राजयसभा में विपक्ष पर मोदी का तंज धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा

नई दिल्ली, लोकसभा में विपक्ष और कांग्रेस पर बरसने के एक दिन बाद बुधवार को मोदी राज्यसभा में एक बार फिर कांग्रेस पर बरसे। पीएम ने अपने चिर-परिचित अंदाज में ‘जनादेश पर सवाल उठाने वालों’, हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने वालों पर जमकर हमला बोला। गालिब के शेर ‘ताउम्र गालिब यह भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी, आईना साफ करता रहा’ के जरिए ईवीएम की बहानेबाजी को लेकर विपक्ष पर तीखा तंज भी कसा। कांग्रेस पर देश की जनता और मतदाता का अपमान का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इतना अहंकार ठीक नहीं कि कांग्रेस जीते तो देश जीता और कांग्रेस हारी तो देश हार गया।
पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद रहे मदनलाल सैनी को श्रद्धांजलि दी। पीएम ने कहा, ‘नए जनादेश के बाद आज पहली बार राज्यसभा के सभी सदस्यों के बीच अपनी बात रखने का मौका मिला है। पहले से अधिक जनसमर्थन और अधिक विश्वास के साथ हमें दोबारा देश की सेवा करने का अवसर देशवासियों ने दिया है। मैं सबका आभार प्रकट करता हूं।
दशकों के बाद बनी पूर्ण बहुमत की सरकार-
पीएम ने कहा कई दशकों के बाद दोबारा एक पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनना, भारत के मतदाताओं के मन में राजनीतिक स्थिरता का महत्व क्या है, एक परिपक्व मतदाता की इसमें सुगंध महसूस हो रही है। यह सिर्फ इस चुनाव की बात नहीं है। हालियां कई चुनावों में मतदाताओं ने स्थिरता को तवज्जो दिया। बहुत कम ऐसे मौके आते हैं जब चुनाव स्वयं जनता-जनार्दन लड़ती है।
मोदी बोले, विचारों में पनपी हुई विकृति के कारण इतने बड़े जनादेश को हम यह कह दे कि आप तो चुनाव जीत गए लेकिन देश चुनाव हार गया। मैं समझता हूं कि इससे बड़ा भारत के लोकतंत्र का अपमान नहीं हो सकता। इससे बड़ा जनता-जनार्दन का अपमान नहीं हो सकता।
जब यह बात कही जाती है कि लोकतंत्र हार गया, देश हार गया तो मैं जरूर पूछना चाहूंगा कि क्या वायनाड में हिंदुस्तान हार गया क्या? क्या रायबरेली, बहरामपुर, तिरुवनंतपुरम में हिंदुस्तान हार गया क्या? यह कौन सा तर्क है? यानी कांग्रेस हारी तो देश हार गया? मतलब कांग्रेस मतलब देश और देश मतलब कांग्रेस? अहंकार की एक सीमा होती है। 55-60 सालों तक देश पर राज करने वाला दल 17 राज्यों में एक सीट भी नहीं जीत पाया।
किसान बिकाऊ है कहना ठीक नही-
यह तक कह दिया कि इस देश का किसान बिकाऊ है, 2-2 हजार रुपये की स्कीम पर बिक गया। मेरे देश का किसान बिकाऊ नहीं है, जो सबका पेट भरता है उस किसान के लिए ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से अपमानित किया गया। मीडिया को भी गाली दी गई। मीडिया के कारण भी चुनाव जीते जाते हैं। मीडिया बिकाऊ है क्या? मीडिया को कोई खरीद लेता है क्या? हम कुछ भी कहते रहते हैं। सदन में कही गई बातों का महत्व होता है। हमें गर्व होना चाहिए कि भारत की चुनाव प्रक्रिया विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला अवसर होता है, इसे खोना नहीं चाहिए। पहली बार पुरुषों के बराबर ही महिलाओं ने भी वोटिंग में हिस्सा लिया। इस बार 78 महिला सांसद जीतकर आई हैं।
ईवीएम पर सवाल उठाना सही नहीं-
यहां पर ईवीएम की चर्चा भी काफी हो रही है। एक नई बीमारी भी शुरू हुई है। ईवीएम को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, बहाने बनाए जाते हैं। कभी हम भी सदन में सिर्फ 2 रह गए थे। हमारा मजाक उड़ाया गया था। मगर हमें अपनी विचारधारा और अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा था। आज ईवीएम के जमाने में हेडलाइन होती है कि पहले के मुकाबले मतदान कितना बढ़ा। जबसे सही अर्थ में लोकतंत्र की प्रक्रिया आई है, ऐसे लोगों के हारने का क्रम भी तभी शुरू हुआ है। इसलिए उनको वापस उसी जगह पर जाना है। देश लोकतंत्र को इस प्रकार से दबोचने की प्रक्रिया में मदद नहीं कर सकता है।
ईवीएम पर सबसे पहले 1977 में चर्चा शुरू हुई। 1982 में पहली बार इसका प्रयोग किया गया। 1988 में कानूनन इस व्यवस्था को स्वीकृति दी। इतना ही नहीं, 1992 में कांग्रेस के नेतृत्व में ही इस ईवीएम को लेकर सारे रूल बनाए गए थे। अब हार गए हो तो रो रहे हो। ईवीएम से देश में अब तक 113 विधानसभा चुनाव हुए हैं। यहां उपस्थित करीब-करीब सभी दलों को उसी ईवीएम से चुनाव जीतकर सत्ता में आने या उसमें भागीदार बनने का मौका मिला है। 4 लोकसभा के चुनाव हुए हैं। उसमें भी दल बदले हैं, अलग-अलग लोग जीतकर आए हैं। 2001 के बाद विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी ईवीएम को लेकर मसले उठाए गए हैं, लेकिन सारे मामलों में न्यायपालिका ने सकारात्मक निर्णय दिया। चुनाव आयोग ने ईवीएम से छेड़छाड़ का चैलेंज भी दिया था, लेकिन यहां जो ईवीएम का रोना रो रहे हैं, उनमें से कोई दल नहीं गया। सिर्फ 2 दल सीपीआई और एनसीपी गए वह भी प्रक्रिया समझने के लिए।
मैं हैरान हूं। कांग्रेस पार्टी के लिए कहना चाहता हूं कि इतने सालों तक आपने देश पर शासन किया है। आप विजय भी नहीं पचा पाते और 2014 से मैं लगातार देख रहा हूं कि आप पराजय को स्वीकार भी नहीं कर पाते हैं।
दुखद स्थितियों से जल्द ही बाहर निकल आएंगे-
मॉब लिंचिंग के लिए किसी पूरे राज्य को दोषी बताना ठीक नहीं
झारखंड मॉब लिंचिंग का अड्डा बन गया है। क्या झारखंड राज्य को दोषी बता देना सही है? जो बुरा हुआ है उसे अलग करें। लेकिन सबको कठघरे में रखकर राजनीति तो कर लेंगे। बिहार में चमकी बुखार हमारी सबसे बड़ी नाकामियों में शामिल बिहार के चमकी बुखार हमारी सबसे बड़ी विफलताओं में शामिल है। हम सबको इसको गंभीरता से लेना होगा। पूर्वी यूपी में अच्छी स्थिति नजर आ रही है पर बड़ा क्लेम नहीं कर सकते हैं। मुझे विश्वास है कि जो यह दुखद स्थिति है उससे जल्दी हम बाहर निकल जाएंगे। पोषण, टीकाकरण, आयुष्मान के जरिए लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करेंगे। ऐसी समस्याओं से लोगों को बचाने के लिए काम करना होगा।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *