एमपी में बारिश से त्राहि-त्राहि, निचली बस्तियों में भरा पानी, बांध लबालब, नदियां उफान पर

भोपाल, राज्य में पिछले तीन दिन से लगातार जारी बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। प्रदेश की सभी बड़ी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे प्रदेश के कई जिलों के गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। सभी बड़े बांधों के गेट खुल गए हैं। इससे आसपास के गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बारिश के चलते अब तक आधा दर्जन से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। आज भी राज्य के 18 जिलों में कहीं-कहीं अत्यधिक बारिश और 20 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। होशंगाबाद में नर्मदा नदी मंगलवार को खतरे के निशान 964 फीट को पार कर गई। शाम 6 बजे सेठानीघाट पर नर्मदा का जलस्तर 965.50 फीट पर था। छह साल बाद यहां खतरे का अलार्म बजाने की नौबत बनी। हालांकि, अलार्म में तकनीकी खराबी के कारण मोबाइल की रिंगटोन बजाकर लोगों को अलर्ट नहीं किया जा सका।
केरवा डैम से निगम ड्रायवर की डूबने से मौत
कोलार इलाके में बोरदा के पास स्थित केरवा पहाड़ी के पीछे बाबाझिरी में 38 वर्षीय रिजवान पिता इरफान खान निवासी गरम गड्ढा बजरिया की डूबने से मौत हो गई। हादसे के दौरान ड्रायवर व उसके तीन बच्चे पानी में खेल रहे थे। इसी दौरान केरवा डैम से आए तेज बहाव से पानी बढ़ गया। इससे रिजवान की डूबने से मौत हो गई।
बेतवा किनारे के रहवासियों को किया शिफ्ट
भोपाल के बड़े तालाब और कलियासोत डैम के गेट खुल जाने से विदिशा में बेतवा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर हो गया। बेतवा किनारे के रहवासी अपने ठिकाने खाली कर सामान सहित दूसरी जगह पर पहुंचाए गए। नोलखी, रामलीला के पास झुग्गी बस्ती, बोहर घाट और बाढ़ वाले गणेश मंदिर के पास की बस्ती के करीब 250 से अधिक लोगों को हटाकर सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया गया है।
भोपाल में भारी बारिश की चेतावनी
राजधानी में पिछले तीन दिन से लगातार बारिश हो रही है। मंगलवार को दोपहर 3 बजे से शुरू हुई बारिश देर रात तक जारी रही। भोपाल में बुधवार को भी भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी की है। प्रदेश में अब तक कोर्ट से 25 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। राजधानी में अब तक 60 इंच से ज्यादा और कोटे से 73 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है।
इन जिलों में रेड अलर्ट
हरदा, होशंगाबाद, मंदसौर, नीमच, नरसिंहपुर, रायसेन, रतलाम और सीहोर में अति भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
48 घंटे 198 लोगों की मौत
मध्य प्रदेश में पिछले 48 घंटों से हो रही भारी बारिश के चलते आठ लोगों की मौत हो गई है। इसी के साथ 15 जून से अब तक वर्षाजनित हादसों में राज्य में अब तक कुल 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी केे अनुसार ‘पिछले 48 घंटों में वर्षाजनित घटनाओं में प्रदेश में आठ लोगों की मौत हुई है। ये मौतें भोपाल, गुना, राजगढ़, विदिशा एवं कटनी जिलों में हुई हैं। अधिकृत आंकड़ों के अनुसार वर्षाजनित घटनाओं में मध्य प्रदेश में 15 जून से लेकर अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इनमें पानी में डूबने से हुई मौत के साथ-साथ बिजली गिरने से मरने वाले लोग भी शामिल हैं।
तीनों को बचाया पर खुद बहा
पेशे से ड्राइवर 35 वर्षीय रिजवान राजधानी के समीप कोलार के बाबा झिरी में अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने गया था। यहां आई बाढ़ में उसके बच्चे डूबने लगे। ड्राइवर ने बहते पानी में छलांग लगा दी और बच्चों को बचा लिया लेकिन वह खुद पानी में बह गया। उनके साथ उनकी पत्नी और बच्चे, बहनोई और कुछ अन्य लोग भी थे। रिजवान और उसके बेटे उथले पानी में खेल रहे थे। अचानक जल स्तर बढऩे लगा। रिजवान के बच्चे पानी में डूबने लगे। उनकी आवाज सुनकर रिजवान ने बहते पानी में छलांग लगा दी। रिजवान बच्चों के पास पहुंचा और उन्हें सहारा देकर पानी के बाहर निकाला लेकिन पानी के तेज बहाव में वह खुद को बहने से नहीं बचा सका। रिजवान का दाहिना पैर एक चट्टान के नीचे फंस गया है। वह मदद के लिए चिल्लाया लेकिन जब तक उसे मदद मिलती पानी का एक तेज सैलाब आया और पत्थर सहित रिजवान को बहाकर ले गया। उसके परिवार ने अपनी आंखों के सामने ही उसे बहते हुए देखा लेकिन वे भी कुछ नहीं कर सके।
कहां क्या हालात
खंडवा: शहर की तीन पुलिया में भरे पानी में एक वृद्ध बह गया। होमगार्ड की टीम दिनभर तलाशती रही। इंदिरा सागर बांध के 12 गेटों से 20 हजार 800 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं ओंकारेश्वर बांध के 18 गेटों से 23 हजार क्यूमेक्स पानी छोड़े जाने से नर्मदा उफान पर है। मोरटक्का में नर्मदा का जलस्तर 166.550 मीटर है, जबकि 167 मीटर के बाद पानी पुल को छूने लगता है।
बड़वानी: नर्मदा का जलस्तर अब तक के रिकॉर्ड 136.800 मीटर पर पहुंच गया है। इससे पूर्व 1970 में जलस्तर 136.680 मीटर तक पहुंचा था। जिला प्रशासन ने अब तक सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन करते हुए राजघाट के टापू बने हिस्से से 20 परिवारों को सामान सहित बाहर निकाला। इस दौरान हंगामा भी हुआ।
उज्जैन: बड़े पुल से शिप्रा 5-6 फीट नीचे बह रही है। नागदा के समीप बिजली गिरने से ग्राम खजूरिया में दो चचेरे भाइयों की मौत हो गई। वहीं कायथा में छोटी कालीसिंध नदी पार करते समय तेज बहाव में बहने से एक युवक की मौत हो गई।
धार: जिले के नालछा में दोपहर करीब एक घंटे में तीन इंच से ज्यादा बारिश हुई। साप्ताहिक हाट बाजार प्रभावित हुआ और दुकानों में पानी घुस गया। सुसारी में भी तेज बारिश से 30 साल बाद नाले का पानी गांव की सड़कों व घरों के सामने से बह निकला। सुसारी-डही मार्ग 6 घंटे तक बंद रहा। मांडू मार्ग पर एक घंटे आवाजाही प्रभावित रही।
जापुर: लगातार तीसरे दिन रिमझिम और तेज बारिश चीलर, लखुंदर और कालीसिंध नदी उफान पर, जिले में अब तक 53.8 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यहां 1973 में 71 इंच और 2006 में 72 इंच हुई थी बारिश।
खरगोन: महेश्वर में नर्मदा के घाट और छतरियां जलमग्न हैं। नर्मदा के बीच बना हुआ बाणेश्वर मंदिर आधे से अधिक डूब गया है।

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