ठाकुरिया परिवार की होल्कर के जमाने की रीगल टॉकीज पर अब आज से नगर-निगम का कब्जा

इन्दौर,शहर के मध्य क्षेत्र में स्थित इस बहुचर्चित रीगल टॉकीज का आज इंदौर नगर निगम की टीम ने कब्जा ले लिया । इस काम को अंजाम देने के लिए सुबह ही निगम की टीम मौके पर पहुंच गई । इस टीम के द्वारा टॉकीज पर निगम स्वामित्व के बोर्ड को लगा दिया गया। इस टॉकीज की नींव होलकर महाराज के समय पड़ी, महाराज फिल्म देखने के बडे शौकीन थे और जब भी वे लंदन जाते तो फिल्में देखते थे | उन्होंने ही वर्ष 1930 में रीगल टॉकीज़ के लिए ठाकुरिया परिवार को जमीन दी और चार वर्ष के अल्प अन्तराल याने कि 1934 में रीगल टॉकीज़ की विधिवत शुरुआत हो गयी | महाराजा खुद परिवार सहित रीगल टॉकीज़ पर फिल्में देखने आते थे, रीगल टाकीज की प्रसिद्धि के कारण यह चौराहा रीगल चौराहा के नाम से जाना जाने लगा | रीगल टॉकिज की 23947 स्क्वेयर फीट जमीन पर टाकीज प्रबंधन का आवेदन हाई कोर्ट द्वारा कल खारिज कर दिया गया था । जस्टिस वीरेंदर सिंह की बेंच ने यह आवेदन खारिज़ किया। नगर निगम की ओर से सीनियर एडवोकेट एके सेठी, ऋषि तिवारी आदि ने तर्क रखे। टॉकिज प्रबंधन की हाई कोर्ट में 2012 से विचाराधीन प्रथम अपील में उक्त आवेदन लगाया गया था।
इसके पहले गत दिनों ही एसडीएम कोर्ट ने नगर निगम के पक्ष में फैसला देते हुए 48 घंटे में कब्जा लेने के आदेश दिए थे। इस आदेश के बाद टॉकिज प्रबंधन ने 2012 से विचाराधीन प्रथम अपील की सुनवाई के लिए मेंशन लिया था, जिसमे यह आवेदन लगाया था। यह आवेदन खारिज होने के बाद अब नगर निगम द्वारा जमीन पर कब्जे की राह आसान हो गई थी । इसके परिणाम स्वरूप आज सुबह नगर निगम की लीज शाखा के प्रभारी इंजीनियर मनीष पांडे अपनी टीम के साथ टाकीज पर पहुंचे। उसके बाद अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह, उपायुक्त महेंद्र सिंह चौहान और अन्य अधिकारी मौके पर आए। इन अधिकारियों के द्वारा टाकीज का कब्जा लेने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। सबसे पहले निगम ने टॉकीज परिसर में लगे फिल्म के बोर्ड उतार दिये, इसके बाद निगम की ओर से टॉकीज पर अपने स्वामित्व का बैनर लगाया गया।
उल्लेखनीय है कि होलकर शासन काल में 1930 में मनोरंजन केंद्र के लिए यह जमीन दी थी जिसके बाद 1934 में यहां रीगल टॉकीज बनकर तैयार हुआ। इससे पहले निगम ने 2008 में टॉकीज की लीज निरस्त कर उस पर कब्जा ले लिया था। वर्ष 2017 में निगम ने सड़क चौड़ीकरण के लिए टॉकीज की कुछ जमीन ली थी और नई बाउंड्रीवॉल बनवाई थी। निगम द्वारा जो जमीन कब्जे में ली गई है ,उसकी आज के मान से कीमत 300 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है । इस जमीन का निगम के द्वारा अब शहर के हित में उपयोग किया जाएगा। नगर निगम यहां पर मेट्रो का स्टेशन, वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर या कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बना रहा है।

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