दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल लोधी का इस्तीफा

भोपाल, दमोह से कांग्रेस विधायक राहुल लोधी ने रविवार को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। उनका अचानक से इस्तीफा देना, कई लोगों के लिए अचरज का प्रश्न बनकर उभरा है। आखिर मतदान से कुछ दिन पहले लोधी को ऐसा क्या हुआ कि उन्हें कांग्रेस में बेचैनी होने लगी या उनका भाजपा के प्रति अचानक से प्रेम जाहिर हो गया। अब भाजपा के पास 114 विधायक हैं और पूर्ण बहुमत के लिए सिर्फ दो विधायक और चाहिए। मगर अब कहानी थोड़ी बदली है। अगर नरोत्तम का गणित सही है और वे हिसाब में कच्चे नहीं हैं, अब सिर्फ एक विधायक की दरकार है।
सदन में बहुमत का आंकड़ा अब 115
उपचुनाव के बाद सदन का आंकड़ा 230 होता। तब भाजपा को सरकार बचाए रखने के लिए 116 विधायकों की जरूरत पड़ती। जैसा नरोत्तम ने बचाव किया था। मगर अब लोधी के इस्तीफे के बाद सदन की संख्या 229 हो गई है। बहुमत के लिए संख्या 115 होगी। लोधी का इस्तीफा कराकर बहुमत के आंकड़े के पास पहुंचने का जुगाड़ भले ही भाजपा कर ले, मगर मतदान से कुछ दिन पहले इस्तीफा देने पर सवाल उठ रहे हैं। क्या उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशियों की हालत खस्ता है। एक समय 22 से 25 सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा का दावा अब 8 से 10 सीटों पर आ टिका है। सिंधिया समर्थक प्रत्याशियों को लेकर क्षेत्र में नाराजगी का जो आलम है, उससे भाजपा भी वाकिफ है। सिंधिया की बॉडी लैंग्वेज साफ इशारा कर रही है कि चुनाव किधर जा रहा है। फिर प्रत्याशियों का घुटने टेकने से लेकर शाष्टांग प्रणाम तक करना बता रहा है कि मतदाता कोई भाव नहीं देने वाला। यही वजह है कि भाजपा नतीजे आने से पहले ही डैमेज कंट्रोल करने प्लान बी पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में एक-दो और कांग्रेस विधायकों का इस्तीफा होने की खबरें भी है।
नेताओं को संदेश देना चाहती है भाजपा
राहुल लोधी का इस्तीफा कराकर भाजपा ने अपने नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं तक संदेश पहुंचाया है कि उनके बिना भी सरकार बनाई जा सकती है। उपचुनाव में सिंधिया समर्थकों के आने से कई जगह भाजपा के पुराने नेता नाराज हैं। समय-समय पर वह पीड़ा जाहिर करते रहे हैं। भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता और संघ के स्वयंसेवक भी चुनाव के अंतिम चरण में नाराज और निष्क्रिय होकर घर बैठे हैं। इस स्थिति को देखते हुए लोधी का इस्तीफा कराकर भाजपा ने नेताओं को संदेश दिया है कि पार्टी को आगे बढऩा है, जो साथ है तो है और जो नहीं है, उसकी सरकार को फिक्र नहीं है।

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