आय बढ़ने के साथ ही बुजुर्ग भी अब खर्चे के मामले में युवाओं से नहीं रहे पीछे

वाशिंगटन, युवा भले ही देश के सबसे बड़े ग्राहक वर्ग के तौर पर जाने जाते हों, लेकिन बदले परिदृश्य में बुजुर्ग भी इन युवाओं से अब पीछे नहीं हैं। एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि पिछले कुछ समय में बुजुर्गों की आय में बढ़ोतरी हुई है। इस कारण देश का बुजुर्ग वर्ग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शॉपिंग पर खर्च कर खुश हो रहा है। इसके कारण बुजुर्ग के पंसद की चीजों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। बुजुर्गों के हित में काम करने वाली संस्था ने भारत में बुजुर्ग लोगों की आय और खर्च का बदलता पैटर्न: एक आकलन विषय पर देशव्यापी अध्ययन किया है। यह अध्ययन इस वर्ष मार्च-अप्रैल के बीच करीब 10,000 बुजुर्गो पर किया गया है। अध्ययन के बाद फाउंडेशन का कहना है कि देश का बुजुर्ग वर्ग भी शॉपिंग के मामले में पीछे नहीं है, और वह जिंदगी भर की जमा पूंजी का उपयोग बुढ़ापे में अपनी तरह से कर रहा है। अध्ययन के अनुसार देश की बुजुर्ग आबादी का करीब पांचवां हिस्सा आय के मुख्य स्रोत के लिए या तो कोई न कोई नौकरी कर रहा है या नियमित आय के अन्य साधन अपना रहा है। हालांकि बुजुर्ग आबादी का 60.4 फीसदी हिस्सा आय के मुख्य स्रोत के लिए अपनी मासिक पेंशन पर आश्रित है।
अध्ययन के मुताबिक देश के 19.4 फीसदी बुजुर्ग इस तरह के हैं, जो आय के मुख्य स्रोत के लिए अपनी भू-संपत्ति या मकान के किराए या निवेश से हासिल ब्याज पर निर्भर हैं। आय के अन्य साधनों में भू-संपत्ति से हासिल आय पर निर्भर रहने वालों की तादाद 65.5 फीसदी, जबकि मकान से आय पर निर्भर रहने वालों की तादाद 74.5 फीसदी है। वहीं, करीब 41.42 फीसदी बुजुर्ग अपने निवेश व बचत से हासिल आय के दम पर खरीदारी करते हैं। करीब 50 फीसदी बुजुर्गों के पास ज्वैलरी या अन्य कीमती आभूषण हैं, 48.5 फीसदी बुजुर्गों के पास कोई अन्य कीमती संपत्ति है। संस्था चेयरमैन हिमांशु रथ ने कहा कि जिस तरह से बुजुर्गों की क्रय शक्ति बढ़ रही है और वे खरीदार के तौर पर सामने आ रहे हैं, उस देखते हुए मार्केटिंग और विज्ञापन कंपनियों को भी बुजुर्गों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। रथ ने कहा, बुजुर्गों की सिर्फ संख्या और उम्र ही नहीं बढ़ रही, बल्कि वे प्रभावशाली ग्राहक वर्ग के तौर पर भी उभर रहे हैं। फाउंडेशन के मुताबिक देश के करीब 32 फीसदी बुजुर्गों की मासिक आय 10-20 हजार रुपए है, जबकि 27 फीसद बुजुर्ग 20,000 रुपए मासिक से ज्यादा आय हासिल कर रहे हैं। वहीं, करीब 20 फीसदी बुजुर्गों की आय 5-10 हजार रुपए है।

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