सभी वर्गों को मिले न्याय, संविधान की यही है मूल भावना

भोपाल, मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि संविधान की मूल अवधारणा है कि सभी वर्गों के साथ न्याय हो। संविधान की इसी सोच के साथ मध्यप्रदेश सरकार काम कर रही है। प्रदेश में हर वर्ग को न्याय मिले और नौजवानों को रोजगार मिले। नाथ आज समन्वय भवन में दलित पिछड़ा अधिकार मोर्चा द्वारा पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय पर आयोजित सम्मान एवं आभार समारोह को संबोधित कर रहे थे।
नाथ ने कहा कि हम किसी वर्ग को आरक्षण नहीं दे रहे हैं बल्कि संविधान की भावना के अनुसार उन्हें न्याय दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय का यही सिद्धांत आज हमें सभी प्रकार की अनेकता के बाद भी एकता के सूत्र में पिरोए हुए हैं। आज कोई वर्ग न्याय से वंचित होगा, तो हम संविधान की मूल भावना को आघात पहुंचायेंगे। न्याय से जुड़े रहेंगे, तो देश निरंतर प्रगति करता जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान को न्याय से जोड़ने का काम इसके निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर ने किया। उन्होंने कहा कि हमारे विशाल देश को दो शक्तियों ने एकजुट कर रखा है। एक हमारी अनेकता में एकता और दूसरी आध्यात्मिक शक्ति है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संविधान इतना महान है कि इसे कई देशों ने अपनाया है। हमें संविधान की रक्षा करना है, इसे अक्षुण्ण बनाए रखना है।
नाथ ने कहा कि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती हर एक नौजवान को काम देने की है। यह तभी संभव होगा, जब प्रदेश में निवेश आए, उद्योग धंधे लगें, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हो। इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश के प्रति निवेशकों का विश्वास बढ़े। सरकार निवेशकों के विश्वास को लौटाने का निरंतर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने पिछड़ा वर्ग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा इस वर्ग ने उन्हें जो प्यार और विश्वास दिया है, उससे उन्हें बल मिला है, सभी वर्गों के सर्वांगीण विकास के लिए शक्ति मिली है। मुख्यमंत्री ने पूर्व उप मुख्यमंत्री श्री सुभाष यादव का स्मरण करते हुए कहा कि पिछली बार मैंने समन्वय भवन का नामकरण स्व. श्री सुभाष यादव के नाम पर करने को कहा था। आज इस भवन पर उनका नाम देखकर बेहद खुशी हुई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 में मैं और यादव जी सांसद थे। उनसे मेरा गहरा रिश्ता था। पिछड़ा वर्ग समाज के लिए वे हमेशा चिंतित रहते थे।

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