एमपी में विधायकों-मंत्रियों से आयकर विभाग संपति के ब्यौरे में अंतर को लेकर करेगा पूछताछ

भोपाल, संपति के ब्यौरे में अंतर को लेकर प्रदेश के माननीयों (विधायकों-मंत्रियों) द्वारा सौंपे गए जवाब से आयकर विभाग संतुष्ठ नहीं है। ऐसे मंत्री और विधायकों की संख्या एक सैकडा से ज्यादा बताई जा रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान इन्होंने नामांकन पत्र के साथ हलफनामे में संपत्ति का जो ब्योरा दिया है, वह उनके द्वारा दी गई पिछली जानकारी से अलग है। इसलिए धारा 131 के तहत समन देकर सही जानकारी मांगी गई है। बताया जाता है कि कई जनप्रतिनिधियों ने चुनाव आयोग को नामांकन पत्र के साथ सौंपे हलफनामे एवं आयकर विभाग को रिटर्न के जरिए संपत्ति और आय को लेकर जो जानकारियां दी हैं, उनमें काफी अंतर सामने आया है। चुनाव में आयोग को संपत्ति का जो ब्योरा दिया गया था, उससे भी मौजूदा हलफनामे का मिलान नहीं हो रहा। संपत्ति में दिख रहे इस बड़े फर्क के बारे में संबंधित करदाता ने स्पष्ट नहीं किया और न ही दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए।
विभाग को कुछ लोगों द्वारा जो जानकारी उपलब्ध कराई गई है, उनमें बिंदुवार कारणों का खुलासा नहीं किया गया। विभाग द्वारा पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव सहित नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा एवं पूर्व विधायक मीरा यादव से भी धारा 131 के तहत समन भेजकर जानकारी चाही गई। विधायक राहुल लोधी, भारत सिंह कुशवाह, आलोक चतुर्वेदी, राकेश गिरी, शशांक भार्गव, संजीव सिंह कुशवाह और रणवीर सिंह जाटव सहित विधानसभा चुनाव के कई अन्य प्रत्याशियों से भी संपत्ति के बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था।संपत्ति में सामने आए गैर आनुपातिक अंतर के बारे में विभाग को यदि समाधानकारक जवाब नहीं मिला तो प्रकरणों की रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजने का प्रावधान है। साथ ही विभाग की असेसमेंट विंग प्रकरण को मेनुअल आधार पर स्क्रूटनी में लेकर नए सिरे से टैक्स एवं जुर्माने की गणना कर वसूली कार्रवाई अलग से शुरू करेगी। चुनाव आयोग भी मामले पर संज्ञान ले सकता है।

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