रादुविवि में नियमित प्रोफेसरों का टोटा, प्रभारियों के भरोसे 13 विभाग

जबलपुर, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय इन दिनों नियमित प्रोफेसरों की कमी से जूझ रहा है। साल-दर-साल यह संख्या लगातार घट रही है। विश्वविद्यालय के 30 विभागों में 13 विभागों में प्रभारी विभागाध्यक्षों से काम चलाया जा रहा है। अगले एक दशक में रादुविवि के ज्यादातर नियमित प्रोफसर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। विश्वविद्यालय में ऐसे कई विभग हैं। जिनमें नियमित प्रोफेसर नहीं है। जहां गेस्ट फेकल्टी से काम चलाया जा रहा है। इन विभागों में प्राचीन भारतीय इतिहास, रसायन शास्त्र विभाग, अंग्रेजी, हिंदी, लाइब्रेरी, सोशलॉजी, इनोवेशन सेंटर, वूमन स्टडी, कम्युनिटी कॉलेज, कंप्यूटर साइंस एप्लीकेशन में एक भी नियमित प्रोफेसर नहीं है। इन विभागों में गेस्ट फेकल्टी के भरोसे काम चल रहा है। विश्वविद्यालय में नियमित प्रोफेसरों की कमी के कारण शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ज्ञात हो कि पिछले 20 वर्षों में विश्वविद्यालय 10 बार नियमित प्रोफेसरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर चुका है। हालांकि प्रदेश शासन किसी भी न किसी बात को लेकर भतिNयों पर रोक लगा देता है। जिसमें बेकलॉग की भर्ती पहले करने व खराब वित्तीय हालत का बहाना लेकर अड़ंगा लगाया जाता है। एक दशक पहले तक जिस विश्वविद्यालय में 160 नियमित प्रोफेसर थे। वहां अब महज 40 प्रोफेसर ही बचे हैं। यदि जल्द नियमित प्रोफेसरों की भर्ती नहीं हुई तो 2028 के बाद नियमित प्रोफेसरों की संख्या सिमट कर महज ही रह जाएगी। पहले शैक्षणिक गुणवत्ता के लिहाज से रादुविवि की गिनती प्रदेश के नामचीन विश्वविद्यालय में होती थी वहीं अब यहां का शैक्षणिक स्तर इतना बिगड़ गया है कि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी अपने बच्चों को यहां बढ़ाने की बजाय महानगरों में पढ़ाना पसंद करते हैं।

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