियर की शुरुआत की। उन्होंने 2005 तक 33 खिताब जीते। 2006 से 2010 के बीच भी 33 खिताब पर कब्जा जमाए, जबकि 2011 से 2015 तक 22 और 2016 से 2019 के बीच 12 खिताब अपने नाम किए हैं। इस खिलाड़ी ने सबसे अधिक 69 खिताब हार्ड कोर्ट पर जीते हैं। इस स्विस स्टार खिलाड़ी ने ग्रास कोर्ट पर 18, क्ले कोर्ट पर 11 और कारपेट सरफेस पर दो खिताब उनके नाम हैं।
वहीं दूसरी ओर कोनर्स ने 8 मेजर और 101 एटीपी टाइटल्स जीते, जबकि फेडरर ने 20 मेजर और 80 एटीपी टाइटल्स हासिल किये हैं।
इंडोर खिताबों की बात करें तो फेडरर के 100 में से 25 इंडोर टाइटल्स शामिल हैं, जबकि कोनर्स ने 109 में से 55 इंडोर खिताब जीते थे।
फाइनल्स: रोजर फेडरर ने 100 खिताब तक पहुंचने के लिए कुल 152 फाइनल खेले, जबकि कोनर्स ने 140 फाइनल खेलते हुए ही यह आंकड़ा हासिल किया।
कोनर्स ने 251 टूर्नमेंट खेले थे, जबकि फेडरर ने 348 टूर्नमेंट खेलते हुए खिताबों का शतक पूरा किया।
ऐसे में पुरुष पुरुष टेनिस में सबसे अधिक खिताब जीतने का विश्व रेकॉर्ड जिमी कोनर्स के नाम है हालांकि, ओवरऑल रेकॉर्ड पर नजर डाली जाए तो दिग्गज महिला खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा 167 खिताब के साथ पहले नंबर पर हैं।
एटीपी रैकिंग में चौथे स्थान पर पहुंचे
रिकार्ड सौवां खिताब जीतने के साथ ही स्विट्जरलैंड के अनुभवी टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर पेशेवर टेनिस संघ (एटीपी) की ताजा रैंकिंग में तीन स्थान के लाभ के साथ ही चौथे स्थान पर आ गए हैं। वहीं सर्बिया के नोवाक जोकोविच पहले नंबर पर बने हुए हैं। स्पेन के राफेल नडाल और जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वरेव दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
इसके अलावा अर्जेंटीना के जुआन मार्टिन डेल पोट्रो, केविन एंडरसन, केई निशिकोरी को 1-1 स्थान का नुकसान हुआ है। यह तीनों क्रमश: पांचवें, छठे और सातवें स्थान पर आ गए हैं। ऑस्ट्रिया के डोमिनिक थीम आठवें और अमेरिका के जॉन इस्नर नौवें स्थान पर बरकरार हैं।
वहीं फेडरर से दुबई चैंपियनशिप के फाइनल में हारने वाले यूनान के युवा खिलाड़ी स्टेफानोस सितसिपास ने शीर्ष-10 में जगह बनायी है। सितसिपास एक स्थान आगे बढ़ते हुए 10वें स्थान पर पहुंच गए हैं।
सितसिपास से हारने वाले क्रोएशिया के मारिन सिलिच 11वें स्थान पर फिसल गए हैं जबकि फेडरर से हारने वाले क्रोएशिया के ही बोर्ना कोरिच 12वें स्थान पर खिसक गये हैं।

मंधाना सबसे युवा टी20 कप्तान बनीं
महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना टी-20 इंटरनेशनल (महिला-पुरुष) वर्ग में सबसे कम उम्र की भारतीय कप्तान बनी हैं। मंधाना ने 22 साल 229 दिन की उम्र में टी-20 इंटरनेशनल में टीम इंडिया की कप्तानी संभाली। इससे पहले सबसे कम उम्र में कप्तानी का रिकार्ड पुरुष वर्ग में सुरेश रैना के नाम था। रैना ने 23 साल 197 दिन की उम्र में टी-20 इंटरनेशनल में टीम इंडिया की कप्तानी संभाली थी जबकि महिलाओं में हरमनप्रीत कौर ने 23 साल 237 दिन की उम्र में टी-20 इंटरनेशनल में भारतीय टीम की कमान संभाली थी।
सलामी बल्लेबाज मंधाना को नियमित कप्तान हरमनप्रीत कौर के बाहर होने की वजह से कप्तानी का अवसर मिला। हरमनप्रीत टखने की चोट लगने की वजह से इंग्लैंड के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज में भी नहीं खेल पाई थीं। यह सीरीज भारत को अगले साल होने वाले टी-20 विश्व कप से पहले टीम के मुख्य खिलाड़ियों को परखने का अवसर है। आईसीसी महिला टी-20 विश्व कप का आयोजन ऑस्ट्रेलिया में अगले साल 21 फरवरी से 8 मार्च तक किया जाएगा।
मंधाना ने कहा कि उन्होंने पहले ही टी-20 विश्व कप के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं और अगले छह से आठ महीने में टीम के संयोजन को लेकर काफी कुछ तय हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘मैंने और कोच डब्ल्यूवी रमण ने उन चीजों पर बात की, जिनकी कमी न्यूजीलैंड दौरे पर खली। यह काफी रोमांचक समय है, क्योंकि हमारे पास इतनी युवा टीम है। हमें यह देखने के लिए छह से आठ महीने इंतजार करना होगा कि सभी खिलाड़ी कैसा प्रदर्शन करते हैं।’
बल्लेबाजी में भी शीर्ष पर
बल्लेबाज रैंकिंग की बात करें तो आईसीसी महिला चैंपियनशिप में 837 रन के साथ सबसे सफल बल्लेबाज बायें हाथ की सलामी बल्लेबाज स्मृति ने करियर के सर्वश्रेष्ठ 797 अंक के साथ शीर्ष पर अपनी स्थिति और पक्की कर ली है।
झूलन गेंदबाजी में नंबर एक पर पहुंची
वहीं अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों की ताजा आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गई हैं। इसके अलावा भारत की ही शिखा पांडेय को भी 12 स्थान का फायदा हुआ है और वह पांचवें स्थान पर पहुंच गई हैं। यह पहली बार हुआ है जब भारत की दो गेंदबाज शीर्ष पांच में शामिल हैं।
नवीनतम रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच हुई सीरीज के परिणामों को भी शामिल किया गया है। ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड पर 3-0 की जीत के साथ विश्वकप में सीधे क्वालीफाई करने की ओर कदम बढ़ाए हैं। टीम 12 मैचों में 22 अंक के साथ शीर्ष पर है। वहीं भारत 15 मैचों में 14 अंक के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि न्यूजीलैंड के 15 मैचों में 14 अंक हैं। गत विश्व चैंपियन इंग्लैंड 12 मैचों में 12 अंक के साथ दक्षिण अफ्रीका के बाद पांचवें स्थान पर है। वहीं इंग्लैंड की नताली सिवर भी भारत के खिलाफ सीरीज में 130 रन बनाने के बाद 10 स्थान के फायद से करियर के सर्वश्रेष्ठ पांचवें स्थान पर पहुंच गई हैं।

हीली सबसे ऊंचा कैच पकड़कर गिनीस बुक में आईं
ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर एलिसा हीली ने सबसे ऊंचा कैच पकड़कर एक नया विश्व रिकार्ड बनाया है। हीली 82.5 मीटर ऊंची गेंद को कैच कर गिनीस बुक में शामिल हो गयीं हैं। मेलबर्न क्रिकेट मैदान पर गिनीस बुक के अधिकारियों के सामने हीली ने यह उपलब्धि दर्ज की। 2018 में आईसीसी टी20 अंतरराष्ट्रीय प्लेयर ऑफ द ईयर का खिताब जीतने वाली एलिसा ने अपने तीसरे प्रयास में इतनी ऊंची गेंद को कैच किया। इससे पिछला रेकॉर्ड 62 मीटर का था, जो क्रिस्टन बॉमगार्टनर के नाम था। उन्होंने इंग्लैंड में 2016 में यह रेकॉर्ड बनाया था। उसी साल पहले इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने 49 मीटर ऊंची गेंद को कैच को कैच किया था। एलिसा ने 64 मीटर की ऊंचाई से शुरुआत की। उन्होंने दूसरे प्रयास मे 64 मीटर की ऊंचाई की गेंद को कैच कर लिया। इसके बाद उन्होंने ऊंचाई बढ़ानी शुरू की। इसके बाद पहले ही प्रयास में 72.3 मीटर की गेंद को कैच कर लिया। इसके बाद एलिसा का आत्मविश्वास और बढ़ गया और उन्होंने 80 मीटर की ऊंचाई तक जाने का फैसला किया। यह ऊंचाई मेलबर्न क्रिकेट के मैदान पर लगे लाइट टावर्स के बराबर है। यहां पहले दो प्रयासों में वह असफल रहीं लेकिन तीसरे और आखिरी प्रयास में उन्होंने घूमती गेंद को कैच कर रेकॉर्ड बना लिया।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने इस रेकॉर्ड का पूरा विडियो साझा किया है इसके बाद एलिसा ने भी अपने टि्वटर अकाउंट पर इसे शेयर किया है। एलिसा ने लोगों से अगले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले वर्ल्ड टी20 के लिए रेकॉर्ड संख्या में पहुंचने की भी अपील की है। ऑस्ट्रेलियाई टीम चार बार विश्व टी20 का खिताब जीत चुकी है ऐसे में इस बार जब यह कप ऑस्ट्रेलिया में ही हो रहा है तो हीली की ख्वाहिश है शायद उनका रेकॉर्ड अधिक दर्शकों को स्टेडियम तक खींच पाएगा। आपको बता दें कि आईसीसी महिला टी20 विश्व कप की शुरुआत 21 फरवरी से होगी। वैसे ऐलिसा को क्रिकेट विरासत में ही मिला है। और वह भी ग्लब वर्क। वह ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर इयान हीली की भतीजी हैं। इतना ही नहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम के दिग्गज तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क उनके पति हैं।

जोकोविच, बाइल्स और वुड्स को लारेस पुरस्कार
सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच, जिम्नास्ट सिमोन बाइल्स, दिग्गज गोल्फर टाइगर वुड्स के साथ ही फुटबॉल विश्व कप विजेता फ्रांस की टीम को यहां 2019 लारेंस विश्व खेल पुरस्कार दिये गये हैं। जोकोविच ने इस दौड़ में काइलियान एमबापे, इलियुद किपचोगे और लेब्रोन जेम्स जैसे खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर ‘साल के सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी’ का पुरस्कार जीता है। जोकोविच ने चौथी बार यह पुरस्कार जीता है।
जिम्नास्ट सिमोन बाइल्स को साल की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी का पुरस्कार दिया गया। उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में रिकार्ड प्रदर्शन करते हुए चार स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीता था। उन्हें 2017 में भी यह पुरस्कार मिला था। फीफा विश्व कप विजेता फ्रांस दुनिया की पहली राष्ट्रीय फुटबाल टीम बनी जिसे दूसरी बार साल की सर्वश्रेष्ठ टीम चुना गया।
जापान की नाओमी ओसाका को ‘ब्रेकथ्रू आफ द ईयर’ पुरस्कार मिला। उन्होंने अमेरिकी ओपन के फाइनल में पांच बार की लारेस पुरस्कार विजेता सेरेना विलियम्स को हराया था। गोल्फ स्टार वुड्स को वापसी करने वाला साल का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। वह इस पुरस्कार को लेने के लिए मौजूद नहीं थे। इससे पहले वह 2000 और 2001 में सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी चुने गए थे। वहीं भारतीय पहलवान विनेश फोगाट भी इस वर्ग में नामित थी और उन्होंने समारोह में हिस्सा लिया। महान फुटबाल मैनेजर आर्सीन वेंगर को 22 साल तक आर्सेनल के मैनेजर के रूप में फुटबाल में योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया।

भारोत्तोलक मीराबाई सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की तैयारियों में लगीं
शीर्ष भारोत्तोलक मीराबाई चानू का मानना है कि टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के लिए उन्हें अपने प्रदर्शन को और बेहतर करना होगा। विश्व चैंपियनशिप 2017 में 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली मीराबाई कमर की चोट के कारण 8 महीने तक टूर्नामेंटों में हिस्सा नहीं ले पाई। उन्होंने पिछले सप्ताह थाईलैंड में ईजीएटी कप में अपने नए 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह 192 किग्रा वजन उठाकर शीर्ष पर रहीं। मीराबाई का मानाना है कि उन्हें अपने नए वजन वर्ग में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाडिय़ों को टक्कर देने 200 किग्रा से अधिक वजन उठाना होगा। अप्रैल में चीन में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप और सितंबर में थाईलैंड में होने वाली 2019 विश्व चैंपियनशिप में मुझे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाने का अवसर मिलेगा। मैं 209 किग्रा का विश्व रिकार्ड तोडऩा चाहती हूं। टोक्यो ओलंपिक 2020 में महिला वर्ग में सात भारत वर्ग होंगे जिसमें 49 किग्रा, 55 किग्रा, 59 किग्रा, 64 किग्रा, 76 किग्रा, 87 किग्रा और 87 किग्रा से अधिक शामिल हैं।मीराबाई ने कहा कि एक किग्रा वजन बढ़कर 48 से 49 किग्रा होने से अब सभी भारोत्तोलक अपने कुल भार में इजाफा करने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा 53 किग्रा में हिस्सा ले रहे कुछ भारोत्तोलक अब 49 किग्रा वर्ग में आ जाएंगे। इसलिए प्रतिस्पर्धा औरा कड़ी हो जाएगी। उन्होंने कहा- मैं ट्रेनिंग के दौरान 199-200 किग्रा वजन उठा रही हूं और अगले कुछ महीनों में असल प्रतियोगिताओं में मुझे 200 किग्रा से अधिक वजन उठाने की उम्मीद है। मेरा लक्ष्य टोक्यो ओलंपिक से पहले 210 किग्रा वजन उठाना है जो विश्व रिकार्ड होगा। यह आसान नहीं होगा लेकिन यह मेरा लक्ष्य है और मुझे पहले से अधिक कड़ी मेहनत करनी होगी।

बुमराह ऐसे बने तेज गेंदबाज
तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह पिछले कुछ समय में भारत के नंबर एक तेज गेंदबाज बन गये हैं। अपने अजीब एक्शन के कारण वह विरोधी टीम के बल्लेबाजों के लिए एक रहस्यमयी गेंदबाज बने हुए हैं। यहां तक कि पूर्व ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज डेनिस लिलि को लगता है कि बुमराह दिग्गज गेंदबाज रहे जेफ थॉमसन की तरह हैं। वहीं बुमराह का मानना है कि सबकुछ आप पर आधारित होता है अगर आप अपनी सहायता नहीं कर सकते तो कोई भी कुछ नहीं कर सकेगा। साथ ही कहा कि बेहतर प्रदर्शन को बरकरार रखना सबसे बड़ी चुनौती रहती है।
इस गेंदबाज ने कहा कि उन्हें हमेशा से ही तेज गेंदबाजी पसंद थी। उन्होंने कहा कि जब मैं बच्चा था और टीवी पर क्रिकेट देखता था तब भी मुझे गेंदबाजी पसंद थी। बड़े-बड़े स्कोर और चौके-छक्के कभी मुझे आकर्षित नहीं कर सके। अपने अलग ऐक्शन के बारे में उन्होंने कहा, ‘मेरी किसी को कॉपी करने में रुचि नहीं थी। मेरे साथ कभी फैन बॉय मोमेंट जैसे कुछ नहीं रहा।’ अपनी खास गेंद यॉर्कर के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि बचपन में टेनिस बॉल से खेलता था। इस गेंद से आप सिर्फ एक तरह की गेंद ही कर सकते हैं। उसमें लेंथ तो आपके हिसाब से होती है, लेकिन बाउंसर नहीं होता। उस वक्त मैं शौकिया खेलता था, लेकिन बाद में जब पेशेवर तरीके से खेलने लगा तो इस बात का अहसास हुआ। गेंद पर नियंत्रण पाने के लिए आपको कठीन परिश्रम तो करना ही पड़ता है। मैंने वैसा ही किया। अब लाइन-लेंथ और बाउंस पर बेहतर नियंत्रण है।
अपनी फिटनेस पर उन्होंने कहा कि जब मैंने पहली बार प्रथम श्रेणी क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच पर आया तो महसूस किया कि अगर मुझे इस स्तर पर खुद को बनाए रखना है, तो फिटनेस बिल्कुल नए स्तर पर ले जाना होगा। फिटनेस तो मापदंड है ही, लेकिन फिर भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट एक अलग ही खेल है। मुझे इसका अहसास जल्दी हुआ।
साथ ही कहा कि मानसिक फिटनेस के लिए संगीत और योग शुरु किया। मैं इन दोनों को काफी वक्त देता हूं। हां, एक बात और जब मैं क्रिकेट मैदान से बाहर होता हूं तो कोई नहीं जानता मैं क्या कर रहा हूं। परिवार और दोस्तों के साथ होने पर कभी क्रिकेट के बारे में बात नहीं करता। मेरे हिसाब से जितना क्रिकेट के बारे में बात करना जरूरी है, उतना ही उसके बारे में बात नहीं करना भी जरूरी है।

सेरेना ऐसे बनी स्टार
अमेरिकी टेनिस स्टार सेरेना विलियम्स की कामयाबी के पीछे उनके माता-पिता का भी अहम योगदान रहा है। सेरेना की मां ने गर्भावस्था में ही उसे टेनिस की कहानियां सुनानी शुरु कर दीं थीं। 26 सितंबर 1981 को मिशिगन में जन्मी सेरेना को उसके जन्म से पहले ही उसके पिता टेनिस खिलाड़ी बनाना चाहते थे और उन्होंने अपनी पत्नी ओराकेन को उनकी गर्भावस्था के दौरान ही टेनिस से जुड़ी किताबें पढ़ने के लिए दीं, टेनिस के मैच दिखाए और महान खिलाड़ियों के किस्से सुनाए। यही वजह है कि टेनिस का खेल जैसे सेरेना के डीएनए में समा गया और इसी के साथ उन्होंने महिला टेनिस का नया इतिहास लिखा।
सेरेना के जन्म के कुछ समय बाद ही उनका परिवार केलिफोर्निया के कांप्टन में जाकर बस गया और नन्ही सेरेना ने तीन साल की उम्र में ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया। पिता ने सेरेना और उसकी बड़ी बहन वीनस को घर पर ही पढ़ाने का फैसला किया ताकि उनकी टेनिस के अभ्यास पर असर न पड़े। सेरेना और वीनस अब टेनिस के गुर सीख गई थीं और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण की जरूरत थी, लिहाजा परिवार ने फ्लोरिडा में वेस्ट पाम बीच जाने का फैसला किया, जहां रिक मैसी की टेनिस अकादमी में उन्हें अतिरिक्त प्रशिक्षण मिलने लगा। सेरेना ने जूनियर टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाना शुरु कर दिया। यहां एक बार फिर उनके पिता ने एक अहम फैसला किया और सेरेना को जूनियर टूर्नामेंट्स में जाने से रोक दिया। इसकी एक वजह तो यह थी कि वह अपनी बेटियों की पढ़ाई को लेकर चिंतित थे और साथ ही उन्हें अपनी बेटियों के साथ रंगभेद की भी आशंका थी।
उस समय सेरेना दस साल से कम उम्र की खिलाड़ियों में पहले नंबर पर थी और टूर्नामेंटों में उसका रिकार्ड 46-3 का था। 1995 में दोनो बहनों को मैसी की अकादमी से हटा लिया गया और उनके प्रशिक्षण का पूरा जिम्मा उनके पिता ने संभाल लिया। उस समय सेरेना नौवीं कक्षा में थी। सेरेना के पिता ने उन्हें आक्रामक खेल के लिए प्रेरित किया और मुश्किल हालात को आसान बनाकर जीतने का हुनर सिखाया। अपने लिए अलग रास्ता बनाने का अंदाज उन्होंने अपने पिता से सीखा।
सेरेना मुख्यत: बेसलाइन खिलाड़ी हैं और रैली को तत्काल अपने नियंत्रण में ले लेने के कारण वह अपने विरोधी खिलाड़ी पर भारी पड़ती हैं। तूफानी सर्विस उनका सबसे मजबूत हथियार है और आक्रामक खेल जोखिमपूर्ण होने के बावजूद उनके लिए जीत का रास्ता बनाता रहा है। बहुत से लोग उन्हें महिला टेनिस के इतिहास की महानतम खिलाड़ी मानते हैं। तेजी के साथ साथ अपनी सर्विस को विरोधी खिलाड़ी की पहुंच से दूर रखना सेरेना के खेल की खासियत है।
2013 के आस्ट्रेलियन ओपन में सेरेना ने 128.6 मील प्रति घंटे की रफ्तार से सर्विस की थी। सेरेना के फोरहैंड और बैकहैंड शॉट्स के साथ साथ उनके ओवर हैड शॉट्स भी विरोधी खिलाड़ियों के लिए मुसीबत रहे हैं। 2012 के विम्बलडन में उनकी सटीक सर्विस का यह आलम था कि सेरेना ने 102 एसेस लगाकर एक नया रिकार्ड बना डाला। आक्रामक खेल भले ही सेरेना की शख्सियत के अनुकूल है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह रक्षात्मक रूख अपनाने में भी माहिर हैं। टेनिस के तीनों तरह के कोर्ट पर खेलने में माहिर सेरेना हाल ही में अमेरिकन ओपन में चेयर अंपायर के साथ हुए झगड़े और कुछ समय पहले पूरे कैटसूट पहनने को लेकर विवादों में भी रही हैं।

विराट और चानू को मिलेगा खेल रत्न
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और विश्व चैंपियन वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को इस साल राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार मिलेगा। वहीं भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा, एथलीट हिमा दास सहित 20 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार दिये जाएंगे। ये पुरस्कार विजेता खिलाड़ियों को 25 सितंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रदान करेंगे। इससे पहले केंद्रीय खेल मंत्रालय ने गुरुवार को पुरस्कार विजेताओं की सूची आधिकारिक तौर पर जारी की। खेल रत्न के लिए चयनित क्रिकेटर विराट पिछले तीन साल से बेहतरीन फॉर्म में चल रहे हैं। उन्हें इससे पहले 2016 और 2017 में भी इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। कोहली ने अब तक 71 टेस्ट मैचों में 6147 रन और 211 वनडे में 9779 रन बनाए हैं।
वहीं चानू को पिछले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में 48 किग्रा में स्वर्ण पदक जीतने के कारण इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्होंने इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सोने का तमगा जीता था लेकिन चोट के कारण एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पाईं। अर्जुन पुरस्कार के लिए चयनित भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता था। वहीं हिमा आईआईएसएफ विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट हैं।
राष्ट्रपति द्रोणाचार्य और ध्यानचंद पुरस्कार भी प्रदान करेंगे।
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाले खिलाड़ी पदक और प्रशस्ति पत्र के अलावा 7.5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है।
अर्जुन, द्रोणाचार्य तथा ध्यानचंद पुरस्कार विजेता को लघुप्रतिमाएं, प्रमाण पत्र और पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है।
पुरस्कार विजेताओं की सूची इस प्रकार है :
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार: विराट कोहली और मीराबाई चानू।
अर्जुन पुरस्कार: नीरज चोपड़ा, जिन्सन जॉनसन और हिमा दास (ऐथलेटिक्स); एन सिक्की रेड्डी (बैडमिंटन); सतीश कुमार (मुक्केबाजी); स्मृति मंधाना (क्रिकेट); शुभंकर शर्मा (गोल्फ); मनप्रीत सिंह, सविता (हॉकी); रवि राठौड़ (पोलो); राही सरनोबत, अंकुर मित्तल, श्रेयसी सिंह (निशानेबाजी); मणिका बत्रा, जी सथियान (टेबल टेनिस); रोहन बोपन्ना (टेनिस); सुमित (कुश्ती); पूजा काडिया (वुशु); अंकुर धामा (पैरा-ऐथलेटिक्स); मनोज सरकार (पैरा-बैडमिंटन)।
द्रोणाचार्य पुरस्कार: सी ए कुट्टप्पा (मुक्केबाजी); विजय शर्मा (भारोत्तोलन); ए श्रीनिवास राव (टेबल टेनिस); सुखदेव सिंह पन्नू (एथलेटिक्स); क्लेरेंस लोबो (हॉकी, आजीवन); तारक सिन्हा (क्रिकेट, आजीवन); जीवन कुमार शर्मा (जूडो, आजीवन); वी आर बीडु (ऐथलेटिक्स, आजीवन)।
ध्यान चंद पुरस्कार: सत्यदेव प्रसाद (तीरंदाजी); भरत कुमार छेत्री (हॉकी); बॉबी अलॉयसियस (एथलेटिक्स); चौगले दादू दत्तात्रेय (कुश्ती)।

सेरेना विवादों में आई
टेनिस स्टार सेरेना विलियम्स पर अमेरिकी ओपन के आयोजक ने टेनिस नियमों के उल्लंघन के लिए 17000 डॉलर का जुर्माना लगाया है। अमेरिकी ओपन के फाइनल में सेरेना और मैच अंपायर के बीच विवाद ने काफी सुर्खियां बटोरी हैं। सेरेना को फाइनल में जापान की 20 वर्षीय खिलाड़ी नाओमी ओसाका ने सीधे सेटों में 6-2, 6-4 से हराया था।
सेरेना पर फाइनल मैच के दूसरे सेट के दौरान अपने कोच से इशारों में मदद लेने पर मैच के अंपायर पुर्तगाल के कार्लोस रामोस ने अंक का दंड लगाया था। इसके अलावा, सेरेना पर कोर्ट में गुस्से से अपना रैकेट फेंकने और अंपायर को अपशब्द कहने के भी आरोप लगे। उन्होंने कार्लोस को चोर कहा था। उन्होंने मैच के बाद अंपायर पर लैंगिकवाद का आरोप भी लगाया था।
अमेरिका की दिग्गज खिलाड़ी ने कहा कि उन्होंने पुरुष खिलाडिय़ों को अंपायरों को बहुत कुछ कहते सुना है, लेकिन उन्हें इस व्यवहार के लिए कभी भी दंडित नहीं किया गया। अमेरिकी ओपन के फाइनल में खेलने के लिए सेरेना को 18.5 लाख डॉलर की राशि मिली है। उन पर लगा जुर्माना इसी राशि से निकाला जाएगा।
सेरेना से नाराज नहीं ओसोका
वहीं ओसोका ने सेरेना की आलोचना करने से इनकार किया, जबकि फाइनल में उनकी जीत पर चेयर अंपायर से इस अमेरिकी खिलाड़ी की बहस हुई थी। 20 साल की ओसोका खिताब जीतने वाली जापान की पहली खिलाड़ी बनी है। जापान की महान टेनिस खिलाड़ी किमिको डेट ने कहा था कि वह निराश थी कि ओसाका जीत दर्ज करने के बाद रोने लगीं और अपने गैरवपूर्ण क्षण को सहेज नहीं पाईं, लेकिन जापान लौटने के बाद ओसाका ने कहा कि उनके मन में सेरेना को प्रति कोई नाराजगी नहीं है। विश्व रैंकिंग में 19वें से 7वें स्थान पर पहुंचीं आसोका ने कहा, ‘मैं दुखी नहीं हूं, क्योंकि मुझे इतना भी नहीं पता कि मुझे कैसा महसूस करना चाहिए था।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मैंने दुखी महसूस करने के बारे में सोचा भी है, क्योंकि मेरे पास किसी अन्य फाइनल में खेलने का अनुभव ही नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने सिर्फ सोचा कि मुझे कोई खेद नहीं होना चाहिए। कुल मिलाकर मैं काफी खुश हूं और मुझे पता है कि मैंने काफी कुछ हासिल किया है।’
इस मामले में एक आस्ट्रेलियाई अखबार के सेरेना के कार्टून बनाने को लेकर भी विवाद हुआ। इस मामले में अखबार पर रंगभेदे के आरोप लगे पर उसने कार्टून हटाने से इंकार कर दिया। अखबार ने कहा कि वह आगे भी ऐसा ही करता रहेगा।

अरपिंदर के लिए पिता ने गिरवी रख दी थी जमीन
एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता ट्रिपल जंपर अरपिंदर सिंह ने आईएएएफ कॉन्टिनेंटल कप में कांस्य जीतकर एक नया रिकार्ड बनाया है। आईएएएफ में पदक जीतने वाले वह पहले भारतीय हैं पर यहां तक की राह उनकी बेहद कठिन रही है। अरपिंदर के खिल के लिए उनके पिता को जमीन तक गिरवी रखनी पड़ी जो अब पदक जीतने के बाद वापस हासिल की है। अब उनके पिता जगवीर सिंह को अपने फैसले पर पर गर्व महसूस हो रहा है। अरपिंदर ने उनकी सारी मेहनत और त्याग को सफल कर दिया।
रिटायर होने के बाद पिता जगवीर की पेंशन केवल 8 हजार रुपये थी। अरपिंदर जब खेलने के लिए बाहर रहते थे तो उन्हें हर महीने 20 हजार रुपये भेजने पड़ते थे। पिता ने इस कारण दो एकड़ जमीन तक गिरवी रख दी। कांस्य पदक जीतने के बाद पंजाब सरकार ने 6 लाख रुपये दिए। इससे उन्होंने जमीन छुड़वाई। जगवीर पुराने दिनों को याद कर कहते हैं, ‘अरपिंदर जब 7 साल का था तो पढ़ने में अच्छा नहीं था, लेकिन शरीर से तगड़ा था। मैंने उससे कहा कि कोई भी एक काम चुन ले, खेल या पढ़ाई। मैं उसे सुबह 3 बजे दौड़ाने ले जाता था। मैं साइकल पर होता और वह आगे-आगे दौड़ता था। 3 किमी जाना और इतना ही आना। कभी-कभी यह दूरी चार से 5 किमी भी हो जाती थी।’
जगवीर आगे कहते हैं, ‘अरपिंदर सुबह उठने में बड़ी आनाकानी करता था। मुझे उसके मुंह पर पानी फेंकना पड़ता तो कभी गर्दन पकड़कर उठाता। मौसम कोई भी हो, अभ्यास नहीं रोका। वहीं अरपिंदर ने कहा कि वह इस सफलता से खुश हैं, लेकिन इससे ज्यादा बेहतर कर सकते थे। रजत पदक मामूली अंतर से मेरे हाथ से निकल गया। अब उनका लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतना है।

सबसे तेज अर्धशतक लगाने वाली पहली एशियाई महिला बल्लेबाज है मंधाना
स्मृति मंधाना ने टी-20 त्रिकोणी सीरीज के तीसरे मैच में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। 21 साल की मंधाना ने इंग्लैंड के खिलाफ 40 गेंदों में ही 76 रनों की शानदार पारी खेली। मंधाना ने केवल 25 गेंदों में ही 50 रन पूरे कर लिए। इसके साथ ही मंधाना महिला टी-20 मैचों में सबसे तेज अर्धशतक लगाने वाली पहली एशियाई और भारतीय बल्लेबाज बन गयी हैं। इस दौरान मंधाना ने अपना ही रिकार्ड तोड़ दिया। इससे पहले ही मंधाना ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 30 गेंदों में ही अर्धशतक पूरा किया था।
ओवरऑल टी-20 इंटरनेशल की बात करें तो मंधाना का यह संयुक्त रूप से चौथा सबसे तेज अर्धशतक है। न्यूजीलैंड की सोफी डिवाइन 18 गेंदों में अर्धशतक लगाकर शीर्ष पर हैं। उन्होंने भारत के खिलाफ 2005 में यह कारनामा किया था। डिएंड्रा डॉटिन (वेस्टइंडीज), रेचल प्रीस्ट (न्यूजीलैंड) ने 22 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया था जबकि डॉटिन और एससी किंग ने 25 गेंदों पर पचास रन बनाये थे।
महिला टी-20 इंटरनेशनलः सबसे तेज अर्धशतक
1 18 गेंद : सोफी डिवाइन (न्यूजीलैंड, विरुद्ध भारत), 2005
2 22 गेंद : डिएंड्रा डॉटिन (वेस्टइंडीज, विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया), 2009
3 22 गेंद : रेचल प्रीस्ट (न्यूजीलैंड, विरुद्ध भारत), 2015
4 25 गेंद :स्मृति मंधाना (भारत, विरुद्ध इंग्लैंड), 2018
4 25 गेंद :डिएंड्रा डॉटिन (वेस्टइंडीज, विरुद्ध साउथ अफ्रीका), 2010
4 25 गेंद :एससी किंग (वेस्टइंडीज, नीदरलैंड्स), 2010 ।

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