दिग्विजय को 2003 में शासन से बेदखल कर मेरा रोल पूरा, अब उन्हें हराना कठिन नहीं : उमा भारती

भोपाल, प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने एक बार फिर लोकसभा चुनाव लडने को लेकर अपनी अनिच्छा जताते हुए कहा कि मेरा योगदान तो 2003 में ही पूरा हो चुका, मैं दिग्विजय को तीन चौथाई बहुमत से शासन से बेदखल कर चुकी हूं। मेरी भूमिका पूरी हो चुकी। दिग्विजय को हराना कठिन नहीं है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तंज कसते हुए कहा कि शिवराज बहुत बड़े नेता हैं, वह तो 13 साल मुख्यमंत्री रहे, दिग्विजय सिंह को हरा ही देंगे। भोपाल स्थित कार्यालय से जारी अपने बयान में उमा ने यह भी स्पष्ट किया है कि हराने और जिताने में जनता और कार्यकर्ता की भूमिका रहती है। नेताओं को घमंड नहीं पालना चाहिए। आप भोपाल की तासीर समझ लीजिए। भोपाल के लोग दिग्विजय को हराने के लिए बेताब हैं। भोपाल में तो आलोक संजर, कृष्णा गौर, रामेश्वर शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, आलोक शर्मा, भगवानदास सबनानी और विश्वास सारंग इनमें से कोई भी दिग्विजय को चुनाव हरा देगा।
उन्होंने बताया कि भोपाल से प्रत्याशी के बारे में मीडिया ने मुझसे सवाल पूछा तो मैं फिर बता दूं कि उम्मीदवार तय करने का अधिकार मेरे पास नहीं है। संसदीय दल ही निर्णय करेगा, किंतु एक बात ध्यान में रखनी पड़ेगी कि दिग्विजय को हराना बिल्कुल भी कठिन नहीं है। उमा ने अतीत की याद दिलाते हुए बताया कि भाजपा के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे से तत्कालीन मुख्यमंत्री कैलाश नाथ काटजू विधानसभा का चुनाव हार गए थे। सुमित्रा महाजन से 1989 का लोकसभा चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री पीसी सेठी हार गए थे। सतना में सुखलाल कुशवाह और होशंगाबाद में सरताज सिंह से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह चुनाव हार गए थे। अपने बयान के पहले उमा भारती ने ट्वीट के जरिए भी नेताओं को घमंड न पालने की नसीहत दी थी। यही बात उन्होंने पत्र में दोहराई।

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