गरीबों को आवास, युवाओं को रोजगार, शुद्ध हवा, साफ पानी हो सबके पास

भोपाल,नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्री जयवर्धनसिंह ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि किसी काम की अच्छी शुरूआत अपने लक्ष्य की सफलता का संकेत होती है और यही मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने कर दिखाया है। 17 दिसम्बर 2018 को शपथ लेते ही मध्यप्रदेश कांग्रेस सरकार ने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय दिया और चुनाव के पहले मध्यप्रदेश को दिए हुए वचनों की प्रतिपूर्ति में लग गई। आज समूचा प्रदेश एक स्वर में यह कह रहा है कि सुशासन की दिशा में बढ़ाया गया कमलनाथ सरकार का यह कदम प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा कर देगा और भविष्य का मध्यप्रदेश कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में देश का सर्वाधिक विकसित प्रदेश होगा।
– प्रदेश का विकास शहरों से आस
याद कीजिए दिसम्बर 2005 में जब केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन की शुरूआत की थी तब इस शहरी विकास के इस कार्यक्रम की बुनियाद थी की शहरों का देश की जीडीपी में योगदान 55 प्रतिशत है, अगर शहर की अधोसंरचना विकास पर अधिक निवेश किया जाए तो देश अधिक तरक्की करेगा। मगर साथ ही इस बात का ध्यान भी रखा गया कि सिर्फ बड़े शहर ही नहीं छोटे और मझोले शहर का विकास भी किया जाना चाहिए और इस उद्देश्य को लेकर 2005 से 2014 तक देश के शहरी विकास के लिए लगभग 1 लाख करोड़ रूपये का निवेश किया गया।
आज मध्यप्रदेश के संदर्भ में देखें तो प्रदेश के शहर एक निर्णायक भूमिका प्रदेश के विकास में निभा सकते है। बशर्ते उनका सुनियोजित विकास हो। इस दिशा में मैंने अपना काम संभालते ही कदम बढ़ाना प्रारंभ किया। हमारी सरकार का उद्देश्य है कि अगले पांच सालों में प्रदेश को निर्मल जल, स्वच्छ हवा और शुद्ध खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएं।
– मॉ नर्मदा निर्मल होगी
वर्तमान में प्रदेश में कुल 378 शहरी स्थानीय निकाय है (यूएलवी) जिसमें से 16 नगर निगम है, 98 नगर पालिका निगम और 264 नगर परिषद है और 30 नगर परिषद नई अधिसूचित की गई है । हमने लक्ष्य रखा है कि इन सारे शहरी निकायों में हम शुद्ध पानी और सेप्टेज मेनेजमेंट अर्थात जो अपशिष्ट है का प्रबंधन किया जाए। इस दिशा में हमने बीते दिनों इन्टर नेशनल बैंकिंग अथारिटी जैसे कि योरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक, जर्मन बैंक, वल्र्ड बैंक ऐशियन डेवलपमेंट बैंक, न्यू डेवलपमेंट बैंक इत्यादि से बीतें दो माह में चर्चा की है और वित्तीय प्रबंधन के लिए इन संस्थानों ने अपनी सैद्धांतिक सहमति भी प्रदान की है।
यह अलौकिक सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश को मॉ नर्मदा का आशीष मिला है। मॉ नर्मदा की पवित्रता की व्याख्या स्कंध पुराण में भी मिलती है। अब हमारा दायित्व है कि मध्यप्रदेश के लिए जीवन दायनी मॉ नर्मदा की पवित्रता और शुद्धता को हम बरकरार रखें। इसलिए मैंने इस बात को निर्धारित किया है कि नर्मदा किनारे के समस्त 25 शहरी स्थानीय निकायों में सेप्टेज मेनेजमेंट का काम त्रीव गति से किया जाएं, ताकि नर्मदा किनारे का गंदा पानी मॉ नर्मदा में ना डाला जा सके।
– मध्यप्रदेश आई.टी और सर्विस सेक्टर का हॅब होगा
मध्यप्रदेश में निवेश की असीम संभावनाएं है। इसलिए हमने इस बात को निर्धारित किया है कि आईटी और सर्विस सेक्टर कम्पनियों के लिए प्रदेश के बड़े शहरों में हम भूमि और अधोसंरचना की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं, ताकि प्रदेश के युवकों को बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध हो सके। इस दिशा में हमने दो माह में काफी तरक्की की है, भविष्य का मध्यप्रदेश आई.टी. और सर्विस सेक्टर कम्पनियों का हब होगा।
– शहरों का होगा समावेशी विकास
हमारी मान्यता है कि मध्यप्रदेश के शहरों का विकास समावेशी होना चाहिए। जब मैं समावेशी कहता हूं तो वह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए और पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी माना जाना चाहिए। हम प्रदेश के शहरों में त्वरित गति से स्ट्रीट वेण्डर्स एक्ट को सही तरीके से लागू कराना हमारी प्राथमिकता होगी। ताकि पथ पर काम करने वाले लोगों को उनका अधिकार सौंपा जा सके। साथ ही शहरों का जो मास्टर प्लान अब निर्धारित होगा वो टीओडी बैस होगा। साथ ही प्रत्येक शहरों में बड़े सिटी फारेस्ट बनाए जाएंगे, ताकि शहरों को शुद्ध हवा मिल सके। शहरों के ट्रेफिक प्लान सुनिश्चित किए जाएंगे। साथ ही स्कॉय वॉक और जंक्शन सेप्रेटर्स भी सुनिश्चित किए जाएंगे।
मध्यप्रदेश में 34 शहरों में जीआईएस आधारित मास्टर प्लान पुनर्रिक्षीत किए जा रहे है। इस हेतु जीआईएस स्टूडियों का निर्माण राज्य नगर नियोजन संस्थान में किया जा रहा है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश को 8 रीजन में बांट कर रिजनल प्लान भी बनाए जा रहे है। पहला ग्वालियर एग्रो रीजन, भोपाल केपीटल रीजन, बीना पेट्रो केमीकल रीजन, इंदौर एग्रो रीजन, नर्मदा ताप्ती रीजन, मध्य सतपुड़ा रीजन, बघेल बुन्देलखंड रीजन और जबलपुर रीजन।

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