अब तक तीन बार ही रद्द हुए हैं ओलिंपिक खेल, पहली बार महामारी के कारण रद्द होंगे खेल

नई दिल्ली, इस बार कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए आगामी टोक्यो ओलिंपिक पर खतरा मंडरा रहा है। ओलंपिक को खेलों का महाकुंभ माना जाता और यह हर चार साल में होते हैं। 1896 में एथेंस से शुरु हुए आधुनिक ओलिंपिक अब तक अपने 124 साल के इतिहास में केवल तीन बार रद्द हुए हैं वह भी विश्व युद्द के कारण। विश्व में कई बार महामारी फैली है पर उसका ओलंपिक कार्यक्रम पर प्रभाव नहीं पड़ा है हालांकि इस साल टोक्यो में होने वाले ओलिंपिक पर कोरोना वायरस का खतरा गहराता जा रहा है और इनके कारण आशंकाएं बढ़ती जा रहा हैं। आयोजक देश जापान ने भी माना है कि अगर हालात नहीं संभले तो ओलंपिक खेलों को रद्द करना पड़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह पहली बार होगा जब महामारी के कारण ओलंपिक रद्द होंगे।
कब-कब नहीं हो पाये खेल
1916 बर्लिन ओलिंपिक: इतिहास में पहली बार 1916 में ओलिंपिक रद्द हुए थे। प्रथम विश्व युद्द के कारण इस ओलिंपिक को रद्द करना पड़ा था। 4 जुलई 1912 को आईओसी की बैठक में बर्लिन ने बड़े बड़े देशों को मात देकर मेजबानी हासिल की थी। मगर प्रथम विश्व युद्द के कारण यह ओलिंपिक रद्द हो गया ‌था। इसके 20 सालों बाद बर्लिन ने 1936 समर ओलिंपिक का आयोजन किया। दूसरे विश्व युद्द से पहले यह आखिरी ओलिंपिक था.
1940 टोक्यो ओलिंपिक: 1940 में 21 सितंबर से 6 अक्टूबर तक टोक्यो में 12वें ओलिंपिक का आयोजन होना था, मगर इसके बाद इसे पुननिर्धारित करके 20 जुलाई से 4 अगस्त के बीच फिनलैंड में आयोजित करवाने का फैसला लिया गया। मगर दूसरे विश्व युद्द के कारण आखिरकार इस ओलिंपिक को रद्द ही करना पड़ा। इसके बाद फिनलैंड ने 1952 में और टोक्यो ने 1964 में समर ओलिंपिक की मेजबानी की।
1944 लंदन ओलिंपिक: ओलिंपिक के 13वें सीजन की मेजबानी लंदन को मिली थी, मगर दूसरे विश्व युद्द के चलते यह ओलिंपिक भी रद्द हो गए थे। इसके बाद लंदन ने 1948 ओलिंपिक की मेजबानी की थी।
ओलंपिक में दुनिया के 200 से अधिक देश हिस्सा लेते हैं। हर एक खिलाड़ी का सपना ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना होता है।
हर चार साल में भव्य रूप से इन खेलों का आयोजन किया जाता है। खेलों की मेजबानी मिलते ही मेजबान देश इसकी तैयारियों में जुट जाते हैं और इसकी तैयारियां में करीब चार साल लग जाते हैं। यह खेल तय समय पर ही शुरू होते हैं।

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