रूस से अगले डेढ़ साल में भारत को मिल जाएगी एस-400 रक्षा प्रणाली

मास्को, रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव ने कहा है कि भारत को एस – 400 रक्षा प्रणाली आगामी 18 से 19 माह के भीतर मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली को भारत को समय सीमा में देने के लिए किए गए करार का कड़ाई से पालन होगा।
रूस के सरकारी मीडिया से बातचीत करते हुए उप प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सौदे का अग्रिम भुगतान मिल चुका है और सभी प्रक्रिया समय सीमा में पूरी की जाएगी। भारत में रूस के साथ इस तरह की पांच प्रणाली खरीदने के लिए बीते वर्ष अक्टूबर माह में 5।43 बिलियन डॉलर का समझौता किया है।
पिछले माह अपनी रूस यात्रा में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेइ लवरोव से मुलाकात के दौरान भी इस विषय में चर्चा की थी और दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
एस-400 मिसाइल प्रणाली ‘एस-300’ का एक उन्नत संस्करण है। इसे रूस की अल्माज केंद्रीय डिजाइन ब्यूरो द्वारा 1990 के दशक में विकसित किया गया था। यह मिसाइल प्रणाली रूस में 2007 से ही सेवा में है और इसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ रक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है। इस मिसाइल प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत है कि यह करीब 400 किलोमीटर के क्षेत्र में दुश्मन के विमान, मिसाइल और यहां तक कि ड्रोन को भी नष्ट करने में सक्षम है। इसे सतह से हवा में मार करने वाली दुनिया की सबसे सक्षम मिसाइल प्रणाली माना जाता है। इस मिसाइल प्रणाली की क्षमता का इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि यह अमेरिका के सबसे उन्नत फाइटर जेट F-35 को भी गिराने की काबिलियत रखता है।
इस रक्षा प्रणाली से विमानों सहित क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों और जमीनी लक्ष्यों को भी निशाना बनाया जा सकता है। इसके अलावा इसकी खासियत है कि इस मिसाइल प्रणाली में एक साथ तीन मिसाइलें दागी जा सकती हैं और इसके प्रत्येक चरण में 72 मिसाइलें शामिल हैं, जो 36 लक्ष्यों पर सटीकता से मार करने में सक्षम हैं।

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