सड़क हादसों की जिम्मेदारी अधिकारी भी लें, जन सुरक्षा से न हो समझौता -योगी

लखनऊ, यमुना एक्सप्रेस-वे भीषण सड़क हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां एक ओर खासे आहत दिखे वहीं उन्होंने अधिकारियों की भी जमकर क्लास ली। उन्होंने खुले शब्दों में कहा कि ऐसे हादसे सिर्फ चालकों के मत्थे मढ़कर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। जनता के जीवन के साथ कतई समझौता बर्दाष्त नहीं होगा। परिवहन विभाग में युद्ध स्तर पर सुधार की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री यहां सड़क सुरक्षा को लेकर हुई बैठक में विभागीय अधिकारियों से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खासे नाराज दिखे।
मुख्यमंत्री योगी ने गुरुवार को यहां हुई बैठक में निर्देश दिया कि सभी वाहन चालकों का मेडिकल चेकअप, लाइसेंस की जांच, उनकी पूरी स्क्रीनिंग और चालकों के स्टेयरिंग पर बैठने से पहले और गंतव्य तक पहुंचने पर उनका ब्रेथ एनेलाइजर टेस्ट कराया जाए। रात में 400 किलोमीटर तक या उससे ज्यादा चलने वाली बसों में दो ड्राइवर रहें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों एवं मंत्रियों के चालकों का भी मेडिकल चेकअप हो। बैठक में मौजूद जेपी इन्फ्राटेक के अधिकारियों को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपकी कंपनी को गलत कार्य करने की इजाजत प्रदेश सरकार नहीं दे सकती है। टोल आप वसूलते हैं, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम आपकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री योगी ने जेपी इन्फ्राटेक के अधिकारियों से कहा कि आईआईटी दिल्ली द्वारा बताए गए सुरक्षा के सभी 13 सुझावों का पालन करिए। यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के अधिकारी इस बात को सुनिश्चित करें अगर मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो कंपनी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बरतने के निर्देष दिए। उन्होंने कहा कि जिन मारूति वैन और टैम्पो को ‘रिजेक्ट’ कर दिया जाता है, उन्हें स्कूल में चलाया जा रहा है। रिक्शों पर बच्चे लटक कर स्कूल जाते हैं। पिछले साल कुशीनगर में हुई घटना से भी सीख नहीं ली गई है। स्कूल का वाहन चलाने वाले सभी चालकों की मेडिकल जांच के साथ ही पुलिस सत्यापन कराएं। उन्होंने कहा कि स्कूली वाहनों का नियमित फिटनेस टेस्ट सत्र शुरू होने से पहले हो जाना चाहिए। इनके लिए जरूरी हो तो छुट्टी के दिन भी आरटीओ कार्यालय खोलें। जो भी वाहन फिटनेस पास हो उनको ही सड़क पर चलने की अनुमति दी जाए। कंडम बसें और डग्गामार वाहनों को ‘स्क्रैप’ घोषित कर दिया जाए।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अन्य प्रदेशों से आने और जाने वाली बिना परमिट की बसों को प्रदेश से गुजरने की अनुमति न दें। जो भी कानून का उल्लंघन करे उससे पूरी सख्ती से निपटें। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करे कि किसी हादसे 10-15 मिनट के भीतर वहां पर घायलों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि जितने भी ट्रामा सेंटर हैं, वो चलने चाहिए, इनमें आर्थोपैडिक सर्जन की व्यवस्था हो। यातायात विभाग को निर्देश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नीली और काली फिल्म चढ़ाए वाहनों पर कार्रवाई की जाए। हेल्मेट और सीट बेल्ट को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि हाइवे पर जनसुविधाओं को बढ़ाया जाए, पेट्रोल पंप की व्यवस्था की जाए और ई चालान की व्यवस्था में और सुधार लाया जाए।

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