देश में दो तिहाई बहुमत वाली सरकारों को भी नहीं मिल सका 48 % से अधिक वोट

नई दिल्ली, केंद्र में 1952 से लेकर अभी तक स्पष्ट बहुमत एवं दो तिहाई बहुमत की जितनी भी सरकारें बनी हैं। उन सभी सरकारों को कभी भी 50 फ़ीसदी भी वोट नहीं मिले हैं। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति लहर में हुए चुनाव में कांग्रेस को 415 लोकसभा सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। उस मतदान से भी सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत तब 48.1 फ़ीसदी था। 2014 में भाजपा को 282 सीटों पर विजय प्राप्त हुई। लेकिन वोट केवल 31.4 फ़ीसदी प्राप्त हुए। 2014 के लोकसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को अभी तक के सबसे कम वोट प्राप्त हुए। मात्र 19.6 फ़ीसदी वोट कांग्रेस को मिले, जो अभी तक के इतिहास में सबसे कम थे।
1952 में कांग्रेस को लोकसभा के चुनाव में 364 सीटों पर विजय हासिल हुई, वोट 45 फीसदी प्राप्त हुए।
1957 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 371 सीटों पर विजय प्राप्त हुई, 47.8 फ़ीसदी वोट प्राप्त हुए।
1962 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 361 सीटों पर विजय प्राप्त हुई, 44.7 फ़ीसदी वोट प्राप्त हुए।
1967 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र 283 सीटें प्राप्त हुई थी। वोट प्रतिशत 40.8 था। 1967 में कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी और विपक्ष काफी मजबूत था।
1971 का लोकसभा चुनाव पाकिस्तान युद्ध के बाद हुआ था। पूर्वी पाकिस्तान नया बांग्लादेश बना। उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को 352 सीटों पर विजय प्राप्त हुई, वोट प्रतिशत 43.7 था।
आपातकाल के बाद 1977 में लोकसभा के चुनाव हुए। जिसमें जनता पार्टी को 295 सीटें प्राप्त हुई। इस चुनाव में इंदिरा गांधी और कांग्रेस का उत्तर भारत में भारी विरोध हुआ था। जनता पार्टी को 41.3 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे। इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था।
1980 में फिर मध्यावधि चुनाव हुआ। इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को 353 सीटों पर विजय प्राप्त हुई। वोटों का प्रतिशत 42.7 फ़ीसदी था। किस्सा कुर्सी का और शाह आयोग की कार्रवाई और इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी से उत्तर भारत में मतदाताओं के रुझान में परिवर्तन आया, इंदिरा के पक्ष में लहर चली। वह पुन: भारी बहुमत से प्रधानमंत्री बनी।
1984 का लोकसभा चुनाव इंदिरा गांधी की हत्या होने के बाद हुआ। इसमें स्वतंत्रता के बाद से लेकर जितने भी चुनाव हुए। उसमें कांग्रेस को सबसे ज्यादा 415 सीटों पर विजय प्राप्त हुई। सहानुभूति लहर होने के बाद भी कांग्रेस को 48.1 फीसद वोट ही प्राप्त हुए।
1989 से लेकर 2009 के लोकसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इस बीच गठबंधन की सरकार ही केंद्र में काबिज रहीं।
2014 में लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 282 सीटों पर विजय प्राप्त हुई। भाजपा स्पष्ट बहुमत में होते हुए भी मात्र 31.4 फ़ीसदी वोट प्राप्त कर सकी। स्पष्ट बहुमत की सरकारों में यह सबसे कम मत पाने वाली सरकार बनी।
2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दल एकजुट हो रहे है। 1977 के लोकसभा चुनाव में सात विपक्ष एकजुट होकर एक ही चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भी प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विपक्ष एकजुट हो रहा है।

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