अशोकनगर जिले के स्कूलों कि बंद पड़ी हैं प्रयोग शालाएं

अशोकनगर, यहां के हायरसेकेण्डरी और हाईस्कूलोंं कि प्रयोगशालाएं काफी समय सा बंद पड़ी हैं, नतीजतन बच्चों के प्रायोगिक विषयों में नंबर भी अच्छे नहीं आ रहे। कई स्कूलों में तो प्रयोग शाला केवल कागजों में संचालित हो रही है। जिले में कुल 50 से ज्यादा हाईस्कूल और हायरसेकेण्डरी स्कूल हैं। इनमें से ज्यादातर स्कूलों के छात्रों ने तो प्रयोगशाला के दर्शन तक नही किए हैं। कुछ स्कूलों में सामग्री तो है परंतु इसे छात्रों के हाथों में नही दिया जाता है। हालांकि नवी कक्षा से प्रत्येक शासकीय और निजी स्कूलों में सर्वसुविधायुक्त लैब अनिवार्य की गई है एवं लैब न होने पर स्कूल की मान्यता समाप्त करने का नियम भी है। स्कूलों में जगह की कमी के कारण सूक्ष्मदर्शी, सिलाइड, बर्नीयर कैलीपर्स, प्रिज्म जैसे उपकरण या तो प्राचार्य की या विज्ञान शिक्षक की अलमारी में कैद हैं। ज्यादातर छात्रों ने प्रयोग करना तो दूर इनकी सकल भी नही देखी है। हायरसेकेण्डरी स्कूलों जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान की अलग-अलग प्रयोगशालाएं होना जरूरी है। साथ ही स्कूलों में विज्ञान शिक्षक के साथ लैब अस्टिेंट की उपस्थिति भी प्रयोग के दौरान छात्रों के साथ रहना जरूरी है। परंतु स्कूलों में प्रयोगशालाओं के ताले ही नही खुल रहे हैं।
स्कूलों में विज्ञान छात्र प्रयोग नही कर पा रहे हैं। इससे इस विषय के प्रति उनकी समझ और रुचि दोनों ही घटती जा रही है। यही कारण है कि जहां जिले के मेधावी छात्र गणित जैसे विषय में शतप्रतिशत अंक हासिल कर रहे हैं। वहीं विज्ञान विषय में 90 का आंकड़ा छूने में भी छात्रों को काफी पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। अब दिसम्बर बीतने को है स्कूलों की प्रयोगशालाओं में गतिविधियां शुरू नही हो पाई हैं। अब जनवरी में ही छात्रों को प्रयोगशाला में ले जाकर गिने चुने दो तीन प्रयोग कराकर औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
ये भी हैं कमियां- 1- सामग्री का अभाव 2- विज्ञान शिक्षक और प्रयोगशाला सहायकों की कमी 3- प्रयोगशालाओं में नही हैं सुरक्षा के इंतजाम 4- प्रयोगशाला के लिए नही हैं स्कूलों में कक्ष 5- विज्ञान शिक्षकों की नही रुचि करते हैं औपचारिकता 6- शिक्षा सत्र के शुरू से होना चाहिए प्रेक्टिकल जनवरी में आती है याद

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