लालू प्रसाद की सेहत स्थिर जमानत की खुशी में भी नहीं खा सके मिठाई

रांची, रांची के रिम्स में इलाजरत राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के डॉक्टर डीके झा ने आज मेडिकल बुलेटिन जारी की। उन्होंने कहा कि लालू की सेहत अभी स्टेबल है, लेकिन बेल मिलने की खुशी में लालू प्रसाद यादव मिठाई नहीं खा सकते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार लालू प्रसाद यादव का शुगर लेवल लगातार बढ़ जाता है. इसलिए मिठाई खाने पर पाबंदी लगाई गई है। हालांकि देवघर कोषागार से जुड़े हुए मामले में लालू प्रसाद यादव को जमानत मिलने के बाद आज ड्रीम्स परिसर के बाहर राजद के नेता और कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी ।
राजद नेताओं का कहना है कि लालू प्रसाद यादव को एक मामले में जमानत मिली है अब अन्य मामले में भी जल्द जमानत मिलने की उम्मीद है और वह जल्द ही बाहर आएंगे।
गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव किडनी फेल्योर, डायबिटीज, दिल की बीमारी, प्रोस्टेट सहित दर्जन भर से अधिक बीमारियों से जूझ रहे हैं. इसके अलावा प्रोस्टेट, हाइपर यूरीसिमिया, पेरियेनल इंफेक्शन, किडनी स्टोन, फैटी लीवर आदि की भी समस्या है। बताया जाता है कि लंबे समय से डायबिटीज होने के कारण उनकी किडनी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. और फिलहाल उनका इलाज रिम्स में चल रहा है. पिछले हफ्ते उनके आम खाने पर रोक लगी थी।

बेटी-दामाद, नातिन को देखकर भावुक हुए
राजद अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव शनिवार को बड़े दिनों के बाद रिम्स की खिड़की से मीडियाकर्मियों को नजर आए। रिम्स में भर्ती लालू काफी दिनों बाद खिड़की पर दिखें तो कार्यकर्ता उत्साहित हुए और लालू का अभिवादन करने लगे। लालू ने भी हाथ हिलाकर कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार किया। लालू को देखकर वहां मौजूद मीडियाकर्मी भी उनकी तस्वीर लेने लगे। हालांकि लालू यादव ने मीडिया को फोटो लेने से मना किया। जब मीडियाकर्मी नहीं माने तो लालू यादव ने अपनी खिड़की बंद कर ली।
इससे पहले शनिवार को ही लालू यादव से उनकी बेटी और दामाद मिलने आए थे। लालू यादव अपनी नातिन को देखकर भावुक हो गए। उन्होंने गोद में लेकर अपनी नातिन को दुलारा और उसके लिए टॉफियां भी मंगाई।
बेटी दामाद के साथ ही आरजेडी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह भी लालू यादव से मिलने पहुंचे थे।लेकिन, जेल मैनुअल के अनुसार हफ्ते में सिर्फ तीन लोग ही कैदी से मुलाकात करते हैं। लालू यादव ने अपने परिवार को तरजीह दी और बेटी दामाद के साथ समधी से भी मुलाकात की। रघुवंश प्रसाद सिंह को बिना मिले ही वापस लौटना पड़ा।

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